11.2 गति Notes

11.2 गति

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (यांत्रिकी) अध्याय: 11.2 गति विषय-वस्तु: गति के प्रकार, समीकरण

1. परिचय

जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन करती है, तो उसे गति कहते हैं। संदर्भ बिंदु (reference point) के सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति में होने वाले बदलाव को ही गति माना जाता है। उदाहरण के लिए चलती रेलगाड़ी में बैठा यात्री ट्रेन के सापेक्ष स्थिर होता है, परंतु प्लेटफार्म पर खड़े व्यक्ति के सापेक्ष वह गतिशील होता है। इससे स्पष्ट है कि गति एक सापेक्ष अवधारणा है। दैनिक जीवन में हम पृथ्वी को स्थिर मानकर वस्तुओं की गति का अध्ययन करते हैं।

गति का अध्ययन करते समय हम विभिन्न राशियों जैसे दूरी, विस्थापन, चाल, वेग और त्वरण का उपयोग करते हैं। इन राशियों के आधार पर ही गति के प्रकारों को वर्गीकृत किया जाता है। गति सरल रेखीय, वृत्तीय, आवर्ती, दोलन, घूर्णन या यादृच्छिक हो सकती है। जब कोई वस्तु एकसमान चाल से चलती है तो उसकी गति एकसमान गति कहलाती है, और जब चाल बदलती रहती है तो वह असमान गति कहलाती है। यह वर्गीकरण रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

रेलवे ग्रुप D जैसी परीक्षाओं में गति से संबंधित समीकरणों (गति के तीन समीकरण) पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न भी पूछे जाते हैं। गति के समीकरणों को जानकर किसी वस्तु का अंतिम वेग, तय दूरी या लगा समय आसानी से ज्ञात किया जा सकता है। इस अध्याय में हम गति के प्रकारों, एकसमान एवं असमान गति, और गति के तीन समीकरणों के साथ सवाल हल करने का अभ्यास करेंगे, जिससे परीक्षा में गति से जुड़े सभी प्रश्न सरल हो जाएँ।

2. गति के प्रकार

गति को उसके पथ और स्वरूप के आधार पर कई प्रकारों में बाँटा जाता है।

एकसमान और असमान गति: यदि कोई वस्तु समान समयांतराल में समान दूरी तय करती है तो वह एकसमान गति है। यदि समान समय में असमान दूरी तय होती है तो वह असमान गति है। एकसमान गति में चाल स्थिर रहती है जबकि असमान गति में चाल परिवर्तित होती रहती है।

उदाहरण 1: एक रेलगाड़ी प्रत्येक 5 मिनट में 6 किलोमीटर तय करती है। क्या यह एकसमान गति है? हल: हर समान समयांतराल (5 मिनट) में समान दूरी (6 किमी) तय हो रही है, अतः यह एकसमान गति है। उदाहरण 2: एक गेंद झुके हुए समतल पर लुढ़कती है। उसकी चाल समय के साथ बढ़ती है, इसलिए यह असमान (त्वरित) गति है।

3. गति के समीकरण

सरल रेखीय गति में एकसमान त्वरण के लिए तीन मुख्य समीकरण होते हैं। इनमें u = प्रारंभिक वेग, v = अंतिम वेग, a = त्वरण, t = समय और s = तय दूरी (विस्थापन) है।

गति समीकरणों का प्रयोग कब करें: जब वस्तु विराम से चले तो u = 0 रखें। जब वस्तु रुक जाए तो v = 0 रखें। गिरती हुई वस्तु के लिए त्वरण g (गुरुत्वीय त्वरण) होता है। इन समीकरणों का उपयोग केवल एकसमान त्वरण वाली गति के लिए ही करना चाहिए।

उदाहरण 3: एक रेलगाड़ी विराम से चलकर 20 मीटर/से² के एकसमान त्वरण से 5 सेकंड चलती है। उसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए। हल: u = 0, a = 20 मी/से², t = 5 से → v = u + at = 0 + 20 × 5 = 100 मी/से। उदाहरण 4: एक कार 10 मी/से के वेग से चल रही है और 2 मी/से² के एकसमान त्वरण से त्वरित होती है। 4 सेकंड में तय दूरी ज्ञात कीजिए। हल: s = ut + ½at² = 10×4 + ½×2×16 = 40 + 16 = 56 मीटर। उदाहरण 5: एक वस्तु 5 मी/से के वेग से चलते हुए 2 मी/से² के एकसमान त्वरण से 100 मीटर की दूरी तय करती है। अंतिम वेग ज्ञात कीजिए। हल: v² = u² + 2as = 25 + 2×2×100 = 25 + 400 = 425 → v = √425 ≈ 20.6 मी/से।

4. एकसमान एवं असमान गति की अवधारणा

गति के प्रकारों को समझने के लिए एकसमान और असमान गति का विस्तृत विश्लेषण आवश्यक है।

उदाहरण 6: एक वस्तु 20 मी/से की चाल से गति करते हुए ब्रेक लगाने पर 4 सेकंड में रुक जाती है। मंदन ज्ञात कीजिए। हल: u = 20 मी/से, v = 0, t = 4 से → a = (v − u)/t = (0 − 20)/4 = −5 मी/से²। मंदन = 5 मी/से²। उदाहरण 7: एक मोटरसाइकिल 30 मी/से के वेग से चल रही है; उसे 6 मी/से² के मंदन से रुकने में लगा समय ज्ञात कीजिए। हल: v = u + at → 0 = 30 + (−6)t → t = 30/6 = 5 सेकंड।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: गति के प्रकार

