विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता) अध्याय: 18.2 मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया विषय-वस्तु: मस्तिष्क भाग, प्रतिवर्त क्रिया
मस्तिष्क शरीर का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण अंग है, जो सभी स्वैच्छिक तथा अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है। यह लगभग 2% शरीर के भार का होता है किंतु शरीर की ऑक्सीजन का लगभग 20% उपभोग करता है। मस्तिष्क कपाल की अस्थियों से सुरक्षित रहता है और इसके चारों ओर मेनिन्जेस नामक तीन झिल्लियाँ होती हैं। मस्तिष्क को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है — अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क। प्रत्येक भाग का अपना विशेष कार्य होता है, जैसे सोचना-समझना, दृष्टि, श्रवण, संतुलन बनाए रखना आदि। इस अध्याय में मस्तिष्क के विभिन्न भागों तथा प्रतिवर्त क्रिया की सम्पूर्ण प्रक्रिया का अध्ययन किया जाएगा।
प्रतिवर्त क्रिया वह तीव्र, अनैच्छिक एवं स्वचालित अनुक्रिया है, जो बिना मस्तिष्क की जानकारी के मेरुरज्जु के माध्यम से होती है। जैसे अचानक गरम बर्तन छूते ही हाथ बिना सोचे-समझे खिंच जाता है। यह क्रिया किसी उद्दीपन के प्रति शरीर की सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है, जो मस्तिष्क को कार्य करने का समय दिए बिना तुरंत संपन्न होती है। इस प्रक्रिया में संवेदी न्यूरॉन, मेरुरज्जु और चालक न्यूरॉन शामिल होते हैं, जिनके मिलने से प्रतिवर्त चाप (reflex arc) बनता है। प्रतिवर्त क्रिया के दौरान संदेश मस्तिष्क तक जाता है अवश्य, किंतु अनुक्रिया मेरुरज्जु स्तर पर ही संपन्न हो जाती है।
मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया दोनों ही नियंत्रण एवं समन्वय के मूल तत्व हैं। मस्तिष्क सोच, स्मृति, भाषा, संवेदना तथा उच्च मानसिक क्रियाओं का केंद्र है, जबकि प्रतिवर्त क्रिया शरीर को तात्कालिक खतरों से बचाती है। परीक्षा की दृष्टि से मस्तिष्क के भागों के नाम एवं कार्य, प्रतिवर्त चाप का क्रम तथा स्वैच्छिक-अनैच्छिक क्रियाओं का अंतर अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगे के अनुच्छेदों में इन्हें विस्तार से समझा जाएगा।
मस्तिष्क को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:
मस्तिष्क में संदेशों के आदान-प्रदान के लिए विशेष स्थान होते हैं, जिन्हें संवेदी और चालक क्षेत्र कहते हैं। संवेदी क्षेत्र इंद्रियों से आने वाले संदेश ग्रहण करते हैं और चालक क्षेत्र मांसपेशियों को आदेश भेजते हैं। उदाहरण के लिए:
मस्तिष्क का बायाँ गोलार्ध शरीर के दाएँ भाग को और दायाँ गोलार्ध शरीर के बाएँ भाग को नियंत्रित करता है, अर्थात गोलार्धों का नियंत्रण पार्श्विक (contralateral) होता है। मस्तिष्क के अंदर पार्श्व वेंट्रिकल नामक गुहाओं में मस्तिष्कमेरू द्रव (CSF) भरा रहता है, जो मस्तिष्क को आघात से बचाता है तथा पोषण प्रदान करता है।
प्रतिवर्त क्रिया एक अनैच्छिक, तीव्र और स्वचालित अनुक्रिया है, जो विशिष्ट उद्दीपन के कारण बिना मस्तिष्क के सचेत निर्णय के होती है। इसका सरलतम उदाहरण घुटने की क्रिया (knee-jerk) है, जिसमें घुटने के नीचे टैप करने पर पैर स्वतः आगे उछल जाता है। प्रतिवर्त क्रिया शरीर को तीव्र गति से खतरे से बचाती है, जैसे आँख में धूल पड़ते ही पलकें बंद हो जाना या आग के पास हाथ जाने पर हाथ खिंच जाना। इस क्रिया में मस्तिष्क को सूचना बाद में पहुँचती है, इसलिए व्यक्ति को प्रतिक्रिया के बाद ही घटना का अनुभव होता है।
प्रतिवर्त चाप प्रतिवर्त क्रिया में शामिल मार्ग है, जिसमें पाँच प्रमुख घटक होते हैं — ग्राहक (receptor), संवेदी न्यूरॉन, मेरुरज्जु (केंद्रीय केंद्र), चालक न्यूरॉन और प्रभावक (effector)। इनका कार्य निम्न क्रम में होता है:
इस प्रकार प्रतिवर्त चाप संवेदी और चालक मार्ग को जोड़कर बिना मस्तिष्क के ही अनुक्रिया संपन्न करा देता है। यही कारण है कि प्रतिवर्त क्रिया मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित सचेत क्रियाओं की अपेक्षा अधिक तीव्र होती है। घुटने की क्रिया को चिकित्सक जाँच में तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य का परीक्षण करने के लिए प्रयोग करते हैं। प्रतिवर्त क्रिया के कारण ही आग जलती है तो हाथ बिना सोचे पीछे खिंचता है, यह एक सुरक्षा तंत्र है।
