21.2 भारत की भौतिक विशेषताएँ Notes

21.2 भारत की भौतिक विशेषताएँ

विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (भूगोल और राजव्यवस्था) अध्याय: 21.2 भारत की भौतिक विशेषताएँ विषय-वस्तु: हिमालय, प्रायद्वीपीय पठार

1. परिचय

भारत की भौतिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है, क्योंकि यहाँ एक ही देश में पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र और द्वीप सभी प्रकार के भौगोलिक स्वरूप पाए जाते हैं। भारत की भूगर्भीय संरचना के आधार पर देश को छह प्रमुख भौतिक विभागों में बाँटा जाता है। ये हैं उत्तरी पर्वत श्रेणियाँ (हिमालय), उत्तरी भारत का विशाल मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, तटीय मैदान, थार का मरुस्थल और द्वीप समूह। रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में भौतिक विशेषताओं से संबंधित प्रश्न जैसे कि हिमालय की श्रेणियाँ, पठारों के नाम और प्रमुख पर्वतों की स्थिति के बारे में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

हिमालय भारत का सबसे ऊँचा और सबसे नवीन वलित पर्वत है, जो विश्व का सबसे नवीन पर्वत भी माना जाता है। यह तृतीय काल (टर्शियरी युग) में टेथिस सागर के तल पर जमा हुए अवसादों से निर्मित हुआ था। हिमालय पर्वत की कुल लंबाई लगभग 2,400 किलोमीटर है और यह पश्चिम में नंगा पर्वत से पूर्व में नामचा बरवा तक फैला हुआ है। हिमालय के उत्तर में तिब्बत का पठार और दक्षिण में भारत का गंगा का मैदान स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई लगभग 6,100 मीटर है, जो किसी अन्य पर्वत श्रेणी की तुलना में सबसे अधिक है।

प्रायद्वीपीय पठार भारत के दक्षिणी भाग में स्थित प्राचीनतम भूखंड है, जिसे गोंडवानालैंड के नाम से भी जाना जाता है। यह पठार विश्व के सबसे प्राचीन स्थलीय क्षेत्रों में से एक है और यहाँ के शैल क्रिस्टलीय (आग्नेय एवं रूपांतरित) प्रकार के हैं। प्रायद्वीपीय पठार पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व में पूर्वी घाट, उत्तर में विंध्य और सतपुड़ा की श्रेणियों से घिरा हुआ है। यह पठार खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है, इसलिए इसे भारत का "खनिज भंडार" भी कहा जाता है। इन दोनों प्रमुख भौतिक विशेषताओं का गहन अध्ययन रेलवे परीक्षा के लिए आवश्यक है।

2. हिमालय पर्वत और उसकी श्रेणियाँ

हिमालय पर्वत को पश्चिम से पूर्व की ओर तीन समानांतर श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ये श्रेणियाँ दक्षिण से उत्तर की ओर क्रमशः शिवालिक, हिमाचल (मध्य हिमालय) और हिमाद्रि (महान हिमालय) कहलाती हैं:

हिमालय की प्रमुख चोटियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. माउंट एवरेस्ट (सागरमाथा): 8,848.86 मीटर, नेपाल में स्थित, विश्व की सबसे ऊँची चोटी।
  2. कंचनजंगा: 8,586 मीटर, भारत की सबसे ऊँची चोटी, सिक्किम में स्थित।
  3. नंगा पर्वत: 8,126 मीटर, पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर में।
  4. नंदा देवी: 7,817 मीटर, उत्तराखंड में, भारत में दूसरी सबसे ऊँची चोटी।
  5. नामचा बरवा: 7,756 मीटर, अरुणाचल प्रदेश में, हिमालय का पूर्वी छोर।

हिमालय के प्रमुख दर्रे (पास) भारतीय भूगोल में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ज़ोजिला दर्रा जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर को लेह से जोड़ता है। नाथूला दर्रा सिक्किम में स्थित है जो भारत-चीन सीमा पर है। शिपकी ला दर्रा हिमाचल प्रदेश में सतलुज घाटी के माध्यम से तिब्बत जाता है। भारहो दर्रा जम्मू-कश्मीर में स्थित है। इन दर्रों की जानकारी परीक्षा में उपयोगी होती है।

3. प्रायद्वीपीय पठार और घाट

प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन स्थल खंड है, जो मुख्यतः दक्कन के पठार के रूप में जाना जाता है। यह पठार दो भागों में बँटा है - पश्चिम में मालवा का पठार और पूर्व में छोटा नागपुर पठार। प्रायद्वीपीय पठार के प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं:

