17.8 श्वसन Notes

17.8 श्वसन

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.8 श्वसन विषय-वस्तु: वायवीय-अवायवीय श्वसन

1. परिचय

सभी जीवों को जीवित रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जिस प्रक्रिया द्वारा जीव भोजन (ग्लूकोज़) का ऑक्सीकरण करके ऊर्जा प्राप्त करते हैं, उसे श्वसन (Respiration) कहते हैं। श्वसन एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है जो कोशिका के अंदर होती है, इसलिए इसे कोशिकीय श्वसन भी कहते हैं। श्वसन की क्रिया में कार्बोहाइड्रेट विघटित होकर ऊर्जा (ATP), कार्बन डाइऑक्साइड और जल मुक्त करते हैं। श्वसन की प्रक्रिया से निकलने वाली ऊर्जा कोशिका के समस्त कार्यों को संचालित करती है।

श्वसन और श्वसनोच्छ्वास (Breathing) में अंतर होता है। श्वसनोच्छ्वास ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने की भौतिक क्रिया है, जबकि श्वसन कोशिका में ऊर्जा निकालने की रासायनिक प्रक्रिया है। श्वसनोच्छ्वास फेफड़ों में होता है, जबकि कोशिकीय श्वसन प्रत्येक कोशिका में होता है। ग्रुप D परीक्षा में इन दोनों को अलग करने वाले प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

श्वसन के मुख्य प्रकार दो हैं- वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) और अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration)। वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में और अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। श्वसन की प्रक्रिया मुख्यतः तीन चरणों में होती है- ग्लाइकोलिसिस, क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला। इनमें ग्लाइकोलिसिस दोनों प्रकार के श्वसन में समान होता है।

2. श्वसन के प्रकार

वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration): इस श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज़ का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। इसका समीकरण निम्न है:

C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + 38 ATP (ऊर्जा)

अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration): इस श्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ग्लूकोज़ का अपूर्ण विघटन होता है। यह दो स्थितियों में हो सकता है:

  1. किण्वन (Fermentation): यीस्ट (खमीर) में अवायवीय श्वसन से ग्लूकोज़ इथाइल अल्कोहल, कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा में बदलता है। C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂ + 2 ATP। यही कारण है कि यीस्ट का उपयोग शराब और रोटी बनाने में होता है।
  2. पेशी कोशिकाओं में: मनुष्य की पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी पर ग्लूकोज़ लैक्टिक अम्ल में बदलता है और ऊर्जा मुक्त होती है। यही कारण है कि अधिक व्यायाम के बाद पेशियों में दर्द और थकान होती है।

  3. अवायवीय श्वसन में कम ऊर्जा (2 ATP) मुक्त होती है।

  4. यह यीस्ट, कुछ जीवाणु, परजीवी (जैसे टेपवर्म) में होता है।

ग्लाइकोलिसिस: श्वसन का पहला चरण साइटोप्लाज्म में होता है, जिसमें ग्लूकोज़ (6 कार्बन) दो अणु पाइरुविक अम्ल (3 कार्बन) में विघटित होता है। ग्लाइकोलिसिस में नेट 2 ATP और 2 NADH का निर्माण होता है।

3. श्वसन के चरण और माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका

1. ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis): यह साइटोप्लाज्म में होता है। ग्लूकोज़ का पाइरुविक अम्ल में विघटन होता है। इसकी खोज एम्बडेन, मेयरहॉफ और पार्नस ने की थी, इसलिए इसे EMP मार्ग भी कहते हैं। इसमें नेट 2 ATP और 2 NADH बनते हैं। यह अवायवीय अवस्था में भी चलता है।

2. क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle): पाइरुविक अम्ल माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश कर एसिटाइल CoA में बदलता है, फिर क्रेब्स चक्र (साइट्रिक अम्ल चक्र) में संचालित होता है। यह माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होता है। इसकी खोज हैंस क्रेब्स ने की थी। इसमें CO₂, NADH, FADH₂ और ATP (GTP) बनते हैं।

3. इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (ETS): यह माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर होती है। NADH और FADH₂ से इलेक्ट्रॉनों के परिवहन से ऑक्सीडेटिव फास्फोरिलीकरण द्वारा अधिकतम ATP का निर्माण होता है। इस चरण में सबसे अधिक ऊर्जा मिलती है।

ATP की संख्या: एक ग्लूकोज़ अणु के पूर्ण वायवीय श्वसन में ग्लाइकोलिसिस से 2 ATP, क्रेब्स चक्र से 2 ATP तथा इलेक्ट्रॉन परिवहन से 34 ATP, कुल 38 ATP का निर्माण होता है। कुछ स्रोतों में नेट 36-38 ATP माना जाता है। माइटोकॉन्ड्रिया को 'कोशिका का पावरहाउस' कहने का कारण भी यही है कि ऊर्जा का अधिकांश भाग यहीं बनता है।

पादप श्वसन: पादप रात में भी श्वसन करते हैं, जिसमें वे ऑक्सीजन लेते हैं और CO₂ छोड़ते हैं। दिन में प्रकाश संश्लेषण की अधिकता के कारण शुद्ध प्रभाव CO₂ का अवशोषण दिखता है। पादपों में गैसीय आदान-प्रदान रंध्रों तथा वातरंध्रों (Lenticels) से होता है।

4. मानव श्वसन तंत्र

मनुष्य में श्वसन तंत्र के मुख्य अंग हैं- नासा छिद्र (Nasal Cavity), स्वरयंत्र (Larynx), श्वासनली (Trachea), ब्रोंकाई, ब्रोंकियोल्स और फेफड़े (Lungs)

गैसों का आदान-प्रदान: ऑक्सीजन एल्वियोली से रक्त में तथा कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से एल्वियोली में विसरण द्वारा पहुँचती है। रक्त में ऑक्सीजन का मुख्य वाहक हीमोग्लोबिन है। रक्त में CO₂ का अधिकांश भाग बाइकार्बोनेट के रूप में परिवहन होता है। श्वसन की दर श्वसन केंद्र (मेडुला ऑब्लोंगेटा) द्वारा नियंत्रित होती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर

लक्षण वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन
ऑक्सीजन आवश्यक आवश्यक नहीं
उत्पाद CO2 और जल अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल
ATP 38 2
स्थल माइटोकॉन्ड्रिया साइटोप्लाज्म
उदाहरण मनुष्य यीस्ट

तालिका 2: श्वसन के चरण और उनके स्थल

चरण स्थल उत्पाद
ग्लाइकोलिसिस साइटोप्लाज्म 2 ATP, 2 NADH, पाइरुविक अम्ल
क्रेब्स चक्र माइटोकॉन्ड्रिया का मैट्रिक्स CO2, NADH, FADH2, 2 ATP
इलेक्ट्रॉन परिवहन माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली अधिकतम ATP

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[17.8 श्वसन] --> B[वायवीय श्वसन]
    A --> C[अवायवीय श्वसन]
    A --> D[श्वसन के चरण]
    B --> B1[ऑक्सीजन आवश्यक]
    B --> B2[38 ATP]
    C --> C1[यीस्ट किण्वन]
    C --> C2[पेशी लैक्टिक अम्ल]
    C --> C3[2 ATP]
    D --> D1[ग्लाइकोलिसिस]
    D --> D2[क्रेब्स चक्र]
    D --> D3[इलेक्ट्रॉन परिवहन]
    D1 --> D11[साइटोप्लाज्म]
    D2 --> D21[मैट्रिक्स]
    D3 --> D31[आंतरिक झिल्ली]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

