13.2 विद्युत धारा Notes

13.2 विद्युत धारा

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (विद्युत और चुंबकत्व) अध्याय: 13.2 विद्युत धारा विषय-वस्तु: धारा, एम्पियर, धारा मापन

1. परिचय

विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर को कहते हैं। जब किसी चालक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर उत्पन्न किया जाता है, तो चालक के अनुप्रस्थ काट से आवेश प्रवाहित होने लगता है और यही प्रवाह विद्युत धारा कहलाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत मानी जाती है। धारा की पारंपरिक दिशा धन आवेश के प्रवाह की दिशा में होती है, अर्थात उच्च विभव से निम्न विभव की ओर, जबकि इलेक्ट्रॉन निम्न विभव से उच्च विभव की ओर (विपरीत दिशा में) चलते हैं।

विद्युत धारा की SI इकाई एम्पियर (A) है। जब किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एक सेकंड में एक कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो धारा एक एम्पियर कहलाती है। धारा को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग होता है वह एमीटर कहलाता है, और इसे हमेशा परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है। धारा के बारे में यह आधारभूत जानकारी ग्रुप D परीक्षा में बार-बार पूछी जाती है।

विद्युत धारा के अध्ययन में दो प्रकार की धाराएँ महत्वपूर्ण हैं - दिष्ट धारा (DC) और प्रत्यावर्ती धारा (AC)। दिष्ट धारा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है, जबकि प्रत्यावर्ती धारा समय के साथ अपनी दिशा बदलती रहती है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में धारा की परिभाषा, सूत्र, इकाई, मापन यंत्र तथा धारा से जुड़े संख्यात्मक प्रश्न प्रमुख रूप से पूछे जाते हैं, इसलिए इस अध्याय में इन सभी बिंदुओं को विस्तार से समझना आवश्यक है।

2. विद्युत धारा की परिभाषा और प्रकार

विद्युत धारा की परिभाषा: किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति सेकंड प्रवाहित होने वाले आवेश की मात्रा विद्युत धारा कहलाती है। अर्थात धारा, आवेश के प्रवाह की दर है।

गणितीय सूत्र: (I = \frac{Q}{t}) - यहाँ (I) = विद्युत धारा (एम्पियर), (Q) = प्रवाहित आवेश (कूलॉम), (t) = समय (सेकंड)। - इस सूत्र से आवेश ज्ञात करने के लिए: (Q = I \times t) - समय ज्ञात करने के लिए: (t = \frac{Q}{I})

धारा की दिशा: - पारंपरिक धारा की दिशा: धन आवेश के प्रवाह की दिशा, अर्थात उच्च विभव (+) से निम्न विभव (−) की ओर। - इलेक्ट्रॉनों की गति की दिशा: ऋण विभव (−) से धन विभव (+) की ओर, अर्थात पारंपरिक दिशा के विपरीत।

विद्युत धारा के प्रकार: - दिष्ट धारा (DC): यह धारा हमेशा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है। उदाहरण: बैटरी, सेल से मिलने वाली धारा। - प्रत्यावर्ती धारा (AC): यह धारा समय के साथ अपनी दिशा और परिमाण बदलती रहती है। उदाहरण: घरों में मिलने वाली विद्युत धारा। - भारत में घरेलू प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति: 50 हर्ट्ज़ (Hz)। - एक चक्र में दिशा बदलने की संख्या: 100 बार प्रति सेकंड (दिशा 50 बार आगे और 50 बार पीछे)।

विद्युत धारा के प्रभाव: - तापीय प्रभाव: धारा प्रवाहित होने पर चालक गर्म होता है, जैसे हीटर और बल्ब में। - चुंबकीय प्रभाव: धारा प्रवाहित होने वाले चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जैसे विद्युत चुंबक में। - रासायनिक प्रभाव: धारा विद्युत अपघटन कर सकती है, जैसे बैटरी चार्ज करने में।

महत्वपूर्ण तथ्य: - धारा एक अदिश राशि है, यद्यपि इसकी दिशा बताई जाती है। - चालक में धारा इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण होती है। - धातुओं में धारा का वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं; विद्युत अपघटनी में धन और ऋण दोनों आयन वाहक होते हैं।

उदाहरण 1: एक चालक के अनुप्रस्थ काट से 5 सेकंड में 20 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है। धारा ज्ञात कीजिए। - हल: (I = Q/t = 20/5 = 4) एम्पियर। - उत्तर: धारा 4 एम्पियर है।

उदाहरण 2: एक चालक में 2 एम्पियर धारा 10 सेकंड के लिए प्रवाहित होती है। प्रवाहित आवेश ज्ञात कीजिए। - हल: (Q = I \times t = 2 \times 10 = 20) कूलॉम। - उत्तर: प्रवाहित आवेश 20 कूलॉम है।

