11.10 कार्य ऊर्जा और शक्ति Notes

11.10 कार्य ऊर्जा और शक्ति

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (यांत्रिकी) अध्याय: 11.10 कार्य ऊर्जा और शक्ति विषय-वस्तु: कार्य, ऊर्जा, शक्ति

1. परिचय

भौतिकी में कार्य (work) शब्द का अर्थ दैनिक जीवन से भिन्न है। किसी वस्तु पर बल लगने और वस्तु के बल की दिशा में विस्थापित होने पर ही कार्य हुआ माना जाता है। यदि केवल बल लगे परंतु वस्तु न चले, तो भौतिकी की दृष्टि से कार्य शून्य होता है। कार्य = बल × विस्थापन, अर्थात W = F × s। यदि बल और विस्थापन के बीच कोण θ हो तो कार्य W = F × s × cosθ होता है। कार्य की SI इकाई जूल (J) है, जो न्यूटन × मीटर के बराबर है। कार्य अदिश राशि है। CGS प्रणाली में कार्य की इकाई अर्ग होती है, और 1 जूल = 10⁷ अर्ग।

ऊर्जा (energy) वस्तु की कार्य करने की क्षमता है। किसी वस्तु में जितनी अधिक ऊर्जा होगी, वह उतना ही अधिक कार्य कर सकती है। ऊर्जा और कार्य की इकाई समान अर्थात जूल होती है। ऊर्जा के मुख्य दो प्रकार हैं – गतिज ऊर्जा (kinetic energy) जो गति के कारण होती है और स्थितिज ऊर्जा (potential energy) जो स्थिति या अवस्था के कारण होती है। गतिज ऊर्जा = ½mv² और स्थितिज ऊर्जा = mgh। ऊर्जा संरक्षण का नियम बताता है कि ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।

शक्ति (power) वह दर है जिस पर कार्य होता है। शक्ति = कार्य ÷ समय, अर्थात P = W/t। शक्ति की SI इकाई वाट (W) है, जो जूल प्रति सेकंड के बराबर है। बड़ी शक्ति के लिए किलोवाट (1 किलोवाट = 1000 वाट) और अश्वशक्ति (1 अश्वशक्ति = 746 वाट) इकाइयाँ प्रयोग होती हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में कार्य, ऊर्जा और शक्ति के सूत्र, उनकी इकाइयाँ, गतिज-स्थितिज ऊर्जा की गणना और ऊर्जा संरक्षण पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में इन सभी का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. कार्य

कार्य की अवधारणा और उसकी गणना के लिए सूत्रों को समझना आवश्यक है।

उदाहरण 1: 10 न्यूटन का बल लगाकर किसी वस्तु को 5 मीटर बल की दिशा में विस्थापित किया जाता है। कार्य ज्ञात कीजिए। हल: W = F × s = 10 × 5 = 50 जूल। उदाहरण 2: 20 न्यूटन का बल लगाने पर वस्तु 3 मीटर चलती है, परंतु बल और विस्थापन में 60° का कोण है। कार्य ज्ञात कीजिए (cos60° = 0.5)। हल: W = 20 × 3 × 0.5 = 30 जूल। उदाहरण 3: एक व्यक्ति अपने सिर पर भार रखकर समतल सड़क पर 10 मीटर चलता है। किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। हल: बल ऊपर की ओर है और विस्थापन क्षैतिज, θ = 90°, अतः कार्य शून्य है।

3. ऊर्जा: गतिज और स्थितिज

ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है और इसकी इकाई भी जूल है। ऊर्जा के दो मुख्य रूप हैं।

उदाहरण 4: 2 किलोग्राम की वस्तु 10 मी/से के वेग से चल रही है। उसकी गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। हल: KE = ½ × 2 × 10² = 100 जूल। उदाहरण 5: 5 किलोग्राम की वस्तु 10 मीटर की ऊँचाई पर रखी है (g = 10 मी/से²)। स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। हल: PE = mgh = 5 × 10 × 10 = 500 जूल। उदाहरण 6: यदि वेग दोगुना कर दिया जाए तो गतिज ऊर्जा कितनी गुनी हो जाएगी? हल: KE ∝ v², अतः चार गुनी हो जाएगी।

4. शक्ति और संख्यात्मक उदाहरण

शक्ति कार्य करने की दर है और इसका सूत्र तथा अनुप्रयोग परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।

उदाहरण 7: एक मशीन 20 सेकंड में 400 जूल कार्य करती है। शक्ति ज्ञात कीजिए। हल: P = W/t = 400/20 = 20 वाट। उदाहरण 8: एक व्यक्ति 40 किलोग्राम का भार 2 मीटर ऊँचाई पर 4 सेकंड में उठाता है (g = 10 मी/से²)। शक्ति ज्ञात कीजिए। हल: कार्य = mgh = 40 × 10 × 2 = 800 जूल; शक्ति = 800/4 = 200 वाट। उदाहरण 9: 100 वाट का बल्ब प्रतिदिन 5 घंटे जलता है। 1 दिन में खपत ऊर्जा kWh में ज्ञात कीजिए। हल: ऊर्जा = शक्ति × समय = 100 × 5 = 500 वाट-घंटा = 0.5 किलोवाट-घंटा।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: कार्य, ऊर्जा और शक्ति के सूत्र

