विषय: रेलवे NTPC – सामान्य ज्ञान (भारतीय कला और संस्कृति) अध्याय: 21.1 भारतीय नृत्य विषय-वस्तु: शास्त्रीय नृत्य
भारतीय नृत्य परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों में से एक है। भारतीय नृत्य की उत्पत्ति का संबंध भरत मुनि के नाट्यशास्त्र से है, जिसे संगीत, नृत्य और नाटक का आधारभूत ग्रंथ माना जाता है। नाट्यशास्त्र में रस, भाव, मुद्रा और अंग-संचालन की विस्तृत व्याख्या की गई है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य आध्यात्मिकता और भक्ति से जुड़े हुए हैं और इनकी जड़ें मंदिरों की परंपरा में हैं।
भारत में शास्त्रीय नृत्य की आठ मान्यता प्राप्त शैलियाँ हैं। संगीत नाटक अकादमी ने इन शास्त्रीय नृत्यों को मान्यता दी है। ये नृत्य शैलियाँ हैं: भरतनाट्यम, कथक, कथकली, मणिपुरी, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मोहिनीअट्टम और सत्रिया। प्रत्येक नृत्य शैली का अपना विशेष क्षेत्र, वेशभूषा, संगीत और तकनीक होती है। इनमें से अधिकांश नृत्य राज्यों और क्षेत्रों की संस्कृति से जुड़े हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में शास्त्रीय नृत्यों से जुड़े प्रश्न बहुत सामान्य हैं। नृत्य का नाम, उसका राज्य, प्रमुख घराना या कलाकार और विशेष तत्व अक्सर पूछे जाते हैं। एनटीपीसी परीक्षा में भारतीय नृत्य से संबंधित प्रश्न संस्कृति अनुभाग में पूछे जाते हैं। इसलिए सभी शास्त्रीय नृत्यों की विस्तृत जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इस अध्याय में आठों शास्त्रीय नृत्यों का विवरण, उनकी विशेषताएँ और महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं।
भरतनाट्यम: - उत्पत्ति: तमिलनाडु। - विशेषता: मंदिर नृत्य परंपरा, भाव-मुद्राओं की प्रधानता। - प्रमुख कलाकार: रुक्मिणी देवी अरुंडेल, बालासरस्वती। - संबंधित देवता: भगवान शिव (नटराज)।
कथक: - उत्पत्ति: उत्तर प्रदेश। - विशेषता: कथाओं का वर्णन, घुंघरू, चक्करदार घूर्णन। - घराने: लखनऊ, जयपुर, बनारस, रायगढ़। - प्रमुख कलाकार: बिरजू महाराज।
कथकली: - उत्पत्ति: केरल। - विशेषता: वेशभूषा और चेहरे पर विस्तृत मेकअप, कहानी वाचन। - विशेषता: इसमें कहानी मुख्यतः अभिनय से सुनाई जाती है।
मणिपुरी: - उत्पत्ति: मणिपुर। - विशेषता: कोमल और लयात्मक गति, रासलीला। - संबंधित: भगवान कृष्ण की रासलीला।
कुचिपुड़ी: - उत्पत्ति: आंध्र प्रदेश। - विशेषता: नृत्य और अभिनय का सम्मिश्रण, तरंगम जैसे तत्व।
ओडिसी: - उत्पत्ति: ओडिशा। - विशेषता: त्रिभंगी मुद्रा, भक्ति भाव। - मंदिर: जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा।
मोहिनीअट्टम: - उत्पत्ति: केरल। - विशेषता: स्त्री नृत्य, कोमल और लयात्मक गति। - शाब्दिक अर्थ: मोहिनी (विष्णु का स्त्री रूप) का नृत्य।
सत्रिया: - उत्पत्ति: असम। - विशेषता: वैष्णव मठों (सत्रों) से जुड़ा। - प्रवर्तक: शंकरदेव।
कथक के घराने: - लखनऊ घराना: कोमल और अभिनय प्रधान। - जयपुर घराना: ताल और लय प्रधान। - बनारस घराना: गति और ठुमरी से जुड़ा। - रायगढ़ घराना: छत्तीसगढ़ से जुड़ा।
