विषय: रेलवे ग्रुप D – गणित (संख्या पद्धति) अध्याय: 1.6 वर्गमूल विषय-वस्तु: वर्गमूल एवं घनमूल निकालने की विधियाँ
किसी संख्या का वर्गमूल वह संख्या है जो स्वयं से गुणा करने पर मूल संख्या प्रदान करती है। जैसे 9 का वर्गमूल 3 है, क्योंकि 3 × 3 = 9। इसे √9 = 3 लिखते हैं। इसी प्रकार घनमूल वह संख्या है जो स्वयं से तीन बार गुणा करने पर मूल संख्या देती है। जैसे 27 का घनमूल 3 है, क्योंकि 3 × 3 × 3 = 27।
रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में वर्गमूल और घनमूल से सीधे प्रश्न तथा इनका प्रयोग क्षेत्रफल, प्रतिशत और सरलीकरण जैसे विषयों में होता है। वर्गमूल निकालने की अभाज्य गुणनखंड विधि, भाग विधि तथा घनमूल की अनुमान विधि परीक्षा की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं।
इस अध्याय में हम पूर्ण वर्ग और पूर्ण घन की पहचान, वर्गमूल-घनमूल निकालने की विभिन्न विधियाँ, वर्गों-घनों की तालिकाएँ तथा रेलवे परीक्षा स्तर के हल सहित प्रश्नों का अध्ययन करेंगे। साथ ही अनुमान (estimation) तकनीकों पर भी ध्यान देंगे।
अभाज्य गुणनखंड विधि: संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में विघटित करें। समान गुणनखंडों के युग्म बनाकर प्रत्येक युग्म से एक गुणनखंड लें और उनका गुणनफल ज्ञात करें। यही गुणनफल वर्गमूल होता है। यदि कोई गुणनखंड बिना युग्म के बच जाए तो वह संख्या पूर्ण वर्ग नहीं होती।
भाग विधि (Long Division): बड़ी संख्याओं का वर्गमूल निकालने के लिए उपयुक्त विधि है। अंकों को दाएँ से बाएँ जोड़ियों में बाँटें, पहले अंक/जोड़े का वर्गमूल लें, घटाएँ, भागफल को दुगुना करके नया भाजक बनाएं और आगे की प्रक्रिया दोहराएँ।
हल सहित उदाहरण: 1. 784 का वर्गमूल ज्ञात कीजिए। हल: 784 = 2⁴ × 7²; √784 = 2² × 7 = 28। 2. 441 का वर्गमूल ज्ञात कीजिए। हल: 441 = 3² × 7²; √441 = 3 × 7 = 21। 3. 625 का वर्गमूल ज्ञात कीजिए। हल: 625 = 5⁴; √625 = 5² = 25। 4. 96 क्या पूर्ण वर्ग है? हल: 96 = 2⁵ × 3; 2 और 3 बिना युग्म के बचते हैं, अतः नहीं। 5. 25² की गणना (a + b)² से कीजिए। हल: (20 + 5)² = 400 + 200 + 25 = 625।
अभाज्य गुणनखंड विधि: संख्या के अभाज्य गुणनखंड करें। समान गुणनखंडों के त्रिक (तिन-तिन) बनाकर प्रत्येक त्रिक से एक गुणनखंड लें; उनका गुणनफल घनमूल होता है। कोई गुणनखंड बिना त्रिक के बचे तो संख्या पूर्ण घन नहीं है।
अनुमान विधि (Estimation): दो अंकों की संख्या के घनमूल के लिए अंतिम अंक से इकाई अंक तय करें (1, 4, 5, 6, 9, 0 स्वयं; 2→8, 3→7, 7→3, 8→2)। फिर पहले अंकों से बनी संख्या की तुलना 1³ से 9³ से करके दहाई का अंक ज्ञात करें।
हल सहित उदाहरण: 1. ∛3375 ज्ञात कीजिए। हल: 3375 = 3³ × 5³; ∛3375 = 3 × 5 = 15। 2. ∛1728 ज्ञात कीजिए। हल: 1728 = 2⁶ × 3³ = (2² × 3)³ = 12³; ∛1728 = 12। 3. ∛5832 ज्ञात कीजिए। हल: 5832 = 2³ × 3⁶ = 18³; ∛5832 = 18। 4. अनुमान विधि से ∛9261 ज्ञात कीजिए। हल: अंतिम अंक 1, इकाई अंक 1; 9 तक 2³ = 8, अतः दहाई 2; उत्तर 21। 5. 64 किस संख्या का घन है? हल: 64 = 4³।
परीक्षा में वर्गमूल-घनमूल से संबंधित प्रश्नों को शीघ्र हल करने के लिए 1 से 25 तक के वर्ग और 1 से 10 तक के घन कंठस्थ रखना अत्यंत लाभदायक है। कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:
हल सहित उदाहरण: 1. √144 + √169 का मान ज्ञात कीजिए। हल: 12 + 13 = 25। 2. √(81 + 19) का मान ज्ञात कीजिए। हल: √100 = 10। 3. ∛8 × √9 का मान ज्ञात कीजिए। हल: 2 × 3 = 6। 4. 529 का वर्गमूल ज्ञात कीजिए। हल: 529 = 23², अतः √529 = 23। 5. एक वर्गाकार खेत का क्षेत्रफल 4225 वर्ग मीटर है, तो उसकी भुजा ज्ञात कीजिए। हल: √4225 = 65 मीटर।
1 से 15 तक की संख्याओं के वर्ग और घन | संख्या | वर्ग | घन | संख्या | वर्ग | घन | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 1 | 1 | 1 | 9 | 81 | 729 | | 2 | 4 | 8 | 10 | 100 | 1000 | | 3 | 9 | 27 | 11 | 121 | 1331 | | 4 | 16 | 64 | 12 | 144 | 1728 | | 5 | 25 | 125 | 13 | 169 | 2197 | | 6 | 36 | 216 | 14 | 196 | 2744 | | 7 | 49 | 343 | 15 | 225 | 3375 | | 8 | 64 | 512 | 16 | 256 | 4096 |
घनमूल की अनुमान विधि में अंतिम अंक का नियम | घन का अंतिम अंक | घनमूल का अंतिम अंक | | --- | --- | | 1 | 1 | | 2 | 8 | | 3 | 7 | | 4 | 4 | | 5 | 5 | | 6 | 6 | | 7 | 3 | | 8 | 2 | | 9 | 9 | | 0 | 0 |
flowchart TD
A[वर्गमूल और घनमूल] --> B[वर्गमूल विधियाँ]
A --> C[घनमूल विधियाँ]
A --> D[महत्वपूर्ण मान]
B --> E[अभाज्य गुणनखंड विधि]
B --> F[भाग विधि]
C --> G[अभाज्य गुणनखंड विधि]
C --> H[अनुमान विधि]
D --> I[√2 = 1.414, √3 = 1.732]
D --> J[घन: 8, 27, 64, 125, 216]
वर्गमूल और घनमूल संख्या पद्धति के वे मूलभूत पहलू हैं जिनका प्रयोग रेलवे ग्रुप D परीक्षा के क्षेत्रफल, सरलीकरण, प्रतिशत आदि अनेक प्रश्नों में होता है। अभाज्य गुणनखंड विधि, भाग विधि और अनुमान विधि में दक्षता प्राप्त करने से प्रश्न तीव्रता से हल होते हैं। तालिकाओं का नियमित अभ्यास तथा सत्यापन की आदत सटीकता में वृद्धि करती है।