विषय: रेलवे ग्रुप D – तर्कशक्ति (तार्किक और विश्लेषणात्मक तर्क) अध्याय: 9.7 निर्णय लेना विषय-वस्तु: दिए गए कथनों से सर्वोत्तम निर्णय
निर्णय लेना (Decision Making) तर्कशक्ति का वह विषय है जिसमें किसी परिस्थिति या समस्या का वर्णन दिया जाता है और उसके नीचे कुछ विकल्प प्रस्तुत किए जाते हैं। परीक्षार्थी को सबसे उपयुक्त और तर्कसंगत निर्णय का चयन करना होता है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में इस विषय से नियमित रूप से दो से तीन प्रश्न पूछे जाते हैं, जिन्हें सही दृष्टिकोण और अभ्यास से शीघ्रता से हल किया जा सकता है।
इस प्रकार के प्रश्नों में कभी-कभी परिस्थिति के साथ कुछ शर्तें या मानदंड दिए होते हैं, और पूछा जाता है कि किस स्थिति में आवेदक या कार्यवाही योग्य है। कभी-कभी समस्या के निवारण हेतु कुछ कार्यवाहियाँ दी जाती हैं, जिनमें से सबसे उपयुक्त तथा सबसे अनुपयुक्त कार्यवाही का चयन करना होता है। परीक्षार्थी को निर्णय लेते समय तटस्थ, व्यावहारिक और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
इस अध्याय में हम निर्णय लेने की अवधारणा, शर्तों वाली परिस्थितियों का विश्लेषण, सर्वोत्तम कार्यवाही चुनने की विधियाँ, अनेक हल किए गए उदाहरण तथा सामान्य गलतियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। अंत में त्वरित पुनरावृत्ति के लिए तालिकाएँ, माइंड मैप और महत्वपूर्ण आरेख भी दिए गए हैं।
निर्णय (Decision): किसी समस्या या परिस्थिति में उपलब्ध विकल्पों में से सबसे उपयुक्त कार्यवाही या विकल्प का चयन ही निर्णय कहलाता है। एक अच्छा निर्णय वह होता है जो न्यायसंगत, व्यावहारिक और अधिकतम लाभ तथा न्यूनतम हानि वाला हो।
निर्णय लेने के प्रकार:
निर्णय का आधार: अच्छा निर्णय उसी परिस्थिति की वस्तुनिष्ठ जानकारी पर आधारित होता है, न कि व्यक्तिगत भावनाओं पर। निर्णय करते समय पक्षपात, डर और अतिरेक से बचना चाहिए। सामान्य नियम है कि जो विकल्प समस्या की जड़ को दूर करता है, दूसरों के हितों की रक्षा करता है तथा नियमों का पालन करता है, वही सर्वोत्तम निर्णय होता है।
चरम विकल्पों से बचाव: "सब कुछ छोड़ देना", "सबको बर्खास्त कर देना", "किसी को कुछ नहीं बताना" जैसे चरम विकल्प प्रायः गलत होते हैं। संतुलित, क्रमिक और तर्कसंगत विकल्प ही सही उत्तर होते हैं।
पहली विधि – समस्या की पहचान: पहले स्पष्ट कीजिए कि परिस्थिति में मूल समस्या क्या है। यदि विद्यालय में पढ़ाई में गिरावट आई है तो समस्या शिक्षण व्यवस्था है, न कि केवल छात्रों की शरारत। समस्या की सही पहचान से ही सही निर्णय संभव है।
दूसरी विधि – विकल्पों का विश्लेषण: प्रत्येक विकल्प को पढ़कर तीन प्रश्न पूछिए। पहला, क्या यह समस्या का समाधान करता है? दूसरा, क्या यह किसी को अनुचित हानि पहुंचाता है? तीसरा, क्या यह व्यावहारिक है? इन तीनों में यदि उत्तर हाँ, हाँ, हाँ है तो विकल्प प्रबल उम्मीदवार है।
तीसरी विधि – उन्मूलन तकनीक (Elimination): पहले स्पष्ट रूप से गलत विकल्पों को हटाइए। जो विकल्प समस्या से असंबंधित हो, विपरीत हो, चरम हो या तर्कहीन हो, उसे तुरंत हटाइए। शेष विकल्पों में से सबसे संतुलित को चुनिए।
