20.4 मुद्रा और मौद्रिक नीति Notes

20.4 मुद्रा और मौद्रिक नीति

विषय: रेलवे NTPC – भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य ज्ञान अध्याय: 20.4 मुद्रा और मौद्रिक नीति विषय-वस्तु: मुद्रा, मौद्रिक नीति

1. परिचय

मुद्रा किसी भी अर्थव्यवस्था का वह माध्यम है जिसके द्वारा वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय होता है। प्राचीन काल में वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलित थी, जिसमें सीधे वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाता था, परंतु वस्तु विनिमय में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग, मापन की कठिनाई और मूल्य का स्थायी भंडार न होना जैसी समस्याएँ थीं। इन समस्याओं के समाधान के लिए मुद्रा का आविष्कार हुआ। मुद्रा ने विनिमय का माध्यम, मूल्य का माप, मूल्य का संचय और स्थगित भुगतान का मानक जैसे चार प्रमुख कार्य किए।

मुद्रा का इतिहास सिक्कों से शुरू हुआ, फिर कागजी मुद्रा और वर्तमान में डिजिटल मुद्रा तक पहुँच गया। भारत में मुद्रा का उत्पादन और नियंत्रण भारतीय रिजर्व बैंक करता है। भारतीय मुद्रा का नाम रुपया है, जो विश्व की सबसे पुरानी जीवित मुद्राओं में से एक मानी जाती है। सन् 2016 में नोटबंदी के बाद भारत में नए 500 और 2000 रुपये के नोट जारी हुए। वर्तमान में भारत में डिजिटल मुद्रा की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं, जिसमें सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी की शुरुआत की गई है।

मौद्रिक नीति वह नीति है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक देश में मुद्रा आपूर्ति, ऋण की उपलब्धता और ब्याज दरों को नियंत्रित करता है। मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना, आर्थिक विकास को गति देना और रोजगार को बढ़ावा देना है। भारत में मौद्रिक नीति का संचालन आरबीआई करता है और वर्ष में कई बार मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठकें होती हैं। सन् 2016 में मौद्रिक नीति समिति का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर करते हैं।

2. मुद्रा के कार्य और मापन

मुद्रा के कार्य: - विनिमय का माध्यम: मुद्रा के द्वारा वस्तुओं और सेवाओं का आसानी से आदान-प्रदान होता है। - मूल्य का माप: मुद्रा के माध्यम से वस्तुओं की कीमत मापी जाती है। - मूल्य का संचय: मुद्रा को संचय करके भविष्य के लिए संपत्ति रखी जा सकती है। - स्थगित भुगतान का मानक: ऋण और उधार के लेनदेन में मुद्रा मानक का कार्य करती है।

मुद्रा आपूर्ति के स्तर: - M1: करेंसी नोट और सिक्के तथा बैंकों की मांग जमा। - M2: M1 + डाकघर की बचत जमा। - M3: M1 + बैंकों की सावधि जमा। इसे कुल मुद्रा आपूर्ति भी कहते हैं। - M4: M3 + डाकघर की सभी जमा।

मुद्रा के प्रकार: - वैध मुद्रा (Legal Tender): जिस मुद्रा को भुगतान में स्वीकार करना कानूनन अनिवार्य हो। - संविदात्मक मुद्रा: जिसे लोग आपसी सहमति से स्वीकार करते हैं, जैसे चेक। - वैकल्पिक मुद्रा: जैसे क्रिप्टोकरेंसी, जिनका कोई सरकारी समर्थन नहीं होता।

मुद्रा के गुण: सर्वमान्यता, सुवाह्यता, विभाजनीयता, स्थायित्व, एकरूपता और सीमित आपूर्ति। ये गुण मुद्रा को व्यापार के लिए उपयुक्त बनाते हैं। भारत में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मुद्रा आपूर्ति का प्रबंधन आरबीआई करता है।

3. मौद्रिक नीति के साधन

मौद्रिक नीति के प्रमुख साधन दो श्रेणियों में बाँटे जाते हैं: मात्रात्मक साधन और गुणात्मक साधन।

मौद्रिक नीति के उद्देश्य: - मूल्य स्थिरता बनाए रखना - आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना - ब्याज दरों में स्थिरता - विनिमय दरों का प्रबंधन - रोजगार में वृद्धि

मौद्रिक नीति समिति (MPC): सन् 2016 में गठित इस समिति में छह सदस्य होते हैं। तीन सदस्य आरबीआई के होते हैं और तीन सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। इस समिति का मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति को निर्धारित सीमा, सामान्यतः चार प्रतिशत प्लस-माइनस दो प्रतिशत, के भीतर रखना है।

4. मुद्रास्फीति और मुद्रा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

मुद्रास्फीति: सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर वृद्धि को मुद्रास्फीति कहते हैं। इससे मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है। मुद्रास्फीति के प्रकार:

मुद्रास्फीति के माप: - उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI): खुदरा स्तर पर मूल्य वृद्धि का माप। - थोक मूल्य सूचकांक (WPI): थोक स्तर पर मूल्य वृद्धि का माप। - जीडीपी डिफ्लेटर: नाममात्र और वास्तविक जीडीपी का अनुपात।

