23.7 जलवायु परिवर्तन Notes

23.7 जलवायु परिवर्तन

विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (समसामयिकी और पर्यावरण) अध्याय: 23.7 जलवायु परिवर्तन विषय-वस्तु: जलवायु परिवर्तन, COP

1. परिचय

जलवायु परिवर्तन आधुनिक युग की सबसे गंभीर वैश्विक समस्या है। ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है। इसका प्रभाव ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र स्तर में वृद्धि, अनियमित मौसम, सूखा एवं बाढ़ के रूप में दिखाई देता है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP) इस समस्या के समाधान के लिए आयोजित होते हैं।

रेलवे ग्रुप D परीक्षा के सामान्य जागरूकता खंड में जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें ग्रीनहाउस प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, पेरिस समझौता, COP सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल, कार्बन न्यूट्रल एवं भारत की जलवायु प्रतिज्ञाएँ शामिल होती हैं। जलवायु परिवर्तन की बुनियादी अवधारणाओं की समझ परीक्षा में लाभदायक होती है।

इस अध्याय में हम ग्रीनहाउस प्रभाव, जलवायु परिवर्तन के कारण एवं प्रभाव, प्रमुख जलवायु सम्मेलनों (COP) और भारत की जलवायु नीतियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। परीक्षा उपयोगी तथ्यों को स्मरणीय तालिकाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

2. ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग

ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी के वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों द्वारा गर्मी को रोकने की प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया पृथ्वी को गर्म रखने के लिए आवश्यक है, परंतु अत्यधिक गैसों से तापमान बढ़ता है।

प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें:

  1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): सबसे अधिक योगदान।
  2. मीथेन (CH4): जीवाश्म ईंधन एवं पशुपालन से।
  3. नाइट्रस ऑक्साइड (N2O): कृषि गतिविधियों से।
  4. जलवाष्प: प्राकृतिक ग्रीनहाउस गैस।
  5. फ्लोरिनेटेड गैसें: औद्योगिक उपयोग।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण:

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव:

ग्रीनहाउस गैसों का सबसे अधिक योगदान कार्बन डाइऑक्साइड का है। वायुमंडल में CO2 की मात्रा औद्योगिक क्रांति के बाद तेजी से बढ़ी है। ग्रीनहाउस गैसों की निगरानी IPCC (जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल) करता है।

3. जलवायु सम्मेलन (COP) और समझौते

COP (Conference of Parties) संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के पक्षकार देशों की बैठक है। पहला COP 1995 में बर्लिन में हुआ। प्रमुख COP सम्मेलन निम्न हैं:

पेरिस समझौता (2015):

  1. वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का लक्ष्य।
  2. 1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य अपनाने का प्रयास।
  3. सभी देशों को अपनी जलवायु प्रतिज्ञाएँ (NDC) देनी होंगी।
  4. विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को वित्तीय सहायता।

क्योटो प्रोटोकॉल (1997): पहला बाध्यकारी जलवायु समझौता, जिसमें विकसित देशों के लिए उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य निर्धारित थे।

अन्य महत्वपूर्ण शब्दावली:

4. भारत की जलवायु नीतियाँ और पहल

भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है:

भारत की प्रमुख जलवायु प्रतिज्ञाएँ:

  1. 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन।
  2. 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता।
  3. 2030 तक ऊर्जा का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से।
  4. उत्सर्जन घनत्व में 45 प्रतिशत की कमी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की शुरुआत भारत एवं फ्रांस द्वारा 2015 में की गई। भारत का मुख्यालय गुरुग्राम में है। भारत ने COP-26 में 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य घोषित किया, जो पंचामृत (पंच अमृत) के रूप में प्रस्तुत किया गया।

अन्य महत्वपूर्ण पहल:

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

गैस स्रोत योगदान
CO2 जीवाश्म ईंधन सबसे अधिक
मीथेन पशुपालन द्वितीय
N2O कृषि महत्वपूर्ण
जलवाष्प प्राकृतिक प्राकृतिक
फ्लोरिनेटेड उद्योग कम

