विषय: रेलवे ग्रुप D – गणित (ज्यामिति और क्षेत्रमिति) अध्याय: 4.10 ठोस क्षेत्रमिति विषय-वस्तु: सम्मिलित ठोस, मिश्रित क्षेत्रमिति समस्याएँ
ठोस क्षेत्रमिति क्षेत्रमिति की वह शाखा है जिसमें दो या दो से अधिक ठोसों को मिलाकर बनी आकृतियों तथा वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। प्रायः एक ही वस्तु में बेलन और शंकु, अर्धगोला और बेलन, घनाभ और बेलन जैसे अनेक ठोस जुड़े होते हैं। ऐसी सम्मिलित आकृतियों का पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन ज्ञात करने के लिए प्रत्येक भाग का सूत्र अलग-अलग प्रयोग करना पड़ता है।
सम्मिलित ठोस हमारे चारों ओर सर्वत्र दिखाई देते हैं। टैंकर के ऊपर जुड़ा अर्धगोला, छत पर लगा शंकु के आकार का टीन, आइसक्रीम कोन (शंकु + अर्धगोला), पेंसिल (बेलन + शंकु), इमारत पर बना गुंबद (अर्धगोला), खलिहान का अनाज का ढेर - ये सभी सम्मिलित ठोसों के उदाहरण हैं। ऐसी वस्तुओं को बनाने, भरने या रंगने के लिए सम्मिलित ठोसों का ज्ञान आवश्यक होता है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ठोस क्षेत्रमिति से ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें दो ठोसों के सूत्रों को एक साथ प्रयोग करना होता है। शंकु + बेलन, बेलन + अर्धगोला, शंकु + अर्धगोला जैसे संयोजन अधिकतर प्रश्नों में आते हैं। इस अध्याय में विद्यार्थी को यह समझना होगा कि सम्मिलित ठोस का कुल आयतन = सभी भागों के आयतन का योग, जबकि पृष्ठीय क्षेत्रफल में जुड़ी सतहों को हटाना होता है। इसी सूझबूझ से मिश्रित क्षेत्रमिति की समस्याएँ हल होती हैं।
नीचे विभिन्न सम्मिलित ठोसों के आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करने की विधियाँ दी गई हैं।
सम्मिलित ठोस के पृष्ठीय क्षेत्रफल में महत्वपूर्ण नियम यह है कि जहाँ दो ठोस जुड़ते हैं, वहाँ का क्षेत्रफल न तो बाहर से दिखाई देता है और न ही उसे गिना जाता है। अतः केवल बाहरी सतहों का ही क्षेत्रफल जोड़ना चाहिए।
निम्नलिखित हल किए गए उदाहरण ठोस क्षेत्रमिति की अवधारणा को स्पष्ट करेंगे।
उदाहरण 1: एक टंकी के नीचे बेलनाकार भाग (त्रिज्या 7 सेमी, ऊँचाई 10 सेमी) और ऊपर अर्धगोला (त्रिज्या 7 सेमी) जुड़ा है। (π = 22/7) कुल आयतन ज्ञात कीजिए। हल: बेलन का आयतन = (22/7) × 49 × 10 = 1540 घन सेमी। अर्धगोले का आयतन = (2/3) × (22/7) × 343 = 718.67 घन सेमी। कुल आयतन = 1540 + 718.67 = 2258.67 घन सेमी।
उदाहरण 2: एक तम्बू के नीचे बेलन (त्रिज्या 7 मी, ऊँचाई 5 मी) और ऊपर शंकु (ऊँचाई 12 मी) है। (π = 22/7) शंकु की तिर्यक ऊँचाई ज्ञात कीजिए। हल: l = √(r² + h²) = √(49 + 144) = √193 ≈ 13.89 मी।
उदाहरण 3: एक आइसक्रीम कोन शंकु (त्रिज्या 3.5 सेमी, ऊँचाई 12 सेमी) के ऊपर अर्धगोला (त्रिज्या 3.5 सेमी) रखा है। (π = 22/7) कुल आयतन ज्ञात कीजिए। हल: शंकु का आयतन = (1/3) × (22/7) × 12.25 × 12 = 154 घन सेमी। अर्धगोले का आयतन = (2/3) × (22/7) × 42.875 = 89.83 घन सेमी। कुल = 243.83 घन सेमी।
उदाहरण 4: एक गोला (त्रिज्या 7 सेमी) पिघलाकर बेलन (त्रिज्या 7 सेमी) बनाया गया। (π = 22/7) बेलन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। हल: गोले का आयतन = बेलन का आयतन, (4/3) × (22/7) × 343 = (22/7) × 49 × h, अतः h = 28/3 = 9.33 सेमी।