प्रमुख नृत्यांगनाएँ और कलाकार: - भरतनाट्यम: रुक्मिणी देवी, बालासरस्वती, पद्म सुब्रह्मण्यम। - कथक: बिरजू महाराज, सितारा देवी। - ओडिसी: केलुचरण महापात्र, सोनल मानसिंह। - कुचिपुड़ी: वेम्पति चिन्ना सत्यम, यामिनी कृष्णमूर्ति। - मणिपुरी: गुरु बिपिन सिंह। - कथकली: कलामंडलम कृष्णन नायर।
नृत्य के सिद्धांत: - भरत मुनि का नाट्यशास्त्र नृत्य का मूल ग्रंथ है। - नृत्य में नवरस मुख्य भाव हैं। - मुद्राएँ हाथों के इशारों से भाव व्यक्त करती हैं। - अभिनय, गीत, वाद्य और रस नृत्य के प्रमुख अंग हैं।
शास्त्रीय नृत्य की विशेषताएँ: - प्रत्येक शैली का अपना विशेष राग और ताल। - वेशभूषा और आभूषण क्षेत्रीय संस्कृति को दर्शाते हैं। - अधिकांश शास्त्रीय नृत्य मंदिर परंपरा से जुड़े हैं। - नृत्य में कहानी, भाव और भक्ति का समावेश होता है।
लोक नृत्य: - ग्रामीण समुदायों द्वारा त्योहारों पर किया जाता है। - औपचारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। - सरल और सामूहिक रूप में होता है। - उदाहरण: भांगड़ा, गरबा, गिद्दा, बिहू।
शास्त्रीय नृत्य: - विशेष प्रशिक्षण और गुरु परंपरा की आवश्यकता होती है। - नाट्यशास्त्र के नियमों पर आधारित होता है। - प्रत्येक नृत्य की अपनी विशिष्ट तकनीक होती है। - अत्यधिक शैलीगत और कठोर प्रशिक्षण की मांग करता है।
प्रमुख लोक नृत्य: - भांगड़ा: पंजाब - गरबा: गुजरात - गिद्दा: पंजाब - बिहू: असम - घूमर: राजस्थान - लावणी: महाराष्ट्र - छऊ: पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा - कच्छी घोड़ी: राजस्थान
महत्वपूर्ण तथ्य: - भारत का सबसे पुराना शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम माना जाता है। - कथक का संबंध कहानी सुनाने की परंपरा से है। - ओडिसी को त्रिभंगी मुद्रा के लिए जाना जाता है। - मोहिनीअट्टम केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है। - सत्रिया को 2000 में शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिला।
| नृत्य | राज्य |
|---|---|
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु |
| कथक | उत्तर प्रदेश |
| कथकली | केरल |
| मणिपुरी | मणिपुर |
| कुचिपुड़ी | आंध्र प्रदेश |
| ओडिसी | ओडिशा |
| मोहिनीअट्टम | केरल |
| सत्रिया | असम |
| नृत्य | विशेष तत्व | प्रमुख कलाकार |
|---|---|---|
| भरतनाट्यम | मंदिर परंपरा | रुक्मिणी देवी |
| कथक | घुंघरू, घूर्णन | बिरजू महाराज |
| कथकली | विस्तृत मेकअप | कलामंडलम नायर |
| ओडिसी | त्रिभंगी मुद्रा | केलुचरण महापात्र |
flowchart TD
A[21.1 भारतीय नृत्य] --> B[शास्त्रीय नृत्य]
A --> C[लोक नृत्य]
A --> D[नाट्यशास्त्र]
B --> B1[भरतनाट्यम तमिलनाडु]
B --> B2[कथक उत्तर प्रदेश]
B --> B3[कथकली केरल]
B --> B4[ओडिसी ओडिशा]
C --> C1[भांगड़ा पंजाब]
C --> C2[गरबा गुजरात]
C --> C3[बिहू असम]
D --> D1[भरत मुनि]
D --> D2[रस और भाव]
भारतीय नृत्य देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत रूप है। आठ शास्त्रीय नृत्यों की विशेषताएँ, उनके राज्य, कलाकार और घराने एनटीपीसी परीक्षा के संस्कृति अनुभाग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी व्यवस्थित पुनरावृत्ति से परीक्षा में आसानी से अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।