17.1 कोशिका संरचना Notes

17.1 कोशिका संरचना

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.1 कोशिका संरचना विषय-वस्तु: कोशिका झिल्ली, केन्द्रक, साइटोप्लाज्म

1. परिचय

कोशिका जीवन की मूल इकाई है। रॉबर्ट हुक ने 1665 ईस्वी में कॉर्क के पतले टुकड़े की सूक्ष्मदर्शी से जाँच करते समय छोटे-छोटे कमरों जैसी रचनाएँ देखीं, जिन्हें उन्होंने 'सेल' अर्थात् कोशिका का नाम दिया। हालाँकि रॉबर्ट हुक ने केवल कोशिका की मृत भित्ति देखी थी, फिर भी यह खोज कोशिका विज्ञान की आधारशिला बनी। इसके बाद 1838 में मैथियास श्लाइडन और 1839 में थियोडोर श्वान ने कोशिका सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिसे रुडोल्फ विरचो ने आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रत्येक कोशिका किसी पूर्ववर्ती कोशिका से उत्पन्न होती है।

कोशिका सिद्धांत के मुख्य बिंदु ये हैं कि सभी जीव कोशिकाओं से बने होते हैं, कोशिका ही जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है, तथा नई कोशिकाएँ पुरानी कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं। कुछ जीव एक कोशिकीय होते हैं जैसे अमीबा, पैरामीशियम और जीवाणु, जबकि मनुष्य जैसे बहुकोशिकीय जीवों में अरबों कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, अंग और अंग तंत्र बनाती हैं। कोशिका का आकार बहुत छोटा होता है और इसे सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता; इसीलिए इसके अध्ययन के लिए सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है।

कोशिका का आकार जीव के अनुसार अलग-अलग होता है। सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा होती है जिसकी लंबाई लगभग 0.1 से 1.0 माइक्रोमीटर होती है, जबकि सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अंडा माना जाता है। मानव शरीर में सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) होती है। कोशिका का आकार विभिन्न प्रकार का होता है जैसे गोल, अंडाकार, तारकाकार, स्तंभाकार और तंतु जैसा। कोशिका के आकार और रूप के बावजूद उसकी मूल संरचना लगभग समान रहती है, जिसमें मुख्यतः कोशिका झिल्ली, साइटोप्लाज्म और केन्द्रक तीन प्रमुख भाग होते हैं।

2. कोशिका झिल्ली

कोशिका झिल्ली को 'प्लाज्मा झिल्ली' या 'कोशिका कला' भी कहते हैं। यह कोशिका के बाहरी भाग को ढकने वाली अति सूक्ष्म, लचीली और अर्धपारगम्य झिल्ली है। इसकी मोटाई लगभग 75 से 100 एंगस्ट्रॉम होती है। इसकी बनावट को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए, जिनमें सबसे अधिक स्वीकृत मॉडल सिंगर और निकोलसन (1972) का 'फ्लूइड मोज़ेक मॉडल' है।

कोशिका झिल्ली के कार्य:

  1. यह कोशिका को बाहरी पर्यावरण से अलग करती है तथा कोशिका को आकृति प्रदान करती है।
  2. यह कोशिका के अंदर-बाहर पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है, इसीलिए इसे 'चयनात्मक पारगम्य' या 'अर्धपारगम्य' झिल्ली कहा जाता है।
  3. यह कोशिका की बाहरी दीवार से चिपककर बाहरी संकेतों का संचार करती है तथा कोशिका-कोशिका पहचान में सहायक होती है।
  4. कुछ प्रोटीन (वाहक प्रोटीन) विशिष्ट पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का कार्य करते हैं।

पदार्थों का परिवहन:

3. साइटोप्लाज्म

कोशिका झिल्ली के अंदर तथा केन्द्रक के बाहर उपस्थित संपूर्ण पदार्थ को साइटोप्लाज्म कहते हैं। यह एक अर्धतरल, पारदर्शी तथा जेली जैसा पदार्थ है। साइटोप्लाज्म में अनेक कोशिकांग तथा समावेशी पदार्थ उपस्थित होते हैं। साइटोप्लाज्म में विघटित अवस्था में जल, लवण, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड तथा विभिन्न एंजाइम होते हैं।

साइटोप्लाज्म के कार्य:

