विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (भूगोल और राजव्यवस्था)
अध्याय: 21.5 प्राकृतिक संसाधन
विषय-वस्तु: खनिज, वन, जल संसाधन
1. परिचय
प्राकृतिक संसाधन वे तत्व हैं जो प्रकृति द्वारा प्रदान किए जाते हैं और मानव के उपयोग में आते हैं। खनिज, वन और जल भारत के तीन प्रमुख प्राकृतिक संसाधन हैं, जो देश के औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था की नींव हैं। रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में खनिजों के प्रकार, उनके उत्पादक राज्य, वनों के प्रकार और जल संसाधनों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। खनिज संसाधनों की दृष्टि से छोटा नागपुर पठार सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे "भारत का खनिज भंडार" कहा जाता है।
भारत में खनिज संसाधन असमान रूप से वितरित हैं। प्रायद्वीपीय पठार का पूर्वी भाग, विशेषकर झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश, खनिजों से परिपूर्ण है। लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, मैंगनीज और तांबा भारत के प्रमुख धात्विक खनिज हैं, जबकि अभ्रक, चूना पत्थर और डोलोमाइट अधात्विक खनिज हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो मुख्यतः मुंबई हाई, असम और गुजरात में पाए जाते हैं।
वन और जल संसाधन पर्यावरण को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। भारत में वन क्षेत्र देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 21.67 प्रतिशत है (ISFR 2021 के अनुसार)। वन लकड़ी, रबर, औषधि और अन्य वन उपज प्रदान करते हैं तथा मृदा अपरदन को रोकते हैं। जल संसाधन में नदियाँ, झीलें, भूजल और हिमनद शामिल हैं। भारत विश्व के कुल जल संसाधनों का लगभग 4 प्रतिशत धारण करता है, जबकि विश्व की जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत भाग यहाँ निवास करता है। इस अध्याय में इन तीनों संसाधनों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
2. खनिज संसाधन
खनिजों को दो भागों में बाँटा जाता है - धात्विक खनिज (लोहा, तांबा, एल्युमीनियम आदि) और अधात्विक खनिज (अभ्रक, चूना पत्थर आदि)। भारत के प्रमुख खनिज संसाधनों का विवरण निम्नलिखित है:
लौह अयस्क: यह इस्पात उद्योग का मूलभूत कच्चा माल है। भारत के प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र ओडिशा के क्योंझर, सुंदरगढ़, गुडा माली, झारखंड के सिंहभूम और कर्नाटक के बाबा बूदन पहाड़ियाँ हैं। ओडिशा लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
कोयला: यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। झारखंड का धनबाद, बोकारो और झरिया क्षेत्र, छत्तीसगढ़ के कोरबा और मध्य प्रदेश के सिंगरौली प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं। झारखंड कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। कोयले के कठोर ग्रेड को एन्थ्रासाइट कहा जाता है।
बॉक्साइट: यह एल्युमीनियम बनाने का कच्चा माल है। ओडिशा, गुजरात, झारखंड और महाराष्ट्र प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। ओडिशा बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक है।
मैंगनीज: इसका उपयोग इस्पात बनाने में होता है। ओडिशा और मध्य प्रदेश प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
तांबा: मध्य प्रदेश का मलाजखंड क्षेत्र, राजस्थान का खेतड़ी क्षेत्र और झारखंड का सिंहभूम क्षेत्र प्रमुख हैं।
सोना: कर्नाटक का कोलार और हट्टी (गोल्डफील्ड) क्षेत्र प्रमुख है। हट्टी सोना क्षेत्र कर्नाटक में स्थित है।
पेट्रोलियम: मुंबई हाई (अरब सागर), असम के दिग्बोई और नहरकटिया, गुजरात के अंकलेश्वर और कलोल प्रमुख तेल क्षेत्र हैं।
अभ्रक: यह अधात्विक खनिज है। झारखंड का कोडरमा विश्व प्रसिद्ध अभ्रक उत्पादक क्षेत्र है।
भारत में खनिज वितरण की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
