विषय: रेलवे ग्रुप D – गणित (ज्यामिति और क्षेत्रमिति) अध्याय: 4.4 वृत्त विषय-वस्तु: वृत्त के गुण, जीवा, स्पर्श रेखा, त्रिज्या
वृत्त उन सभी बिंदुओं का समूह है जो किसी निश्चित बिंदु से समान दूरी पर स्थित होते हैं। वह निश्चित बिंदु केंद्र कहलाता है और केंद्र से वृत्त के किसी भी बिंदु की दूरी त्रिज्या कहलाती है। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में वृत्त से परिधि, क्षेत्रफल, जीवा, चाप, वृत्तखंड और स्पर्श रेखा पर प्रश्न पूछे जाते हैं। वृत्त क्षेत्रमिति की सबसे अधिक उपयोगी आकृति है, क्योंकि वृत्ताकार मैदान, पहिया और पाइप जैसी वास्तविक वस्तुओं की गणना इसी से की जाती है।
वृत्त की परिधि से गुजरने वाला तथा केंद्र से होकर जाने वाला रेखाखंड व्यास कहलाता है, जो त्रिज्या का दो गुना होता है। वृत्त की परिधि 2 गुणा पाई गुणा त्रिज्या तथा क्षेत्रफल पाई गुणा त्रिज्या वर्ग होता है, जहाँ पाई का मान लगभग 22 भाग 7 या 3.14 लिया जाता है। केंद्र और परिधि पर स्थित दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है, और सबसे लंबी जीवा व्यास होती है। इन मूल परिभाषाओं पर परीक्षा में अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
वृत्त के किसी बिंदु पर खींची गई ऐसी सीधी रेखा जो वृत्त को केवल एक ही बिंदु पर छूती है, स्पर्श रेखा कहलाती है। स्पर्श रेखा और स्पर्श बिंदु से खींची गई त्रिज्या परस्पर लंबवत होती हैं। केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है, जो वृत्त का एक महत्वपूर्ण गुण है। इस अध्याय में इन सभी अवधारणाओं का विस्तार से अध्ययन हल किए गए उदाहरणों के साथ किया जाएगा।
वृत्त से संबंधित कुछ मौलिक गुण होते हैं जिनका उपयोग अधिकांश प्रश्नों को हल करने में होता है।
वृत्त की परिधि दो गुणा पाई गुणा त्रिज्या के बराबर होती है। वृत्त का क्षेत्रफल पाई गुणा त्रिज्या वर्ग होता है। व्यास ज्ञात होने पर परिधि पाई गुणा व्यास के बराबर होती है।
केंद्र पर बने कोण को केंद्रीय कोण कहते हैं। केंद्रीय कोण के सामने वृत्त की परिधि पर बना भाग चाप कहलाता है। केंद्रीय कोण के अनुपात में चाप की लंबाई बदलती है और 360 डिग्री के केंद्रीय कोण पर पूरी परिधि बनती है।
केंद्र पर कोण से बना चाप और दोनों त्रिज्याओं से घिरा क्षेत्र त्रिज्यखंड कहलाता है, जिसका क्षेत्रफल पाई गुणा त्रिज्या वर्ग गुणा कोण भाग 360 होता है। जीवा और चाप से घिरा क्षेत्र वृत्तखंड कहलाता है।
समान लंबाई की जीवाएँ केंद्र से समान दूरी पर होती हैं। केंद्र से जीवा की दूरी जितनी अधिक होगी, जीवा उतनी ही छोटी होगी। व्यास केंद्र से सबसे कम दूरी वाली जीवा है।
उदाहरण 1: एक वृत्त की त्रिज्या 14 सेमी है। इसकी परिधि ज्ञात कीजिए। हल: परिधि = 2 गुणा पाई गुणा त्रिज्या = 2 गुणा 22 भाग 7 गुणा 14 = 88 सेमी।
उदाहरण 2: एक वृत्त का क्षेत्रफल 154 वर्ग सेमी है। इसकी त्रिज्या ज्ञात कीजिए। हल: क्षेत्रफल = पाई गुणा त्रिज्या वर्ग → 154 = 22 भाग 7 गुणा त्रिज्या वर्ग → त्रिज्या वर्ग = 154 गुणा 7 भाग 22 = 49 → त्रिज्या = 7 सेमी।
जीवा और व्यास वृत्त के सबसे अधिक प्रश्न देने वाले भाग हैं, इसलिए इनके गुणों पर विशेष ध्यान दें।
वृत्त की परिधि पर स्थित दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है। वृत्त की सबसे बड़ी जीवा व्यास है, जो केंद्र से गुजरती है और त्रिज्या का दो गुना होती है।
केंद्र से जीवा पर खींचा गया लंब जीवा को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। इसके विपरीत, केंद्र से जीवा के मध्य बिंदु को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा पर लंबवत होता है।
यदि केंद्र से जीवा पर लंब की लंबाई और त्रिज्या ज्ञात हो, तो पाइथागोरस प्रमेय से जीवा की आधी लंबाई निकाली जा सकती है। जीवा की लंबाई दो गुणा वर्गमूल त्रिज्या वर्ग घटा लंब की दूरी वर्ग होती है।
बराबर जीवाएँ केंद्र पर बराबर कोण बनाती हैं और केंद्र से समान दूरी पर स्थित होती हैं। बराबर केंद्रीय कोणों के सामने बराबर जीवाएँ होती हैं।
