21.6 भारतीय संविधान Notes

21.6 भारतीय संविधान

विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (भूगोल और राजव्यवस्था) अध्याय: 21.6 भारतीय संविधान विषय-वस्तु: संविधान निर्माण, प्रस्तावना

1. परिचय

भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च विधान है, जिसमें सरकार के ढाँचे, नागरिकों के अधिकारों और देश के संचालन के नियमों का विस्तृत उल्लेख है। इसे भारत की संविधान सभा द्वारा बनाया गया था, जिसका गठन 1946 में किया गया था। रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में भारतीय संविधान से संबंधित प्रश्न जैसे कि संविधान सभा, प्रस्तावना, मूल अधिकार, नागरिकता और संवैधानिक निकायों के बारे में नियमित रूप से पूछे जाते हैं। संविधान के ज्ञान के बिना राजव्यवस्था के प्रश्नों को हल करना संभव नहीं है।

संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसकी अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की। इसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया। संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे, जिनमें से 296 सदस्य ब्रिटिश भारत से तथा 93 सदस्य देशी रियासतों से चुने गए थे। संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए मसौदा समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। डॉ. अंबेडकर को भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार (निर्माता) के रूप में जाना जाता है।

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को देश में लागू किया गया। यही कारण है कि 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' और 26 जनवरी को 'गणतंत्र दिवस' मनाया जाता है। मूल रूप से संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं, जो संशोधनों के साथ बढ़कर अब 448 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हो गई हैं। संविधान के विभिन्न प्रावधान विभिन्न देशों से लिए गए हैं, जिनके बारे में आगे चर्चा की जाएगी।

2. संविधान निर्माण और प्रमुख तिथियाँ

संविधान निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ी प्रमुख तिथियाँ और घटनाएँ निम्नलिखित हैं:

संविधान सभा की संरचना और प्रमुख व्यक्तियों का विवरण निम्नलिखित है:

  1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद: संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष।
  2. डॉ. बी.आर. अंबेडकर: मसौदा समिति के अध्यक्ष, संविधान के प्रमुख शिल्पकार।
  3. बी.एन. राव: संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार।
  4. पंडित जवाहरलाल नेहरू: उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले।
  5. सरदार वल्लभभाई पटेल: प्रांतीय संविधान समिति और मौलिक अधिकार समिति के अध्यक्ष।
  6. डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा: संविधान सभा के प्रथम अस्थायी अध्यक्ष।

संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के आधार पर किया गया था। संविधान निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा। संविधान सभा की कुल 11 बैठकें हुईं और मसौदे पर 7,635 संशोधन प्रस्तावों में से लगभग 2,473 संशोधनों पर चर्चा हुई। संविधान निर्माण पर कुल लगभग 64 लाख रुपये व्यय हुए। संविधान को 26 जनवरी 1950 को इसलिए लागू किया गया क्योंकि 1930 में इसी दिन पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया गया था।

3. प्रस्तावना (Preamble)

प्रस्तावना संविधान का परिचय है, जिसमें संविधान के मूल उद्देश्यों और दर्शन का वर्णन किया गया है। प्रस्तावना को संविधान की "आत्मा" कहा जाता है। प्रस्तावना का पूरा पाठ निम्नलिखित है:

"हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"

प्रस्तावना की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. प्रस्तावना के चार मूल शब्द: संप्रभु (प्रभुत्वसंपन्न), समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य।
  2. तीन उद्देश्य: न्याय, स्वतंत्रता, समता।
  3. तीन गारंटी: प्रतिष्ठा (गरिमा), बंधुता, राष्ट्र की एकता और अखंडता।
  4. 42वाँ संशोधन (1976): इसके द्वारा प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
  5. बेरुबाड़ी केस (1960): सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है।

प्रस्तावना में "हम, भारत के लोग" से यह स्पष्ट होता है कि संविधान की सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित है, अर्थात भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द का अर्थ है कि राज्य का कोई धर्म नहीं है और सभी धर्मों को समान संरक्षण प्राप्त है। 'समाजवादी' का अर्थ है कि आर्थिक संसाधनों का समान वितरण और सामाजिक न्याय की प्राप्ति। 'गणराज्य' का अर्थ है कि देश का प्रमुख (राष्ट्रपति) चुना जाता है, न कि वंशानुगत। प्रस्तावना को सर्वोच्च न्यायालय के केशवानंद भारती मामले (1973) में "संविधान की मूल संरचना" का अंग घोषित किया गया था।

4. संविधान के स्रोत और मुख्य विशेषताएँ

भारतीय संविधान विभिन्न देशों के संविधानों से सर्वोत्तम प्रावधान ग्रहण करके बनाया गया है। विभिन्न देशों से लिए गए प्रावधान निम्नलिखित हैं:

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान: 448 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ।
  2. संघीय व्यवस्था: दोहरी सरकार (केंद्र और राज्य), तीन सूचियाँ (संघ, राज्य, समवर्ती)।
  3. संसदीय प्रणाली: राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख, प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख।
  4. एकल नागरिकता: पूरे देश में एक ही नागरिकता।
  5. लोकतंत्रात्मक शासन: 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार।
  6. आपातकालीन प्रावधान: राष्ट्रपति शासन, राष्ट्रीय आपातकाल, वित्तीय आपातकाल।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

