विषय: रेलवे NTPC – कंप्यूटर ज्ञान
अध्याय: 19.4 कंप्यूटर सॉफ्टवेयर
विषय-वस्तु: सॉफ्टवेयर प्रकार
1. परिचय
सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के निर्देशों और प्रोग्रामों का समूह है जो हार्डवेयर को कार्य करने का मार्ग दिखाता है। यदि हार्डवेयर कंप्यूटर का शरीर है, तो सॉफ्टवेयर उसकी आत्मा कहलाता है। बिना सॉफ्टवेयर के कंप्यूटर केवल एक निर्जीव मशीन होता है, क्योंकि सॉफ्टवेयर ही निर्धारित करता है कि कंप्यूटर किस प्रकार का कार्य करेगा। रेलवे NTPC परीक्षा में सॉफ्टवेयर के प्रकार, उनकी विशेषताओं और प्रमुख उदाहरणों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
सॉफ्टवेयर को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है: सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर। सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के आंतरिक संसाधनों को नियंत्रित करता है और हार्डवेयर तथा उपयोगकर्ता के बीच सेतु का कार्य करता है, जबकि एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता के विशिष्ट कार्यों जैसे टाइपिंग, गणना, डिज़ाइन आदि को पूरा करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम, ड्राइवर और कंपाइलर सिस्टम सॉफ्टवेयर के उदाहरण हैं, जबकि MS Word, MS Excel और गेम एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण हैं।
इस अध्याय में हम सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे। साथ ही फ्रीवेयर, शेयरवेयर, कंपाइलर, इंटरप्रेटर जैसी अवधारणाओं को भी स्पष्ट किया जाएगा। सॉफ्टवेयर के वर्गीकरण की स्पष्ट समझ परीक्षा में सॉफ्टवेयर संबंधी प्रश्नों को शीघ्रता से हल करने में सहायक सिद्ध होगी।
2. सिस्टम सॉफ्टवेयर
परिभाषा: सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर प्रणाली के आंतरिक संसाधनों, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच समन्वय का कार्य करता है। यह कंप्यूटर को चालू करने, उसके संसाधनों को प्रबंधित करने और अन्य सॉफ्टवेयर को चलाने में सहायता करता है। यह उपयोगकर्ता के बजाय कंप्यूटर प्रणाली के लिए कार्य करता है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रमुख घटक:
ऑपरेटिंग सिस्टम (OS): कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण सिस्टम सॉफ्टवेयर। यह मेमोरी, प्रोसेसर, फाइलों और डिवाइसों का प्रबंधन करता है। उदाहरण: विंडोज़, लिनक्स, मैक ओएस, एंड्रॉइड, यूनिक्स।
डिवाइस ड्राइवर: यह कंप्यूटर को हार्डवेयर उपकरणों (प्रिंटर, स्कैनर, ग्राफिक्स कार्ड) से संवाद करने में सहायता करता है। प्रत्येक हार्डवेयर का अपना ड्राइवर होता है।
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर: यह कंप्यूटर के रखरखाव और अनुकूलन हेतु विशेष कार्य करता है। उदाहरण: एंटीवायरस, डिस्क क्लीनअप, डिस्क डीफ्रेगमेंटर, बैकअप सॉफ्टवेयर।
कंपाइलर: प्रोग्रामिंग भाषा के कोड को एक साथ मशीन भाषा में बदलता है।
इंटरप्रेटर: प्रोग्राम को पंक्ति-दर-पंक्ति मशीन भाषा में बदलता है।
कंपाइलर और इंटरप्रेटर में अंतर: कंपाइलर पूरे प्रोग्राम को एक साथ बाइनरी कोड में परिवर्तित करता है और त्रुटियाँ एक बार में दिखाता है, जबकि इंटरप्रेटर एक पंक्ति के बाद दूसरी पंक्ति का अनुवाद करता है और पहली त्रुटि पर कार्य रोक देता है। कंपाइलर जावा, C जैसी भाषाओं में तथा इंटरप्रेटर पाइथन, बेसिक जैसी भाषाओं में उपयोग होता है।
3. एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर
परिभाषा: एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता के विशिष्ट कार्यों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया सॉफ्टवेयर है। यह उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं पर आधारित होता है और सीधे उपयोगकर्ता के लिए कार्य करता है।
एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के प्रकार:
शब्द संसाधक (Word Processor): दस्तावेज़ बनाने, संपादित करने और प्रारूपित करने हेतु। उदाहरण: MS Word, Google Docs, WordPerfect।
स्प्रेडशीट (Spreadsheet): डेटा का संगठन, गणना और विश्लेषण हेतु। उदाहरण: MS Excel, Google Sheets।
प्रस्तुति सॉफ्टवेयर: स्लाइड शो और प्रस्तुतियाँ बनाने हेतु। उदाहरण: MS PowerPoint, Google Slides।
डेटाबेस सॉफ्टवेयर: डेटा का संगठन और प्रबंधन हेतु। उदाहरण: MS Access, Oracle, MySQL।
ब्राउज़र: इंटरनेट देखने हेतु। उदाहरण: Google Chrome, Mozilla Firefox, Microsoft Edge।
ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर: चित्र और डिज़ाइन बनाने हेतु। उदाहरण: Adobe Photoshop, CorelDRAW।
मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर: वीडियो और ऑडियो चलाने/संपादित करने हेतु। उदाहरण: VLC, Windows Media Player।
विशिष्ट और सामान्य सॉफ्टवेयर: एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर सामान्य उद्देश्य (जैसे ब्राउज़र) या विशिष्ट उद्देश्य (जैसे रेलवे टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर, अस्पताल प्रबंधन सॉफ्टवेयर) के लिए हो सकता है।
4. सॉफ्टवेयर से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण अवधारणाएँ
लाइसेंस के आधार पर सॉफ्टवेयर के प्रकार:
फ्रीवेयर: निःशुल्क उपलब्ध सॉफ्टवेयर जिसे डाउनलोड और उपयोग किया जा सकता है, किंतु इसमें बदलाव की अनुमति नहीं होती। उदाहरण: Google Chrome, Adobe Reader।
शेयरवेयर: निःशुल्क परीक्षण अवधि के बाद भुगतान करना आवश्यक होता है। उदाहरण: कुछ एंटीवायरस परीक्षण संस्करण।
ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर: जिसका स्रोत कोड निःशुल्क उपलब्ध हो और उपयोगकर्ता उसमें संशोधन कर सकें। उदाहरण: Linux, Mozilla Firefox, Apache, LibreOffice।
प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर: जिसका स्रोत कोड गोपनीय हो और लाइसेंस खरीदकर ही उपयोग किया जा सके। उदाहरण: Microsoft Windows, Adobe Photoshop।
कमर्शियल सॉफ्टवेयर: वाणिज्यिक उद्देश्य से विकसित और बिक्री हेतु उपलब्ध सॉफ्टवेयर।
प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर:
प्रोग्रामिंग भाषाएँ जैसे C, C++, Java, Python, BASIC का उपयोग सॉफ्टवेयर विकास में होता है।
सोर्स कोड: प्रोग्रामर द्वारा लिखा गया निर्देशों का समूह।
ऑब्जेक्ट कोड: सोर्स कोड के अनुवाद के बाद मशीन-सुगम रूप।
मशीन भाषा: केवल 0 और 1 में लिखी भाषा, जिसे कंप्यूटर सीधे समझता है।
उच्च स्तरीय भाषाएँ: मानव-सुगम भाषाएँ जिन्हें कंपाइलर/इंटरप्रेटर द्वारा मशीन भाषा में बदला जाता है।
मालवेयर और सुरक्षा सॉफ्टवेयर:
एंटीवायरस: वायरस, ट्रोजन और मैलवेयर से कंप्यूटर की रक्षा करता है। उदाहरण: Quick Heal, Norton, McAfee, Windows Defender।
फायरवॉल: अनधिकृत नेटवर्क प्रवेश को रोकता है।
स्पाइवेयर: गुप्त रूप से उपयोगकर्ता की गतिविधियों की निगरानी करने वाला दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: सिस्टम और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर में अंतर
