19.5 खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल Notes

19.5 खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (विकास और पर्यावरण) अध्याय: 19.5 खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल विषय-वस्तु: खाद्य श्रृंखला, पोषी स्तर

1. परिचय

खाद्य श्रृंखला (Food Chain) वह क्रमबद्ध श्रृंखला है जिसमें एक जीव द्वारा दूसरे जीव का भोजन के रूप में उपभोग होता है, और इस प्रकार भोजन में संचित ऊर्जा एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर तक स्थानांतरित होती रहती है। खाद्य श्रृंखला की शुरुआत सदैव हरे पौधों (उत्पादकों) से होती है, क्योंकि केवल उत्पादक ही सूर्य के प्रकाश को भोजन में बदलने की क्षमता रखते हैं। उदाहरण के लिए, घास → हिरण → शेर एक साधारण खाद्य श्रृंखला है, जिसमें घास उत्पादक, हिरण प्राथमिक उपभोक्ता और शेर द्वितीयक उपभोक्ता है।

पोषी स्तर (Trophic Level) खाद्य श्रृंखला में किसी जीव की स्थिति को दर्शाता है। उत्पादक पहला पोषी स्तर बनाते हैं, प्राथमिक उपभोक्ता दूसरा, द्वितीयक उपभोक्ता तीसरा और इसी प्रकार आगे स्तर बढ़ते जाते हैं। जब किसी पारितंत्र में कई खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ जाती हैं, तो वे एक जटिल नेटवर्क का निर्माण करती हैं, जिसे खाद्य जाल (Food Web) कहते हैं। खाद्य जाल पारितंत्र में स्थिरता प्रदान करता है, क्योंकि किसी एक श्रृंखला में व्यवधान आने पर जीव दूसरी श्रृंखला से भोजन प्राप्त कर सकते हैं।

रेलवे ग्रुप D की जीव विज्ञान परीक्षा में खाद्य श्रृंखला की परिभाषा, पोषी स्तरों की पहचान, खाद्य जाल का अर्थ तथा श्रृंखला और जाल में अंतर से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में हम खाद्य श्रृंखला के प्रकार, पोषी स्तरों की संरचना, खाद्य जाल के महत्व तथा संबंधित उदाहरणों का अध्ययन करेंगे।

2. खाद्य श्रृंखला (Food Chain)

खाद्य श्रृंखला एक ऐसा क्रम है जिसमें प्रत्येक जीव अपने से पहले आने वाले जीव को खाकर ऊर्जा प्राप्त करता है और स्वयं अपने से आगे आने वाले जीव का भोजन बनता है। खाद्य श्रृंखला का आरंभ उत्पादकों से होता है और इसका अंत शीर्ष शिकारी पर होता है।

खाद्य श्रृंखला के प्रकार:

  1. चारण खाद्य श्रृंखला (Grazing Food Chain): इसकी शुरुआत हरे पौधों से होती है, जैसे घास → टिड्डा → मेंढक → सांप → बाज। इसमें सूर्य की ऊर्जा का प्रवाह सीधे पौधों से शुरू होता है।
  2. अपरदी खाद्य श्रृंखला (Detritus Food Chain): इसकी शुरुआत मृत कार्बनिक पदार्थों (अपरद) से होती है, जैसे मृत पत्तियां → जीवाणु → केंचुआ → पक्षी। यह श्रृंखला अपघटकों पर आधारित होती है।

खाद्य श्रृंखला के प्रमुख बिंदु:

खाद्य श्रृंखला के उदाहरण:

  1. घास → हिरण → शेर (स्थलीय श्रृंखला)।
  2. फाइटोप्लैंकटन → जूओप्लैंकटन → छोटी मछली → बड़ी मछली (जलीय श्रृंखला)।
  3. मक्का → चूहा → सांप → बाज (अनाज आधारित श्रृंखला)।

3. पोषी स्तर (Trophic Levels)

पोषी स्तर खाद्य श्रृंखला में किसी जीव के पोषण संबंधी स्थान को कहते हैं। प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊर्जा का स्थानांतरण होता है और प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है।

पोषी स्तरों का वर्गीकरण:

  1. प्रथम पोषी स्तर: हरे पौधे (उत्पादक)।
  2. द्वितीय पोषी स्तर: प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी), जैसे खरगोश, टिड्डा, हिरण।
  3. तृतीय पोषी स्तर: द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी), जैसे मेंढक, भेड़िया।
  4. चतुर्थ पोषी स्तर: तृतीयक उपभोक्ता (शीर्ष मांसाहारी), जैसे शेर, बाज।

पोषी स्तरों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:

4. खाद्य जाल (Food Web)

जब किसी पारितंत्र में कई खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में गुंथ जाती हैं, तो उस जटिल जाल को खाद्य जाल कहते हैं। खाद्य जाल में एक जीव एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं का भाग हो सकता है। उदाहरण के लिए, घास को टिड्डा, खरगोश और हिरण तीनों खा सकते हैं, और इनमें से प्रत्येक को कई शिकारी खा सकते हैं।

खाद्य जाल का महत्व:

  1. खाद्य जाल पारितंत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखता है।
  2. किसी एक प्रजाति के समाप्त होने पर अन्य जीव भोजन के विकल्प खोज लेते हैं।
  3. यह पारितंत्र में विभिन्न प्रजातियों के बीच पारिस्थितिक संतुलन को दर्शाता है।
  4. खाद्य जाल अधिक जटिल होने पर पारितंत्र अधिक स्थिर होता है।

खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर:

पारिस्थितिक पिरामिड: पोषी स्तरों के आधार पर संख्या, जैवभार और ऊर्जा को ग्राफीय रूप में दर्शाने वाले चित्र को पारिस्थितिक पिरामिड कहते हैं। संख्या का पिरामिड, जैवभार का पिरामिड और ऊर्जा का पिरामिड तीन मुख्य प्रकार के पारिस्थितिक पिरामिड हैं। ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा रहता है, जिसका आधार उत्पादक होता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पोषी स्तर और उनके जीव

पोषी स्तर नाम उदाहरण
प्रथम उत्पादक घास, पेड़, फाइटोप्लैंकटन
द्वितीय प्राथमिक उपभोक्ता खरगोश, टिड्डा, हिरण
तृतीय द्वितीयक उपभोक्ता मेंढक, भेड़िया
चतुर्थ तृतीयक उपभोक्ता शेर, बाज

तालिका 2: खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर

विशेषता खाद्य श्रृंखला खाद्य जाल
संरचना सरल और एक दिशीय जटिल और बहु-दिशीय
ऊर्जा प्रवाह एक ही रास्ते से कई रास्तों से
स्थिरता कम अधिक
निर्माण एकल क्रम अनेक श्रृंखलाओं से

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[19.5 खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल] --> B[खाद्य श्रृंखला]
    A --> C[पोषी स्तर]
    A --> D[खाद्य जाल]
    B --> E[चारण श्रृंखला]
    B --> F[अपरदी श्रृंखला]
    C --> G[उत्पादक]
    C --> H[प्राथमिक उपभोक्ता]
    C --> I[द्वितीयक उपभोक्ता]
    C --> J[तृतीयक उपभोक्ता]
    D --> K[स्थिरता]
    D --> L[बहु-दिशीय ऊर्जा प्रवाह]
    C --> M[दस प्रतिशत नियम]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

चारण खाद्य श्रृंखला घास उत्पादक टिड्डा प्राथमिक उपभोक्ता मेंढक द्वितीयक उपभोक्ता सांप तृतीयक उपभोक्ता हर पोषी स्तर पर ऊर्जा घटती है अगले स्तर पर केवल लगभग दस प्रतिशत ऊर्जा पहुंचती है स्वर्ण नियम: खाद्य श्रृंखला हमेशा उत्पादक से आरंभ होती है और शीर्ष मांसाहारी पर समाप्त होती है।

खाद्य जाल घास टिड्डा खरगोश हिरण शेर स्वर्ण नियम: खाद्य जाल में एक जीव कई श्रृंखलाओं का भाग होता है, जो पारितंत्र को स्थिरता देता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. खाद्य श्रृंखला का आरंभ अपघटक से मान लेना, जबकि यह हमेशा उत्पादक से शुरू होती है।
  2. शाकाहारी को प्रथम पोषी स्तर मान लेना, जबकि शाकाहारी द्वितीय पोषी स्तर पर होते हैं।
  3. खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल को एक ही समझना, जबकि जाल अनेक श्रृंखलाओं का नेटवर्क है।
  4. अपघटक को एक निश्चित पोषी स्तर पर रखना, जबकि अपघटक सभी स्तरों के मृत पदार्थ उपयोग करते हैं।
  5. दस प्रतिशत नियम को ऊर्जा स्थानांतरण से जोड़ने में गलती करना, जबकि यह अगले स्तर तक पहुंचने वाली ऊर्जा की मात्रा बताता है।
  6. चारण और अपरदी श्रृंखला में भ्रम; याद रखें चारण श्रृंखला हरे पौधों से और अपरदी श्रृंखला मृत पदार्थ से शुरू होती है।
  7. शीर्ष मांसाहारी को भी शिकार करने वाला सामान्य मांसाहारी बता देना, जबकि उसे कोई शिकार नहीं करता।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. पोषी स्तरों का क्रम उत्पादक से शीर्ष शिकारी तक तालिका 1 के रूप में याद रखें।
  2. खाद्य श्रृंखला के उदाहरण घास → हिरण → शेर और फाइटोप्लैंकटन → जूओप्लैंकटन → मछली रट लें।
  3. दस प्रतिशत नियम से जुड़े प्रश्न का उत्तर हमेशा ऊर्जा स्थानांतरण से जोड़ें।
  4. चारण और अपरदी खाद्य श्रृंखला की शुरुआत के आधार पर अंतर पहचानें।
  5. खाद्य जाल पारितंत्र को अधिक स्थिर बनाता है, यह तथ्य स्मरण रखें।
  6. पोषी स्तरों की संख्या सामान्यतः पांच से अधिक नहीं होती, इस कारण पर ध्यान दें।

10. निष्कर्ष

खाद्य श्रृंखला पारितंत्र में ऊर्जा और पदार्थ के प्रवाह को क्रमबद्ध रूप से दर्शाती है, जिसका आरंभ उत्पादकों से होता है, और अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं जो पारितंत्र को स्थिरता प्रदान करता है। पोषी स्तरों की पहचान और दस प्रतिशत नियम इस अध्याय के मूल केंद्र हैं। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में खाद्य श्रृंखला, पोषी स्तर और खाद्य जाल के उदाहरणों तथा उनके अंतर को स्पष्ट रूप से जानना ही इस अध्याय से अधिकतम अंक प्राप्त करने का मार्ग है।