10.6 आकृति श्रृंखला Notes

10.6 आकृति श्रृंखला

विषय: रेलवे ग्रुप D – तर्कशक्ति (आँकड़े और गैर-मौखिक तर्क) अध्याय: 10.6 आकृति श्रृंखला विषय-वस्तु: आकृति श्रृंखला पूर्ण करना

1. परिचय

आकृति श्रृंखला (Figure Series) गैर-मौखिक तर्क का महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें आकृतियों का एक क्रम दिया जाता है जो एक निश्चित नियम के अनुसार चलता है। क्रम में एक आकृति लुप्त होती है, जिसे दिए गए विकल्पों में से चुनना होता है। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में यह विषय लगभग हर वर्ष पूछा जाता है। इन प्रश्नों का उद्देश्य उम्मीदवार की यह क्षमता परखना है कि वह आकृतियों में होने वाले क्रमबद्ध परिवर्तन को पहचानकर अगले चरण का पूर्वानुमान कर सके।

श्रृंखला के प्रश्नों में परिवर्तन विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं - आकृति का घूर्णन, तत्वों की संख्या में वृद्धि या कमी, छायांकन में परिवर्तन, स्थिति का खिसकना, आकार का बढ़ना-घटना या तत्वों का जुड़ना-हटना। कई बार दो अलग-अलग नियम एक साथ चलते हैं, जैसे बाहरी आकृति घूमती है और भीतरी तत्व की संख्या बढ़ती है। ऐसे में दोनों नियमों को अलग-अलग पहचानना आवश्यक है।

इस अध्याय में हम श्रृंखला के प्रकार, नियम पहचानने की विधि तथा चरण-दर-चरण हल किए गए उदाहरण सीखेंगे। अभ्यास के दौरान आकृति के प्रत्येक अंग को अलग-अलग देखने की आदत बनानी चाहिए, क्योंकि इसी से छिपे हुए नियम प्रकट होते हैं।

2. आकृति श्रृंखला के प्रमुख नियम

श्रृंखला के प्रश्नों में प्रयुक्त प्रमुख नियम निम्न हैं:

घूर्णन (Rotation): प्रत्येक चरण में आकृति एक निश्चित कोण से घूमती है। उदाहरण: त्रिभुज प्रत्येक चरण में 90° घड़ी की दिशा में घूमता है।

संख्या में वृद्धि-कमी: तत्वों की संख्या एक निश्चित अंतर से बढ़ती या घटती है। उदाहरण: 1, 2, 3, 4 बिंदु।

छायांकन परिवर्तन: छायांकन एक क्रम से जुड़ता या हटता है, या छायांकित क्षेत्र घूमता है।

स्थिति खिसकना: तत्व एक चरण में एक निश्चित दिशा में खिसकता है, जैसे भीतरी वृत्त ऊपर से नीचे की ओर।

आकार परिवर्तन: आकृति का आकार धीरे-धीरे बढ़ता या घटता है।

तत्वों का जुड़ना-हटना: प्रत्येक चरण में एक नया तत्व जुड़ता है या कोई तत्व हटता है।

एकांतर नियम: कभी-कभी वैकल्पिक आकृतियों में अलग-अलग नियम चलते हैं, जैसे विषम स्थानों पर एक नियम और सम स्थानों पर दूसरा।

आंतरिक-बाह्य संबंध: भीतर और बाहर की आकृतियों में क्रमबद्ध परिवर्तन होता है।

3. नियम पहचानने की विधि

श्रृंखला का नियम पहचानने के लिए निम्न चरण अपनाएँ:

  1. पहले दो या तीन आकृतियों की तुलना करें और पहचानें कि कौन-सा तत्व बदल रहा है।
  2. आकृति के प्रत्येक अंग को अलग-अलग देखें - बाहरी आकृति, भीतरी तत्व, छायांकन, स्थिति।
  3. घूर्णन हो तो उसका कोण और दिशा निश्चित करें।
  4. संख्या बदल रही हो तो वृद्धि या कमी का अंतर ज्ञात करें।
  5. नियम को कम से कम दो या तीन चरणों पर जाँचें।
  6. लुप्त आकृति के स्थान पर विकल्पों को लगाकर जाँचें कि पूरा क्रम सही चलता है।
  7. दो नियम चल रहे हों तो दोनों की अलग-अलग पुष्टि करें।

महत्वपूर्ण बात: यदि श्रृंखला में दोनों छोर से नियम लगता है, तो विकल्पों को रखकर यह भी देखें कि उत्तर आकृति अगली आकृति की ओर ले जाती है या नहीं।

4. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: श्रृंखला में आकृतियाँ 1 बिंदु, 2 बिंदु, 3 बिंदु, ? हैं। लुप्त आकृति में कितने बिंदु होंगे? हल: नियम - प्रत्येक चरण में एक बिंदु बढ़ता है। अतः उत्तर में 4 बिंदु होंगे।

उदाहरण 2: श्रृंखला की पहली आकृति में त्रिभुज ऊपर की ओर है, दूसरी में दाईं ओर, तीसरी में नीचे की ओर, चौथी में बाईं ओर। पाँचवीं में कौन-सी दिशा होगी? हल: नियम - 90° घड़ी की दिशा में घूर्णन। अतः पाँचवीं आकृति में त्रिभुज फिर ऊपर की ओर होगा।

