विषय: रेलवे ग्रुप D – गणित (बीजगणित) अध्याय: 3.4 मूलभूत समीकरण विषय-वस्तु: द्विघात एवं घात समीकरण का परिचय
मूलभूत समीकरणों में मुख्यतः द्विघात समीकरण (Quadratic Equation) तथा घात समीकरण (Exponential Equation) का अध्ययन किया जाता है। द्विघात समीकरण वह समीकरण है जिसमें चर की अधिकतम घात 2 होती है, जैसे x^2 + 5x + 6 = 0। इसके दो मूल (Roots) होते हैं। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में द्विघात समीकरणों के प्रश्न मुख्यतः गुणनखंड विधि तथा श्रीधराचार्य सूत्र पर आधारित होते हैं। इसके अतिरिक्त घात समीकरण जैसे 2^x = 8 या 3^(x+1) = 27 में घातांकों के गुणों का उपयोग करके x का मान ज्ञात किया जाता है।
द्विघात समीकरण का सामान्य रूप ax^2 + bx + c = 0 है, जहाँ a, b, c अचर हैं और a शून्य नहीं है। इस समीकरण के दो मूल होते हैं जिन्हें α और β से प्रदर्शित किया जाता है। मूलों का योग -b/a तथा गुणनफल c/a होता है। यह संबंध मूलों पर आधारित प्रश्नों में बहुत उपयोगी है। द्विघात समीकरण का विविक्तकर (Discriminant) D = b^2 - 4ac होता है, जिसके माध्यम से यह जाना जाता है कि मूल वास्तविक हैं या नहीं।
इस अध्याय में हम द्विघात समीकरण को गुणनखंड विधि और सूत्र विधि से हल करना, मूलों के योग एवं गुणनफल, विविक्तकर का महत्व तथा घातांक समीकरणों को हल करने की विधि सीखेंगे। घातांक समीकरणों में आधार को समान करने का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण है: यदि a^m = a^n हो तो m = n होता है।
द्विघात समीकरण ax^2 + bx + c = 0 को गुणनखंड विधि से हल करने के लिए मध्य पद को दो ऐसे भागों में विभाजित किया जाता है जिनका योग bx और गुणनफल ac हो। तब समान गुणनखंड निकालकर प्रत्येक गुणनखंड को शून्य के बराबर रखकर मूल ज्ञात किए जाते हैं।
हल किया गया उदाहरण 1: x^2 + 5x + 6 = 0 को हल कीजिए।
x^2 + 2x + 3x + 6 = 0x(x + 2) + 3(x + 2) = 0(x + 2)(x + 3) = 0x = -2 या x = -3। मूल = -2, -3।हल किया गया उदाहरण 2: x^2 - 7x + 12 = 0 को हल कीजिए।
(x - 3)(x - 4) = 0, अतः x = 3 या x = 4।हल किया गया उदाहरण 3: x^2 - 9 = 0 को हल कीजिए।
x^2 - 3^2 = 0, अतः (x - 3)(x + 3) = 0।हल किया गया उदाहरण 4: 2x^2 - 8x = 0 को हल कीजिए।
2x(x - 4) = 0, अतः 2x = 0 या x - 4 = 0।हल किया गया उदाहरण 5: x^2 - 6x + 9 = 0 को हल कीजिए।
(x - 3)^2 = 0, अतः x = 3 (दो समान मूल)।जब द्विघात समीकरण गुणनखंडों में न बंटे, तब श्रीधराचार्य सूत्र का उपयोग होता है। ax^2 + bx + c = 0 के मूल:
x = [-b ± √(b^2 - 4ac)] / (2a)
यहाँ b^2 - 4ac को विविक्तकर (Discriminant) कहते हैं। यदि विविक्तकर धनात्मक हो तो मूल वास्तविक एवं असमान, शून्य हो तो वास्तविक एवं समान, तथा ऋणात्मक हो तो मूल काल्पनिक (वास्तविक नहीं) होते हैं। इसके अतिरिक्त, द्विघात समीकरण के मूलों α और β के लिए α + β = -b/a तथा αβ = c/a होता है।
हल किया गया उदाहरण 6: x^2 - 5x + 6 = 0 के मूलों का योग एवं गुणनफल ज्ञात कीजिए।
-b/a = 5, गुणनफल = c/a = 6।हल किया गया उदाहरण 7: 2x^2 - 4x + 2 = 0 का विविक्तकर ज्ञात कीजिए।
D = b^2 - 4ac = (-4)^2 - 4(2)(2) = 16 - 16 = 0।हल किया गया उदाहरण 8: सूत्र से x^2 + 2x - 8 = 0 को हल कीजिए।