चौथी विधि – शर्तों की जाँच: यदि परिस्थिति के साथ शर्तें दी गई हैं तो प्रत्येक आवेदक को प्रत्येक शर्त से मिलाइए। कुछ शर्तें अनिवार्य होती हैं और कुछ वैकल्पिक। सभी अनिवार्य शर्तें पूरी होने पर ही पात्रता स्वीकार की जाती है। इसके लिए तालिका बनाकर चिह्न लगाना सबसे सुरक्षित तरीका है।
पाँचवीं विधि – प्राथमिकता का नियम: सर्वोत्तम निर्णय वह है जो सबसे पहले जान-माल की रक्षा करता है, फिर नियमों का पालन सुनिश्चित करता है और अंत में सुविधा बढ़ाता है। सुरक्षा संबंधी विकल्प हमेशा सुविधा संबंधी विकल्प से ऊपर माने जाते हैं।
उदाहरण 1: परिस्थिति: "एक छात्र परीक्षा के दौरान अचानक बेहोश हो गया।" निम्न में से सर्वोत्तम कार्यवाही कौन-सी है? विकल्प: (क) परीक्षा जारी रखना, (ख) छात्र को तुरंत चिकित्सा सहायता दिलाना, (ग) उसे अकेला छोड़ देना, (घ) सभी परीक्षार्थियों को घर भेज देना।
हल: चरण 1: समस्या है बेहोश हुए छात्र का स्वास्थ्य। चरण 2: विकल्प क और घ चरम हैं और समस्या का समाधान नहीं करते। चरण 3: विकल्प ग अनुचित और खतरनाक है। चरण 4: विकल्प ख सुरक्षा प्राथमिकता का पालन करता है। उत्तर: (ख) छात्र को तुरंत चिकित्सा सहायता दिलाना।
उदाहरण 2: परिस्थिति: "ट्रेन के पटरी से उतर जाने के कारण बड़ी संख्या में यात्री घायल हो गए।" सर्वोत्तम कार्यवाही कौन-सी है? विकल्प: (क) केवल मुआवजे की घोषणा करना, (ख) घायलों का तत्काल उपचार और बचाव दल भेजना, (ग) दुर्घटना की बात छिपाना, (घ) अगली ट्रेन भी रोक देना।
हल: चरण 1: प्राथमिकता है घायलों की जान बचाना। चरण 2: विकल्प ग अनैतिक है, घ अनावश्यक है। चरण 3: क केवल घोषणा है जो तत्काल सहायता नहीं देती। चरण 4: ख जीवन की रक्षा को प्राथमिकता देता है। उत्तर: (ख) घायलों का तत्काल उपचार और बचाव दल भेजना।
उदाहरण 3: शर्तें: "रोजगार के लिए आवेदक की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच हो, अंग्रेजी में 60 प्रतिशत अंक हों और वाहन चलाने का लाइसेंस हो।" रमेश की आयु 22 वर्ष है, अंग्रेजी में 55 प्रतिशत अंक हैं और लाइसेंस है। रमेश पात्र है या नहीं?
हल: चरण 1: आयु शर्त 18 से 25 के बीच है, 22 इस सीमा में है, शर्त पूरी। चरण 2: अंक शर्त 60 प्रतिशत है, रमेश के 55 प्रतिशत हैं, शर्त पूरी नहीं। चरण 3: लाइसेंस उपलब्ध है, शर्त पूरी। चरण 4: एक अनिवार्य शर्त पूरी न होने पर पात्रता नहीं बनती। उत्तर: रमेश पात्र नहीं है, क्योंकि उसके अंक न्यूनतम सीमा से कम हैं।
उदाहरण 4: परिस्थिति: "कार्यालय में अधिकांश कर्मचारी समय से पहुंचने में देरी कर रहे हैं।" सर्वोत्तम कार्यवाही कौन-सी है? विकल्प: (क) सभी कर्मचारियों को बर्खास्त कर देना, (ख) देरी के कारण जानकर उचित व्यवस्था करना, (ग) कोई कार्यवाही न करना, (घ) समय बदलने की मांग करना।
हल: चरण 1: समस्या की जड़ पता करनी चाहिए, जैसे परिवहन की कमी। चरण 2: क चरम है, ग लापरवाही है। चरण 3: घ बिना जानकारी के समय बदलना तर्कहीन है। चरण 4: ख समस्या का समाधान खोजता है। उत्तर: (ख) देरी के कारण जानकर उचित व्यवस्था करना।
उदाहरण 5: शर्तें: "छात्रवृत्ति हेतु परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम, पिछली परीक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक और विद्यालय का अनुशंसा पत्र आवश्यक है।" सीता की आयु चार लाख, अंक 80 प्रतिशत और अनुशंसा पत्र है। सीता पात्र है?