3. एम्पियर और धारा मापन

एम्पियर की परिभाषा: यदि किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो चालक में विद्युत धारा 1 एम्पियर कहलाती है। - सूत्र: (1 \text{ एम्पियर} = \frac{1 \text{ कूलॉम}}{1 \text{ सेकंड}})

छोटी और बड़ी इकाइयाँ: - मिली एम्पियर (mA): (1 \text{ A} = 1000 \text{ mA}) - माइक्रो एम्पियर (µA): (1 \text{ A} = 10^6 \text{ µA}) - किलो एम्पियर (kA): (1 \text{ kA} = 1000 \text{ A}) - (1 \text{ mA} = 10^{-3} \text{ A}) - (1 \text{ µA} = 10^{-6} \text{ A})

धारा मापन - एमीटर: - धारा मापने वाला यंत्र एमीटर कहलाता है। - एमीटर को परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है ताकि उसमें से पूरी धारा प्रवाहित हो। - आदर्श एमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है, जिससे धारा पर कोई प्रभाव न पड़े। - एमीटर का धन टर्मिनल बैटरी के धन टर्मिनल की ओर जोड़ा जाता है। - धारा मापने का चिन्ह: (A) अक्षर या ((A)) में बंद वृत्त।

मिली एम्पियर में धारा मापन: - छोटी धारा मापने के लिए मिली एमीटर (मिली-एम्पियरमीटर) का उपयोग होता है। - बहुत छोटी धारा (माइक्रो) मापने के लिए माइक्रो एमीटर प्रयोग होता है।

गैल्वेनोमीटर: - बहुत छोटी धारा की उपस्थिति तथा दिशा जानने के लिए गैल्वेनोमीटर का उपयोग होता है। - गैल्वेनोमीटर में छोटी धारा प्रवाहित करने पर सुई में विक्षेप होता है।

धारा की माप में सावधानियाँ: - एमीटर को समानांतर क्रम में कभी नहीं जोड़ना चाहिए, अन्यथा यह जल सकता है। - एमीटर का धन सिरा धन सिरे से तथा ऋण सिरा ऋण सिरे से जोड़ना चाहिए। - एमीटर की सीमा अनुमानित धारा से अधिक होनी चाहिए।

उदाहरण 3: एक परिपथ में 0.5 एम्पियर धारा बह रही है। इसे मिली एम्पियर में व्यक्त कीजिए। - हल: (0.5 \times 1000 = 500) मिली एम्पियर। - उत्तर: 0.5 एम्पियर = 500 मिली एम्पियर।

उदाहरण 4: एक चालक में 250 मिली एम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। इसे एम्पियर में व्यक्त कीजिए। - हल: (250/1000 = 0.25) एम्पियर। - उत्तर: 250 मिली एम्पियर = 0.25 एम्पियर।

4. धारा से संबंधित संख्यात्मक उदाहरण

आवेश और इलेक्ट्रॉनों की संख्या से संबंधित सूत्र: - (I = Q/t) - (Q = ne) - संयुक्त रूप: (I = \frac{ne}{t}) - इलेक्ट्रॉनों की संख्या: (n = \frac{I \times t}{e})

धारा और इलेक्ट्रॉनों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य: - एक इलेक्ट्रॉन का आवेश (e = 1.6 \times 10^{-19}) कूलॉम। - 1 कूलॉम आवेश = (6.25 \times 10^{18}) इलेक्ट्रॉन। - धारा जितनी अधिक होगी, इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह उतना ही अधिक होगा।

औसत वेग और धारा: - धातु में इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग बहुत कम होता है, फिर भी धारा बहुत तेजी से स्थापित होती है। - धारा का प्रवाह विद्युत क्षेत्र के स्थापित होने की गति पर निर्भर करता है, इलेक्ट्रॉनों की भौतिक गति पर नहीं।

उदाहरण 5: एक चालक में 2 एम्पियर धारा 2 सेकंड के लिए प्रवाहित होती है। प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। - हल: (Q = I \times t = 2 \times 2 = 4) कूलॉम। - (n = Q/e = 4/(1.6 \times 10^{-19}) = 2.5 \times 10^{19}) इलेक्ट्रॉन। - उत्तर: (2.5 \times 10^{19}) इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे।

उदाहरण 6: एक चालक में 0.4 एम्पियर धारा बह रही है। एक मिनट में प्रवाहित आवेश ज्ञात कीजिए। - हल: (t = 1) मिनट = 60 सेकंड। - (Q = I \times t = 0.4 \times 60 = 24) कूलॉम। - उत्तर: एक मिनट में 24 कूलॉम आवेश प्रवाहित होगा।

उदाहरण 7: यदि किसी चालक में 10 कूलॉम आवेश 5 सेकंड में प्रवाहित होता है तो धारा कितनी होगी? - हल: (I = Q/t = 10/5 = 2) एम्पियर। - उत्तर: धारा 2 एम्पियर है।