शरीर की क्रियाओं को मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है — स्वैच्छिक क्रियाएँ, अनैच्छिक क्रियाएँ और प्रतिवर्त क्रियाएँ। स्वैच्छिक क्रियाएँ मस्तिष्क की इच्छा से होती हैं, जैसे चलना, बोलना, लिखना आदि। इनका नियंत्रण प्रमस्तिष्क द्वारा होता है। अनैच्छिक क्रियाएँ बिना इच्छा के चलती रहती हैं, जैसे हृदय की धड़कन, श्वसन, पाचन आदि, जिन्हें मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र नियंत्रित करता है। प्रतिवर्त क्रियाएँ विशेष उद्दीपन पर होने वाली तीव्र अनैच्छिक प्रतिक्रियाएँ हैं, जिनका केंद्र मेरुरज्जु होता है।
स्वैच्छिक और प्रतिवर्त क्रिया में मुख्य अंतर यह है कि स्वैच्छिक क्रिया में मस्तिष्क का सचेत निर्णय होता है, जबकि प्रतिवर्त क्रिया में नहीं। स्वैच्छिक क्रियाएँ सीखी जा सकती हैं जबकि प्रतिवर्त क्रियाएँ जन्मजात होती हैं। अनैच्छिक क्रियाओं के कुछ उदाहरण निम्न हैं:
अनैच्छिक क्रियाओं में कोशिकीय स्तर पर संवेदन का केंद्र मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा है। यदि मेड्यूला क्षतिग्रस्त हो जाए तो श्वसन और हृदय की धड़कन रुक सकती है, जिससे जीवन संकट में आ जाता है। इसी कारण मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा को जीवन का केंद्र भी कहा जाता है। परीक्षा में प्रायः प्रतिवर्त क्रिया, प्रतिवर्त चाप के अवयवों तथा मस्तिष्क के भागों के कार्यों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
| मस्तिष्क भाग | संरचना | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| अग्र मस्तिष्क | प्रमस्तिष्क (Cerebrum) | सोच, स्मृति, बुद्धि, भाषा |
| अग्र मस्तिष्क | थैलेमस, हाइपोथैलेमस | संवेदी स्थानांतरण, तापमान-भूख नियंत्रण |
| मध्य मस्तिष्क | - | दृष्टि, श्रवण प्रतिवर्त |
| पश्च मस्तिष्क | अनुमस्तिष्क (Cerebellum) | संतुलन एवं समन्वय |
| पश्च मस्तिष्क | मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा | हृदय धड़कन, श्वसन, रक्तचाप |
| क्रम | घटक | कार्य |
|---|---|---|
| 1 | ग्राहक (Receptor) | उद्दीपन ग्रहण करना |
| 2 | संवेदी न्यूरॉन | संदेश मेरुरज्जु तक ले जाना |
| 3 | मेरुरज्जु (सहचारी न्यूरॉन) | संदेश को चालक पथ पर स्थानांतरित करना |
| 4 | चालक न्यूरॉन | आदेश प्रभावक तक पहुँचाना |
| 5 | प्रभावक (मांसपेशी/ग्रंथि) | अनुक्रिया उत्पन्न करना |
flowchart TD
A[18.2 मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया] --> B[मस्तिष्क के भाग]
A --> C[प्रतिवर्त क्रिया]
A --> D[क्रियाओं के प्रकार]
B --> B1[अग्र मस्तिष्क]
B --> B2[मध्य मस्तिष्क]
B --> B3[पश्च मस्तिष्क]
B1 --> B11[प्रमस्तिष्क]
B1 --> B12[थैलेमस]
B1 --> B13[हाइपोथैलेमस]
B3 --> B31[अनुमस्तिष्क]
B3 --> B32[मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा]
B3 --> B33[पोंस]
C --> C1[प्रतिवर्त चाप]
C1 --> C11[ग्राहक]
C1 --> C12[संवेदी न्यूरॉन]
C1 --> C13[मेरुरज्जु]
C1 --> C14[चालक न्यूरॉन]
C1 --> C15[प्रभावक]
D --> D1[स्वैच्छिक]
D --> D2[अनैच्छिक]
D --> D3[प्रतिवर्त]
<svg viewBox="0 0 800 600" xmlns="http://www.w3.org/2000/svg" font-family="Arial, sans-serif">
<rect width="800" height="600" fill="#ffffff"/>
<text x="400" y="40" text-anchor="middle" font-size="26" font-weight="bold" fill="#1a237e">मस्तिष्क के प्रमुख भाग</text>
<ellipse cx="400" cy="200" rx="220" ry="120" fill="#e8f5e9" stroke="#2e7d32" stroke-width="3"/>
<text x="400" y="180" text-anchor="middle" font-size="18" font-weight="bold" fill="#000">प्रमस्तिष्क (Cerebrum)</text>
<text x="400" y="205" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#000">सोच, स्मृति, भाषा</text>
<ellipse cx="400" cy="360" rx="120" ry="45" fill="#fff3e0" stroke="#e65100" stroke-width="3"/>
<text x="400" y="355" text-anchor="middle" font-size="15" fill="#000">अनुमस्तिष्क (Cerebellum)</text>
