11.7 दक्षिण भारतीय राज्य Notes

11.7 दक्षिण भारतीय राज्य

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (प्राचीन भारतीय इतिहास) अध्याय: 11.7 दक्षिण भारतीय राज्य विषय-वस्तु: चोल, चालुक्य, पल्लव, पांड्य

1. परिचय

दक्षिण भारत का इतिहास प्राचीन काल से ही समृद्ध रहा है। प्रारंभ में दक्षिण में चोल, चेर और पांड्य नामक तीन प्रमुख तमिल राज्य थे, जिन्हें 'मुवेंदर' (तीन राजा) कहा जाता था। बाद में सातवाहन, पल्लव, चालुक्य तथा राष्ट्रकूट जैसे राजवंशों का उदय हुआ। इनमें से चोल, चालुक्य, पल्लव और पांड्य सबसे महत्वपूर्ण रहे। ये राज्य अपने मंदिरों, मूर्तिकला, साहित्य तथा समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।

चोल साम्राज्य दक्षिण भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य था। राजाराज प्रथम (985–1014 ई.) तथा राजेंद्र प्रथम (1014–1044 ई.) के नेतृत्व में चोल साम्राज्य अपने चरम पर पहुँचा। चोलों ने श्रीलंका तथा मालदीव जैसे द्वीपों पर भी अधिकार किया। राजाराज प्रथम ने तंजावुर (तंजौर) का बृहदेश्वर मंदिर बनवाया, जो विश्व धरोहर स्थल है। राजेंद्र प्रथम ने गंगाईकोंडचोलपुरम की स्थापना की तथा गंगा तक विजय अभियान चलाया।

पल्लव, चालुक्य तथा पांड्य राज्यों ने भी दक्षिण भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया। पल्लवों ने महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) के रथ मंदिर तथा गुफा मंदिर बनवाए। चालुक्यों की राजधानी बादामी (वातापी) थी, जहाँ शैल-निर्मित मंदिरों की विशिष्ट शैली विकसित हुई। पांड्यों की राजधानी मदुरै थी, जो संगम साहित्य का केंद्र थी। रेलवे NTPC परीक्षा में इन वंशों की राजधानियों, शासकों तथा मंदिरों से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

2. चोल साम्राज्य – दक्षिण का सबसे शक्तिशाली राज्य

चोल वंश का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, परंतु इसका स्वर्ण युग मध्यकालीन चोल (9वीं से 13वीं शताब्दी) माना जाता है। चोलों की राजधानी प्रारंभ में उरैयूर तथा बाद में तंजावुर थी। चोल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार राजाराज प्रथम तथा राजेंद्र प्रथम के काल में हुआ।

चोल शासकों की मुख्य उपलब्धियाँ:

नमूना प्रश्न (उदाहरण): तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर किसने बनवाया? (1) राजेंद्र प्रथम (2) राजाराज प्रथम (3) नरसिंहवर्मन (4) पुलकेशिन द्वितीय। सही उत्तर (2) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) राजेंद्र प्रथम को 'गंगाईकोंड चोल' कहा गया। (2) गंगाईकोंडचोलपुरम राजेंद्र प्रथम की राजधानी थी। (3) चोल नौसेना ने श्रीलंका और मालदीव तक विजय प्राप्त की। (4) चोल काल की कांस्य नटराज मूर्ति विश्व प्रसिद्ध है।

3. पल्लव और चालुक्य वंश

पल्लव वंश की राजधानी कांचीपुरम (कांची) थी। पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम तथा नरसिंहवर्मन प्रथम (मामल्ल) प्रसिद्ध हुए। पल्लवों ने महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) में शैल-कट (रॉक-कट) रथ मंदिर तथा तटीय मंदिर का निर्माण कराया। नरसिंहवर्मन प्रथम को 'वातापिकोंड' (वातापी का विजेता) कहा गया, क्योंकि उसने चालुक्य राजधानी बादामी पर अधिकार किया। पल्लव वंश का सबसे शक्तिशाली शासक नरसिंहवर्मन प्रथम था। पल्लवों की राजधानी कांची के साथ ही उन्होंने दक्षिण में विस्तार किया।

