15.6 ऑक्सीकरण और अपचयन Notes

15.6 ऑक्सीकरण और अपचयन

विषय: रेलवे ग्रुप D – रसायन विज्ञान (अभिक्रियाएँ और रासायनिक गुण) अध्याय: 15.6 ऑक्सीकरण और अपचयन विषय-वस्तु: ऑक्सीकरण-अपचयन, रेडॉक्स

1. परिचय

ऑक्सीकरण और अपचयन रसायन विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से हैं, और इन दोनों की संयुक्त अभिक्रिया को 'रेडॉक्स अभिक्रिया' (Redox Reaction) कहते हैं। पुरानी परिभाषा के अनुसार, ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का खिसकना 'ऑक्सीकरण' है, जबकि हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का हटना 'अपचयन' है। आधुनिक दृष्टि से ऑक्सीकरण में इलेक्ट्रॉन का त्याग होता है और अपचयन में इलेक्ट्रॉन का ग्रहण। जहाँ जंग लगता है, लकड़ी जलती है, भोजन पचता है या हम सांस लेते हैं, वहाँ रेडॉक्स अभिक्रिया हो रही होती है।

ऑक्सीकरण और अपचयन सदैव साथ-साथ होते हैं; इन्हें अलग-अलग नहीं किया जा सकता। जो पदार्थ ऑक्सीकृत होता है वह इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, और जो अपचित होता है वह वही इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। इसलिए जब कभी कोई तत्व ऑक्सीकृत होता है, तो कोई दूसरा तत्व निश्चित रूप से अपचित होता है। इलेक्ट्रॉन देने वाले पदार्थ को 'अपचायक' (Reducing Agent) और इलेक्ट्रॉन लेने वाले पदार्थ को 'ऑक्सीकारक' (Oxidising Agent) कहते हैं। ऑक्सीकरण संख्या (Oxidation Number) की सहायता से यह पहचाना जा सकता है कि कौन-सा तत्व कितना ऑक्सीकृत या अपचित हुआ है।

RRB ग्रुप D की परीक्षा में ऑक्सीकरण-अपचयन की पहचान, ऑक्सीकारक-अपचायक के नाम, ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन तथा दैनिक जीवन के रेडॉक्स उदाहरण (जंग लगना, दहन, श्वसन) पर प्रश्न पूछे जाते हैं। CuO + H2 → Cu + H2O जैसी अभिक्रिया में कौन ऑक्सीकृत और कौन अपचित है, यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है। इस अध्याय में हम ऑक्सीकरण-अपचयन की परिभाषाएँ, ऑक्सीकरण संख्या और रेडॉक्स अभिक्रियाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. ऑक्सीकरण और अपचयन की परिभाषाएँ

ऑक्सीकरण और अपचयन को तीन दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है:

इन्हें याद रखने का सरल उपाय है 'OIL RIG' – Oxidation Is Loss (of electrons), Reduction Is Gain (of electrons)। उदाहरण के लिए 2Cu + O2 → 2CuO में तांबा ऑक्सीजन से जुड़कर ऑक्सीकृत होता है। इसके विपरीत CuO + H2 → Cu + H2O में कॉपर ऑक्साइड में से ऑक्सीजन निकलकर कॉपर बनता है, अतः CuO अपचित होता है, जबकि हाइड्रोजन ऑक्सीजन पाकर ऑक्सीकृत होता है।

इलेक्ट्रॉन दृष्टि से देखें तो 2Fe + 3O2 → Fe2O3 में लोहा इलेक्ट्रॉन छोड़कर ऑक्सीकृत होता है, और ऑक्सीजन इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर अपचित होती है। इसी प्रकार दैनिक जीवन में जब सेब कटकर भूरा होता है या घी बासी होता है, तब उसमें ऑक्सीकरण होता है, और इसे रोकने के लिए एंटीऑक्सीडेंट का उपयोग होता है।

3. ऑक्सीकरण संख्या और रेडॉक्स अभिक्रिया

ऑक्सीकरण संख्या (Oxidation Number) वह आवेश है जो किसी तत्व के परमाणु पर तब माना जाता है जब सभी आबंधों के इलेक्ट्रॉन अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व को सौंप दिए जाएँ। इसके कुछ मुख्य नियम:

जिस अभिक्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं, वह 'रेडॉक्स अभिक्रिया' कहलाती है। उदाहरण के लिए:

रेडॉक्स अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन देने वाला पदार्थ 'अपचायक' (Reducing Agent) तथा इलेक्ट्रॉन लेने वाला पदार्थ 'ऑक्सीकारक' (Oxidising Agent) होता है। किसी अभिक्रिया में जो पदार्थ ऑक्सीकृत होता है वह अपचायक होता है, और जो अपचित होता है वह ऑक्सीकारक होता है। उदाहरण के लिए CuO + H2 → Cu + H2O में CuO ऑक्सीकारक (यह O देता है) तथा H2 अपचायक है।

4. कार्य उदाहरण और दैनिक जीवन में रेडॉक्स

उदाहरण 1: अभिक्रिया ZnO + C → Zn + CO में कौन ऑक्सीकृत और कौन अपचित है? - ZnO में Zn की संख्या +2, और मुक्त Zn में 0 है; अतः Zn अपचित है। - C की संख्या 0 से बढ़कर CO में +2 होती है; अतः C ऑक्सीकृत है। - अपचायक = C, ऑक्सीकारक = ZnO।

उदाहरण 2: 2Cu + O2 → 2CuO में कौन ऑक्सीकृत है? - Cu की संख्या 0 से +2 होती है, अतः Cu ऑक्सीकृत है। - O की संख्या 0 से -2 होती है, अतः O अपचित है। - ऑक्सीकारक = O2, अपचायक = Cu।

उदाहरण 3: जंग लगना (Rusting)। - समीकरण: 4Fe + 3O2 + 6H2O → 4Fe(OH)3 - लोहा ऑक्सीजन और जल के साथ अभिक्रिया कर जंग बनाता है, इसमें Fe ऑक्सीकृत होता है। - ऑक्सीजन और जल दोनों की उपस्थिति आवश्यक होती है।

उदाहरण 4: दहन (Combustion)। - CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O में मीथेन का कार्बन ऑक्सीकृत होता है। - दहन ऊष्माक्षेपी रेडॉक्स अभिक्रिया है।

दैनिक जीवन में रेडॉक्स अभिक्रियाओं के अनेक उदाहरण हैं। श्वसन में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होकर ऊर्जा निकलती है (C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा), बैटरी और सेल में रेडॉक्स अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है, और विरंजक (ब्लीचिंग) की क्रियाओं में भी ऑक्सीकरण शामिल होता है। इन अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण संख्या के परिवर्तन से यह पहचान आसान हो जाती है कि कौन सा पदार्थ ऑक्सीकृत या अपचित हो रहा है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

क्रम रेडॉक्स अभिक्रिया ऑक्सीकृत पदार्थ अपचित पदार्थ
1 2Cu + O2 → 2CuO Cu O2
2 CuO + H2 → Cu + H2O H2 CuO
3 ZnO + C → Zn + CO C ZnO
4 MnO2 + 4HCl → MnCl2 + Cl2 + 2H2O HCl (Cl) MnO2
5 CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O CH4 (C) O2

तालिका 2

अवधारणा परिभाषा उदाहरण
ऑक्सीकरण इलेक्ट्रॉन का त्याग, ऑक्सीजन संख्या वृद्धि 2Cu → 2CuO
अपचयन इलेक्ट्रॉन का ग्रहण, ऑक्सीकरण संख्या कमी CuO → Cu
ऑक्सीकारक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, अपचित होता है O2, CuO, KMnO4
अपचायक इलेक्ट्रॉन दान करता है, ऑक्सीकृत होता है H2, C, Zn, Na

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[ऑक्सीकरण और अपचयन रेडॉक्स] --> B[ऑक्सीकरण]
    A --> C[अपचयन]
    B --> B1[इलेक्ट्रॉन की हानि]
    B --> B2[ऑक्सीजन का जुड़ना]
    B --> B3[ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि]
    C --> C1[इलेक्ट्रॉन का ग्रहण]
    C --> C2[हाइड्रोजन का जुड़ना]
    C --> C3[ऑक्सीकरण संख्या में कमी]
    A --> D[ऑक्सीकारक]
    A --> E[अपचायक]
    A --> F[दैनिक जीवन में]
    D --> D1[O2 CuO KMnO4]
    E --> E1[H2 C Zn Na]
    F --> F1[जंग लगना]
    F --> F2[दहन]
    F --> F3[श्वसन]
    F --> F4[बैटरी]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