उदाहरण 8: 5 एम्पियर धारा प्रवाहित होने पर किसी परिपथ में 1 मिनट में कितना आवेश गुजरेगा? - हल: (Q = 5 \times 60 = 300) कूलॉम। - उत्तर: 300 कूलॉम आवेश प्रवाहित होगा।

धारा, आवेश और समय की तालिका: - यदि धारा और समय दिया हो तो (Q = I \times t) - यदि आवेश और समय दिया हो तो (I = Q/t) - यदि आवेश और धारा दिया हो तो (t = Q/I)

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

राशि सूत्र SI इकाई
विद्युत धारा (I = Q/t) एम्पियर (A)
विद्युत आवेश (Q = I \times t) कूलॉम (C)
समय (t = Q/I) सेकंड (s)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n = Q/e) इकाई रहित

तालिका 2

इकाई मान
1 एम्पियर 1000 मिली एम्पियर
1 एम्पियर (10^6) माइक्रो एम्पियर
1 मिली एम्पियर (10^{-3}) एम्पियर
1 माइक्रो एम्पियर (10^{-6}) एम्पियर
1 कूलॉम (6.25 \times 10^{18}) इलेक्ट्रॉन
भारत में AC आवृत्ति 50 हर्ट्ज़

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[13.2 विद्युत धारा] --> B[धारा की परिभाषा]
    A --> C[धारा के प्रकार]
    A --> D[धारा की इकाई]
    A --> E[धारा मापन]
    B --> B1[I = Q / t]
    C --> C1[दिष्ट धारा DC]
    C --> C2[प्रत्यावर्ती धारा AC]
    D --> D1[एम्पियर]
    D --> D2[मिली एम्पियर]
    E --> E1[एमीटर]
    E --> E2[श्रेणी संयोजन]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

एमीटर का श्रेणी संयोजन बैटरी A एमीटर बल्ब पूरा परिपथ - धारा का प्रवाह एमीटर को हमेशा श्रेणी में जोड़ा जाता है स्वर्ण नियम: धारा मापने के लिए एमीटर श्रेणी क्रम में जोड़ें।

DC और AC धारा की तुलना समय धारा DC (सीधी रेखा) AC (तरंग रूप) भारत में घरेलू AC आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ है स्वर्ण नियम: DC एक दिशा में और AC दिशा बदलता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. छात्र धारा की दिशा को इलेक्ट्रॉनों की दिशा के समान मान लेते हैं, जबकि धारा की पारंपरिक दिशा धन आवेश के प्रवाह की दिशा है और इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशा में चलते हैं।
  2. (I = Q/t) में समय को मिनट में रखकर गणना कर लेते हैं, जबकि समय को हमेशा सेकंड में बदलना चाहिए।
  3. एमीटर को समानांतर क्रम में जोड़ने की गलती होती है, जबकि एमीटर को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
  4. 1 एम्पियर को (10^3) माइक्रो एम्पियर मान लेते हैं, जबकि 1 एम्पियर = (10^6) माइक्रो एम्पियर होता है।
  5. दिष्ट धारा (DC) और प्रत्यावर्ती धारा (AC) के गुणों को उलट-पुलट कर लिख देते हैं।
  6. भारत में घरेलू विद्युत आवृत्ति को 60 हर्ट्ज़ लिख देते हैं, जबकि भारत में यह 50 हर्ट्ज़ है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. सूत्र (I = Q/t) और (Q = ne) को अवश्य याद रखें, क्योंकि अधिकांश संख्यात्मक प्रश्न इन्हीं पर आधारित होते हैं।
  2. इकाई परिवर्तन हमेशा पहले करें - मिनट को सेकंड और मिली एम्पियर को एम्पियर में बदलें।
  3. एमीटर के संयोजन पर प्रश्न आए तो उत्तर हमेशा 'श्रेणी क्रम' होगा।
  4. इलेक्ट्रॉनों की संख्या के प्रश्न में पहले (Q = I \times t) ज्ञात करें, फिर (n = Q/e) लगाएं।
  5. AC की आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ तथा दिशा परिवर्तन प्रति सेकंड 100 बार, ये तथ्य परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।

10. निष्कर्ष

विद्युत धारा विद्युत विज्ञान का वह आधारभूत विषय है जो आवेश के प्रवाह की दर को व्यक्त करता है। इस अध्याय में धारा की परिभाषा, सूत्र, प्रकार, एम्पियर की इकाई, मापन के यंत्र तथा संख्यात्मक उदाहरणों का विस्तार से अध्ययन किया गया। धारा से जुड़े सभी सूत्र और इकाइयों के परिवर्तनों को स्मरण रखना ग्रुप D परीक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। नियमित अभ्यास से धारा के संख्यात्मक प्रश्न बहुत आसानी से हल किए जा सकते हैं, और यही अभ्यास परीक्षा में सफलता का कुंजी बनता है। आगे के अध्यायों जैसे विभवांतर और ओम का नियम इसी अध्याय के ज्ञान पर आधारित हैं।