दक्कन का पठार पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के बीच स्थित है। यह पठार पश्चिम की ओर से पूर्व की ओर धीरे-धीरे ढलान करता है, इसीलिए प्रायद्वीपीय नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। नर्मदा और ताप्ती जैसी कुछ नदियाँ दरार घाटी (रिफ्ट वैली) में बहते हुए पश्चिम की ओर जाकर अरब सागर में गिरती हैं। पश्चिमी घाट का ऊँचाई में निरंतर क्रम टूटने से स्थानीय नाम मिले हैं, जैसे महाराष्ट्र में सह्याद्रि, कर्नाटक में बाबा बूदन पहाड़ियाँ और केरल में अनामलाई-कार्डमम पहाड़ियाँ। पश्चिमी घाट में पालघाट (पालक्कड़) गैप केवल एक प्रमुख अंतराल है।

प्रायद्वीपीय पठार के प्रमुख उपखंड निम्नलिखित हैं:

  1. मालवा पठार: विंध्य के उत्तर-पश्चिम में, मुख्यतः बेसाल्ट (काली मिट्टी) युक्त क्षेत्र।
  2. छोटा नागपुर पठार: झारखंड में स्थित, खनिजों की प्रचुरता के लिए प्रसिद्ध।
  3. कर्नाटक पठार: पश्चिमी घाट के पूर्व में, उपजाऊ काली मिट्टी वाला क्षेत्र।
  4. दीनगर पठार / मेसा और बूटा: विंध्य और सतपुड़ा के बीच का ट्रैप क्षेत्र।

4. उत्तरी मैदान, मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप

हिमालय के दक्षिण में स्थित उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित विशाल जलोढ़ मैदान है। यह मैदान पश्चिम में सिंधु नदी से पूर्व में ब्रह्मपुत्र तक लगभग 3,200 किलोमीटर तक विस्तृत है। उत्तरी मैदान को तीन भागों में बाँटा जाता है:

थार का मरुस्थल राजस्थान में स्थित है, जिसे "महान भारतीय मरुस्थल" भी कहा जाता है। यह विश्व का नौवाँ सबसे बड़ा उपोष्ण मरुस्थल है। मरुस्थल की सीमा पर कच्छ का रण नमकीन दलदली क्षेत्र है, जो अरब सागर की खाड़ियों के संपर्क में है। थार मरुस्थल में लूनी ही एकमात्र प्रमुख नदी है।

तटीय मैदानों को दो भागों में बाँटा जाता है। पश्चिमी तट को कन्याकुमारी के उत्तर में मालाबार तट (केरल), कर्नाटक तट और कोंकण तट (महाराष्ट्र-गोवा) में विभाजित किया गया है। पूर्वी तट को उत्तर में उत्कल तट (ओडिशा) और दक्षिण में कोरोमंडल तट (तमिलनाडु) कहा जाता है। पूर्वी तट पर डेल्टा विकसित हुए हैं, जबकि पश्चिमी तट पर लैगून एवं एस्चुअरी पाए जाते हैं। पश्चिमी तट पर केरल के लैगून (कयाल) जल परिवहन के लिए प्रसिद्ध हैं।

भारत के द्वीप समूहों में बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (572 द्वीप) तथा अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप द्वीप समूह प्रमुख हैं। अंडमान-निकोबार द्वीप प्रवाल भित्तियों और सक्रिय ज्वालामुखी (बैरन द्वीप) के लिए जाने जाते हैं। लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है और यहाँ के अधिकांश द्वीप प्रवाल द्वीप हैं। बैरन द्वीप दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

हिमालय श्रेणी स्थिति औसत ऊँचाई
हिमाद्रि (महान हिमालय) सबसे उत्तर लगभग 6,100 मीटर
हिमाचल (मध्य हिमालय) मध्य 3,700 - 4,500 मीटर
शिवालिक (बाह्य हिमालय) सबसे दक्षिण 900 - 1,200 मीटर

तालिका 2

चोटी/स्थल ऊँचाई/स्थान
माउंट एवरेस्ट 8,848.86 मीटर, नेपाल
कंचनजंगा 8,586 मीटर, सिक्किम (भारत की सबसे ऊँची)
नंदा देवी 7,817 मीटर, उत्तराखंड
गुरु शिखर 1,722 मीटर, अरावली (माउंट आबू)
अनामुडी 2,695 मीटर, पश्चिमी घाट
धूपगढ़ 1,350 मीटर, सतपुड़ा

