विषय: रेलवे NTPC – भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य ज्ञान अध्याय: 20.1 भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल बातें विषय-वस्तु: अर्थव्यवस्था परिचय
अर्थव्यवस्था से तात्पर्य उन सभी गतिविधियों के समूह से है जिनके माध्यम से किसी देश के लोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग करते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी और एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सन् 1947 में स्वतंत्रता के समय यह एक कृषि प्रधान तथा अति पिछड़ी अर्थव्यवस्था थी, जिसमें औद्योगिक विकास बहुत कम था और अधिकांश जनसंख्या निर्वाह स्तर पर जीवन यापन करती थी।
स्वतंत्रता के बाद भारत ने आयोजित विकास का मार्ग अपनाया, जिसमें योजना आयोग तथा पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सरकार ने अर्थव्यवस्था की बागडोर संभाली। प्रारंभिक दशकों में सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार, भारी उद्योगों की स्थापना और हरित क्रांति जैसे प्रयासों से देश में खाद्यान्न उत्पादन तथा औद्योगिक आधार का विकास हुआ। फिर भी सन् 1991 तक देश में उच्च मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया।
सन् 1991 में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा ही बदल दी। उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों ने बाजार को अधिक स्वतंत्रता दी, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिला और विदेशी निवेश का प्रवेश बढ़ा। आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और सेवा क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन चुका है। एनटीपीसी परीक्षा में भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल बातों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इसकी आधारभूत समझ अनिवार्य है।
अर्थव्यवस्था शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द 'ओइकोनोमिया' से हुई है, जिसका अर्थ है गृह प्रबंधन। अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था उन संस्थाओं, नीतियों और गतिविधियों का जाल है जो वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग को नियंत्रित करता है।
प्रमुख तथ्य: - भारत की अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है क्योंकि इसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का सह-अस्तित्व है। - अर्थव्यवस्था की मुख्य इकाइयाँ हैं: परिवार (उपभोक्ता), फर्म (उत्पादक) और सरकार। - तीन आर्थिक क्षेत्र: प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवाएँ)।
भारतीय अर्थव्यवस्था एक विकासशील अर्थव्यवस्था है, जिसकी कई विशिष्ट विशेषताएँ हैं:
अवधारणाएँ जो महत्वपूर्ण हैं: - नाममात्र जीडीपी: वर्तमान मूल्यों पर मापा गया उत्पादन। - वास्तविक जीडीपी: आधार वर्ष के मूल्यों पर मापा गया उत्पादन, जो मुद्रास्फीति का प्रभाव निकालकर बताता है। - क्रय शक्ति समता: विभिन्न देशों की मुद्राओं की क्रय क्षमता की तुलना करने वाली विधि।
भारतीय अर्थव्यवस्था के तीन मुख्य क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रम बंटवारा और रोजगार: भारत में लगभग 45-50 प्रतिशत से अधिक श्रम शक्ति अभी भी कृषि में लगी हुई है, जबकि सेवा क्षेत्र में रोजगार का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। यह संरचनात्मक परिवर्तन भारतीय अर्थव्यवस्था के परिवर्तन का सूचक है।
महत्वपूर्ण तथ्य: - भारतीय रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था की मौद्रिक नीति का संचालन करता है। - भारतीय सांख्यिकी संगठन आर्थिक आंकड़ों का संकलन करता है। - पहला औद्योगिक नीति प्रस्ताव सन् 1948 में घोषित किया गया था।
| क्षेत्र | नाम | मुख्य घटक |
|---|---|---|
| प्राथमिक | कृषि क्षेत्र | कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, खनन |
| द्वितीयक | औद्योगिक क्षेत्र | विनिर्माण, निर्माण, बिजली, गैस, जल आपूर्ति |
| तृतीयक | सेवा क्षेत्र | परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य |
| प्रकार | स्वामित्व | मूल्य निर्धारण | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| पूँजीवादी | निजी | बाजार के आधार पर | अमेरिका |
| समाजवादी | राज्य | राज्य द्वारा | पूर्व सोवियत संघ |
| मिश्रित | सार्वजनिक और निजी | दोनों मिलकर | भारत |
flowchart TD
A[20.1 भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल बातें] --> B[अर्थव्यवस्था के प्रकार]
A --> C[तीन आर्थिक क्षेत्र]
A --> D[मुख्य विशेषताएँ]
A --> E[1991 आर्थिक सुधार]
B --> B1[पूँजीवादी]
B --> B2[समाजवादी]
B --> B3[मिश्रित - भारत]
C --> C1[प्राथमिक - कृषि]
C --> C2[द्वितीयक - उद्योग]
C --> C3[तृतीयक - सेवाएँ]
D --> D1[विकासशील अर्थव्यवस्था]
D --> D2[सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व]
E --> E1[उदारीकरण]
E --> E2[निजीकरण]
E --> E3[वैश्वीकरण]
भारतीय अर्थव्यवस्था एक जटिल लेकिन गतिशील मिश्रित अर्थव्यवस्था है, जो कृषि प्रधान स्वरूप से सेवा प्रधान स्वरूप की ओर बढ़ रही है। इसकी मूल बातों की गहन समझ प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों की भूमिका को स्पष्ट करती है और एनटीपीसी परीक्षा में अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रश्नों को हल करने की मजबूत नींव देती है।