उदाहरण 3: एक वृत्त की त्रिज्या 10 सेमी है और केंद्र से जीवा पर लंब की दूरी 6 सेमी है। जीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए। हल: जीवा की आधी लंबाई वर्ग = त्रिज्या वर्ग - लंब की दूरी वर्ग = 100 - 36 = 64 → आधी जीवा = 8 सेमी। अतः जीवा की लंबाई = 16 सेमी।
उदाहरण 4: एक वृत्त की जीवा की लंबाई 12 सेमी है और केंद्र से उसकी दूरी 8 सेमी है। वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए। हल: केंद्र से लंब जीवा को समद्विभाजित करता है, अतः आधी जीवा = 6 सेमी। त्रिज्या वर्ग = 36 + 64 = 100 → त्रिज्या = 10 सेमी।
स्पर्श रेखा वृत्त के सबसे महत्वपूर्ण विषय-बिंदुओं में से एक है और परीक्षा में इसके गुणों पर नियमित प्रश्न आते हैं।
वह सीधी रेखा जो वृत्त को केवल एक बिंदु पर छूती है, स्पर्श रेखा कहलाती है और वह बिंदु स्पर्श बिंदु कहलाता है। स्पर्श रेखा वृत्त के अंदर नहीं जाती।
स्पर्श बिंदु पर खींची गई त्रिज्या स्पर्श रेखा पर सदैव लंबवत होती है। यह वृत्त का सबसे अधिक उपयोगी गुण है और इसी से पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग कर कई प्रश्न हल होते हैं।
वृत्त के बाहर स्थित किसी बिंदु से वृत्त पर केवल दो स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं। बाह्य बिंदु से दोनों स्पर्श रेखाओं की लंबाई समान होती है। स्पर्श बिंदुओं को मिलाने वाली जीवा स्पर्श जीवा कहलाती है।
वह रेखा जो वृत्त को दो बिंदुओं पर काटती है, छेदक रेखा कहलाती है। स्पर्श रेखा की तुलना में छेदक रेखा वृत्त के अंदर प्रवेश करती है।
उदाहरण 5: एक वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी है। बाह्य बिंदु P से केंद्र O की दूरी 13 सेमी है। P से खींची गई स्पर्श रेखा की लंबाई ज्ञात कीजिए। हल: त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लंबवत होती है, अतः समकोण त्रिभुज बनता है। स्पर्श रेखा वर्ग = 169 - 25 = 144 → स्पर्श रेखा की लंबाई = 12 सेमी।
उदाहरण 6: बाह्य बिंदु से वृत्त पर दो स्पर्श रेखाएँ खींची गई हैं। एक स्पर्श रेखा की लंबाई 9 सेमी है। दूसरी की लंबाई कितनी होगी? हल: बाह्य बिंदु से दोनों स्पर्श रेखाओं की लंबाई समान होती है। अतः दूसरी स्पर्श रेखा की लंबाई भी 9 सेमी होगी।
| भाग | परिभाषा |
|---|---|
| केंद्र | वृत्त का निश्चित बिंदु |
| त्रिज्या | केंद्र से परिधि की दूरी |
| व्यास | त्रिज्या का दो गुना, सबसे बड़ी जीवा |
| जीवा | परिधि के दो बिंदुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड |
| चाप | परिधि का कोई भाग |
| स्पर्श रेखा | वृत्त को एक बिंदु पर छूने वाली रेखा |
| आँकड़ा | सूत्र |
|---|---|
| परिधि | 2 गुणा पाई गुणा त्रिज्या |
| क्षेत्रफल | पाई गुणा त्रिज्या वर्ग |
| त्रिज्यखंड क्षेत्रफल | पाई गुणा त्रिज्या वर्ग गुणा कोण भाग 360 |
| जीवा की लंबाई | 2 गुणा वर्गमूल त्रिज्या वर्ग घटा लंब दूरी वर्ग |
| स्पर्श रेखा | वर्गमूल केंद्र दूरी वर्ग घटा त्रिज्या वर्ग |
flowchart TD
A[वृत्त] --> B[गुण]
A --> C[जीवा और व्यास]
A --> D[स्पर्श रेखा]
B --> B1[परिधि और क्षेत्रफल]
B --> B2[केंद्रीय कोण]
B --> B3[चाप और वृत्तखंड]
C --> C1[व्यास सबसे बड़ी जीवा]
C --> C2[केंद्र से लंब समद्विभाजित]
D --> D1[त्रिज्या लंबवत]
D --> D2[बाह्य बिंदु से समान लंबाई]
D --> D3[छेदक रेखा]
वृत्त अध्याय क्षेत्रमिति का सबसे महत्वपूर्ण और प्रश्न-प्रचुर भाग है, जिसमें परिधि, क्षेत्रफल, जीवा और स्पर्श रेखा से रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में प्रत्येक वर्ष प्रश्न आते हैं। त्रिज्या, व्यास, जीवा और स्पर्श रेखा के गुणों तथा उनके बीच के संबंधों को समझने से अधिकांश प्रश्न पाइथागोरस प्रमेय की सहायता से कुछ चरणों में हल हो जाते हैं। पाई के उपयुक्त मान का चयन और सूत्रों की सही पहचान समय बचाने में सहायक होती है। इस अध्याय के सूत्रों और उदाहरणों का नियमित अभ्यास करने से परीक्षा में वृत्त से आने वाले अंक सुनिश्चित हो जाते हैं।