20.3 बैंकिंग और भारतीय रिजर्व बैंक Notes

20.3 बैंकिंग और भारतीय रिजर्व बैंक

विषय: रेलवे NTPC – भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य ज्ञान अध्याय: 20.3 बैंकिंग और भारतीय रिजर्व बैंक विषय-वस्तु: RBI, बैंकिंग

1. परिचय

बैंकिंग प्रणाली किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाती है, क्योंकि यह बचत के संग्रह, ऋण के वितरण, भुगतान प्रणाली और वित्तीय स्थिरता का कार्य करती है। भारत की बैंकिंग प्रणाली का केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक है, जिसकी स्थापना सन् 1935 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम 1934 के अंतर्गत हुई। आरबीआई की स्थापना का श्रेय हिल्टन यंग आयोग की सिफारिशों को जाता है और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है।

भारत में बैंकिंग का आधुनिक विकास अठारहवीं-उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ। सन् 1770 में स्थापित बैंक ऑफ हिंदुस्तान भारत का पहला बैंक माना जाता है, हालाँकि यह बाद में बंद हो गया। सन् 1935 में स्थापित रिजर्व बैंक का स्वामित्व प्रारंभ में निजी था, परंतु सन् 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। स्वतंत्रता के बाद 1949 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम लागू हुआ और 1955 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का गठन किया गया।

सन् 1969 में भारत सरकार ने 14 प्रमुख निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक नियंत्रण बढ़ गया। इसके बाद 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। सन् 1991 में नरसिंहम समिति की सिफारिशों से बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों का नया दौर शुरू हुआ। वर्तमान समय में भारत की बैंकिंग प्रणाली में केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और विकास बैंक जैसे अनेक स्तरीय संस्थान शामिल हैं। एनटीपीसी परीक्षा में बैंकिंग तथा आरबीआई से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

2. भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य

भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यों को मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

प्रमुख तथ्य: - आरबीआई की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई। - प्रथम गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ थे, जबकि प्रथम भारतीय गवर्नर सी. डी. देशमुख थे। - आरबीआई का राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ। - आरबीआई का सेंट्रल बोर्ड के अंतर्गत प्रबंधन होता है।

3. बैंकिंग के प्रकार और महत्वपूर्ण संस्थाएँ

भारत की बैंकिंग प्रणाली में कई प्रकार के बैंक कार्य करते हैं:

महत्वपूर्ण संस्थाएँ: - एन.आई.बी. (नाबार्ड): कृषि और ग्रामीण विकास के लिए शीर्ष वित्तीय संस्थान, स्थापना 1982 में। - एस.आई.डी.बी.आई.: लघु उद्योग विकास बैंक, स्थापना 1990 में। - एक्सिम बैंक: निर्यात-आयात बैंक, स्थापना 1982 में। - इंडियन बैंक्स एसोसिएशन: बैंकों का संगठन, जो बैंकिंग नीति में सहयोग करता है।

स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण: - सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (जैसे एसबीआई, पीएनबी) - निजी क्षेत्र के बैंक (जैसे एचडीएफसी, आईसीआईसीआई) - विदेशी बैंक (जैसे एचएसबीसी, सिटी बैंक) - छोटे वित्त बैंक और भुगतान बैंक

4. बैंकिंग नियंत्रण के साधन और सुधार

आरबीआई मुद्रा और ऋण आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए कई साधनों का प्रयोग करता है:

बैंकिंग सुधार: - नरसिंहम समिति प्रथम (1991) और नरसिंहम समिति द्वितीय (1998) ने बैंकिंग सुधारों की नींव रखी। - सन् 2016 में बैंकों के विलय की प्रक्रिया शुरू हुई। - इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और पेटीएम पेमेंट्स बैंक जैसे नए बैंक भुगतान सेवाओं में सक्रिय हैं।

जमा के प्रकार: बचत खाता, चालू खाता, सावधि जमा और आवर्ती जमा। इसके अलावा सावधि जमा में लॉक-इन अवधि होती है। भारत में जमा बीमा कार्यक्रम DICGC के अंतर्गत अधिकतम पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: बैंकिंग नियंत्रण के साधन

साधन पूरा नाम कार्य
CRR नकद आरक्षित अनुपात जमा का हिस्सा आरबीआई के पास रखना
SLR वैधानिक तरलता अनुपात सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश
रेपो दर पुनर्खरीद दर बैंकों को अल्पकालिक ऋण
रिवर्स रेपो दर विपरीत पुनर्खरीद दर बैंकों से राशि जमा करना
बैंक दर बैंक दर दीर्घकालिक ऋण की दर