उदाहरण 3: श्रृंखला में छायांकित वृत्त, खाली वृत्त, छायांकित वृत्त, ? है। लुप्त आकृति कौन-सी होगी? हल: नियम - छायांकन और खालीपन का एकांतर। अतः उत्तर खाली वृत्त होगा।

उदाहरण 4: श्रृंखला में वृत्त, वृत्त के भीतर रेखा, वृत्त के भीतर दो रेखाएँ, ? है। लुप्त आकृति कौन-सी होगी? हल: नियम - प्रत्येक चरण में एक रेखा जुड़ती है। अतः उत्तर में तीन रेखाएँ होंगी।

उदाहरण 5: श्रृंखला में छोटा वृत्त, मध्यम वृत्त, बड़ा वृत्त, ? है। लुप्त आकृति कौन-सी होगी? हल: नियम - आकार में क्रमिक वृद्धि। अतः उत्तर सबसे बड़ा वृत्त होगा।

उदाहरण 6: श्रृंखला में वर्ग, वर्ग और वृत्त, वर्ग और दो वृत्त, ? है। लुप्त आकृति कौन-सी होगी? हल: नियम - प्रत्येक चरण में एक वृत्त जुड़ता है। अतः उत्तर में वर्ग और तीन वृत्त होंगे।

उदाहरण 7: श्रृंखला में बड़ा त्रिभुज, मध्यम त्रिभुज, छोटा त्रिभुज, ? है। लुप्त आकृति कौन-सी होगी? हल: नियम - आकार में क्रमिक कमी। अतः उत्तर सबसे छोटा त्रिभुज होगा।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: श्रृंखला के नियम

नियम उदाहरण
घूर्णन 90° या 180° घड़ी की दिशा में
संख्या वृद्धि 1, 2, 3, 4 बिंदु
संख्या कमी 8, 6, 4, 2 रेखाएँ
छायांकन भरा, खाली, भरा, खाली
आकार वृद्धि छोटा, मध्यम, बड़ा
तत्व जुड़ना वृत्त के साथ रेखाएँ जुड़ना

तालिका 2: घूर्णन के कोण

कोण दिशा
90° चौथाई घूर्णन
180° आधा घूर्णन
270° तीन-चौथाई घूर्णन
45° आठवाँ भाग घूर्णन

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[10.6 आकृति श्रृंखला] --> B[पहले चरणों की तुलना]
    A --> C[नियम पहचानें]
    B --> C
    C --> D[घूर्णन]
    C --> E[संख्या परिवर्तन]
    C --> F[छायांकन]
    C --> G[आकार परिवर्तन]
    C --> H[स्थिति खिसकना]
    D --> I[लुप्त आकृति ज्ञात करें]
    E --> I
    F --> I
    G --> I
    H --> I
    I --> J[विकल्पों में जाँच करें]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

घूर्णन पर आधारित आकृति श्रृंखला पहली दूसरी तीसरी चौथी पाँचवीं छठी स्वर्ण नियम: घूर्णन का कोण और दिशा पहले निश्चित करें।

संख्या वृद्धि पर आधारित श्रृंखला 1 बिंदु 2 बिंदु 3 बिंदु 4 बिंदु स्वर्ण नियम: संख्या वृद्धि का अंतर हर चरण में समान रखें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. पहले दो चरणों से नियम बनाकर बाद के चरणों में उसकी पुष्टि न करना।
  2. घूर्णन की दिशा (घड़ी या उल्टी) और कोण की गलत पहचान करना।
  3. दो नियमों वाली श्रृंखला में केवल एक नियम लागू करना।
  4. छायांकन में हो रहे परिवर्तन को अनदेखा करना।
  5. विकल्पों में से केवल अगली आकृति से मिलान करना, पूरे क्रम से नहीं।
  6. एकांतर नियम को न पहचानना, जबकि विषम-सम चरणों में अलग नियम चलते हैं।
  7. आकार में हो रही सूक्ष्म वृद्धि-कमी को न पहचानना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. पहले दो या तीन चरणों से नियम निश्चित करें, फिर उसे बाद के चरणों पर जाँचें।
  2. आकृति के बाहरी और भीतरी भाग को अलग-अलग देखें।
  3. घूर्णन में कोण और दिशा दोनों पर ध्यान दें।
  4. एकांतर चरणों में अलग नियम होने पर विषम-सम स्थानों की तुलना करें।
  5. लुप्त आकृति के स्थान पर विकल्प रखकर पूरे क्रम की सुसंगतता जाँचें।
  6. छायांकन, रंग और स्थिति में होने वाले हर परिवर्तन को नोट करें।

10. निष्कर्ष

आकृति श्रृंखला में छिपे नियम की सही पहचान ही सफलता की कुंजी है। घूर्णन, संख्या, छायांकन, आकार और स्थिति के परिवर्तनों को अलग-अलग पहचानकर तथा उनकी पुष्टि करके लुप्त आकृति को शीघ्र ज्ञात किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से यह विषय परीक्षा में सुनिश्चित अंक दिलाने वाला बन जाता है।