तालिका 2

COP वर्ष स्थान मुख्य बिंदु
COP-21 2015 पेरिस पेरिस समझौता
COP-26 2021 ग्लासगो नई प्रतिज्ञाएँ
COP-27 2022 शर्म अल-शेख हानि कोष
COP-28 2023 दुबई ऊर्जा संक्रमण

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[जलवायु परिवर्तन] --> B[ग्रीनहाउस प्रभाव]
    A --> C[ग्लोबल वार्मिंग]
    A --> D[COP सम्मेलन]
    A --> E[भारत की पहल]
    B --> F[CO2]
    B --> G[मीथेन]
    C --> H[तापमान वृद्धि]
    D --> I[पेरिस 2015]
    D --> J[ग्लासगो 2021]
    D --> K[दुबई 2023]
    E --> L[नेट जीरो 2070]
    E --> M[सौर गठबंधन]
    E --> N[500 GW लक्ष्य]
    I --> O[2 डिग्री लक्ष्य]
    L --> P[पंचामृत]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

ग्रीनहाउस गैसें गैसें CO2 सबसे अधिक मीथेन पशुपालन N2O कृषि जलवाष्प प्राकृतिक निगरानी IPCC जलवायु रिपोर्ट तैयार करता है स्वर्ण नियम CO2 ग्रीनहाउस गैसों में सबसे अधिक योगदान देती है।

प्रमुख COP सम्मेलन COP COP-21 2015, पेरिस COP-26 2021, ग्लासगो COP-28 2023, दुबई पेरिस समझौता तापमान 2 डिग्री से नीचे रखने का लक्ष्य स्वर्ण नियम पेरिस समझौता COP-21 में अपनाया गया।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. पेरिस समझौता और COP: पेरिस समझौता COP-21 (2015) में अपनाया गया, जबकि COP-26 ग्लासगो में हुआ। दोनों को नहीं मिलाना चाहिए।
  2. क्योटो प्रोटोकॉल का वर्ष: क्योटो प्रोटोकॉल 1997 में हुआ, न कि 2005 में (2005 में लागू हुआ)।
  3. भारत का नेट जीरो लक्ष्य: भारत ने 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है, न कि 2050 तक।
  4. ISA का मुख्यालय: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय गुरुग्राम में है, न कि नई दिल्ली में।
  5. CO2 का योगदान: कार्बन डाइऑक्साइड सबसे अधिक योगदान देती है, मीथेन नहीं।
  6. पहला COP: पहला COP 1995 में बर्लिन में हुआ, इसे 1992 (UNFCCC) से नहीं मिलाना चाहिए।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. COP सम्मेलनों का वर्ष, स्थान और मुख्य बिंदु की तालिका याद रखें।
  2. भारत के 2070 नेट जीरो और 500 GW लक्ष्य को स्पष्ट रखें।
  3. ग्रीनहाउस गैसों के स्रोत और उनके योगदान का क्रम याद रखें।
  4. पेरिस समझौते का 2 डिग्री और 1.5 डिग्री का लक्ष्य निश्चित रूप से याद रखें।
  5. पंचामृत (पंच अमृत) COP-26 में भारत की प्रतिज्ञा है, इसे याद रखें।
  6. ISA की शुरुआत भारत एवं फ्रांस द्वारा हुई, यह तथ्य तैयार रखें।

10. निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन रेलवे ग्रुप D परीक्षा के सामान्य जागरूकता खंड का महत्वपूर्ण विषय है। ग्रीनहाउस प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, COP सम्मेलनों और भारत की जलवायु प्रतिज्ञाओं की जानकारी परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है। गैसों के योगदान, समझौतों के वर्ष और लक्ष्यों की स्मरणीय तालिकाओं के नियमित अभ्यास से इस विषय में महारत हासिल की जा सकती है।