विषय: रेलवे ग्रुप D – रसायन विज्ञान (धातु कार्बन और आवर्त सारणी)
अध्याय: 16.2 अभिक्रियाशीलता श्रेणी
विषय-वस्तु: धातुओं की अभिक्रियाशीलता क्रम
1. परिचय
सभी धातुओं की रासायनिक अभिक्रियाशीलता समान नहीं होती। कुछ धातुएँ अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं, जैसे पोटैशियम और सोडियम, जबकि कुछ अत्यंत अक्रिय होती हैं, जैसे सोना और चाँदी। धातुओं को उनकी घटती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित करने पर जो सूची बनती है, उसे अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) या धातु क्रियाशीलता श्रेणी कहते हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में अभिक्रियाशीलता श्रेणी से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे ऊपर पोटैशियम और सबसे नीचे सोना होता है। श्रेणी में ऊपर की धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील होती हैं और नीचे की धातुएँ कम अभिक्रियाशील। यह श्रेणी किसी धातु की जल, अम्ल, ऑक्सीजन से अभिक्रिया तथा किसी दूसरे धातु के लवण को प्रतिस्थापित करने की क्षमता को निर्धारित करती है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी की सहायता से हम यह बता सकते हैं कि कौन-सी धातु किस अन्य धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित करेगी। श्रेणी में ऊपर की धातु नीचे की धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है, परंतु नीचे की धातु ऊपर की धातु को विस्थापित नहीं कर सकती। यही विस्थापन अभिक्रिया धातुओं की अभिक्रियाशीलता का मुख्य आधार है।
2. अभिक्रियाशीलता श्रेणी का क्रम
अभिक्रियाशीलता श्रेणी (घटती अभिक्रियाशीलता के क्रम में) प्रमुख धातुएँ:
पोटैशियम (K) – सबसे अधिक अभिक्रियाशील
सोडियम (Na)
कैल्शियम (Ca)
मैग्नीशियम (Mg)
एल्युमिनियम (Al)
जिंक (Zn)
आयरन (Fe)
लेड (Pb)
हाइड्रोजन (H)
कॉपर (Cu)
पारा (Hg)
चाँदी (Ag)
सोना (Au) – सबसे कम अभिक्रियाशील
इस श्रेणी को याद रखने के लिए अनेक स्मरण सूत्र उपयोग में लाए जाते हैं। परीक्षा की दृष्टि से क्रम याद रखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि प्रश्नों में धातुओं के क्रम को पहचानना पड़ता है।
हल किया गया उदाहरण 1: निम्न में से सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है: जिंक, मैग्नीशियम, सोना, लोहा?
हल: श्रेणी के अनुसार मैग्नीशियम (Mg) इन सभी से ऊपर स्थित है। अतः मैग्नीशियम सबसे अधिक अभिक्रियाशील है। सोना सबसे कम अभिक्रियाशील है।
3. विस्थापन अभिक्रियाएँ
अभिक्रियाशीलता श्रेणी का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग विस्थापन अभिक्रिया को समझना है। विस्थापन अभिक्रिया में श्रेणी में ऊपर की अधिक अभिक्रियाशील धातु, नीचे की कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
विस्थापन अभिक्रिया का सामान्य रूप: A + BX → AX + B (जहाँ A, B से अधिक अभिक्रियाशील है)।
हल किया गया उदाहरण 2: जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डाला जाता है तो क्या होता है?
हल: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu। लोहा कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है, अतः वह कॉपर को उसके लवण से विस्थापित कर देता है। विलयन का नीला रंग हरा (फेरस सल्फेट) हो जाता है और कॉपर धातु अलग होकर जम जाती है।
हल किया गया उदाहरण 3: क्या कॉपर जिंक सल्फेट विलयन से जिंक को विस्थापित कर सकता है?
हल: नहीं। कॉपर अभिक्रियाशीलता श्रेणी में जिंक से नीचे है। केवल श्रेणी में ऊपर की धातु ही नीचे की धातु को विस्थापित कर सकती है। अतः कॉपर जिंक को विस्थापित नहीं कर सकता।
4. जल और अम्ल के साथ धातुओं की अभिक्रिया
अभिक्रियाशीलता श्रेणी के अनुसार धातुओं की जल तथा अम्ल से अभिक्रिया भिन्न होती है:
अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ (K, Na, Ca): ठंडे जल से तीव्र अभिक्रिया करती हैं। उदाहरण: 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2।
मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (Mg, Zn, Fe): गर्म जल या भाप से अभिक्रिया करती हैं। उदाहरण: Mg + H2O → MgO + H2 (भाप के साथ)।
कम अभिक्रियाशील धातुएँ (Cu, Ag, Au): जल से अभिक्रिया नहीं करतीं।
अम्ल के साथ: श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ अम्ल से हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। कॉपर, चाँदी, सोना जैसी हाइड्रोजन से नीचे की धातुएँ अम्ल से हाइड्रोजन नहीं मुक्त करतीं।
हल किया गया उदाहरण 4: ताँबा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन गैस क्यों नहीं मुक्त करता?