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[भारत की भौतिक विशेषताएँ] --> B[हिमालय]
    A --> C[प्रायद्वीपीय पठार]
    A --> D[उत्तरी मैदान]
    A --> E[मरुस्थल तट द्वीप]
    B --> F[हिमाद्रि हिमाचल शिवालिक]
    B --> G[कंचनजंगा सबसे ऊँची]
    C --> H[अरावली सबसे प्राचीन]
    C --> I[पश्चिमी घाट पूर्वी घाट]
    D --> J[सिंधु गंगा ब्रह्मपुत्र का मैदान]
    E --> K[थार मरुस्थल]
    E --> L[अंडमान लक्षद्वीप]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

हिमालय की तीन श्रेणियाँ हिमाद्रि (महान हिमालय) सबसे उत्तरी और सबसे ऊँची श्रेणी, लगभग 6100 मीटर हिमाचल (मध्य हिमालय) घाटियाँ जैसे कश्मीर कुल्लू कांगड़ा शिवालिक (बाह्य हिमालय) सबसे दक्षिणी नवीनतम श्रेणी 900-1200 मीटर स्वर्ण नियम: हिमालय को दक्षिण से उत्तर की ओर शिवालिक, हिमाचल, हिमाद्रि याद करें। कंचनजंगा भारत की सबसे ऊँची चोटी है। प्रमुख दर्रे: जोजिला, नाथूला, शिपकी ला, भारहो दर्रों के नाम परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं

प्रायद्वीपीय पठार का ढाँचा अरावली सबसे प्राचीन वलित पर्वत दक्कन का पठार पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के बीच पश्चिमी घाट अनामुडी 2695 मीटर पूर्वी घाट पूर्वी तट के समानांतर स्वर्ण नियम: छोटा नागपुर पठार खनिजों की कटोरी और अरावली सबसे प्राचीन पर्वत है। नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. सबसे ऊँची चोटी: विद्यार्थी अक्सर भारत की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट बता देते हैं, जबकि एवरेस्ट नेपाल में है और भारत की सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा है।
  2. सबसे प्राचीन पर्वत: हिमालय को सबसे प्राचीन पर्वत समझ लिया जाता है, जबकि हिमालय नवीनतम वलित पर्वत है और अरावली सबसे प्राचीन है।
  3. श्रेणियों का क्रम: हिमालय की श्रेणियों का क्रम दक्षिण से उत्तर की ओर उल्टा लिख दिया जाता है; सही क्रम शिवालिक, हिमाचल, हिमाद्रि है।
  4. पश्चिमी घाट की ऊँची चोटी: अनामुडी को सतपुड़ा की चोटी बता दिया जाता है, जबकि अनामुडी पश्चिमी घाट में है।
  5. नदियों की दिशा: प्रायद्वीप की सभी नदियाँ पश्चिम की ओर बहती हैं, यह सोचना गलत है; अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, केवल नर्मदा-ताप्ती पश्चिम की ओर।
  6. द्वीपों की स्थिति: लक्षद्वीप को बंगाल की खाड़ी में बताया जाता है, जबकि लक्षद्वीप अरब सागर में है और अंडमान-निकोबार बंगाल की खाड़ी में।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. हिमालय श्रेणियों का क्रम याद करने हेतु "श-ह-ह" यानी शिवालिक, हिमाचल, हिमाद्रि (दक्षिण से उत्तर) याद रखें।
  2. चोटियों और उनके राज्यों को स्थायी रूप से जोड़कर याद करें, जैसे कंचनजंगा-सिक्किम, नंदा देवी-उत्तराखंड, गुरु शिखर-राजस्थान।
  3. परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख दर्रों की सूची और उनके राज्य नोट करें।
  4. भौतिक विभागों की संख्या 6 (पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तट, द्वीप) याद रखें।
  5. ऊँचाई के आंकड़ों को बराबर करते समय इकाइयों (मीटर/फीट) पर विशेष ध्यान दें।
  6. घाटों की स्थिति के प्रश्न में उत्तर से दक्षिण तक के तटीय नामों (कोंकण, कर्नाटक, मालाबार) का क्रम याद रखें।

10. निष्कर्ष

भारत की भौतिक विशेषताओं का ज्ञान भूगोल की नींव है, क्योंकि नदियाँ, जलवायु, मिट्टी और कृषि सभी भौतिक संरचना पर निर्भर करती हैं। हिमालय की श्रेणियों और चोटियों तथा प्रायद्वीपीय पठार की श्रेणियों और घाटों का सटीक ज्ञान रेलवे ग्रुप डी में सुनिश्चित अंक दिलाता है। वर्गीकरण और स्थान संबंधी तथ्यों को व्यवस्थित रूप से याद करके तथा बार-बार अभ्यास द्वारा इन्हें आसानी से स्मरण रखा जा सकता है।