विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (विकास और पर्यावरण)
अध्याय: 19.8 जैव विविधता और संरक्षण
विषय-वस्तु: जैव विविधता, संरक्षण
1. परिचय
जैव विविधता (Biodiversity) पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवों की विभिन्नता को कहते हैं, जिसमें आनुवंशिक विविधता, जाति विविधता और पारितंत्रीय विविधता शामिल होती है। सरल शब्दों में कहें तो जैव विविधता पृथ्वी पर उपस्थित पौधों, जंतुओं, सूक्ष्मजीवों तथा उनके पारितंत्रों की कुल विभिन्नता है। जैव विविधता जीवन की समृद्धि का सूचक है, क्योंकि जितनी अधिक विविधता होती है, पारितंत्र उतना ही अधिक स्थिर और उत्पादक होता है। विश्व की अधिकांश जैव विविधता उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) क्षेत्रों में पाई जाती है।
संरक्षण (Conservation) जैव विविधता की सुरक्षा, सही उपयोग और प्रबंधन की वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीवों और उनके आवासों को लुप्त होने से बचाया जाता है। मानवीय गतिविधियों जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता तेजी से घट रही है, इसलिए संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जैव विविधता का संरक्षण दो प्रकार से किया जाता है – स्थाने संरक्षण (In-situ) और बहिःस्थाने संरक्षण (Ex-situ)।
रेलवे ग्रुप D की जीव विज्ञान परीक्षा में जैव विविधता की परिभाषा, विभिन्न प्रकार, संरक्षण की विधियां, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैव विविधता हॉटस्पॉट तथा लुप्तप्राय प्रजातियों से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में हम जैव विविधता के प्रकार, इसके महत्व, संरक्षण की विधियां तथा संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों और अधिनियमों का अध्ययन करेंगे।
2. जैव विविधता की अवधारणा
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की विभिन्नता को दर्शाने वाली समग्र अवधारणा है। इसे तीन स्तरों पर समझा जाता है।
जैव विविधता के तीन स्तर:
आनुवंशिक विविधता: एक ही जाति के जीवों में पाए जाने वाले जीनों की विभिन्नता। यह किस्मों, नस्लों और उपप्रजातियों के रूप में देखी जाती है।
जाति विविधता: किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या और उनका अनुपात। जैसे किसी वन में पेड़ों, पक्षियों और जंतुओं की विभिन्न प्रजातियां।
पारितंत्रीय विविधता: पृथ्वी पर उपस्थित विभिन्न पारितंत्रों की विभिन्नता, जैसे वन, घास के मैदान, रेगिस्तान, तालाब, समुद्र।
जैव विविधता का महत्व:
पारितंत्र की स्थिरता और उत्पादकता बनाए रखती है।
भोजन, औषधि, ईंधन और आवास जैसी आधारभूत आवश्यकताएं पूरी करती है।
पारिस्थितिक सेवाएं जैसे परागण, जल शोधन और जलवायु नियंत्रण प्रदान करती है।
पारिस्थितिक संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सहायक होती है।
जीनों के भंडार के रूप में कृषि और औषधि क्षेत्र में योगदान करती है।
जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots): वे क्षेत्र जहां बड़ी संख्या में स्थानिक (Endemic) प्रजातियां पाई जाती हैं और जहां निवास स्थान नष्ट होने का खतरा अधिक होता है, जैव विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं। भारत में चार प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं – हिमालय, पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा और सुंदालैंड।
3. जैव विविधता के संकट और कारण
जैव विविधता में होने वाली गिरावट को जैव विविधता का संकट कहते हैं। प्राकृतिक और मानवीय कारणों से अनेक प्रजातियां लुप्त हो रही हैं।
जैव विविधता के संकट के कारण:
वनों की कटाई: पेड़ों के कटने से जंतुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं।