हल: क्योंकि ताँबा अभिक्रियाशीलता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित है। हाइड्रोजन से नीचे की धातुएँ अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकतीं, इसलिए कोई अभिक्रिया नहीं होती।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: अभिक्रियाशीलता श्रेणी का क्रम
क्रम
धातु
प्रतीक
अभिक्रियाशीलता
1
पोटैशियम
K
सबसे अधिक
2
सोडियम
Na
अत्यधिक
3
कैल्शियम
Ca
अत्यधिक
4
मैग्नीशियम
Mg
अधिक
5
एल्युमिनियम
Al
अधिक
6
जिंक
Zn
मध्यम
7
आयरन
Fe
मध्यम
8
कॉपर
Cu
कम
9
चाँदी
Ag
बहुत कम
10
सोना
Au
सबसे कम
तालिका 2: अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं का व्यवहार
धातु समूह
जल से अभिक्रिया
अम्ल से अभिक्रिया
K, Na, Ca
ठंडे जल से तीव्र
हाइड्रोजन मुक्त
Mg, Zn, Fe
गर्म जल/भाप से
हाइड्रोजन मुक्त
Cu, Ag, Au
कोई अभिक्रिया नहीं
हाइड्रोजन नहीं मुक्त
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[16.2 अभिक्रियाशीलता श्रेणी] --> B[क्रम]
A --> C[विस्थापन अभिक्रिया]
A --> D[जल और अम्ल से अभिक्रिया]
B --> B1[K सबसे अधिक]
B --> B2[Au सबसे कम]
C --> C1[ऊपर की धातु विस्थापित करती है]
C --> C2[Fe + CuSO4 = FeSO4 + Cu]
D --> D1[K Na Ca तीव्र]
D --> D2[Cu Ag Au अक्रिय]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
विद्यार्थी प्रायः कॉपर और जिंक का क्रम भूल जाते हैं; श्रेणी में जिंक कॉपर से ऊपर है।
यह गलती आम है कि नीचे की धातु ऊपर की धातु को विस्थापित कर सकती है; वास्तव में केवल ऊपर की धातु ही विस्थापित करती है।
हाइड्रोजन का स्थान श्रेणी में बीच में (आयरन और कॉपर के मध्य) होता है, इसे शुरुआत या अंत में रखना गलत है।
कुछ विद्यार्थी सोडियम को सबसे अधिक अभिक्रियाशील मानते हैं; वास्तव में पोटैशियम सबसे अधिक अभिक्रियाशील है।
ताँबे को अम्ल से हाइड्रोजन मुक्त करता हुआ दिखाना गलत है; ताँबा हाइड्रोजन से नीचे होने के कारण अम्ल से हाइड्रोजन नहीं मुक्त करता।
विस्थापन अभिक्रिया में FeSO4 के स्थान पर CuSO4 में Cu की जगह Fe लिखते समय उत्पाद गलत लिखना सामान्य गलती है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
अभिक्रियाशीलता श्रेणी का पूरा क्रम K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Hg Ag Au कंठस्थ रखें।
विस्थापन प्रश्न में श्रेणी देखें: ऊपर की धातु विस्थापित करती है, नीचे की नहीं।
हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ अम्ल से H2 मुक्त करती हैं; यह सूत्र याद रखें।
Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu जैसे विस्थापन समीकरण याद रखें, ये प्रश्नों में बार-बार आते हैं।
सोना सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है, इसे 'अक्रिय धातु' कहा जाता है।
सोडियम जल में तैरती है और हाइड्रोजन गैस मुक्त करती है, यह व्यवहार प्रश्नों में पूछा जाता है।
10. निष्कर्ष
अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं को उनकी घटती अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित करती है, जिसमें पोटैशियम सबसे ऊपर और सोना सबसे नीचे होता है। यह श्रेणी विस्थापन अभिक्रियाओं, जल और अम्ल के साथ धातुओं के व्यवहार को समझने में सहायक होती है। श्रेणी में ऊपर की धातु नीचे की धातु को उसके लवण से विस्थापित करती है। इन नियमों की पूर्ण समझ रेलवे ग्रुप D परीक्षा में धातुओं की अभिक्रियाशीलता से संबंधित सभी प्रश्नों को हल करने के लिए आवश्यक है।