विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (यांत्रिकी) अध्याय: 11.7 गुरुत्वाकर्षण विषय-वस्तु: गुरुत्वाकर्षण, गुरुत्व त्वरण
ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है। वस्तुओं के बीच लगने वाले इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। यही बल पृथ्वी पर वस्तुओं को बाँधे रखता है, सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति सुनिश्चित करता है और चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा कराता है। न्यूटन ने 1687 में गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार किन्हीं दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह नियम ब्रह्मांड के सभी पिंडों पर समान रूप से लागू होता है।
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का गणितीय रूप है F = G × (m₁m₂)/r², जिसमें G गुरुत्वाकर्षण नियतांक है जिसका मान 6.67 × 10⁻¹¹ न्यूटन मी²/किग्रा² होता है। गुरुत्वाकर्षण बल की विशेषता यह है कि यह सदैव आकर्षण बल होता है, यह वस्तुओं के संपर्क के बिना (असंपर्क) लगता है और यह ब्रह्मांड का सबसे दुर्बल बल है, परंतु बड़े द्रव्यमानों के कारण इसका प्रभाव अत्यधिक होता है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गिरती वस्तु में जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्वीय त्वरण (g) कहते हैं, जिसका मान पृथ्वी तल पर लगभग 9.8 मी/से² है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा में गुरुत्वाकर्षण के नियम के सूत्र, G का मान, गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान, g की भिन्नता के कारण, ग्रहों की गति और केपलर के नियमों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। गुरुत्वीय बल से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न भी सामान्य हैं, जैसे दो द्रव्यमानों के बीच बल ज्ञात करना। इस अध्याय में गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम, गुरुत्वीय त्वरण, g के मान में भिन्नता और हल किए गए उदाहरणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके केंद्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
उदाहरण 1: दो वस्तुएँ क्रमशः 5 किग्रा और 5 किग्रा द्रव्यमान की हैं और इनके बीच की दूरी 1 मीटर है। गुरुत्वाकर्षण बल कितना होगा? हल: F = G × (5×5)/1² = 25G न्यूटन। उदाहरण 2: यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए तो गुरुत्वाकर्षण बल कितना हो जाएगा? हल: बल व्युत्क्रमानुपाती r² के, अतः बल चौथाई हो जाएगा।
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु में जो त्वरण उत्पन्न होता है, उसे गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं और इसे g से व्यक्त करते हैं।
उदाहरण 3: एक पत्थर को ऊँचाई से छोड़ा जाता है। 3 सेकंड बाद उसका वेग कितना होगा? (g = 10 मी/से²) हल: v = u + gt = 0 + 10 × 3 = 30 मी/से। उदाहरण 4: एक वस्तु को ऊपर फेंकने पर 2 सेकंड में उसकी चाल कितनी कम होगी? हल: ऊपर जाते समय त्वरण g का विरोध करता है; 2 सेकंड में चाल में कमी = g × t = 10 × 2 = 20 मी/से।
g (गुरुत्वीय त्वरण) और G (गुरुत्वाकर्षण नियतांक) में मूल अंतर यह है कि g स्थान पर निर्भर करता है जबकि G ब्रह्मांड में सर्वत्र समान रहता है।
उदाहरण 5: 10 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु का पृथ्वी पर भार ज्ञात कीजिए (g = 10 मी/से²)। हल: W = mg = 10 × 10 = 100 न्यूटन। उदाहरण 6: उसी वस्तु का चंद्रमा पर भार कितना होगा? हल: चंद्रमा पर g ≈ 1.63 मी/से², अतः W = 10 × 1.63 = 16.3 न्यूटन, यानी पृथ्वी के भार का लगभग छठा भाग। उदाहरण 7: 50 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु का भार पृथ्वी पर कितना होगा? हल: W = 50 × 9.8 = 490 न्यूटन।
केपलर के नियम: ग्रहों की गति से संबंधित तीन नियम – कक्षा का नियम (ग्रह अंडाकार कक्षा में चलते हैं), क्षेत्रफल का नियम (समान समय में समान क्षेत्रफल) और आवर्तकाल का नियम (T² ∝ r³)। रेलवे परीक्षाओं में इनके बारे में सामान्य प्रश्न पूछे जाते हैं।
| विशेषता | g (गुरुत्वीय त्वरण) | G (गुरुत्वाकर्षण नियतांक) |
|---|---|---|
| परिभाषा | गिरती वस्तु का त्वरण | नियतांक |
| मान | 9.8 मी/से² (पृथ्वी तल) | 6.67 × 10⁻¹¹ न्यूटन मी²/किग्रा² |
| स्थान पर निर्भरता | निर्भर करता है | नहीं करता |
| SI इकाई | मी/से² | न्यूटन मी²/किग्रा² |
| स्थिति | g का मान |
|---|---|
| ध्रुवों पर | अधिकतम |
| भूमध्य रेखा पर | न्यूनतम |
| ऊँचाई पर | घटता है |
| पृथ्वी के केंद्र पर | शून्य |
| चंद्रमा पर | पृथ्वी का ~1/6 |
flowchart TD
A[गुरुत्वाकर्षण] --> B[सार्वत्रिक नियम]
B --> C[F = G m₁m₂/r²]
B --> D[G = 6.67 × 10⁻¹¹]
A --> E[गुरुत्वीय त्वरण]
E --> F[g = 9.8 मी/से²]
E --> G[g = GM/R²]
A --> H[g में भिन्नता]
H --> I[ध्रुव पर अधिक]
H --> J[भूमध्य रेखा पर कम]
H --> K[केंद्र पर शून्य]
A --> L[भार]
L --> M[W = mg]
L --> N[चंद्रमा पर 1/6]
A --> O[केपलर के नियम]
गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड का वह मूलभूत बल है जो सभी द्रव्यमानों को परस्पर जोड़ता है, और न्यूटन का सार्वत्रिक नियम F = G m₁m₂/r² इसकी गणना का आधार है। गुरुत्वीय त्वरण (g = 9.8 मी/से²) गिरती वस्तुओं की गति निर्धारित करता है, जबकि G सर्वत्र समान नियतांक है। भार W = mg होने से चंद्रमा पर वस्तु का भार पृथ्वी का छठा भाग हो जाता है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में g और G के मान, उनमें अंतर, भार की गणना और g की भिन्नता से जुड़े प्रश्न आते हैं। इस अध्याय की समझ से द्रव्यमान, भार और मुक्त पतन जैसे आगे के विषय सरलता से समझ में आते हैं।