विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (भूगोल और राजव्यवस्था)
अध्याय: 21.8 संसद और सरकार
विषय-वस्तु: संसद, सरकार के अंग
1. परिचय
भारतीय संसद देश की सर्वोच्च विधायिका है, जो कानून बनाने का कार्य करती है। संविधान के अनुच्छेद 79 में कहा गया है कि भारतीय संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा तीन अंग शामिल हैं। रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में संसद की संरचना, सदस्यों की संख्या, अध्यक्ष (स्पीकर), प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और सरकार के विभिन्न अंगों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। संसद के संबंध में अनुच्छेद 79 से 122 तक के प्रावधान महत्वपूर्ण हैं।
भारत में संसदीय प्रणाली अपनाई गई है, जिसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। प्रधानमंत्री कार्यपालिका का प्रमुख होता है, जो लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है। राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद में निहित होती है। संसद के अधीन कानून निर्माण, बजट अनुमोदन और सरकार की निगरानी का कार्य होता है। सरकार के तीन मुख्य अंग - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
सरकार के अंगों के बीच संतुलन लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या करती है तथा विवादों का निपटारा करती है। भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के कार्यों का विवरण संविधान के भाग पाँच में दिया गया है। इस अध्याय में संसद की संरचना, सदस्यों की संख्या, प्रमुख अधिकारी तथा सरकार के विभिन्न अंगों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
2. संसद की संरचना
भारतीय संसद में तीन अंग होते हैं - राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा। संसद की संरचना निम्नलिखित है:
लोकसभा (निचला सदन): यह प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुना जाता है। संविधान के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 है, जिसमें 530 सदस्य राज्यों से, 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से और 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं। 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के आरक्षण को समाप्त कर दिया गया, इसलिए वर्तमान में निर्वाचित सदस्यों की संख्या 543 है।
राज्यसभा (उच्च सदन): यह स्थायी सदन है, जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें 238 सदस्य राज्यों से अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है, जिसमें प्रति दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य निवृत्त होते हैं।
राष्ट्रपति: संसद का तीसरा अंग होने के नाते राष्ट्रपति दोनों सदनों की बैठकें बुलाता है, सत्रावसान करता है और विधेयकों को स्वीकृति देता है।
संसद की कार्यवाही के प्रमुख अधिकारी निम्नलिखित हैं:
लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर): लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है। वह सदस्यों में से चुना जाता है और मतदान की स्थिति में निर्णायक मत देता है। प्रथम लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे।
उपाध्यक्ष: लोकसभा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाही की अध्यक्षता करता है।
राज्यसभा का सभापति: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
राज्यसभा का उपसभापति: सभापति की अनुपस्थिति में कार्यवाही संचालित करता है।
लोकसभा और राज्यसभा की सदस्य संख्या के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 है, वर्तमान में निर्वाचित 543 सदस्य।
राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, वर्तमान में अधिकतम 245 सदस्य।
राज्यसभा के 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत होते हैं।
लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष है, जबकि राज्यसभा का कार्यकाल 6 वर्ष (सदस्य) है।
3. सरकार के अंग और संसदीय प्रक्रिया
भारतीय सरकार में तीन अंग होते हैं, जिनके बीच शक्तियों का विभाजन होता है:
विधायिका (Legislature): कानून बनाने वाला अंग। संसद (केंद्र स्तर पर) और विधानसभा (राज्य स्तर पर) इसके उदाहरण हैं। यह कानून बनाने के साथ-साथ बजट स्वीकृत करती है।
कार्यपालिका (Executive): कानूनों को लागू करने वाला अंग। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद इसके अंग हैं। इसका कार्य प्रशासन चलाना है।
न्यायपालिका (Judiciary): कानूनों की व्याख्या और विवादों के निपटारे का अंग। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय इसके उदाहरण हैं।
संसदीय प्रक्रिया में विधेयक के पारित होने के चरण निम्नलिखित हैं:
प्रथम वाचन: विधेयक का प्रस्तुतीकरण और चर्चा।
द्वितीय वाचन: विधेयक की धाराओं की विस्तृत चर्चा और संशोधन।
तृतीय वाचन: विधेयक पर अंतिम मतदान।
दूसरे सदन में पारित: दूसरे सदन में विधेयक की मंजूरी।
राष्ट्रपति की स्वीकृति: राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से विधेयक कानून बनता है।
भारत में संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के गठन के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