तालिका 2: आरबीआई से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

विषय विवरण
स्थापना 1 अप्रैल 1935
मुख्यालय मुंबई
राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949
प्रथम गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ
प्रथम भारतीय गवर्नर सी. डी. देशमुख
मुद्रा निर्गमन केवल आरबीआई

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[20.3 बैंकिंग और भारतीय रिजर्व बैंक] --> B[आरबीआई]
    A --> C[बैंकों के प्रकार]
    A --> D[नियंत्रण के साधन]
    B --> B1[मुद्रा निर्गमकर्ता]
    B --> B2[बैंकों का बैंक]
    B --> B3[सरकार का बैंकर]
    C --> C1[वाणिज्यिक बैंक]
    C --> C2[सहकारी बैंक]
    C --> C3[ग्रामीण बैंक]
    D --> D1[CRR]
    D --> D2[SLR]
    D --> D3[रेपो दर]
    D --> D4[बैंक दर]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरबीआई के मुख्य कार्य मुद्रा निर्गमकर्ता नोट जारी करना एकमात्र अधिकार बैंकों का बैंक अंतिम ऋणदाता CRR और SLR नियंत्रण सरकार का बैंकर ऋण प्रबंधन सरकारी लेनदेन ऋण नियंत्रण रेपो और बैंक दर रेपो दर नियंत्रण विदेशी मुद्रा प्रबंधन भंडार का रखरखाव FEMA के अंतर्गत आंकड़े प्रकाशन मुद्रास्फीति जीडीपी वृद्धि स्वर्ण नियम आरबीआई मुद्रा निर्गमन, बैंकों के बैंक और सरकार के बैंकर की तिहरी भूमिका निभाता है।

बैंकों के प्रकार वाणिज्यिक बैंक सार्वजनिक, निजी, विदेशी उदाहरण: एसबीआई, एचडीएफसी सहकारी बैंक सहकारिता सिद्धांत पर कृषि ऋण प्रदाता क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापना 1975 ग्रामीण ऋण सुविधा विकास बैंक नाबार्ड, एसआईडीबीआई एक्सिम बैंक स्वर्ण नियम भारतीय बैंकिंग में वाणिज्यिक, सहकारी, ग्रामीण और विकास बैंक चार मुख्य स्तर हैं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. आरबीआई की स्थापना वर्ष: कई विद्यार्थी 1935 के स्थान पर 1949 या 1947 लिख देते हैं। स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी।
  2. एक रुपये के नोट का निर्गमन: यह भूल होती है कि एक रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है, जबकि आरबीआई सभी अन्य नोट जारी करता है।
  3. रेपो और रिवर्स रेपो में उलझन: रेपो दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है और रिवर्स रेपो दर पर आरबीआई बैंकों से राशि लेता है। दोनों को अक्सर उल्टा याद किया जाता है।
  4. सीआरआर और एसएलआर का भेद: सीआरआर में नकद आरबीआई के पास रखना होता है जबकि एसएलआर में सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश। यह अंतर परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
  5. राष्ट्रीयकरण की तिथियाँ: 1969 में 14 बैंक और 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। इन संख्याओं को गलत याद रखा जाता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. आरबीआई के कार्यों को सूचीबद्ध करके प्रत्येक कार्य का एक उदाहरण लिखें।
  2. रेपो, रिवर्स रेपो, सीआरआर, एसएलआर और बैंक दर की परिभाषाएँ एक पंक्ति में याद करें।
  3. बैंकों के राष्ट्रीयकरण की तिथियों और बैंकों की संख्या को तालिका बनाकर रटें।
  4. एक रुपये के नोट और भारत सरकार के संबंध को हमेशा विशेष रूप से याद रखें।
  5. नरसिंहम समिति और उसकी सिफारिशों के प्रश्नों का कम से कम एक बार अभ्यास करें।

10. निष्कर्ष

भारतीय बैंकिंग प्रणाली और भारतीय रिजर्व बैंक देश की आर्थिक स्थिरता के आधार स्तंभ हैं। आरबीआई के कार्यों, बैंकों के प्रकारों और नियंत्रण के साधनों की सटीक समझ प्रतियोगी परीक्षाओं में बैंकिंग से जुड़े प्रश्नों को हल करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।