चालुक्य वंश की स्थापना पुलकेशिन प्रथम ने की, जिसकी राजधानी बादामी (वातापी) थी। चालुक्य वंश का सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय था, जिसने 630 ई. के आसपास उत्तर भारत के सम्राट हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के किनारे पराजित किया। पुलकेशिन द्वितीय के दरबार में चीनी यात्री ह्वेन त्सांग आया था।

चालुक्य वंश की उपलब्धियाँ:

नमूना प्रश्न (उदाहरण): पल्लवों की राजधानी कौन-सी थी? (1) तंजावुर (2) कांचीपुरम (3) मदुरै (4) बादामी। सही उत्तर (2) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को नर्मदा तट पर पराजित किया। (2) ऐहोले अभिलेख रविकीर्ति ने लिखा। (3) नरसिंहवर्मन प्रथम को 'वातापिकोंड' कहा गया। (4) चालुक्यों की राजधानी बादामी थी।

4. पांड्य वंश और संगम साहित्य

पांड्य वंश की राजधानी मदुरै थी। पांड्य शासकों ने तमिल संगम साहित्य का संरक्षण किया। पांड्य साम्राज्य कालांतर में चोलों के अधीन हो गया। प्राचीन काल में पांड्य शासकों में नेडुंजेलियन प्रमुख थे। पांड्यों का धर्म मुख्यतः हिंदू (शैव एवं वैष्णव) था, परंतु बाद में कुछ पांड्य शासक जैन धर्म की ओर भी झुके।

संगम साहित्य तमिल भाषा का सबसे प्राचीन साहित्य है। इसका संग्रह मदुरै में हुए 'संगम' (सभा) में हुआ। संगम काल के प्रमुख साहित्यिक ग्रंथ:

नमूना प्रश्न (उदाहरण): पांड्यों की राजधानी कौन-सी थी? (1) तंजावुर (2) मदुरै (3) कांची (4) वेंगी। सही उत्तर (2) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) सिलप्पदिकारम इलांगो अडिगल ने लिखी। (2) तिरुक्कुरल तिरुवल्लुवर की रचना है। (3) तोलकाप्पियम तमिल का प्राचीनतम व्याकरण ग्रंथ है। (4) संगम साहित्य का केंद्र मदुरै था।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1 – दक्षिण भारतीय राजवंश

राजवंश राजधानी प्रमुख शासक विशेषता
चोल तंजावुर राजाराज प्रथम, राजेंद्र प्रथम बृहदेश्वर मंदिर, नौसेना
पल्लव कांचीपुरम नरसिंहवर्मन प्रथम महाबलीपुरम के मंदिर
चालुक्य बादामी (वातापी) पुलकेशिन द्वितीय हर्ष पर विजय, ऐहोले अभिलेख
पांड्य मदुरै नेडुंजेलियन संगम साहित्य का संरक्षण

तालिका 2 – दक्षिण भारतीय मंदिर एवं साहित्य

मंदिर/ग्रंथ स्थान/लेखक विशेषता
बृहदेश्वर मंदिर तंजावुर राजाराज प्रथम द्वारा निर्मित
महाबलीपुरम मंदिर तमिलनाडु पल्लवों की शैल-कला
सिलप्पदिकारम इलांगो अडिगल तमिल महाकाव्य
तिरुक्कुरल तिरुवल्लुवर नीति ग्रंथ
ऐहोले अभिलेख कर्नाटक रविकीर्ति द्वारा रचित

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[दक्षिण भारतीय राज्य] --> B[चोल]
    A --> C[पल्लव]
    A --> D[चालुक्य]
    A --> E[पांड्य]
    B --> F[तंजावुर राजधानी]
    B --> G[राजाराज और राजेंद्र]
    B --> H[बृहदेश्वर मंदिर]
    C --> I[कांची राजधानी]
    C --> J[महाबलीपुरम मंदिर]
    D --> K[बादामी राजधानी]
    D --> L[पुलकेशिन द्वितीय]
    E --> M[मदुरै राजधानी]
    E --> N[संगम साहित्य]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