छोटा नागपुर पठार: इसे "भारत का रूहर" अर्थात खनिजों की कटोरी कहा जाता है, जो झारखंड में स्थित है।
लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक: ओडिशा।
कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक: झारखंड।
बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक: ओडिशा।
मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक: ओडिशा।
अभ्रक का सबसे बड़ा उत्पादक: झारखंड (कोडरमा)।
3. वन संसाधन
भारत के वन संसाधन विविध जलवायु के कारण विभिन्न प्रकार के हैं। वनों को निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा गया है:
आरक्षित वन (Reserved Forests): ये वन आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण हैं। देश के कुल वन क्षेत्र का लगभग 67 प्रतिशत भाग इसमें आता है। इनमें काटाई प्रतिबंधित होती है।
संरक्षित वन (Protected Forests): देश के कुल वन क्षेत्र का लगभग 27 प्रतिशत भाग इसमें आता है। इनमें कुछ सीमा तक वन उपज की अनुमति होती है।
अवर्गीकृत वन (Unclassified Forests): देश के कुल वन क्षेत्र का लगभग 6 प्रतिशत भाग, जहाँ वनोपज पर स्थानीय लोगों के अधिकार होते हैं।
भारत के वन प्रकार उनके वितरण के आधार पर निम्नलिखित हैं:
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन: अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (पश्चिमी घाट, अंडमान) में पाए जाते हैं। यहाँ आबनूस, महोगनी, रबर जैसे वृक्ष होते हैं।
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन: ये भारत के सबसे विस्तृत वन हैं। सागौन, साल, शीशम प्रमुख वृक्ष हैं। इन्हें "मानसूनी वन" भी कहते हैं।
कंटीले वन: राजस्थान, गुजरात के मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। बबूल, खेजड़ी, बेर प्रमुख वृक्ष हैं।
पर्वतीय वन: हिमालय की ढलानों पर पाए जाते हैं। चीड़, देवदार, स्प्रूस, फर यहाँ उगते हैं।
मैंग्रोव वन: खारे पानी के तटीय क्षेत्रों में, विशेषकर सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) में पाए जाते हैं। ये तटीय कटाव से रक्षा करते हैं।
वन संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा वन संरक्षण अधिनियम (1980), राष्ट्रीय वन नीति (1952, 1988) और चिपको आंदोलन जैसे प्रयास किए गए। राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता से वन संसाधनों का संरक्षण हो रहा है। परीक्षा की दृष्टि से वनों के प्रकार, उनमें पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष और उनके वितरण क्षेत्र को याद रखना आवश्यक है।
4. जल संसाधन
जल संसाधन भारत की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और विद्युत उत्पादन का आधार हैं। भारत के जल संसाधनों के महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
सतही जल: भारत की प्रमुख नदियाँ (गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, गोदावरी) सतही जल के मुख्य स्रोत हैं। भारत का कुल सतही जल संसाधन लगभग 1,869 घन किलोमीटर है।
भूजल: भारत का लगभग 89 प्रतिशत जल उपयोग कृषि में होता है, जिसमें से अधिकांश भूजल से प्राप्त होता है। गंगा-ब्रह्मपुत्र-सिंधु का मैदान भूजल से सर्वाधिक समृद्ध क्षेत्र है।
हिमनद जल: हिमालय के हिमनद (गंगोत्री, सियाचिन) मीठे जल का विशाल भंडार हैं।
जल विद्युत परियोजनाएँ: भाखड़ा नांगल (सतलुज), नागार्जुन सागर (कृष्णा), हीराकुंड (महानदी), टिहरी (भागीरथी) प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएँ हैं।
सिंचाई: भारत में नहरें, नलकूप, तालाब और नल-कूप सिंचाई के प्रमुख साधन हैं।
जल संसाधनों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जाते हैं:
वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग): छतों और खुले स्थानों से वर्षा जल को इकट्ठा करना।
जल संचयन ढांचे: राजस्थान में जोहड़, पंजाब में कुहल, तमिलनाडु में एरी और केरल में सूरंगम जैसे पारंपरिक जल स्रोत।