<text x="400" y="378" text-anchor="middle" font-size="13" fill="#000">संतुलन एवं समन्वय</text>
<rect x="330" y="440" width="140" height="55" rx="8" fill="#fce4ec" stroke="#c62828" stroke-width="3"/>
<text x="400" y="466" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#000">मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा</text>
<text x="400" y="484" text-anchor="middle" font-size="12" fill="#000">हृदय, श्वसन</text>
<text x="400" y="545" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#555">मेरुरज्जु (कशेरुकाओं के भीतर)</text>
<rect x="60" y="560" width="680" height="36" rx="8" fill="#fdf6d8" stroke="#b8860b" stroke-width="2"/>
<text x="70" y="583" font-size="15" fill="#000">स्वर्ण नियम: प्रमस्तिष्क सोच का, अनुमस्तिष्क संतुलन का और मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा जीवन का केंद्र है।</text>
</svg>
<svg viewBox="0 0 800 600" xmlns="http://www.w3.org/2000/svg" font-family="Arial, sans-serif">
<rect width="800" height="600" fill="#ffffff"/>
<text x="400" y="40" text-anchor="middle" font-size="26" font-weight="bold" fill="#1a237e">प्रतिवर्त चाप (Reflex Arc)</text>
<rect x="40" y="120" width="120" height="70" rx="8" fill="#e3f2fd" stroke="#1565c0" stroke-width="2"/>
<text x="100" y="155" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#000">ग्राहक</text>
<text x="100" y="175" text-anchor="middle" font-size="12" fill="#000">(त्वचा)</text>
<path d="M160 155 L240 155" stroke="#1565c0" stroke-width="3" marker-end="url(#ar1)"/>
<text x="200" y="143" text-anchor="middle" font-size="12" fill="#000">संवेदी न्यूरॉन</text>
<ellipse cx="300" cy="155" rx="60" ry="45" fill="#c8e6c9" stroke="#2e7d32" stroke-width="2"/>
<text x="300" y="152" text-anchor="middle" font-size="13" fill="#000">मेरुरज्जु</text>
<text x="300" y="170" text-anchor="middle" font-size="11" fill="#000">(केंद्र)</text>
<path d="M360 155 L440 155" stroke="#e65100" stroke-width="3"/>
<text x="400" y="143" text-anchor="middle" font-size="12" fill="#000">चालक न्यूरॉन</text>
<rect x="440" y="120" width="120" height="70" rx="8" fill="#fff3e0" stroke="#e65100" stroke-width="2"/>
<text x="500" y="155" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#000">प्रभावक</text>
<text x="500" y="175" text-anchor="middle" font-size="12" fill="#000">(मांसपेशी)</text>
<path d="M500 190 L500 260 L100 260 L100 190" stroke="#888" stroke-width="2" stroke-dasharray="6 4" fill="none"/>
<text x="330" y="285" text-anchor="middle" font-size="13" fill="#555">मस्तिष्क को सूचना विलंबित होकर पहुँचती है</text>
<rect x="60" y="540" width="680" height="42" rx="8" fill="#fdf6d8" stroke="#b8860b" stroke-width="2"/>
<text x="70" y="566" font-size="15" fill="#000">स्वर्ण नियम: प्रतिवर्त क्रिया में अनुक्रिया मेरुरज्जु स्तर पर बिना मस्तिष्क के निर्णय के तुरंत हो जाती है।</text>
<defs><marker id="ar1" markerWidth="8" markerHeight="8" refX="6" refY="3" orient="auto"><path d="M0,0 L8,3 L0,6 Z" fill="#1565c0"/></marker></defs>
</svg>
मस्तिष्क शरीर का सर्वोच्च नियंत्रण केंद्र है, जिसके अग्र, मध्य और पश्च भाग विभिन्न प्रकार की स्वैच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं का संचालन करते हैं। प्रतिवर्त क्रिया और प्रतिवर्त चाप यह सुनिश्चित करते हैं कि शरीर खतरों के प्रति तीव्र एवं सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया कर सके। मस्तिष्क के भागों के नाम-कार्य, प्रतिवर्त चाप के घटकों का क्रम तथा स्वैच्छिक-अनैच्छिक क्रियाओं में अंतर इस अध्याय के प्रमुख बिंदु हैं। इन्हें भली-भाँति समझ लेने से न केवल परीक्षा में अच्छे अंक मिलेंगे, बल्कि हार्मोन और समन्वय के अगले अध्याय को समझने में भी सहायता मिलेगी।