19.2 प्राकृतिक चयन Notes

19.2 प्राकृतिक चयन

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (विकास और पर्यावरण) अध्याय: 19.2 प्राकृतिक चयन विषय-वस्तु: प्राकृतिक चयन, अनुकूलन

1. परिचय

प्राकृतिक चयन (Natural Selection) विकासवाद की वह केंद्रीय प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्रकृति स्वयं यह निर्धारित करती है कि कौन सा जीव जीवित रहेगा, कौन सा नष्ट होगा और कौन सा अपनी संतति को आगे बढ़ाएगा। चार्ल्स डार्विन ने इस अवधारणा को अपने विकासवाद के सिद्धांत का मूल आधार बनाया। डार्विन के अनुसार किसी भी जनसंख्या में जीवों के बीच प्राकृतिक भिन्नताएँ विद्यमान रहती हैं, और वातावरण की चुनौतियों में जो जीव अपने गुणों के कारण सबसे अधिक अनुकूल होते हैं, वे ही प्रकृति द्वारा चुने जाते हैं तथा अपने लाभदायक लक्षणों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।

प्राकृतिक चयन और अनुकूलन (Adaptation) दोनों परस्पर जुड़ी हुई अवधारणाएँ हैं। अनुकूलन वह लाभदायक परिवर्तन है जो जीव को अपने परिवेश में जीवित रहने में सहायता करता है, जबकि प्राकृतिक चयन वह प्रक्रिया है जो इन लाभदायक गुणों वाले जीवों को जीवित रखकर उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाती है। उदाहरण के लिए, बर्फीले क्षेत्रों में रहने वाले खरगोश का सफेद फर उसका अनुकूलन है, और शिकारियों से बचने के कारण सफेद फर वाले खरगोशों का जीवित रहना प्राकृतिक चयन है।

रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में प्राकृतिक चयन और अनुकूलन से प्रश्न मुख्यतः सिद्धांत के चरणों, अनुकूलन के उदाहरणों तथा संबंधित शब्दों के अर्थ पर आधारित होते हैं। इस अध्याय में हम प्राकृतिक चयन की क्रियाविधि, प्रकार, अनुकूलन के रूप, उनके उदाहरण तथा प्राकृतिक चयन और कृत्रिम चयन में अंतर का अध्ययन करेंगे।

2. प्राकृतिक चयन की अवधारणा

प्राकृतिक चयन वह प्रक्रिया है जिसमें वातावरण की परिस्थितियों के अनुसार अधिक योग्य जीवों का चयन प्रकृति द्वारा होता है और कम योग्य जीव धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लगातार चलती रहती है और जीवों की जनसंख्या के आनुवंशिक बनावट को बदलती रहती है।

प्राकृतिक चयन की मूल शर्तें:

प्राकृतिक चयन की क्रियाविधि:

  1. जनसंख्या में वंशानुगत भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
  2. सीमित संसाधनों के कारण जीवों के बीच संघर्ष शुरू होता है।
  3. जो जीव पर्यावरण के साथ सर्वोत्तम अनुकूलन करते हैं, वे जीवित रहते हैं।
  4. जीवित बचे जीव अपने लाभदायक गुणों को संतति में स्थानांतरित करते हैं।
  5. लाभदायक गुणों का पीढ़ियों में संचय होने से नई जातियों का विकास होता है।

प्राकृतिक चयन के प्रकार:

  1. स्थिरीकरण चयन (Stabilizing Selection): मध्यवर्ती लक्षणों वाले जीवों का चयन, जैसे मानव शिशु का औसत वजन।
  2. दिशात्मक चयन (Directional Selection): एक दिशा में चरम लक्षणों का चयन, जैसे जिराफ की बढ़ती लंबी गर्दन।
  3. वियोजी चयन (Disruptive Selection): दोनों चरम लक्षणों का चयन और मध्यवर्ती का समाप्त होना, जैसे कुछ पक्षियों की चोंच के दो आकार।

3. अनुकूलन (Adaptation)

अनुकूलन जीव के शरीर या व्यवहार में होने वाला ऐसा परिवर्तन है जो उसे अपने पर्यावरण में जीवित रहने, भोजन प्राप्त करने तथा शिकारियों से बचने में सहायक होता है। अनुकूलन तीन प्रकार के होते हैं: संरचनात्मक (जैसे रेगिस्तानी छिपकली की शुष्क त्वचा), क्रियात्मक (जैसे ऊंट की कूबड़ में वसा का संचय) और व्यवहारिक (जैसे पक्षियों का प्रव्रजन)।

अनुकूलन के महत्वपूर्ण उदाहरण:

  1. ऊंट: कूबड़ में वसा संचय और पानी बचाने की क्षमता रेगिस्तान में अनुकूलन है।
  2. मछली: शरीर पर शल्क और गिल की उपस्थिति जलीय अनुकूलन है।
  3. ध्रुवीय भालू: सफेद फर और मोटी चमड़ी की तह ठंड से बचाती है।
  4. कमीलेन (गिरगिट): रंग बदलने की क्षमता शिकार और छलावरण के लिए अनुकूलन है।
  5. पौधों में कैक्टस: पत्तियों का कांटों में बदलना और जल का संचय शुष्क स्थानों का अनुकूलन है।
  6. प्रव्रजन करने वाले पक्षी: लंबी दूरी तय करना व्यवहारिक अनुकूलन का उदाहरण है।

अनुकूलन और प्राकृतिक चयन का संबंध: अनुकूलन जीव का वह गुण है जो प्राकृतिक चयन द्वारा बढ़ावा दिया जाता है। वास्तव में अनुकूलन प्राकृतिक चयन का परिणाम है, क्योंकि जो जीव अपने पर्यावरण से सर्वोत्तम तालमेल बिठाते हैं, वे ही अगली पीढ़ी में अपने जीन पहुंचाते हैं।

कृत्रिम चयन: जब जीवों का चयन प्रकृति के बजाय मनुष्य करता है, तो उसे कृत्रिम चयन कहते हैं। इसके उदाहरण हैं गोभी की किस्में (कड़वा सरसों से विकसित), मक्का के बड़े दाने, अनेक प्रकार के कुत्ते तथा दूध देने वाली गायों की नस्लें। डार्विन ने यह अवधारणा कबूतरों के पालन से ली थी।

4. प्राकृतिक चयन के उदाहरण और साक्ष्य

प्राकृतिक चयन को आधुनिक काल में प्रायोगिक रूप से भी सिद्ध किया गया है। ये उदाहरण प्राकृतिक चयन के वास्तविक प्रमाण हैं और परीक्षा में पूछे जाते हैं।

प्राकृतिक चयन के वास्तविक साक्ष्य:

  1. औद्योगिक मेलेनिज्म (मैनचेस्टर की पेपर्ड मोथ): औद्योगिक क्रांति के दौरान प्रदूषण के कारण पेड़ों की छाल काली हो गई, जिससे काली (मेलेनिक) पतंगे सफेद पतंगों की तुलना में शिकारियों से अधिक बचीं और उनकी संख्या बढ़ गई।
  2. डी.डी.टी. प्रतिरोधी मच्छर: कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से जिन मच्छरों में प्रतिरोधकता वाला जीन था, वे ही जीवित बचे और आगे बढ़े।
  3. एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया: दवाओं के अधिक प्रयोग से प्रतिरोधी बैक्टीरिया का चयन होता है, जिससे बीमारियाँ इलाज में कठिन हो जाती हैं।
  4. गैलापागोस के फिंच: भोजन की उपलब्धता के अनुसार चोंच के आकार में बदलाव प्राकृतिक चयन का जीवंत उदाहरण है।
  5. सिकल सेल रोग और मलेरिया: जिन व्यक्तियों में सिकल सेल लक्षण होता है, वे मलेरिया से कुछ हद तक सुरक्षित रहते हैं, अतः मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में इस जीन का चयन होता है।

जीवित जीवाश्म और अनुकूलन: कुछ जीव करोड़ों वर्षों से लगभग अपरिवर्तित बने रहे हैं, जैसे लिमुलस (घोड़े की नाल केकड़ा), सेलाकैंथ मछली, जिन्हें जीवित जीवाश्म कहते हैं। इनका अपने पर्यावरण में उत्कृष्ट अनुकूलन ही इनके जीवित रहने का कारण है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: प्राकृतिक चयन के प्रकार और उनके लक्षण

प्रकार लक्षण उदाहरण
स्थिरीकरण चयन मध्यवर्ती लक्षणों का चयन मानव शिशु का औसत वजन
दिशात्मक चयन एक चरम दिशा में बदलाव जिराफ की लंबी गर्दन
वियोजी चयन दोनों चरमों का चयन पक्षियों की चोंच के दो आकार

तालिका 2: अनुकूलन के प्रकार और उदाहरण

अनुकूलन का प्रकार अर्थ उदाहरण
संरचनात्मक अनुकूलन शरीर की आकृति में परिवर्तन मछली के शल्क, कैक्टस के कांटे
क्रियात्मक अनुकूलन शरीर की क्रियाओं में परिवर्तन ऊंट की कूबड़, मनुष्य का पसीना
व्यवहारिक अनुकूलन व्यवहार में परिवर्तन पक्षियों का प्रव्रजन, मधुमक्खी का नृत्य