विशेषता
सिस्टम सॉफ्टवेयर
एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर
कार्य
प्रणाली प्रबंधन
उपयोगकर्ता कार्य
उपयोगकर्ता
कंप्यूटर प्रणाली
उपयोगकर्ता
उदाहरण
OS, ड्राइवर
MS Word, Excel
भाषा
निम्न स्तरीय
उच्च स्तरीय
चलने का क्रम
सबसे पहले
OS के बाद
तालिका 2: सॉफ्टवेयर के प्रकार और उदाहरण
सॉफ्टवेयर प्रकार
प्रमुख उदाहरण
ऑपरेटिंग सिस्टम
विंडोज़, लिनक्स, मैक ओएस
यूटिलिटी
एंटीवायरस, डिस्क क्लीनअप
शब्द संसाधक
MS Word, Google Docs
स्प्रेडशीट
MS Excel
प्रस्तुति
MS PowerPoint
ब्राउज़र
Chrome, Firefox
डेटाबेस
Oracle, MySQL
ओपन सोर्स
Linux, LibreOffice
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[19.4 कंप्यूटर सॉफ्टवेयर] --> B[सिस्टम सॉफ्टवेयर]
A --> C[एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर]
A --> D[लाइसेंस आधारित]
A --> E[प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर]
B --> B1[ऑपरेटिंग सिस्टम]
B --> B2[ड्राइवर]
B --> B3[यूटिलिटी]
B --> B4[कंपाइलर]
C --> C1[MS Word]
C --> C2[MS Excel]
C --> C3[ब्राउज़र]
C --> C4[गेम]
D --> D1[फ्रीवेयर]
D --> D2[शेयरवेयर]
D --> D3[ओपन सोर्स]
D --> D4[प्रोप्राइटरी]
E --> E1[C, C++]
E --> E2[Java]
E --> E3[Python]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
कई उम्मीदवार MS Word को सिस्टम सॉफ्टवेयर मानते हैं, जबकि यह एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर है।
डिवाइस ड्राइवर को एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर समझना; ड्राइवर सिस्टम सॉफ्टवेयर है।
फ्रीवेयर और ओपन सोर्स को एक समान मानना; ओपन सोर्स में कोड में बदलाव संभव है, फ्रीवेयर में नहीं।
कंपाइलर और इंटरप्रेटर को समान समझना; इनकी कार्य विधि भिन्न है।
मैलवेयर और एंटीवायरस में भ्रम; एंटीवायरस सुरक्षा सॉफ्टवेयर है, मैलवेयर हानिकारक है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर को "सॉफ्टवेयर नहीं" समझना; यह कंप्यूटर प्रणाली का अनिवार्य भाग है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
हर सॉफ्टवेयर का उदाहरण सिस्टम या एप्लिकेशन के रूप में वर्गीकृत करने का अभ्यास करें।
फ्रीवेयर, शेयरवेयर और ओपन सोर्स के अंतर को उदाहरण सहित स्मरण रखें।
कंपाइलर बनाम इंटरप्रेटर की तुलना तालिका बनाकर पढ़ें।
ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (Linux, LibreOffice) के नामों की सूची बनाएँ।
प्रोग्रामिंग भाषाओं के स्तर (निम्न, उच्च) को समझें।
सुरक्षा सॉफ्टवेयर जैसे एंटीवायरस और फायरवॉल के कार्यों को स्पष्ट करें।
10. निष्कर्ष
सॉफ्टवेयर कंप्यूटर प्रणाली का अभिन्न अंग है जो हार्डवेयर को सार्थक कार्य करने में सक्षम बनाता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर प्रणाली का संचालन करता है जबकि एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता के विशिष्ट कार्य पूरे करता है। लाइसेंस के आधार पर फ्रीवेयर, शेयरवेयर, ओपन सोर्स और प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर का वर्गीकरण समझना आवश्यक है। कंपाइलर, इंटरप्रेटर और प्रोग्रामिंग भाषाओं की अवधारणाएँ सॉफ्टवेयर विकास का आधार हैं। इन मूलभूत अवधारणाओं की स्पष्ट समझ से परीक्षा में सॉफ्टवेयर संबंधी प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।