गति का प्रकार परिभाषा उदाहरण
सरल रेखीय गति सीधी रेखा में गति सीधी सड़क पर चलती कार
वृत्तीय गति वृत्ताकार पथ पर गति घड़ी की सुई
आवर्ती गति नियत समयांतराल पर दोहराव पेंडुलम का दोलन
घूर्णन गति अक्ष के परितः घूमना लट्टू, पृथ्वी का घूर्णन
यादृच्छिक गति अनिश्चित दिशा वाली गति गैस अणुओं की गति

तालिका 2: गति के समीकरण

क्रम समीकरण उपयोग
प्रथम v = u + at अंतिम वेग ज्ञात करना
द्वितीय s = ut + ½at² दूरी ज्ञात करना
तृतीय v² = u² + 2as समय न होने पर दूरी/वेग ज्ञात करना
त्वरण a = (v − u)/t त्वरण ज्ञात करना
औसत चाल कुल दूरी ÷ कुल समय समग्र चाल ज्ञात करना

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[गति] --> B[सरल रेखीय गति]
    A --> C[वृत्तीय गति]
    A --> D[आवर्ती गति]
    A --> E[घूर्णन गति]
    A --> F[यादृच्छिक गति]
    A --> G[गति के समीकरण]
    G --> H[v = u + at]
    G --> I[s = ut + ½at²]
    G --> J[v² = u² + 2as]
    A --> K[एकसमान गति]
    A --> L[असमान गति]
    K --> M[चाल स्थिर]
    L --> N[त्वरण या मंदन]
    N --> O[ऋणात्मक त्वरण]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

समय-दूरी ग्राफ: एकसमान और असमान गति समय (t) दूरी (s) एकसमान गति (सरल रेखा) असमान गति (वक्र) स्वर्ण नियम: एकसमान गति में दूरी-समय ग्राफ सरल रेखा होती है, वक्र गति में नहीं।

समय-वेग ग्राफ: त्वरण और दूरी समय (t) वेग (v) एकसमान त्वरण दूरी = वक्र के नीचे का क्षेत्रफल एकसमान चाल (त्वरण = 0) स्वर्ण नियम: समय-वेग ग्राफ का ढलान त्वरण तथा नीचे का क्षेत्रफल दूरी देता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. दूरी और विस्थापन को एक ही राशि मान लिया जाता है; दूरी अदिश है और विस्थापन सदिश।
  2. गति के समीकरणों को केवल एकसमान त्वरण के लिए ही लागू किया जा सकता है, यह भूल जाते हैं।
  3. तृतीय समीकरण में 2as के स्थान पर as लिखना सामान्य गलती है।
  4. वृत्तीय गति में चाल स्थिर रहने पर भी वेग बदलता है, इसे अनदेखा किया जाता है।
  5. मंदन (ऋणात्मक त्वरण) को धनात्मक मानकर गणना करना भूल है।
  6. u = 0 लिखने की बजाय बिना शर्तें देखे समीकरणों में मान रखना गलत उत्तर देता है।
  7. समय-वेग ग्राफ के क्षेत्रफल को त्वरण बताना सामान्य गलती है, क्षेत्रफल दूरी होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रश्न में प्रारंभिक वेग (u) और अंतिम वेग (v) को पहचानें; विराम का अर्थ u = 0 है।
  2. समीकरण चुनने से पहले तय करें कि कौन सी राशि ज्ञात करनी है और क्या दिया है।
  3. गति के तीनों समीकरणों को सूत्र रूप में कंठस्थ रखें तथा इकाइयों को एक प्रणाली में रखें।
  4. वृत्तीय गति में दिशा बदलने से वेग परिवर्तित होता है, अतः त्वरण होता है — यह ध्यान रखें।
  5. मंदन के प्रश्न में त्वरण को ऋणात्मक चिह्न के साथ रखें।
  6. ग्राफ वाले प्रश्नों में ढलान और क्षेत्रफल के अर्थ याद रखें: ढलान = त्वरण, क्षेत्रफल = दूरी।
  7. समय-दूरी के प्रश्न में औसत चाल के लिए कुल दूरी को कुल समय से भाग दें, दोनों चालों का औसत नहीं।

10. निष्कर्ष

गति यांत्रिकी का वह प्रारंभिक अध्याय है जो दूरी, विस्थापन, चाल, वेग और त्वरण की नींव पर टिका है। सरल रेखीय, वृत्तीय, आवर्ती और घूर्णन गति जैसे प्रकारों की पहचान और गति के तीन समीकरणों का सही प्रयोग ही परीक्षा में अधिकतर अंक दिलाता है। एकसमान और असमान गति तथा ग्राफों का विश्लेषण करने की क्षमता रेलवे ग्रुप D के प्रश्नपत्रों में बार-बार परखी जाती है। गति के समीकरणों का अभ्यास जितना अधिक होगा, संख्यात्मक प्रश्न उतने ही आसान लगेंगे। इस अध्याय की स्पष्ट समझ से आगे के अध्यायों अर्थात् बल, संवेग और ऊर्जा की अवधारणाओं को समझना भी सरल हो जाता है।