श्वसन के प्रकार श्वसन वायवीय श्वसन ऑक्सीजन युक्त 38 ATP अवायवीय श्वसन बिना ऑक्सीजन 2 ATP किण्वन यीस्ट अल्कोहल CO2 पेशी श्वसन लैक्टिक अम्ल स्वर्ण नियम: वायवीय श्वसन में 38 ATP और अवायवीय में 2 ATP बनता है।

मानव श्वसन तंत्र नासा छिद्र स्वरयंत्र श्वासनली वलयाकार उपास्थि ब्रोंकस ब्रोंकस फेफड़ा फेफड़ा एल्वियोली मध्यच्छद स्वर्ण नियम: गैस विनिमय फेफड़ों की एल्वियोली में होता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. श्वसन और श्वसनोच्छ्वास को एक ही मान लिया जाता है; श्वसनोच्छ्वास फेफड़ों की भौतिक क्रिया है जबकि श्वसन कोशिका की रासायनिक प्रक्रिया है।
  2. अवायवीय श्वसन केवल यीस्ट में होता है, यह गलत है; यह पेशी कोशिकाओं और कुछ जीवाणुओं में भी होता है।
  3. ग्लाइकोलिसिस को माइटोकॉन्ड्रिया में होने वाला चरण मान लिया जाता है, जबकि यह साइटोप्लाज्म में होता है।
  4. क्रेब्स चक्र को ग्राना में होने वाला चरण समझ लिया जाता है; यह माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होता है।
  5. अधिक व्यायाम में पेशी दर्द का कारण इथाइल अल्कोहल माना जाता है, जबकि असली कारण लैक्टिक अम्ल है।
  6. वायवीय श्वसन में 2 ATP और अवायवीय में 38 ATP याद कर लिया जाता है; वास्तव में विपरीत है।
  7. रक्त में CO2 का मुख्य परिवहन हीमोग्लोबिन से होता है, यह आधा सच है; अधिकांश CO2 बाइकार्बोनेट के रूप में जाती है।
  8. एल्वियोली में गैसों का आदान-प्रदान परासरण से होता है, यह गलत है; यह विसरण से होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. वायवीय = 38 ATP + CO2 + जल; अवायवीय = 2 ATP + अल्कोहल/लैक्टिक अम्ल, यह जोड़ी याद रखें।
  2. ग्लाइकोलिसिस-साइटोप्लाज्म, क्रेब्स-मैट्रिक्स, इलेक्ट्रॉन परिवहन-आंतरिक झिल्ली, तीनों के स्थल याद रखें।
  3. यीस्ट का किण्वन उत्पाद इथाइल अल्कोहल और पेशी का उत्पाद लैक्टिक अम्ल, इसे स्पष्ट करें।
  4. क्रेब्स चक्र की खोजकर्ता हैंस क्रेब्स है, इसे अन्य खोजकर्ताओं से अलग रखें।
  5. ATP का अधिकतम निर्माण इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में होता है, यह बिंदु महत्वपूर्ण है।
  6. फेफड़ों की एल्वियोली को गैस विनिमय स्थल और विसरण प्रक्रिया से जोड़ें।
  7. श्वसन केंद्र = मेडुला ऑब्लोंगेटा, यह तथ्य याद रखें।
  8. पादप दिन में प्रकाश संश्लेषण और रात में श्वसन दोनों करते हैं; शुद्ध प्रभाव का प्रश्न सावधानी से हल करें।

10. निष्कर्ष

श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है जिससे सभी जीव भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति में 38 ATP और अवायवीय श्वसन में बिना ऑक्सीजन के 2 ATP का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया ग्लाइकोलिसिस (साइटोप्लाज्म), क्रेब्स चक्र (मैट्रिक्स) और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (आंतरिक झिल्ली) में पूरी होती है। मनुष्य में श्वसन तंत्र नासा छिद्र से एल्वियोली तक गैसों का परिवहन करता है। परीक्षा की दृष्टि से दोनों श्वसनों का अंतर, ATP संख्या तथा श्वसन तंत्र के अंगों का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है।