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[19.2 प्राकृतिक चयन] --> B[अवधारणा]
    A --> C[क्रियाविधि]
    A --> D[प्रकार]
    A --> E[अनुकूलन]
    A --> F[साक्ष्य]
    D --> G[स्थिरीकरण चयन]
    D --> H[दिशात्मक चयन]
    D --> I[वियोजी चयन]
    E --> J[संरचनात्मक]
    E --> K[क्रियात्मक]
    E --> L[व्यवहारिक]
    F --> M[पेपर्ड मोथ]
    F --> N[एंटीबायोटिक प्रतिरोध]
    F --> O[फिंच की चोंच]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

प्राकृतिक चयन की क्रियाविधि भिन्नताओं की उत्पत्ति संसाधनों के लिए संघर्ष योग्यतम का जीवित रहना गुणों का संतति में स्थानांतरण नई जातियों का निर्माण स्वर्ण नियम: प्राकृतिक चयन का क्रम याद रखें – भिन्नता, संघर्ष, योग्यतम का चयन, फिर संतति में गुणों का स्थानांतरण।

अनुकूलन के प्रकार संरचनात्मक मछली के शल्क कैक्टस के कांटे क्रियात्मक ऊंट की कूबड़ पसीने की क्रिया व्यवहारिक पक्षियों का प्रव्रजन मधुमक्खी का नृत्य अनुकूलन प्राकृतिक चयन का परिणाम है जो जीव पर्यावरण से सर्वोत्तम तालमेल बिठाता है वही जीवित रहता है स्वर्ण नियम: अनुकूलन जीव का गुण है और प्राकृतिक चयन उसी गुण को पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ावा देने वाली प्रक्रिया है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. प्राकृतिक चयन को 'जीवों की इच्छा' या 'प्रयास' से होने वाला परिवर्तन समझ लेना, जबकि यह भिन्नताओं के आधार पर होने वाला चयन है।
  2. स्थिरीकरण और वियोजी चयन को आपस में बदल लेना; याद रखें कि स्थिरीकरण में मध्यवर्ती और वियोजी में दोनों चरम लक्षणों का चयन होता है।
  3. कृत्रिम चयन को प्राकृतिक चयन मान लेना, जबकि कृत्रिम चयन में मनुष्य चयन करता है, जैसे कुत्तों की नस्लें।
  4. पेपर्ड मोथ उदाहरण में यह भ्रम होना कि प्रदूषण के कारण सफेद पतंगे बढ़े, जबकि प्रदूषण से काली पतंगे बढ़ीं।
  5. अनुकूलन को व्यक्ति के जीवनकाल में होने वाला अचानक परिवर्तन मानना, जबकि यह वंशानुगत होता है।
  6. व्यवहारिक अनुकूलन को संरचनात्मक अनुकूलन समझ लेना, जैसे प्रव्रजन को शारीरिक बदलाव बताना।
  7. एंटीबायोटिक के कारण बैक्टीरिया में प्रतिरोधकता विकसित होना नहीं बल्कि पहले से उपस्थित प्रतिरोधी जीन वालों का चयन होना – इस सूक्ष्म अंतर को ध्यान में रखें।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्राकृतिक चयन के पांचों चरणों को क्रमबद्ध रूप से याद रखें, इसी क्रम से प्रश्न बनते हैं।
  2. अनुकूलन के तीन प्रकारों (संरचनात्मक, क्रियात्मक, व्यवहारिक) के कम से कम दो-दो उदाहरण रट लें।
  3. पेपर्ड मोथ, एंटीबायोटिक प्रतिरोध, सिकल सेल व मलेरिया और फिंच की चोंच – ये चार साक्ष्य परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
  4. कृत्रिम चयन के उदाहरण (गोभी, कुत्ते, दूध देने वाली गाय) अलग से याद रखें, क्योंकि यह सामान्य ज्ञान का प्रिय प्रश्न है।
  5. ऊंट की कूबड़, मछली के शल्क, गिरगिट का रंग और कैक्टस के कांटे जैसे अनुकूलन उदाहरण प्रायः दिए जाते हैं, इन्हें पहचानने की क्षमता विकसित करें।
  6. स्थिरीकरण, दिशात्मक और वियोजी चयन के उदाहरण वाली तालिका 1 को ध्यान से पढ़ें।

10. निष्कर्ष

प्राकृतिक चयन विकासवाद की वह इंजन प्रक्रिया है जो जनसंख्या में मौजूद भिन्नताओं में से लाभदायक लक्षणों को संरक्षित करती है, और अनुकूलन उसी प्रक्रिया का दृश्य परिणाम है जो जीवों को उनके पर्यावरण में सफल बनाता है। पेपर्ड मोथ, एंटीबायोटिक प्रतिरोध और फिंच की चोंच जैसे उदाहरण इस सिद्धांत को ठोस प्रमाण देते हैं। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्नों को सरलता से हल करने के लिए सिद्धांत के चरण, अनुकूलन के प्रकार और प्रमुख साक्ष्यों को याद रखना ही पर्याप्त है।