राष्ट्रपति की नियुक्ति: राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है, जिसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त होता है।
मंत्रिपरिषद: प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
सामूहिक उत्तरदायित्व: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।
व्यक्तिगत उत्तरदायित्व: प्रत्येक मंत्री राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी है।
4. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री
भारतीय संविधान के अनुसार इन पदों की योग्यताएँ, चुनाव और कार्यकाल निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रपति (अनुच्छेद 52-62): वह देश का प्रथम नागरिक और संवैधानिक प्रमुख है। उसका कार्यकाल 5 वर्ष है। वह निर्वाचक मंडल द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। न्यूनतम आयु 35 वर्ष होती है। वह महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63-71): वह राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। उसका कार्यकाल 5 वर्ष है और न्यूनतम आयु 35 वर्ष है। वह संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा चुना जाता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में वह राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करता है।
प्रधानमंत्री (अनुच्छेद 74-75): वह सरकार का वास्तविक प्रमुख है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उसे लोकसभा का सदस्य या उसकी विश्वास प्राप्त व्यक्ति होना चाहिए। वह मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है और सरकार का नेतृत्व करता है।
राष्ट्रपति और सरकार के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रपति सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ करता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, राज्यपाल, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश।
राष्ट्रपति संसद के समक्ष वर्ष में दो बार अभिभाषण देता है - पहला सत्र और वित्त विधेयक प्रस्तुति के समय।
राष्ट्रपति के पास क्षमादान (पार्डन), परिहार, निलंबन की शक्तियाँ हैं।
राष्ट्रपति सभी विधेयकों को तीन स्थितियों में स्वीकृति दे सकता है - स्वीकृति, रोक या पुनर्विचार हेतु लौटाना।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
संसद अंग
सदस्य संख्या
कार्यकाल
लोकसभा
अधिकतम 552 (वर्तमान 543 निर्वाचित)
5 वर्ष
राज्यसभा
अधिकतम 250 (वर्तमान 245)
स्थायी, सदस्य 6 वर्ष
राष्ट्रपति
1
5 वर्ष
उपराष्ट्रपति
1
5 वर्ष
तालिका 2
सरकार का अंग
कार्य
प्रमुख पद
विधायिका
कानून निर्माण
संसद, विधानसभा
कार्यपालिका
कानून लागू करना
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री
न्यायपालिका
व्याख्या एवं विवाद निपटारा
सर्वोच्च न्यायालय
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[संसद और सरकार] --> B[संसद]
A --> C[सरकार के अंग]
A --> D[प्रमुख पद]
B --> E[राष्ट्रपति लोकसभा राज्यसभा]
C --> F[विधायिका कार्यपालिका न्यायपालिका]
D --> G[राष्ट्रपति प्रधानमंत्री उपराष्ट्रपति]
E --> H[लोकसभा 543 राज्यसभा 245]
F --> I[कानून निर्माण लागू व्याख्या]
G --> J[5 वर्ष कार्यकाल]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
लोकसभा की संख्या: लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 है, वर्तमान में 543 निर्वाचित हैं; इन्हें परस्पर बदलना गलत है।
राज्यसभा के मनोनीत सदस्य: राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्यों को लोकसभा का मनोनीत सदस्य बता दिया जाता है।
स्पीकर का चुनाव: लोकसभा अध्यक्ष को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त बताया जाता है, जबकि उसका चुनाव लोकसभा के सदस्य स्वयं करते हैं।
राष्ट्रपति की आयु: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की न्यूनतम आयु 35 वर्ष है, इसे 25 वर्ष (लोकसभा) समझना गलत है।
उपराष्ट्रपति का पद: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है, न कि लोकसभा का।
संसद के अंग: संसद में केवल दो सदन (लोकसभा और राज्यसभा) मान लिए जाते हैं, जबकि राष्ट्रपति भी संसद का अंग है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
लोकसभा (543 निर्वाचित), राज्यसभा (245), राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (5 वर्ष) की संख्याएँ हमेशा याद रखें।
संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा सूत्र को ध्यान में रखें।
लोकसभा स्पीकर, राज्यसभा सभापति (उपराष्ट्रपति) के बीच अंतर स्पष्ट करें।
विधेयक पारित होने के चरणों (प्रथम, द्वितीय, तृतीय वाचन) को क्रम से याद करें।
राष्ट्रपति की न्यूनतम आयु 35 वर्ष और लोकसभा सदस्य की 25 वर्ष की आयु के भेद को याद रखें।
सरकार के तीन अंगों और उनके कार्यों की जोड़ी बनाकर याद करें।
10. निष्कर्ष
संसद और सरकार भारतीय लोकतंत्र की मुख्य संस्थाएँ हैं, जो कानून निर्माण और शासन संचालन का कार्य करती हैं। लोकसभा और राज्यसभा की संरचना, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्य तथा सरकार के तीन अंगों का ज्ञान रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में निश्चित अंक दिलाता है। इन तथ्यों को तालिकाओं और संक्षिप्त नोट्स के माध्यम से याद करके परीक्षा में सटीक उत्तर दिया जा सकता है।