विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.9 परिवहन और परिसंचरण विषय-वस्तु: रक्त, हृदय, परिवहन
जीवों में पोषक तत्व, ऑक्सीजन, हार्मोन तथा अपशिष्ट पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया को परिवहन (Transportation) कहते हैं। मानव शरीर में यह कार्य परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) द्वारा होता है, जिसके प्रमुख घटक रक्त, रक्त वाहिकाएँ और हृदय हैं। रक्त पोषक तत्वों और गैसों का परिवहन करता है, रक्त वाहिकाएँ रक्त को शरीर के हर भाग तक पहुँचाती हैं और हृदय रक्त को पंप करने का कार्य करता है। पादपों में परिवहन जाइलम और फ्लोएम द्वारा होता है।
मानव शरीर में रक्त लगभग 5 से 6 लीटर होता है, जो शरीर के कुल भार का लगभग 7-8 प्रतिशत होता है। रक्त शरीर का तरल संयोजी ऊतक है। रक्त का pH लगभग 7.4 होता है और यह थोड़ा क्षारीय होता है। परिसंचरण तंत्र को हृदय-रक्त वाहिका तंत्र भी कहते हैं। हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाओं का अध्ययन रक्त परिसंचरण की मूलभूत समझ देता है।
परिसंचरण तंत्र के अध्ययन में रक्त कोशिकाओं के प्रकार और कार्य, रक्त वाहिकाओं के प्रकार (धमनी, शिरा, केशिका), हृदय की संरचना तथा हृदय की धड़कन को समझना आवश्यक है। ग्रुप D की परीक्षा में रक्त समूह, हृदय के कक्ष, रक्त वाहिकाओं के अंतर तथा पादप परिवहन से संबंधित प्रश्न बहुत पूछे जाते हैं।
रक्त प्लाज्मा: रक्त का तरल भाग प्लाज्मा है, जो लगभग 55 प्रतिशत होता है। प्लाज्मा में जल, प्रोटीन (एल्बुमिन, ग्लोब्युलिन, फाइब्रिनोजेन), खनिज, ग्लूकोज़, हार्मोन आदि होते हैं। फाइब्रिनोजेन रक्त के थक्के जमाने में सहायक होता है।
रक्त कोशिकाएँ:
रक्त समूह (Blood Groups): रक्त समूह ABO प्रणाली में A, B, AB और O तथा Rh प्रणाली (पॉज़िटिव/नेगेटिव) के आधार पर वर्गीकृत होता है। AB रक्त समूह को सर्वग्राही (Universal Recipient) और O को सर्वदाता (Universal Donor) कहते हैं। Rh कारक की खोज लैंडस्टीनर और वीनर ने की थी।
रक्त वाहिकाओं के प्रकार:
हृदय की संरचना: हृदय एक पेशीय अंग है जो वक्ष गुहा में होता है। यह पेरीकार्डियम नामक दोहरी झिल्ली से घिरा होता है। हृदय में चार कक्ष होते हैं:
कपाट (Valves): अलिंद और निलय के बीच द्विवलन (Bicuspid/Mitral) और त्रिवलन (Tricuspid) कपाट होते हैं। ये रक्त के विपरीत प्रवाह को रोकते हैं।
हृदय की धड़कन: हृदय की धड़कन हृदय की स्वतःप्रेरक (Auto-regulatory) पेसमेकर कोशिकाओं से शुरू होती है, जो दाएँ अलिंद में स्थित होती हैं। सामान्य व्यक्ति के हृदय की धड़कन प्रति मिनट लगभग 72 बार होती है। एक धड़कन में लगभग 0.8 सेकंड लगते हैं। हृदय की धड़कन की ध्वनि 'लब-डब' कपाटों के बंद होने से उत्पन्न होती है।
रक्त परिसंचरण: दाएँ निलय से अशुद्ध रक्त फेफड़ों में जाता है (फुप्फुस परिसंचरण) और बाएँ निलय से शुद्ध रक्त पूरे शरीर में जाता है (प्रणालीगत परिसंचरण)। ऑक्सीजन और CO₂ का परिवहन हीमोग्लोबिन तथा प्लाज्मा द्वारा होता है।
पादपों में परिवहन: पादपों में जल और खनिजों का परिवहन जाइलम द्वारा तथा भोजन का परिवहन फ्लोएम द्वारा होता है। जल जड़ों से पत्तियों तक जाइलम में पहुँचता है, जबकि फ्लोएम भोजन को दोनों दिशाओं में ले जाता है। पादप में जल का वाष्पोत्सर्जन रंध्रों से होता है।
जाइलम में जल का उठाव (Transpiration Pull): वाष्पोत्सर्जन के कारण जल के अणुओं का खिंचाव पैदा होता है, जिससे जल जाइलम में ऊपर उठता है। इसे वाष्पोत्सर्जन खिंचाव कहते हैं। कोशिकाओं के बीच जल का संचलन परासरण द्वारा होता है।
लसीका (Lymph): रक्त के केशिकाओं से बाहर निकले तरल को लसीका या ऊतक द्रव कहते हैं। यह शरीर की कोशिकाओं के बीच पाया जाता है। लसीका पोषक तत्वों और अपशिष्ट पदार्थों को ऊतकों और रक्त के बीच स्थानांतरित करती है। लसीका में WBC पाई जाती हैं परंतु RBC नहीं होतीं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
| कोशिका | केन्द्रक | मुख्य कार्य | जीवनकाल |
|---|---|---|---|
| लाल रक्त कोशिका | अनुपस्थित | ऑक्सीजन परिवहन | लगभग 120 दिन |
| श्वेत रक्त कोशिका | उपस्थित | शरीर की रक्षा | कुछ दिन-सप्ताह |
| प्लेटलेट्स | अनुपस्थित | रक्त थक्का जमाना | 7-10 दिन |
| वाहिका | दिशा | दीवार | कपाट | दाब |
|---|---|---|---|---|
| धमनी | हृदय से दूर | मोटी लचीली | नहीं | उच्च |
| शिरा | हृदय की ओर | पतली | होते हैं | निम्न |
| केशिका | धमनी-शिरा के बीच | एक कोशिका मोटी | नहीं | अत्यंत निम्न |
flowchart TD
A[17.9 परिवहन और परिसंचरण] --> B[रक्त]
A --> C[रक्त वाहिकाएँ]
A --> D[हृदय]
A --> E[पादप परिवहन]
B --> B1[RBC ऑक्सीजन]
B --> B2[WBC रक्षा]
B --> B3[प्लेटलेट्स थक्का]
C --> C1[धमनी]
C --> C2[शिरा]
C --> C3[केशिका]
D --> D1[4 कक्ष]
D --> D2[72 धड़कन प्रति मिनट]
E --> E1[जाइलम]
E --> E2[फ्लोएम]
परिवहन और परिसंचरण तंत्र शरीर की सभी कोशिकाओं तक पोषण और ऑक्सीजन पहुँचाने तथा अपशिष्ट निकालने का कार्य करता है। रक्त अपने तीन प्रकार की कोशिकाओं और प्लाज्मा के साथ यह कार्य पूरा करता है, जबकि हृदय चार कक्षों वाला पंप है जो रक्त को निरंतर गति देता है। धमनियाँ, शिराएँ और केशिकाएँ रक्त वितरण की त्रिगुण प्रणाली बनाती हैं। परीक्षा की दृष्टि से रक्त कोशिकाओं के कार्य, रक्त समूह, हृदय के कक्ष तथा रक्त वाहिकाओं के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये विषय ग्रुप D परीक्षा का प्रमुख हिस्सा हैं।