रेडॉक्स अभिक्रिया CuO + H2 → Cu + H2O कॉपर ऑक्साइड CuO में Cu : +2 O देता है, ऑक्सीकारक अपचयन: संख्या घटती है हाइड्रोजन गैस H2 में H : 0 O लेता है, अपचायक ऑक्सीकरण: संख्या बढ़ती है उत्पाद Cu (कॉपर धातु, संख्या 0) H2O (जल) इलेक्ट्रॉन एक साथ आदान-प्रदान होते हैं स्वर्ण नियम ऑक्सीकरण और अपचयन सदैव साथ-साथ होते हैं।

दैनिक जीवन में रेडॉक्स अभिक्रियाएँ जंग लगना 4Fe + 3O2 + 6H2O → 4Fe(OH)3 धीमी रेडॉक्स अभिक्रिया दहन CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O ऊष्माक्षेपी रेडॉक्स श्वसन C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O ग्लूकोज का ऑक्सीकरण बैटरी / सेल रेडॉक्स से विद्युत धारा एनोड पर ऑक्सीकरण एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीकरण रोकते हैं घी-मक्खन खराब होने से बचाने में स्वर्ण नियम ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि = ऑक्सीकरण, कमी = अपचयन।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. ऑक्सीकृत-अपचित में उलझन: CuO + H2 → Cu + H2O में CuO को ऑक्सीकृत बताना गलत है; CuO ऑक्सीजन खोकर अपचित होता है।
  2. ऑक्सीकारक-अपचायक उल्टा: जो अपचित होता है वह ऑक्सीकारक होता है; इसे उल्टा कर लेना सामान्य भूल है।
  3. ऑक्सीकरण संख्या: H की संख्या यौगिकों में +1 मानना कुछ स्थितियों (जैसे NaH में -1) में गलत हो सकता है।
  4. अकेला ऑक्सीकरण: यह मानना कि अभिक्रिया में केवल ऑक्सीकरण या केवल अपचयन हो सकता है, गलत है; दोनों साथ होते हैं।
  5. जंग के लिए शर्त: जंग लगने के लिए केवल ऑक्सीजन पर्याप्त है, यह मानना गलत है; जल भी आवश्यक है।
  6. दहन को गैर-रेडॉक्स मानना: दहन एक ऊष्माक्षेपी रेडॉक्स अभिक्रिया है, इसे रेडॉक्स न मानना गलत है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. 'OIL RIG' याद रखें: ऑक्सीकरण इलेक्ट्रॉन हानि, अपचयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण।
  2. ऑक्सीकरण संख्या बदलाव देखें: बढ़ना = ऑक्सीकरण, घटना = अपचयन।
  3. जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक हैं, यह प्रश्न बार-बार आता है।
  4. अपचायक वही है जो ऑक्सीकृत होता है; ऑक्सीकारक वही जो अपचित होता है।
  5. CuO + H2 → Cu + H2O और ZnO + C → Zn + CO को रेडॉक्स प्रश्नों के मानक उदाहरण के रूप में अभ्यास करें।

10. निष्कर्ष

ऑक्सीकरण और अपचयन रासायनिक अभिक्रियाओं की वे दो विपरीत प्रक्रियाएँ हैं जो हमेशा साथ-साथ घटित होती हैं और मिलकर रेडॉक्स अभिक्रिया बनाती हैं। ऑक्सीकरण में इलेक्ट्रॉन की हानि और ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि होती है, जबकि अपचयन में इलेक्ट्रॉन का ग्रहण और ऑक्सीकरण संख्या में कमी होती है। ऑक्सीजन युक्त पदार्थ ऑक्सीकारक और हाइड्रोजन, कार्बन, धातुएँ आमतौर पर अपचायक के रूप में कार्य करते हैं। जंग लगना, दहन, श्वसन और बैटरी की कार्यप्रणाली सभी रेडॉक्स अभिक्रियाओं के व्यावहारिक उदाहरण हैं। परीक्षा में ऑक्सीकरण संख्या के परिवर्तन और OIL RIG के नियम को लागू करके इन प्रश्नों को सटीकता से हल किया जा सकता है।