भूजल पुनर्भरण: तालाबों और बोरवेल के माध्यम से भूमिगत जल स्तर बढ़ाना।
जल कुशल सिंचाई: ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर विधियों से जल की बचत।
नदी जोड़ो परियोजना: अधिशेष जल वाली नदियों को कम जल वाली नदियों से जोड़ना।
जल दिवस: 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है।
भारत में जल की मात्रा असमान रूप से वितरित है। ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन में प्रचुर जल है, जबकि राजस्थान और गुजरात के क्षेत्रों में जल की कमी है। जल प्रदूषण रोकने के लिए नमामि गंगे परियोजना जैसी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। परीक्षा में जल संसाधनों से संबंधित प्रश्नों में सतही जल का वितरण, भूजल उपयोग और जल संरक्षण की विधियों पर प्रश्न आते हैं।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
खनिज
प्रमुख उत्पादक राज्य
प्रमुख क्षेत्र
लौह अयस्क
ओडिशा
क्योंझर, सुंदरगढ़, गुडा माली
कोयला
झारखंड
धनबाद, झरिया, बोकारो
बॉक्साइट
ओडिशा
कोरापुट, कालाहांडी
अभ्रक
झारखंड
कोडरमा
पेट्रोलियम
असम, गुजरात
दिग्बोई, अंकलेश्वर
सोना
कर्नाटक
कोलार, हट्टी
तालिका 2
वन प्रकार
क्षेत्र
प्रमुख वृक्ष
सदाबहार वन
पश्चिमी घाट, अंडमान
महोगनी, आबनूस
पर्णपाती वन
मध्य भारत
सागौन, साल
कंटीले वन
राजस्थान
बबूल, खेजड़ी
पर्वतीय वन
हिमालय
चीड़, देवदार
मैंग्रोव वन
सुंदरबन
सुंदरी, गोरान
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[प्राकृतिक संसाधन] --> B[खनिज]
A --> C[वन]
A --> D[जल]
B --> E[लौह अयस्क कोयला बॉक्साइट]
B --> F[छोटा नागपुर पठार खनिजों की कटोरी]
C --> G[सदाबहार पर्णपाती कंटीले पर्वतीय मैंग्रोव]
C --> H[सुंदरबन मैंग्रोव वन]
D --> I[सतही जल भूजल हिमनद]
D --> J[भाखड़ा टिहरी जल विद्युत]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
कोयला उत्पादक राज्य: कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक छत्तीसगढ़ मान लिया जाता है, जबकि वास्तव में झारखंड कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
लौह अयस्क का क्षेत्र: गुडा माली को कर्नाटक में बताया जाता है, जबकि गुडा माली ओडिशा में स्थित है।
वन का प्रतिशत: भारत का वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का लगभग 21.67 प्रतिशत है, इसे 33 प्रतिशत नहीं समझना चाहिए।
मैंग्रोव वन: मैंग्रोव वनों को केवल केरल में बताया जाता है, जबकि सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) में सबसे अधिक मैंग्रोव वन हैं।
पेट्रोलियम का क्षेत्र: दिग्बोई को गुजरात में बताया जाता है, जबकि दिग्बोई असम में स्थित है।
अभ्रक उत्पादन: अभ्रक के कोडरमा क्षेत्र को मध्य प्रदेश में बताया जाता है, जबकि कोडरमा झारखंड में है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
खनिज और उसके उत्पादक राज्य की जोड़ी को "खनिज-राज्य" के रूप में एक साथ याद करें।
वनों को वृक्ष के साथ याद करें, जैसे सागौन-पर्णपाती, चीड़-पर्वतीय, बबूल-कंटीले, सुंदरी-मैंग्रोव।
जल संसाधन के बांधों को नदी के साथ याद करें: भाखड़ा-सतलुज, टिहरी-भागीरथी, हीराकुंड-महानदी।
छोटा नागपुर पठार के खनिज क्षेत्र (धनबाद, झरिया, बोकारो) के नाम अलग से नोट करें।
वन संरक्षण अधिनियम 1980 और राष्ट्रीय वन नीति 1952/1988 जैसे अधिनियमों की तिथियाँ याद रखें।
10. निष्कर्ष
खनिज, वन और जल भारत के औद्योगिक और कृषि विकास की रीढ़ हैं, इसलिए इनका भौगोलिक वितरण और उत्पादन से संबंधित तथ्य रेलवे ग्रुप डी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्पादक राज्यों, क्षेत्रों और संसाधनों के प्रकारों को तालिकाओं के माध्यम से याद करने से परीक्षा में प्रश्नों को सटीक ढंग से हल किया जा सकता है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उचित प्रबंधन देश की दीर्घकालिक समृद्धि के लिए आवश्यक है, यह समझना भी परीक्षा की दृष्टि से लाभकारी है।