विषय: रेलवे ग्रुप D – गणित (ज्यामिति और क्षेत्रमिति) अध्याय: 4.1 रेखाएँ और कोण विषय-वस्तु: कोणों के प्रकार, रेखाओं के गुण, कोण युग्म
ज्यामिति गणित की वह शाखा है जिसमें बिंदु, रेखा, कोण और विभिन्न आकृतियों के गुणों का अध्ययन किया जाता है। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में गणित विषय से लगभग 25 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें से ज्यामिति और क्षेत्रमिति के भाग से 3 से 5 प्रश्न आते हैं। रेखाएँ और कोण ज्यामिति की आधारशिला हैं; इनकी ठोस समझ के बिना त्रिभुज, चतुर्भुज और वृत्त जैसे आगे के अध्यायों को समझना संभव नहीं है। इस अध्याय में हम कोणों के प्रकार, रेखाओं के गुण और कोण युग्मों का विस्तार से अध्ययन करेंगे तथा साथ में हल किए गए उदाहरणों से अवधारणाओं को स्थायी करेंगे।
बिंदु का कोई आयाम नहीं होता; वह केवल एक स्थान निर्धारित करता है। रेखा दोनों ओर अनिश्चित रूप से बढ़ती हुई सीधी आकृति है, जिसकी केवल लंबाई होती है, चौड़ाई या ऊँचाई नहीं। रेखाखंड रेखा का वह भाग है जो दो निश्चित बिंदुओं के बीच बंद होता है, जबकि किरण केवल एक ओर से आरंभ होकर दूसरी ओर अनिश्चित रूप से आगे बढ़ती है। रेखाखंड की लंबाई को AB या |AB| से दर्शाया जाता है। परीक्षा में अक्सर इन्हीं मूल परिभाषाओं पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें शुरू से ही स्पष्ट कर लेना लाभदायक है।
जब दो किरणें एक ही बिंदु से प्रारंभ होती हैं, तो उनके बीच बना अंतर कोण कहलाता है। कोण को डिग्री या रेडियन में मापा जाता है और एक पूर्ण चक्कर 360 डिग्री का होता है। कोण बनाने वाली किरणों को भुजाएँ तथा उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु को शीर्ष कहते हैं। कोणों को चाँदे की सहायता से मापा जाता है। रेलवे परीक्षा में कोणों के मापन तथा उनके योग पर आधारित गणना संबंधी प्रश्न बहुत सामान्य हैं, इसलिए न्यून, समकोण और अधिक कोण जैसी अवधारणाओं पर पूर्ण पकड़ आवश्यक है।
कोणों को उनके माप के आधार पर कई प्रकारों में बाँटा जाता है। परीक्षा में इनकी सीमाओं पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए प्रत्येक प्रकार की सीमा को कंठस्थ रखें।
जिस कोण का माप 0 से बड़ा और 90 डिग्री से छोटा हो, उसे न्यून कोण कहते हैं। उदाहरण के लिए 30 डिग्री, 45 डिग्री और 60 डिग्री न्यून कोण हैं।
जिस कोण का माप ठीक 90 डिग्री हो, उसे समकोण कहते हैं। समकोण को अंग्रेजी अक्षर L के आकार के चिह्न से दर्शाया जाता है।
जिस कोण का माप 90 से बड़ा और 180 डिग्री से छोटा हो, उसे अधिक कोण कहते हैं। उदाहरण के लिए 100 डिग्री और 150 डिग्री अधिक कोण हैं।
जिस कोण का माप ठीक 180 डिग्री हो, उसे सरल कोण या रेखीय कोण कहते हैं। यह एक सीधी रेखा जैसा दिखाई देता है।
जिस कोण का माप 180 से बड़ा और 360 डिग्री से छोटा हो, उसे प्रतिवर्ती कोण कहते हैं। उदाहरण के लिए 210 डिग्री और 300 डिग्री प्रतिवर्ती कोण हैं।
ठीक 360 डिग्री के कोण को पूर्ण कोण कहते हैं, जबकि 0 डिग्री के कोण को शून्य कोण कहते हैं। पूर्ण कोण में किरण एक पूरा चक्कर लगाकर वापस अपनी स्थिति पर आ जाती है।
उदाहरण 1: एक कोण अपने पूरक कोण से 30 डिग्री बड़ा है। दोनों कोण ज्ञात कीजिए। हल: माना छोटा कोण x डिग्री है। प्रश्नानुसार बड़ा कोण = x + 30 डिग्री। पूरक कोणों का योग 90 डिग्री होता है। अतः x + (x + 30) = 90 → 2x + 30 = 90 → 2x = 60 → x = 30। अतः छोटा कोण 30 डिग्री तथा बड़ा कोण 60 डिग्री होगा।
समतल में दो रेखाओं की स्थिति के अनुसार उनके बीच कई प्रकार के संबंध बनते हैं। इन संबंधों को समझना ज्यामिति के सभी प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
जो रेखाएँ एक ही समतल में स्थित हों और कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद न करें, उन्हें समांतर रेखाएँ कहते हैं। समांतर रेखाओं के बीच की दूरी हर बिंदु पर समान रहती है। समांतर रेखाओं को समान अंकों के चिह्नों से दर्शाया जाता है।
जो दो रेखाएँ एक-दूसरे को किसी बिंदु पर काटती हैं, प्रतिच्छेदी रेखाएँ कहलाती हैं। प्रतिच्छेद करने पर चार कोण बनते हैं, जिनमें शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं तथा आसन्न कोणों का योग 180 डिग्री होता है।