मुद्रा से जुड़े तथ्य: - मुद्रास्फीति से ऋणदाताओं को हानि और ऋणी को लाभ होता है। - वेतनभोगी वर्ग मुद्रास्फीति से सबसे अधिक प्रभावित होता है। - मुद्रास्फीति के विपरीत स्थिति को अपस्फीति कहते हैं। - सन् 2023 में भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल रुपये की पायलट परियोजना शुरू की।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु: - मुद्रा का अवमूल्यन मुद्रा की विनिमय दर में गिरावट है। - पुनर्मूल्यांकन विनिमय दर में वृद्धि है। - क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या आभासी मुद्रा है, जिसका कोई केंद्रीय नियंत्रण नहीं होता।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: मुद्रा आपूर्ति के स्तर

स्तर घटक
M1 करेंसी नोट, सिक्के, मांग जमा
M2 M1 + डाकघर बचत जमा
M3 M1 + सावधि जमा
M4 M3 + डाकघर की सभी जमा

तालिका 2: मौद्रिक नीति के साधन

साधन प्रकार कार्य
बैंक दर मात्रात्मक दीर्घकालिक ऋण दर
रेपो दर मात्रात्मक अल्पकालिक ऋण दर
रिवर्स रेपो मात्रात्मक बैंकों से राशि जमा करना
सीआरआर मात्रात्मक नकद आरक्षित अनुपात
एसएलआर मात्रात्मक सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश
नैतिक दबाव गुणात्मक बैंकों को सलाह

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[20.4 मुद्रा और मौद्रिक नीति] --> B[मुद्रा के कार्य]
    A --> C[मुद्रा आपूर्ति]
    A --> D[मौद्रिक नीति साधन]
    A --> E[मुद्रास्फीति]
    B --> B1[विनिमय का माध्यम]
    B --> B2[मूल्य का माप]
    B --> B3[मूल्य का संचय]
    C --> C1[M1 और M2]
    C --> C2[M3 और M4]
    D --> D1[मात्रात्मक साधन]
    D --> D2[गुणात्मक साधन]
    E --> E1[CPI]
    E --> E2[WPI]
    E --> E3[जीडीपी डिफ्लेटर]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मुद्रा के चार कार्य विनिमय का माध्यम वस्तुओं का आदान-प्रदान मूल्य का माप कीमतों का निर्धारण मूल्य का संचय भविष्य हेतु संपत्ति स्थगित भुगतान का मानक ऋण-उधार का माप स्वर्ण नियम मुद्रा विनिमय, माप, संचय और स्थगित भुगतान चारों कार्य करती है।

मुद्रास्फीति के कारण और प्रभाव मुद्रास्फीति के कारण मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि मांग में वृद्धि उत्पादन लागत में वृद्धि आपूर्ति में कमी मुद्रास्फीति के प्रभाव क्रय शक्ति में कमी वेतनभोगियों को हानि ऋणी को लाभ बचत का मूल्य घटना स्वर्ण नियम मुद्रास्फीति बढ़ने पर मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है और निश्चित आय वर्ग को हानि होती है। मुद्रास्फीति के मापन में CPI और WPI दोनों महत्वपूर्ण हैं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. मुद्रा आपूर्ति के स्तरों का क्रम: M1 से M4 तक का क्रम अक्सर गलत लिखा जाता है। M1 सबसे छोटा और M4 सबसे व्यापक माप है।
  2. सीपीआई और डब्ल्यूपीआई का भेद: सीपीआई खुदरा मूल्यों पर आधारित है जबकि डब्ल्यूपीआई थोक मूल्यों पर। इन्हें परीक्षा में उल्टा याद किया जाता है।
  3. मुद्रास्फीति से किसे लाभ: विद्यार्थी अक्सर मान लेते हैं कि मुद्रास्फीति से सभी को हानि होती है, जबकि ऋणी को लाभ होता है।
  4. वैध और संविदात्मक मुद्रा: चेक संविदात्मक मुद्रा है, नोट वैध मुद्रा। दोनों में अंतर नहीं किया जाता।
  5. सीबीडीसी का अर्थ: सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को क्रिप्टोकरेंसी समझ लिया जाता है, जबकि यह आरबीआई की जारी डिजिटल मुद्रा है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. मुद्रा के चार कार्यों को क्रमबद्ध रूप से याद करें और प्रत्येक का एक उदाहरण लिखें।
  2. M1, M2, M3, M4 के घटकों की तालिका बनाएँ और रटें।
  3. रेपो, रिवर्स रेपो, सीआरआर, एसएलआर और बैंक दर को एक मैट्रिक्स में याद करें।
  4. सीपीआई और डब्ल्यूपीआई के बीच का अंतर और मुद्रास्फीति के लाभ-हानि वर्ग को स्पष्ट रूप से समझें।
  5. एमपीसी के गठन वर्ष और सदस्यों की संख्या को सटीक याद रखें।

10. निष्कर्ष

मुद्रा और मौद्रिक नीति आधुनिक अर्थव्यवस्था के संचालन का आधार हैं। मुद्रा के कार्यों, मुद्रा आपूर्ति के स्तरों, मौद्रिक नीति के साधनों और मुद्रास्फीति की अवधारणा को समझकर एनटीपीसी जैसी परीक्षाओं में अर्थशास्त्र के अंक आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।