चोल साम्राज्य – प्रमुख शासक एवं राजधानी राजाराज प्रथम 985-1014 ई. बृहदेश्वर मंदिर राजेंद्र प्रथम 1014-1044 ई. गंगाईकोंडचोलपुरम प्रारंभिक चोल राजधानी उरैयूर बाद में तंजावुर चोलों की मुख्य उपलब्धियाँ विशाल नौसेना ग्राम सभा प्रशासन कांस्य नटराज मूर्ति श्रीलंका एवं मालदीव पर अधिकार स्वर्ण नियम: चोल नौसेना के अधीन श्रीलंका, मालदीव तथा कदारम पर चोलों का अधिकार रहा।

दक्षिण भारत – राजवंशों का मानचित्र पल्लव कांचीपुरम नरसिंहवर्मन प्रथम चालुक्य बादामी (वातापी) पुलकेशिन द्वितीय पांड्य मदुरै संगम साहित्य प्रमुख साहित्यिक ग्रंथ तोलकाप्पियम व्याकरण तिरुक्कुरल नीति ग्रंथ सिलप्पदिकारम इलांगो अडिगल मणिमेखलाई सात्तनार महत्वपूर्ण मंदिर एवं अभिलेख महाबलीपुरम के रथ मंदिर ऐहोले अभिलेख (रविकीर्ति) स्वर्ण नियम: राजधानियाँ रटें – चोल-तंजावुर, पल्लव-कांची, चालुक्य-बादामी, पांड्य-मदुरै।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण राजेंद्र प्रथम से जोड़ना गलत है; यह मंदिर राजाराज प्रथम ने तंजावुर में बनवाया।
  2. पल्लवों की राजधानी को मदुरै मानना गलत है; पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम थी, मदुरै पांड्यों की राजधानी थी।
  3. चालुक्यों की राजधानी को तंजावुर मानना गलत है; चालुक्यों की राजधानी बादामी (वातापी) थी।
  4. सिलप्पदिकारम को तिरुवल्लुवर की रचना मानना गलत है; सिलप्पदिकारम इलांगो अडिगल की रचना है, तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल लिखा।
  5. पुलकेशिन द्वितीय को मामल्लपुरम के निर्माण से जोड़ना गलत है; महाबलीपुरम के मंदिर पल्लवों (नरसिंहवर्मन) ने बनवाए।
  6. ऐहोले अभिलेख को हरिषेण की रचना मानना गलत है; ऐहोले अभिलेख रविकीर्ति ने लिखा, हरिषेण ने एलाहाबाद प्रशस्ति लिखी।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. चारों वंशों की राजधानियाँ रटें: चोल-तंजावुर, पल्लव-कांची, चालुक्य-बादामी, पांड्य-मदुरै।
  2. प्रत्येक वंश से एक शासक का नाम याद रखें: चोल-राजाराज, पल्लव-नरसिंहवर्मन, चालुक्य-पुलकेशिन द्वितीय, पांड्य-नेडुंजेलियन।
  3. मंदिर-निर्माता का मिलान रटें: बृहदेश्वर-राजाराज प्रथम, महाबलीपुरम-पल्लव, पट्टडकल-चालुक्य।
  4. साहित्य-लेखक मिलान रटें: तिरुक्कुरल-तिरुवल्लुवर, सिलप्पदिकारम-इलांगो अडिगल, मणिमेखलाई-सात्तनार, तोलकाप्पियम-तोलकाप्पियर।
  5. चोल वंश के दो शासकों की अवधि रटें: राजाराज (985-1014), राजेंद्र (1014-1044)।
  6. संगम साहित्य का केंद्र मदुरै तथा तमिल का इलियड 'सिलप्पदिकारम' याद रखें।

10. निष्कर्ष

दक्षिण भारतीय राज्यों ने भारतीय संस्कृति को मंदिर-निर्माण, मूर्तिकला, साहित्य और समुद्री व्यापार से समृद्ध किया। चोलों की भव्य मंदिर शैली, पल्लवों की शैल-कला, चालुक्यों की स्थापत्य विरासत तथा पांड्यों का संगम साहित्य आज भी दक्षिण भारत की पहचान हैं। रेलवे NTPC परीक्षा में इन वंशों की राजधानियों, शासकों, मंदिरों तथा साहित्यिक रचनाओं से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। इन तथ्यों की क्रमबद्ध पुनरावृत्ति से उम्मीदवार आसानी से अंक प्राप्त कर सकते हैं।