अवैध शिकार: हाथी, बाघ, गैंडा जैसे जंतु अपने दांत, सींग और खाल के लिए मारे जाते हैं।
प्रदूषण: जल, वायु और मिट्टी के प्रदूषण से जीवों का अस्तित्व खतरे में आता है।
आक्रामक प्रजातियां: बाहर से आई प्रजातियां स्थानीय प्रजातियों को नष्ट कर देती हैं।
जलवायु परिवर्तन: तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव से जीवों के आवास बदलते हैं।
कृषि का विस्तार: खेती के लिए वन और आर्द्रभूमि नष्ट की जाती हैं।
लुप्तप्राय प्रजातियां: जिन प्रजातियों के समाप्त होने का खतरा बहुत अधिक होता है, उन्हें लुप्तप्राय (Endangered) प्रजातियां कहते हैं। भारत में बाघ, हिम तेंदुआ, सिंगल (एक सींग वाला) गैंडा, एशियाई शेर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गंगा डॉल्फिन और वन्य एशियाई हाथी लुप्तप्राय प्रजातियों के उदाहरण हैं। इनकी संख्या में निरंतर गिरावट के कारण इन्हें IUCN की लाल सूची में शामिल किया गया है।
4. जैव विविधता का संरक्षण (Conservation)
जैव विविधता का संरक्षण उसकी सुरक्षा, संवर्धन और सतत उपयोग की प्रक्रिया है। संरक्षण के दो मुख्य प्रकार हैं।
स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation): इस विधि में जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षित किया जाता है। इसमें निम्नलिखित माध्यम शामिल हैं:
राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): बड़े संरक्षित क्षेत्र, जहां जीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षा मिलती है। जैसे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (गैंडा), गिर राष्ट्रीय उद्यान (एशियाई शेर), जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (बाघ)।
वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries): ऐसे संरक्षित क्षेत्र जहां केवल जंतु संरक्षित होते हैं। जैसे भरतपुर पक्षी अभयारण्य।
बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves): बड़े क्षेत्र जहां पारितंत्र के साथ मानव समुदाय भी जुड़ा रहता है। जैसे नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व, सुंदरबन बायोस्फीयर रिजर्व।
संरक्षित वन: जहां वनों और जंतुओं की सुरक्षा की जाती है।
बहिःस्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation): इस विधि में जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर निकालकर विशेष स्थानों पर संरक्षित किया जाता है। इसमें शामिल हैं:
प्राणी उद्यान (Zoos): जंतुओं को नियंत्रित वातावरण में संरक्षित करना।
वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens): पौधों की प्रजातियों का संरक्षण।
बीज बैंक (Seed Banks): बीजों का दीर्घकालिक संग्रहण और संरक्षण।
जीन बैंक (Gene Banks): जीनों और ऊतकों का संरक्षण।
इन-विट्रो संरक्षण: प्रयोगशाला में भ्रूण, शुक्राणु और ऊतकों का संरक्षण।
क्रायोप्रिजर्वेशन: बहुत कम तापमान पर जीवों के अंगों का संरक्षण।
संरक्षण से जुड़े अधिनियम और संगठन:
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: भारत में वन्य जीवों के संरक्षण का मुख्य कानून।
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980: वनों की कटाई को नियंत्रित करने के लिए।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरण की सुरक्षा का व्यापक कानून।
प्रोजेक्ट टाइगर, 1973: बाघों के संरक्षण के लिए।
प्रोजेक्ट एलीफेंट, 1992: हाथियों के संरक्षण के लिए।
IUCN: प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन, जो लाल सूची प्रकाशित करता है।
WWF: वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर, वैश्विक संरक्षण संगठन।
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और उनके विशेष जीव:
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम) – एक सींग वाला गैंडा।
गिर राष्ट्रीय उद्यान (गुजरात) – एशियाई शेर।
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड) – बाघ।
सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (पश्चिम बंगाल) – रॉयल बंगाल टाइगर।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) – बाघ।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: जैव विविधता के स्तर
स्तर
परिभाषा
उदाहरण
आनुवंशिक विविधता
जीनों में विभिन्नता
चावल की अनेक किस्में
जाति विविधता
प्रजातियों की संख्या
वन में अनेक पक्षी प्रजातियां
पारितंत्रीय विविधता
पारितंत्रों की विभिन्नता
वन, तालाब, समुद्र
तालिका 2: संरक्षण के प्रकार और माध्यम
संरक्षण का प्रकार
माध्यम
उदाहरण
स्थाने संरक्षण
राष्ट्रीय उद्यान
काजीरंगा, गिर
स्थाने संरक्षण
वन्यजीव अभयारण्य
भरतपुर पक्षी अभयारण्य
स्थाने संरक्षण
बायोस्फीयर रिजर्व
नीलगिरि
बहिःस्थाने संरक्षण
प्राणी उद्यान
चिड़ियाघर
बहिःस्थाने संरक्षण
बीज बैंक
बीजों का संग्रहण
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[19.8 जैव विविधता और संरक्षण] --> B[जैव विविधता]
A --> C[संरक्षण]
B --> D[आनुवंशिक विविधता]
B --> E[जाति विविधता]
B --> F[पारितंत्रीय विविधता]
B --> G[हॉटस्पॉट]
C --> H[स्थाने संरक्षण]
C --> I[बहिःस्थाने संरक्षण]
H --> J[राष्ट्रीय उद्यान]
H --> K[अभयारण्य]
H --> L[बायोस्फीयर रिजर्व]
I --> M[प्राणी उद्यान]
I --> N[बीज बैंक]
I --> O[जीन बैंक]
A --> P[प्रोजेक्ट टाइगर]
A --> Q[प्रोजेक्ट एलीफेंट]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
जैव विविधता को केवल जंतुओं की विविधता मानना, जबकि इसमें पौधे, सूक्ष्मजीव और आनुवंशिक भिन्नता भी शामिल है।
स्थाने और बहिःस्थाने संरक्षण में भ्रम, जैसे चिड़ियाघर को स्थाने संरक्षण मानना; वास्तव में चिड़ियाघर बहिःस्थाने संरक्षण है।
काजीरंगा को शेर का राष्ट्रीय उद्यान मानना, जबकि काजीरंगा गैंडे के लिए प्रसिद्ध है और शेर गिर राष्ट्रीय उद्यान में है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के वर्ष 1972 को अन्य वर्षों से मिला देना।
हॉटस्पॉट को सामान्य संरक्षित क्षेत्र मानना, जबकि हॉटस्पॉट में स्थानिक प्रजातियों की संख्या अधिक होती है।
IUCN को भारत सरकार का संगठन मान लेना, जबकि यह अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में सामान्य प्रजातियों को शामिल कर देना।
9. परीक्षा युक्तियाँ
राष्ट्रीय उद्यान और उनके विशेष जंतु (काजीरंगा-गैंडा, गिर-शेर, सुंदरबन-बाघ) के जोड़े रट लें।
स्थाने और बहिःस्थाने संरक्षण के माध्यमों की तालिका 2 याद रखें।
भारत के चार हॉटस्पॉट हिमालय, पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा और सुंदालैंड याद रखें।
प्रोजेक्ट टाइगर (1973) और प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992) के वर्ष स्मरण रखें।
जैव विविधता के तीनों स्तरों के उदाहरण तैयार करें।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 को अधिनियम व वर्ष के साथ याद रखें।
10. निष्कर्ष
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की समृद्धि और पारितंत्र की स्थिरता का आधार है, और इसकी सुरक्षा के लिए स्थाने तथा बहिःस्थाने संरक्षण दोनों आवश्यक हैं। राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व, प्रोजेक्ट टाइगर और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम जैसे प्रयास लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में जैव विविधता के स्तर, संरक्षण की विधियां और प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों की सटीक जानकारी ही इस अध्याय से अधिकतम अंक प्राप्त करने की कुंजी है।