विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (इतिहास और संस्कृति) अध्याय: 20.6 कला और साहित्य विषय-वस्तु: कला, साहित्यिक रचनाएँ
भारतीय कला और साहित्य की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। सिंधु घाटी की मुहरों और मूर्तियों से लेकर वैदिक साहित्य, संस्कृत महाकाव्य, भक्ति काव्य और आधुनिक हिंदी साहित्य तक यह विरासत निरंतर समृद्ध होती रही है। कला में चित्रकला, मूर्तिकला, मंदिर निर्माण, लघु चित्र, लोक कला और सजावटी कला शामिल हैं। साहित्य में काव्य, गद्य, नाटक, कथा, उपन्यास और निबंध की विभिन्न विधाएँ विकसित हुईं। इनके माध्यम से भारत ने विश्व को रामायण, महाभारत, पंचतंत्र, कामसूत्र और बौद्ध जातक जैसी अमूल्य रचनाएँ दीं।
रेलवे ग्रुप D की सामान्य जागरूकता परीक्षा में कला और साहित्य से जुड़े प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। इनमें प्रसिद्ध ग्रंथों के रचयिता, साहित्यकारों के नाम, चित्रकला की शैलियाँ, मूर्तिकला के उदाहरण, साहित्यिक पुरस्कार और प्रसिद्ध रचनाएँ शामिल हैं। जैसे- 'गीतांजलि' किसकी रचना है, या अजंता की गुफाओं का संबंध किस कला से है। इन प्रश्नों के सटीक उत्तर के लिए रचयिता-रचना और शैली-काल की जोड़ियों की जानकारी आवश्यक है।
इस अध्याय में हम भारतीय कला के प्रमुख रूपों- चित्रकला, मूर्तिकला और स्थापत्य की शैलियों तथा साहित्य की प्रमुख रचनाओं का अध्ययन करेंगे। संस्कृत, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के महत्वपूर्ण ग्रंथों, उनके रचयिताओं और साहित्यिक पुरस्कारों की तालिकाओं, माइंड मैप और परीक्षा युक्तियों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय चित्रकला का प्रारंभ प्रागैतिहासिक काल की गुफा चित्रकलाओं से माना जाता है, जिनमें भीमबेटका (मध्य प्रदेश) की रॉक पेंटिंग्स विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। बौद्ध काल में अजंता (महाराष्ट्र) की गुफाओं में बनाई गई भित्ति चित्रकला विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें जातक कथाओं और बुद्ध के जीवन के दृश्य चित्रित हैं। एलोरा की गुफाओं में भी मूर्तियां और चित्र मिलते हैं। मध्यकाल में 'लघु चित्रकला' (मिनिएचर पेंटिंग) का विकास हुआ जिसमें मुगल और राजस्थानी (राजपूत) शैलियाँ प्रमुख थीं। मुगल शैली में बाबरनामा, हमजानामा जैसे चित्र-ग्रंथ तैयार हुए।
राजस्थानी चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ मेवाड़, बूंदी, कोटा, जयपुर, किशनगढ़ और बीकानेर की हैं। इनमें रागमाला, कृष्ण लीला और बारहमासा के चित्र बनाए गए। पहाड़ी चित्रकला की बशोली और कांगड़ा शैलियाँ प्रसिद्ध हैं, जिनमें राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंग चित्रित किए गए। दक्षिण भारत में तंजौर (तंजावुर) की चित्रकला अपनी सोने की पत्ती और रत्नों के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है। पट्टचित्र (ओडिशा), मधुबनी (बिहार), वरली (महाराष्ट्र-गुजरात), कलमकारी (आंध्र प्रदेश) और फड़ (राजस्थान) लोक चित्रकला की प्रमुख विधाएँ हैं।