  1. यह कोशिकांगों को अपनी जगह पर स्थिर रखता है तथा उन्हें कार्य करने हेतु उचित वातावरण प्रदान करता है।
  2. कोशिकांगों के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान साइटोप्लाज्म के माध्यम से होता है।
  3. साइटोप्लाज्म में अनेक जैव रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं, जैसे ग्लाइकोलिसिस (ग्लूकोज का पाइरुविक अम्ल में विघटन)।
  4. समावेशी पदार्थ जैसे वसा की बूँदें, ग्लाइकोजन कण आदि साइटोप्लाज्म में संचित रहते हैं।

4. केन्द्रक

केन्द्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण भाग है, जिसे कोशिका का 'मस्तिष्क' या 'नियंत्रण केंद्र' भी कहा जाता है। रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में ऑर्किड पादप की कोशिका में केन्द्रक की खोज की थी। सामान्यतः प्रत्येक कोशिका में एक केन्द्रक होता है, परंतु कुछ कोशिकाओं में एक से अधिक केन्द्रक हो सकते हैं। अधिकांश जंतु कोशिकाओं में केन्द्रक कोशिका के केंद्र में तथा पादप कोशिकाओं में परिधि की ओर स्थित होता है। जिन कोशिकाओं में केन्द्रक नहीं होता, उन्हें अकेन्द्रिक कोशिकाएँ कहते हैं, जैसे स्तनधारियों की लाल रक्त कोशिकाएँ।

केन्द्रक की संरचना:

केन्द्रक के कार्य:

  1. यह कोशिका की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करता है, इसीलिए इसे 'नियंत्रण कक्ष' कहा जाता है।
  2. गुणसूत्रों में उपस्थित DNA (जीन) वंशानुगत गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित करते हैं।
  3. यह कोशिका विभाजन की प्रक्रिया का नियंत्रण करता है।
  4. न्यूक्लियोलस rRNA का संश्लेषण करता है, जो प्रोटीन संश्लेषण में सहायक होता है।

जीवों का वर्गीकरण केन्द्रक के आधार पर:

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: कोशिका के मुख्य भाग और उनके कार्य

भाग संरचना मुख्य कार्य
कोशिका झिल्ली लिपिड दोहरी परत + प्रोटीन अर्धपारगम्य बाधक, पदार्थों का परिवहन नियंत्रण
साइटोप्लाज्म अर्धतरल जेली जैसा द्रव्य कोशिकांगों को स्थान तथा माध्यम देना
केन्द्रक दोहरी झिल्ली, क्रोमैटिन, न्यूक्लियोलस कोशिका की क्रियाओं का नियंत्रण
न्यूक्लियोलस केन्द्रक के अंदर गोल रचना rRNA का संश्लेषण
क्रोमैटिन DNA + हिस्टोन प्रोटीन वंशानुगत सूचना का वहन

तालिका 2: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर

लक्षण प्रोकैरियोटिक कोशिका यूकैरियोटिक कोशिका
केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित उपस्थित
केन्द्रक सुस्पष्ट नहीं सुस्पष्ट
कोशिकांग माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी अनुपस्थित सभी सुव्यवस्थित कोशिकांग उपस्थित
गुणसूत्र एक, वृत्ताकार अनेक, रैखिक
आकार छोटा (1-10 माइक्रोमीटर) बड़ा (10-100 माइक्रोमीटर)

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[17.1 कोशिका संरचना] --> B[कोशिका झिल्ली]
    A --> C[साइटोप्लाज्म]
    A --> D[केन्द्रक]
    B --> B1[लिपिड दोहरी परत]
    B --> B2[प्रोटीन]
    B --> B3[अर्धपारगम्य]
    C --> C1[साइटोसोल]
    C --> C2[कोशिकांग]
    C --> C3[समावेशी पदार्थ]
    D --> D1[केन्द्रक कला]
    D --> D2[क्रोमैटिन]
    D --> D3[न्यूक्लियोलस]
    B --> B4[विसरण परासरण]
    D --> D4[गुणसूत्र DNA]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

पशु कोशिका का चित्र कोशिका झिल्ली केन्द्रक न्यूक्लियोलस माइटोकॉन्ड्रिया गॉल्जी सम्मिश्र रिक्तिका अंतर्द्रव्यी जालिका पशु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है स्वर्ण नियम केन्द्रक कोशिका का नियंत्रण केंद्र तथा साइटोप्लाज्म जीवन का भौतिक आधार है।