हल: चरण 1: आय शर्त दो लाख से कम है, सीता की आय चार लाख है, शर्त पूरी नहीं। चरण 2: अंक शर्त पूरी है। चरण 3: अनुशंसा पत्र उपलब्ध है। चरण 4: आय शर्त पूरी न होने से पात्रता नहीं बनती। उत्तर: सीता पात्र नहीं है, क्योंकि उसकी पारिवारिक आय अधिक है।
उदाहरण 6: परिस्थिति: "रेलवे स्टेशन पर एक अधेड़ व्यक्ति को सीने में दर्द की शिकायत हुई।" सर्वोत्तम कार्यवाही कौन-सी है? विकल्प: (क) उसे स्टेशन से बाहर करना, (ख) स्टेशन के चिकित्सक को बुलाना, (ग) उसे स्वयं दवा देना, (घ) अन्य यात्रियों की सलाह लेना।
हल: चरण 1: स्वास्थ्य आपात स्थिति है। चरण 2: क अनुचित है, ग बिना जानकारी के दवा खतरनाक है। चरण 3: घ में विलंब होगा। चरण 4: ख चिकित्सकीय सहायता का सुरक्षित रास्ता है। उत्तर: (ख) स्टेशन के चिकित्सक को बुलाना।
| निर्णय का प्रकार | विशेषता | उद्देश्य |
|---|---|---|
| सर्वोत्तम कार्यवाही | विकल्पों में से चुनाव | समस्या का समाधान |
| शर्तों वाली पात्रता | मानदंडों की जाँच | न्यायसंगत चयन |
| आपात परिस्थिति | तत्काल कार्यवाही | जान-माल की रक्षा |
| मूल्यांकन | दो विकल्पों की तुलना | तर्कसंगत निष्कर्ष |
| पहचान बिंदु | उपयुक्त निर्णय | अनुपयुक्त निर्णय |
|---|---|---|
| समाधान | समस्या की जड़ दूर करे | सतही बात करे |
| हानि | न्यूनतम अनुचित हानि | किसी को नुकसान |
| व्यावहारिकता | संभव और क्रमिक | असंभव या अतिशय |
| नियम | नियमों का पालन | नियमों का उल्लंघन |
| भावना | तटस्थ दृष्टिकोण | पक्षपात या डर |
flowchart TD
A[9.7 निर्णय लेना] --> B[समस्या पहचानें]
B --> C[विकल्प पढ़ें]
C --> D[अनुपयुक्त हटाएं]
D --> E[चरम विकल्प अस्वीकार]
D --> F[असंबंधित विकल्प अस्वीकार]
C --> G[शर्तें जाँचें]
G --> H[सभी अनिवार्य शर्तें पूरी]
H --> I[पात्र घोषित करें]
C --> J[सुरक्षा प्राथमिकता]
J --> K[जान-माल की रक्षा वाला निर्णय]
I --> L[सर्वोत्तम निर्णय]
K --> L
समस्या के बजाय व्यक्ति पर ध्यान देना: परीक्षार्थी समस्या के समाधान के बजाय किसी व्यक्ति को दोष देने वाले विकल्प चुन लेते हैं, जो प्रायः गलत होता है।
चरम विकल्प चुनना: "सबको बर्खास्त करना", "सब बंद कर देना" जैसे अतिवादी विकल्पों को सही मान लेना सबसे बड़ी गलती है।
शर्तों की जाँच में जल्दबाजी: केवल कुछ शर्तें पढ़कर पात्रता घोषित करना, जबकि सभी अनिवार्य शर्तें पूरी होना आवश्यक है।
भावनात्मक विकल्प चुनना: जो विकल्प सहानुभूति पर आधारित हो पर व्यावहारिक न हो, उसे सही मानना गलत है।
तत्काल बनाम दीर्घकालिक में भ्रम: केवल तत्काल राहत देने वाले विकल्प को हमेशा सही मानना, जबकि जड़ से समाधान करने वाला विकल्प अधिक उपयुक्त होता है।
सुरक्षा को कम आंकना: सुविधा या आराम बढ़ाने वाले विकल्प को सुरक्षा बढ़ाने वाले विकल्प से श्रेष्ठ मान लेना गलत है।
प्रत्येक विकल्प को पढ़कर पूछें कि क्या यह समस्या की जड़ को दूर करता है, यदि नहीं तो हटाएं।
जिन विकल्पों में चरम शब्द हों या पूर्ण अस्वीकृति हो, उन्हें पहले ही खारिज कर दें।
शर्तों वाले प्रश्नों में पहले सभी शर्तें लिखें, फिर आवेदक का विवरण मिलाकर चिह्न लगाएं।
सुरक्षा संबंधी विकल्प को प्राथमिकता दें; जान-माल की रक्षा करने वाला निर्णय प्रायः सही होता है।
यदि दो विकल्प समान लगें तो जो अधिक न्यायसंगत और नियमों के अनुकूल हो, उसे चुनें।
समय बचाने के लिए उन्मूलन तकनीक का उपयोग करें, तीन गलत विकल्प हटाने पर चौथा स्वतः सही होता है।
निर्णय लेना तर्कशक्ति का वह व्यावहारिक विषय है जो परीक्षार्थी की सूझ-बूझ, तटस्थता और व्यावहारिक सोच का परीक्षण करता है। समस्या की सही पहचान, विकल्पों का विश्लेषण, चरम विकल्पों का बहिष्कार और सुरक्षा को प्राथमिकता देना इस अध्याय के प्रमुख स्तंभ हैं। जो परीक्षार्थी हल किए गए उदाहरणों का अभ्यास करेगा और स्वर्णिम नियमों का पालन करेगा, वह न केवल निर्णय लेने के प्रश्नों को सटीक हल करेगा बल्कि पूरे तर्कशक्ति अनुभाग में आत्मविश्वास के साथ अंक अर्जित करेगा।