D = 4 - 4(1)(-8) = 4 + 32 = 36।x = [-2 ± √36] / 2 = [-2 ± 6] / 2x = 2 या x = -4।हल किया गया उदाहरण 9: ऐसा द्विघात समीकरण ज्ञात कीजिए जिसके मूलों का योग 7 तथा गुणनफल 12 हो।
x^2 - (योग)x + (गुणनफल) = 0x^2 - 7x + 12 = 0।घात समीकरणों में चर घातांक के रूप में होता है, जैसे 2^x = 32 या 3^(x+1) = 81। इन्हें हल करने के लिए दोनों पक्षों का आधार समान करना आवश्यक है, क्योंकि a^m = a^n होने पर m = n होता है। घातांकों के प्रमुख नियम: a^m × a^n = a^(m+n), a^m ÷ a^n = a^(m-n), (a^m)^n = a^(mn), a^0 = 1 तथा a^(-m) = 1/a^m।
हल किया गया उदाहरण 10: 2^x = 32 में x का मान ज्ञात कीजिए।
32 = 2^5, अतः 2^x = 2^5।x = 5।हल किया गया उदाहरण 11: 3^(x+1) = 81 में x का मान ज्ञात कीजिए।
81 = 3^4, अतः 3^(x+1) = 3^4।x + 1 = 4, अतः x = 3।हल किया गया उदाहरण 12: 5^(2x) = 625 में x का मान ज्ञात कीजिए।
625 = 5^4, अतः 2x = 4, x = 2।हल किया गया उदाहरण 13: 2^(x+3) = 64 में x का मान ज्ञात कीजिए।
64 = 2^6, अतः x + 3 = 6, x = 3।हल किया गया उदाहरण 14: (3^2)^x = 3^8 में x का मान ज्ञात कीजिए।
3^(2x) = 3^8, अतः 2x = 8, x = 4।| संबंध | सूत्र | उदाहरण x^2 - 5x + 6 = 0 |
|---|---|---|
| सामान्य रूप | ax^2 + bx + c = 0 | x^2 - 5x + 6 = 0 |
| मूलों का सूत्र | x = [-b ± √(b^2 - 4ac)]/(2a) | x = 2, 3 |
| मूलों का योग | -b/a | 5 |
| मूलों का गुणनफल | c/a | 6 |
| विविक्तकर | b^2 - 4ac | 25 - 24 = 1 |
| नियम | सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|
| गुणा | a^m × a^n = a^(m+n) | 2^3 × 2^4 = 2^7 |
| भाग | a^m ÷ a^n = a^(m-n) | 3^5 ÷ 3^2 = 3^3 |
| घात की घात | (a^m)^n = a^(mn) | (2^2)^3 = 2^6 |
| शून्य घात | a^0 = 1 | 7^0 = 1 |
| ऋणात्मक घात | a^(-m) = 1/a^m | 2^(-3) = 1/8 |
| आधार समान | a^m = a^n तो m = n | 2^x = 2^5 तो x = 5 |
flowchart TD
A[3.4 मूलभूत समीकरण] --> B[द्विघात समीकरण]
A --> C[घात समीकरण]
B --> B1[ax^2 + bx + c = 0]
B --> B2[गुणनखंड विधि]
B --> B3[श्रीधराचार्य सूत्र]
B --> B4[मूलों का योग -b/a]
B --> B5[गुणनफल c/a]
B --> B6[विविक्तकर b^2 - 4ac]
C --> C1[2^x = 32 के रूप में]
C --> C2[आधार समान करें]
C --> C3[a^m = a^n तो m = n]
C --> C4[घातांकों के नियम]
(x + 2)(x + 3) = 0 से मूल x = 2, x = 3 लिखना, जबकि सही मूल -2 और -3 हैं।b^2 - 4ac के अंतर्गत ac के गुणन को 2b से जोड़ना, सूत्र का शुद्ध रूप x = [-b ± √(b^2 - 4ac)]/(2a) ही है।2^x = 32 में सीधे x = 32 लिखना।a^0 = 1 भूल जाना तथा किसी संख्या की शून्य घात को शून्य मान लेना।b^2 - 4ac में ऋणात्मक c गुणा करने पर जोड़ बनता है।x^2 - (योग)x + (गुणनफल) = 0 सूत्र का उपयोग करें।मूलभूत समीकरणों में द्विघात समीकरण और घात समीकरण की समझ बीजगणित की प्रगति के लिए आवश्यक है। द्विघात समीकरण के मूल गुणनखंड विधि अथवा श्रीधराचार्य सूत्र से ज्ञात किए जाते हैं, जबकि मूलों के योग-गुणनफल और विविक्तकर के सूत्र कई प्रश्नों का शीघ्र उत्तर देते हैं। घात समीकरणों में आधार समान करने का सिद्धांत ही समाधान की कुंजी है। इन विधियों का नियमित अभ्यास रेलवे ग्रुप D परीक्षा में गणित के अंक बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।