त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - अजंता की 29 गुफाएँ बौद्ध चित्रकला और मूर्तिकला का केंद्र हैं। - एलोरा में कैलाश मंदिर (राष्ट्रकूट) एक विशाल एकाश्म शैलकृत मंदिर है। - 'भीमबेटका' यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और इसे 'भारत का भीमबेटका' कहा जाता है। - मुगल चित्रकला के संरक्षक- हुमायूं, अकबर, जहांगीर; जहांगीर के काल में चित्रकला शिखर पर थी। - 'फड़' चित्रकला राजस्थान की पारंपरिक स्क्रॉल पेंटिंग है। - पट्टचित्र ओडिशा की चित्रकला शैली है जो कपड़े पर बनाई जाती है। - मधुबनी चित्रकला बिहार के मिथिला क्षेत्र की लोक कला है।
भारतीय मूर्तिकला में सिंधु घाटी की मुहरें, पुरोहित-राजा की प्रतिमा और नृत्य करती हुई कांस्य प्रतिमा (डांसिंग गर्ल) सबसे प्राचीन हैं। मौर्य काल में अशोक के स्तंभों पर बनी मूर्तियाँ और सारनाथ का सिंह स्तंभ मूर्तिकला का उत्कृष्ट नमूना है। कुषाण काल में गांधार (हिंदू-यूनानी) और मथुरा शैली की बुद्ध मूर्तियाँ बनीं। गांधार शैली पर यूनानी प्रभाव स्पष्ट था। गुप्त काल को भारतीय मूर्तिकला का स्वर्ण युग कहा जाता है और इसी काल में बुद्ध की सुंदर प्रतिमाएँ बनाई गईं। सारनाथ में बुद्ध की 'धर्मचक्र प्रवर्तन' प्रतिमा गुप्त काल की है।
स्थापत्य कला में मंदिरों की तीन प्रमुख शैलियाँ विकसित हुईं- नागर शैली (उत्तर भारत, शिखर युक्त, जैसे खजुराहो और कोणार्क), द्रविड़ शैली (दक्षिण भारत, विमान और गोपुरम युक्त, जैसे बृहदेश्वर मंदिर और मीनाक्षी मंदिर) और वेसर शैली (नागर और द्रविड़ का मिश्रण, जैसे हम्पी)। खजुराहो (मध्य प्रदेश) के कंदरिया महादेव मंदिर को चंदेल राजाओं ने बनवाया। कोणार्क (ओडिशा) का सूर्य मंदिर गंग वंश द्वारा बनवाया गया रथाकार मंदिर है। मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) के 'पंच रथ' पल्लव काल की वास्तुकला का नमूना हैं। तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर राजराज प्रथम (चोल) द्वारा बनवाया गया।
त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - गांधार कला का केंद्र- वर्तमान अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र (तक्षशिला, पेशावर)। - सारनाथ का सिंह स्तंभ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। - खजुराहो- चंदेल वंश; कोणार्क सूर्य मंदिर- गंग वंश। - बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर)- चोल राजा राजराज प्रथम। - 'पंच रथ' मामल्लपुरम में पल्लव काल का है। - मीनाक्षी मंदिर मदुरै में स्थित है। - रामेश्वरम मंदिर की गलियारे विश्व की सबसे लंबी मंदिर गलियारों में मानी जाती हैं।
भारतीय साहित्य की सबसे प्राचीन रचनाएँ वेद (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद) हैं। इसके बाद ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक और उपनिषद आए। महाकाव्य 'रामायण' की रचना वाल्मीकि ने की और 'महाभारत' वेद व्यास की कृति है। पतंजलि का 'महाभाष्य' व्याकरण का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। कालिदास ने 'अभिज्ञानशाकुंतलम', 'मेघदूत', 'रघुवंश' और 'कुमारसंभव' की रचना की। बाणभट्ट ने 'हर्षचरित' और 'कादंबरी' लिखी। विशाखदत्त का 'मुद्राराक्षस' राजनीतिक नाटक है। दंडी का 'दशकुमारचरित' और शूद्रक का 'मृच्छकटिकम' (गाड़ीवान का नाटक) प्रसिद्ध हैं। जैन साहित्य में 'कल्पसूत्र' और बौद्ध साहित्य में 'जातक कथाएँ' मिलती हैं।
हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकाल (कन्नौज के राजा जयचंद के कवि चंदबरदाई- पृथ्वीराज रासो), भक्तिकाल (कबीर, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई), रीतिकाल (बिहारी, केशव) और आधुनिक काल (भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा) में बांटा जाता है। प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान', 'गबन', 'कर्मभूमि' और कहानी 'ईदगाह' हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर को 'गीतांजलि' के लिए 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - वाल्मीकि को 'आदिकवि' कहा जाता है और रामायण को 'आदिकाव्य'। - कालिदास को 'भारत का शेक्सपियर' कहा जाता है। - 'हर्षचरित' बाणभट्ट की रचना है जो हर्षवर्धन के जीवन पर आधारित है। - 'पृथ्वीराज रासो' चंदबरदाई की रचना है। - प्रेमचंद को 'कथा सम्राट' कहा जाता है। - 'कादंबरी' बाणभट्ट का गद्य काव्य है। - 1913 में रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार मिला; वह इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे।
| रचना | रचयिता | काल/भाषा |
|---|---|---|
| रामायण | वाल्मीकि | संस्कृत |
| महाभारत | वेद व्यास | संस्कृत |
| अभिज्ञानशाकुंतलम | कालिदास | संस्कृत |
| हर्षचरित | बाणभट्ट | संस्कृत |
| पृथ्वीराज रासो | चंदबरदाई | हिंदी (आदिकाल) |
| रामचरितमानस | तुलसीदास | अवधी |
| गोदान | प्रेमचंद | हिंदी |
| कला रूप | स्थान | वंश/शैली |
|---|---|---|
| अजंता गुफाएँ | महाराष्ट्र | बौद्ध भित्ति चित्र |
| खजुराहो मंदिर | मध्य प्रदेश | चंदेल वंश |
| कोणार्क सूर्य मंदिर | ओडिशा | गंग वंश |
| बृहदेश्वर मंदिर | तंजावुर | चोल वंश |
| मामल्लपुरम | तमिलनाडु | पल्लव वंश |
| कैलाश मंदिर | एलोरा | राष्ट्रकूट वंश |
flowchart TD
A[कला और साहित्य] --> B[चित्रकला]
A --> C[मूर्तिकला और स्थापत्य]
A --> D[साहित्य]
B --> B1[अजंता भित्ति चित्र]
B --> B2[मुगल लघु चित्र]
B --> B3[राजस्थानी शैली]
B --> B4[पहाड़ी शैली]
C --> C1[गांधार शैली]
C --> C2[नागर शैली]
C --> C3[द्रविड़ शैली]
D --> D1[वेद और महाकाव्य]
D --> D2[कालिदास की रचनाएँ]
D --> D3[हिंदी साहित्य]
C2 --> E1[खजुराहो]
C3 --> E2[बृहदेश्वर]
D3 --> E3[प्रेमचंद]
B1 --> E4[बौद्ध जातक कथाएँ]
भारतीय कला और साहित्य का अध्ययन रेलवे ग्रुप D की परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है। चित्रकला की शैलियाँ, मूर्तिकला के स्मारक, मंदिरों की वास्तुकला और प्रसिद्ध साहित्यिक रचनाएँ परीक्षा के नियमित प्रश्न-क्षेत्र हैं। रचयिता-रचना और कला-स्थान की जोड़ियों को तालिका और माइंड मैप के माध्यम से व्यवस्थित करने से आप इन प्रश्नों में आसानी से अंक प्राप्त कर सकते हैं। भारतीय कला और साहित्य की इस समृद्ध विरासत की समझ आपको परीक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय गौरव का अनुभव भी कराएगी।