कोशिका झिल्ली फ्लूइड मोज़ेक मॉडल लिपिड की दोहरी परत प्रोटीन प्रोटीन ग्लाइकोप्रोटीन अर्धपारगम्य झिल्ली चयनात्मक पारगमन करती है स्वर्ण नियम झिल्ली के परासरण और विसरण को सदैव सांद्रता प्रवणता के साथ समझें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. छात्र कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति में अंतर नहीं कर पाते; कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिका, कवक और जीवाणु में होती है, जंतु कोशिका में नहीं।
  2. परासरण को विसरण समझ लिया जाता है; परासरण में केवल जल का प्रवाह अर्धपारगम्य झिल्ली से होता है जबकि विसरण में कोई भी गैस या विलेय अणु गति करते हैं।
  3. रॉबर्ट हुक को कोशिका की खोज का श्रेय है परंतु वे मृत कोशिका भित्ति ही देख सके थे; जीवित कोशिका की खोज उन्नत सूक्ष्मदर्शी के बाद हुई।
  4. कई बार विद्यार्थी यह मान लेते हैं कि केन्द्रक ही कोशिका का एकमात्र आनुवंशिक भंडार है, जबकि माइटोकॉन्ड्रिया में भी अपना DNA होता है।
  5. 'प्रोटोप्लाज्म' और 'साइटोप्लाज्म' को एक ही मान लिया जाता है; प्रोटोप्लाज्म में केन्द्रक सम्मिलित होता है जबकि साइटोप्लाज्म केन्द्रक से बाहर का द्रव्य है।
  6. न्यूक्लियोलस को केन्द्रक का ही पर्याय समझ लिया जाता है; न्यूक्लियोलस केन्द्रक के अंदर की एक रचना है जो rRNA बनाता है।
  7. लाल रक्त कोशिका में केन्द्रक नहीं होता, परंतु कई छात्र मान लेते हैं कि सभी कोशिकाओं में केन्द्रक अवश्य होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. कोशिका सिद्धांत के प्रतिपादक श्लाइडन और श्वान तथा 'कोशिका-कोशिका से' कहने वाले विरचो को हमेशा याद रखें, यह बार-बार पूछा जाता है।
  2. झिल्ली मॉडल 'फ्लूइड मोज़ेक' सिंगर-निकोलसन से जोड़िए तथा लिपिड दोहरी परत + प्रोटीन को याद रखिए।
  3. प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक के अंतर को तालिका रूप में याद करें; जीवाणु और नीले-हरे शैवाल प्रोकैरियोट हैं।
  4. केन्द्रक के नाम 'कोशिका का मस्तिष्क' तथा 'नियंत्रण कक्ष' जैसे शब्दों को प्रश्न में पहचान कर तुरंत केन्द्रक से जोड़ें।
  5. राइबोसोम की खोज पालाडे ने की, यह जानकारी कई वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में उपयोगी है।
  6. आकार के आधार पर सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा तथा सबसे बड़ी शुतुरमुर्ग का अंडा याद रखें।
  7. लाल रक्त कोशिका के केन्द्रक रहित होने को विशेष प्रश्न के रूप में चिह्नित करें।
  8. सक्रिय परिवहन को ATP खर्च से जोड़ें और निष्क्रिय परिवहन को बिना ऊर्जा के गति से जोड़ें।

10. निष्कर्ष

कोशिका संरचना का ज्ञान सम्पूर्ण जीव विज्ञान की नींव है, क्योंकि ऊतक, अंग और अंग तंत्र कोशिकाओं से ही बने होते हैं। कोशिका झिल्ली की अर्धपारगम्यता, साइटोप्लाज्म की जैव रासायनिक गतिविधियाँ तथा केन्द्रक का नियंत्रण कार्य मिलकर जीवन प्रक्रियाओं को संचालित करते हैं। परीक्षा की दृष्टि से कोशिका सिद्धांत, झिल्ली का फ्लूइड मोज़ेक मॉडल, प्रोकैरियोट-यूकैरियोट का अंतर तथा परासरण-विसरण जैसे अवधारणाओं को दृढ़ता से समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं से आगे के सभी अध्याय जुड़े हुए हैं।