तिथि/घटना विवरण
9 दिसंबर 1946 संविधान सभा की पहली बैठक
13 दिसंबर 1946 उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत
29 अगस्त 1947 मसौदा समिति का गठन
26 नवंबर 1949 संविधान अंगीकृत
26 जनवरी 1950 संविधान लागू

तालिका 2

देश भारतीय संविधान में ग्रहण किया गया प्रावधान
ब्रिटेन संसदीय प्रणाली, विधि का शासन
अमेरिका मौलिक अधिकार, महाभियोग
आयरलैंड नीति निर्देशक तत्व
कनाडा संघीय व्यवस्था
ऑस्ट्रेलिया समवर्ती सूची
दक्षिण अफ्रीका संविधान संशोधन प्रक्रिया

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[भारतीय संविधान] --> B[संविधान सभा]
    A --> C[प्रस्तावना]
    A --> D[स्रोत]
    A --> E[मुख्य विशेषताएँ]
    B --> F[डॉ. राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष]
    B --> G[डॉ. अंबेडकर मसौदा समिति]
    C --> H[न्याय स्वतंत्रता समता बंधुता]
    C --> I[42वें संशोधन से जुड़े शब्द]
    D --> J[ब्रिटेन अमेरिका आयरलैंड]
    E --> K[448 अनुच्छेद 12 अनुसूचियाँ]
    E --> L[संसदीय प्रणाली]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

संविधान निर्माण की समयरेखा 9 दिसंबर 1946 पहली बैठक सच्चिदानंद सिन्हा 29 अगस्त 1947 मसौदा समिति अंबेडकर अध्यक्ष 26 नवंबर 1949 अंगीकरण संविधान दिवस 26 जनवरी 1950 संविधान लागू गणतंत्र दिवस राजेंद्र प्रसाद - स्थायी अध्यक्ष | नेहरू - उद्देश्य प्रस्ताव बी.एन. राव - संवैधानिक सलाहकार स्वर्ण नियम: संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। डॉ. अंबेडकर को संविधान का निर्माता माना जाता है।

प्रस्तावना के प्रमुख तत्व न्याय सामाजिक आर्थिक राजनीतिक स्वतंत्रता विचार और अभिव्यक्ति विश्वास और धर्म उपासना की स्वतंत्रता समता प्रतिष्ठा की समता अवसर की समता बंधुता व्यक्ति की गरिमा राष्ट्र की एकता अखंडता स्वर्ण नियम: 42वें संशोधन 1976 ने प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े। प्रस्तावना संविधान की आत्मा है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. अंगीकरण और लागू करने की तिथि: 26 नवंबर 1949 (अंगीकरण) और 26 जनवरी 1950 (लागू) को परस्पर बदल दिया जाता है।
  2. संविधान के अध्यक्ष: डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा का अध्यक्ष बता दिया जाता है, जबकि वे मसौदा समिति के अध्यक्ष थे; संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
  3. संविधान सभा का गठन: संविधान सभा का गठन 1946 के कैबिनेट मिशन के आधार पर हुआ था, न कि 1947 में।
  4. प्रस्तावना में जुड़े शब्द: 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द मूल संविधान में था, यह सोचना गलत है; इसे 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
  5. स्रोतों की पहचान: 'नीति निर्देशक तत्व' को अमेरिका से लिया गया बताया जाता है, जबकि यह आयरलैंड से लिया गया है।
  6. अनुच्छेदों की संख्या: मूल संविधान के 395 अनुच्छेद को वर्तमान 448 अनुच्छेद समझ लिया जाता है; दोनों अलग हैं।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तिथियों की सूची बनाकर याद करें: 9 दिसंबर 1946 (पहली बैठक), 26 नवंबर 1949 (अंगीकरण), 26 जनवरी 1950 (लागू)।
  2. प्रस्तावना के चार शब्द (संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य) और उनके अर्थ स्पष्ट रखें।
  3. विभिन्न देशों से लिए गए प्रावधानों की जोड़ी को तालिका में याद करें।
  4. संविधान सभा के अध्यक्ष (राजेंद्र प्रसाद) और मसौदा समिति के अध्यक्ष (अंबेडकर) के बीच भेद याद रखें।
  5. 42वें संशोधन से जुड़े शब्दों (समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, अखंडता) को विशेष रूप से याद करें।
  6. संविधान के 25 भाग, 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियों की वर्तमान संख्या का पुनरावलोकन करें।

10. निष्कर्ष

भारतीय संविधान देश की राजनीतिक व्यवस्था की नींव है, जिसका निर्माण लंबी प्रक्रिया के बाद 26 जनवरी 1950 को पूर्ण हुआ। प्रस्तावना संविधान के दर्शन को स्पष्ट करती है, जबकि विभिन्न देशों से लिए गए प्रावधान इसकी व्यापकता को दर्शाते हैं। रेलवे ग्रुप डी के लिए तिथियाँ, प्रमुख व्यक्ति, प्रस्तावना के शब्द और संविधान के स्रोत याद रखना अत्यंत आवश्यक है। व्यवस्थित पुनरावृत्ति के माध्यम से इन तथ्यों में महारत प्राप्त की जा सकती है।