यदि दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक-दूसरे से 90 डिग्री का कोण बनाती हैं, तो वे लंबवत रेखाएँ कहलाती हैं। लंबवत रेखाओं द्वारा बने चारों कोण समकोण होते हैं।
जब एक रेखा दो समांतर रेखाओं को दो अलग-अलग बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तो उसे तिर्यक रेखा कहते हैं। तिर्यक रेखा के कारण आठ कोण बनते हैं, जिनमें संगत कोण बराबर होते हैं, एकांतर कोण बराबर होते हैं तथा तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अंत: कोण संपूरक होते हैं। यदि ये संबंध संतुष्ट होते हैं, तो रेखाएँ समांतर सिद्ध की जा सकती हैं।
उदाहरण 2: दो समांतर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटती है। बने एकांतर कोण (2x + 30) डिग्री तथा (4x - 10) डिग्री हैं। x का मान ज्ञात कीजिए। हल: एकांतर कोण बराबर होते हैं। अतः 2x + 30 = 4x - 10 → 30 + 10 = 4x - 2x → 40 = 2x → x = 20 डिग्री।
उदाहरण 3: एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है और उनमें से एक संगत कोण 65 डिग्री का है। उसका संगत कोण कितना होगा? हल: संगत कोण बराबर होते हैं। अतः दूसरा संगत कोण भी 65 डिग्री होगा।
दो कोणों के बीच के योग या स्थिति के आधार पर कोण युग्मों को कई प्रकारों में बाँटा जाता है।
दो कोणों का योग 90 डिग्री हो तो वे एक-दूसरे के पूरक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए 40 डिग्री और 50 डिग्री परस्पर पूरक हैं।
दो कोणों का योग 180 डिग्री हो तो वे एक-दूसरे के संपूरक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए 120 डिग्री और 60 डिग्री परस्पर संपूरक हैं।
एक रेखा पर स्थित बिंदु पर बने दो आसन्न कोण जिनका योग 180 डिग्री हो, रैखिक युग्म कहलाते हैं। रैखिक युग्म के कोण सदैव संपूरक होते हैं और इनकी अभयनिष्ठ भुजा के अलावा शेष भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं।
दो रेखाओं के प्रतिच्छेदन से बने सामने वाले कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं और सदैव बराबर होते हैं।
दो कोण जिनका शीर्ष और एक भुजा उभयनिष्ठ हो, आसन्न कोण कहलाते हैं। आसन्न कोणों का योग आवश्यक रूप से निश्चित नहीं होता; केवल रैखिक युग्म बनाने वाले आसन्न कोणों का योग 180 डिग्री होता है।
उदाहरण 4: रैखिक युग्म के कोण (3x - 20) डिग्री और (x + 40) डिग्री हैं, तो x का मान ज्ञात कीजिए। हल: रैखिक युग्म के कोणों का योग 180 डिग्री होता है। अतः (3x - 20) + (x + 40) = 180 → 4x + 20 = 180 → 4x = 160 → x = 40 डिग्री।
उदाहरण 5: यदि दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं और शीर्षाभिमुख कोण (5x + 10) डिग्री तथा (2x + 70) डिग्री हैं, तो x ज्ञात कीजिए। हल: शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। अतः 5x + 10 = 2x + 70 → 3x = 60 → x = 20 डिग्री।
| कोण का प्रकार | माप की सीमा |
|---|---|
| न्यून कोण | 0 से 90 डिग्री के बीच |
| समकोण | ठीक 90 डिग्री |
| अधिक कोण | 90 से 180 डिग्री के बीच |
| सरल कोण | ठीक 180 डिग्री |
| प्रतिवर्ती कोण | 180 से 360 डिग्री के बीच |
| पूर्ण कोण | ठीक 360 डिग्री |
| कोण युग्म | गुण |
|---|---|
| पूरक कोण | योग = 90 डिग्री |
| संपूरक कोण | योग = 180 डिग्री |
| रैखिक युग्म | आसन्न तथा योग = 180 डिग्री |
| शीर्षाभिमुख कोण | बराबर होते हैं |
| संगत कोण | बराबर होते हैं |
| एकांतर कोण | बराबर होते हैं |
flowchart TD
A[रेखाएँ और कोण] --> B[कोणों के प्रकार]
A --> C[रेखाओं के गुण]
A --> D[कोण युग्म]
B --> B1[न्यून कोण]
B --> B2[समकोण]
B --> B3[अधिक कोण]
B --> B4[प्रतिवर्ती कोण]
C --> C1[समांतर रेखाएँ]
C --> C2[लंबवत रेखाएँ]
C --> C3[तिर्यक रेखा]
D --> D1[पूरक कोण]
D --> D2[संपूरक कोण]
D --> D3[शीर्षाभिमुख कोण]
रेखाएँ और कोण ज्यामिति की वह मजबूत नींव हैं जिस पर त्रिभुज, चतुर्भुज और वृत्त जैसे सभी आगे के अध्याय टिके हैं। कोणों के प्रकारों की सीमाएँ, रेखाओं के गुण तथा कोण युग्मों के योग नियम को कंठस्थ करने से रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में ज्यामिति से आने वाले प्रश्न बहुत कम समय में हल किए जा सकते हैं। इस अध्याय में दिए गए उदाहरणों और तालिकाओं का बार-बार अभ्यास करने से अवधारणाएँ स्थायी हो जाती हैं, जिससे अगले अध्यायों की पढ़ाई भी सरल और आनंददायक बन जाती है।