उदाहरण 5: एक खलिहान में गेहूँ का ढेर शंकु के आकार का है, जिसकी त्रिज्या 7 मी और ऊँचाई 3 मी है। (π = 22/7) ढेर का आयतन ज्ञात कीजिए। हल: आयतन = (1/3) × (22/7) × 49 × 3 = 154 घन मीटर।
उदाहरण 6: एक बेलनाकार बर्तन (त्रिज्या 14 सेमी) में पानी है। उसमें एक गोला (त्रिज्या 7 सेमी) डालने से जलस्तर में कितनी वृद्धि होगी? (π = 22/7) हल: गोले का आयतन = (4/3) × (22/7) × 343 = 1437.33 घन सेमी। जलस्तर में वृद्धि = आयतन ÷ आधार क्षेत्रफल = 1437.33 ÷ 616 = 2.33 सेमी।
समस्या पहचान: मिश्रित प्रश्न में पहले निर्धारित करें कि कौन-कौन से ठोस मिले हैं और कौन सी राशि (आयतन, क्षेत्रफल, ऊँचाई, लागत) ज्ञात करनी है। उसके अनुसार ही सूत्र चुनें।
पृष्ठीय क्षेत्रफल में जुड़ी सतह हटाना: बेलन पर अर्धगोला जुड़ने पर अर्धगोले का वृत्तीय आधार और बेलन का ऊपरी वृत्त दोनों ढक जाते हैं, इसलिए पृष्ठीय क्षेत्रफल में ये नहीं जुड़ते। कुल बाहरी क्षेत्रफल में केवल दिखाई देने वाली सतहें ही जोड़ें।
आयतन में सब कुछ जोड़ना: सम्मिलित ठोस का आयतन निकालने के लिए सभी भागों के आयतन जोड़ दिए जाते हैं, यहाँ कोई सतह हटाने की आवश्यकता नहीं होती।
पिघलाने और ढालने के प्रश्न: पिघलाने पर धातु का आयतन नियत रहता है। यदि n समान छोटे ठोस पिघलाकर एक बड़ा ठोस बनता है, तो बड़े ठोस का आयतन = n × छोटे ठोस का आयतन।
जल विस्थापन के प्रश्न: पानी में डूबी वस्तु उतना ही पानी विस्थापित करती है जितना उसका आयतन होता है। बेलनाकार बर्तन में जलस्तर की वृद्धि = वस्तु का आयतन ÷ बर्तन के आधार का क्षेत्रफल।
| सम्मिलित ठोस | कुल आयतन |
|---|---|
| बेलन + शंकु | πr²h₁ + (1/3)πr²h₂ |
| बेलन + अर्धगोला | πr²h + (2/3)πr³ |
| शंकु + अर्धगोला | (1/3)πr²h + (2/3)πr³ |
| घनाभ + अर्धगोला | lbh + (2/3)πr³ |
| शंकु ढेर (अनाज) | (1/3)πr²h |
| सम्मिलित ठोस | बाहरी पृष्ठीय क्षेत्रफल |
|---|---|
| बेलन + शंकु | 2πrh₁ + πrl |
| बेलन + अर्धगोला | 2πrh + 2πr² |
| शंकु + अर्धगोला | πrl + 2πr² |
| पिघलाने का नियम | पहले का आयतन = बाद का आयतन |
| जल विस्थापन | वृद्धि = आयतन ÷ आधार क्षेत्रफल |
flowchart TD
A[4.10 ठोस क्षेत्रमिति] --> B[बेलन + शंकु]
A --> C[बेलन + अर्धगोला]
A --> D[शंकु + अर्धगोला]
A --> E[घनाभ + अर्धगोला]
A --> F[अनाज का शंकु ढेर]
A --> G[पिघलाकर ढालना]
A --> H[जल विस्थापन]
B --> I[आयतन का योग]
C --> I
D --> I
A --> J[पृष्ठीय क्षेत्रफल में जुड़ी सतह हटाना]
A --> K[बाहरी सतहों का योग]
ठोस क्षेत्रमिति में बेलन, शंकु, गोला, अर्धगोला और घनाभ जैसे ठोसों के संयोजन से बनी वस्तुओं के आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल का अध्ययन किया जाता है। सम्मिलित ठोस का आयतन सभी भागों के आयतन का योग होता है, जबकि पृष्ठीय क्षेत्रफल में जुड़ी सतहों को हटाकर केवल बाहरी सतहों का योग लिया जाता है। पिघलाने, ढालने और जल विस्थापन के नियम इस अध्याय की मिश्रित समस्याओं की कुंजी हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में इस अध्याय से प्रश्न पूछे जाने की प्रबल संभावना है, अतः सूत्रों और विधियों का नियमित अभ्यास परीक्षा में निश्चित रूप से लाभकारी सिद्ध होगा।