राशि सूत्र SI इकाई
कार्य W = F × s × cosθ जूल
गतिज ऊर्जा KE = ½mv² जूल
स्थितिज ऊर्जा PE = mgh जूल
शक्ति P = W/t वाट
शक्ति (वेग रूप) P = F × v वाट

तालिका 2: इकाइयों का परिवर्तन

इकाई मान
1 जूल 10⁷ अर्ग
1 वाट 1 जूल/सेकंड
1 किलोवाट 1000 वाट
1 अश्वशक्ति 746 वाट
1 किलोवाट-घंटा 3.6 × 10⁶ जूल

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[कार्य ऊर्जा शक्ति] --> B[कार्य]
    B --> C[W = F × s × cosθ]
    B --> D[इकाई जूल]
    A --> E[ऊर्जा]
    E --> F[गतिज ऊर्जा ½mv²]
    E --> G[स्थितिज ऊर्जा mgh]
    E --> H[संरक्षण नियम]
    A --> I[शक्ति]
    I --> J[P = W/t]
    I --> K[इकाई वाट]
    A --> L[इकाई परिवर्तन]
    L --> M[1 जूल = 10⁷ अर्ग]
    L --> N[1 अश्वशक्ति = 746 वाट]
    L --> O[1 किलोवाट-घंटा = 3.6 × 10⁶ जूल]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

गतिज ऊर्जा और वेग का संबंध वेग (v) गतिज ऊर्जा KE = ½mv² (परवलय) वेग 2 गुना → ऊर्जा 4 गुना वेग 3 गुना → ऊर्जा 9 गुना स्वर्ण नियम: गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है; वेग दोगुना करने पर ऊर्जा चार गुनी।

ऊर्जा संरक्षण: स्थितिज से गतिज m पृथ्वी ऊपर: स्थितिज अधिक बीच: दोनों बराबर होते जाते हैं नीचे: गतिज अधिकतम स्वर्ण नियम: ऊर्जा न तो उत्पन्न होती है और न नष्ट, केवल रूप बदलती है; कुल ऊर्जा स्थिर रहती है। g = 10 मी/से² पर 2 किग्रा × 10 मी की स्थितिज ऊर्जा = 200 जूल।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. दीवार को धकेलने पर उसका कार्य होता है, यह गलत धारणा है; विस्थापन शून्य होने से कार्य शून्य है।
  2. सिर पर भार लेकर चलने पर कार्य होता है, यह भ्रांति है; बल लंबवत होने से कार्य शून्य है।
  3. गतिज ऊर्जा के सूत्र को mv² लिख देना गलत है; सही सूत्र ½mv² है।
  4. शक्ति की इकाई को जूल लिख दिया जाता है; शक्ति की इकाई वाट है।
  5. कार्य और शक्ति को एक ही राशि मान लिया जाता है; शक्ति कार्य की दर है।
  6. वेग दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा दोगुनी होती है, यह गलत है; ऊर्जा चार गुनी होती है।
  7. 1 अश्वशक्ति का मान 1000 वाट मान लिया जाता है; सही मान 746 वाट है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. कार्य के प्रश्न में सबसे पहले जाँचें कि बल की दिशा में विस्थापन है या नहीं; न होने पर कार्य शून्य।
  2. गतिज ऊर्जा में ½ का गुणक न भूलें; KE = ½mv²।
  3. स्थितिज ऊर्जा के प्रश्न में m, g और h सभी का गुणनफल लें।
  4. शक्ति के प्रश्न में कार्य को जूल और समय को सेकंड में रखें, तभी उत्तर वाट में आता है।
  5. इकाई परिवर्तन याद रखें: 1 जूल = 10⁷ अर्ग, 1 kWh = 3.6 × 10⁶ जूल, 1 अश्वशक्ति = 746 वाट।
  6. विद्युत ऊर्जा के प्रश्न में शक्ति (वाट) को घंटे से गुणा करके किलोवाट-घंटा में बदलें।
  7. ऊर्जा संरक्षण के प्रश्न में कुल ऊर्जा सदैव स्थिर रखें, केवल रूप बदलते हैं।

10. निष्कर्ष

कार्य बल और विस्थापन का गुणनफल है जिसकी SI इकाई जूल है, और बल की दिशा में विस्थापन न होने पर कार्य शून्य होता है। ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है जो गतिज (½mv²) और स्थितिज (mgh) रूपों में पाई जाती है, और ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार कुल ऊर्जा सदैव स्थिर रहती है। शक्ति कार्य की दर है जिसकी इकाई वाट है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में कार्य, ऊर्जा और शक्ति के सूत्र, उनकी इकाइयाँ और उन पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न नियमित रूप से आते हैं। इन अवधारणाओं और इकाई परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से समझने से इस अध्याय के सभी प्रश्न सरलता से हल हो जाते हैं, और यह यांत्रिकी के पूरे विषय की तैयारी का अंतिम और महत्वपूर्ण हिस्सा है।