20.5 बजट और राजकोषीय नीति Notes

20.5 बजट और राजकोषीय नीति

विषय: रेलवे NTPC – भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य ज्ञान अध्याय: 20.5 बजट और राजकोषीय नीति विषय-वस्तु: बजट, राजकोषीय नीति

1. परिचय

बजट सरकार की वह वित्तीय योजना है जिसमें एक वित्तीय वर्ष के दौरान प्रस्तावित आय और व्यय का विवरण प्रस्तुत किया जाता है। भारत में संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत राष्ट्रपति की ओर से संसद के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत किया जाता है, जिसे आम बजट कहा जाता है। बजट प्रस्तुति का मुख्य दायित्व वित्त मंत्री का होता है। भारत का पहला केंद्रीय बजट सन् 1860 में जेम्स विल्सन ने प्रस्तुत किया था, जबकि स्वतंत्र भारत का पहला बजट 1947 में आर. के. षण्मुखम चेट्टी ने प्रस्तुत किया था।

भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक माना जाता है। बजट को संसद में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाता है, परंतु मतदान का अधिकार केवल लोकसभा को होता है। बजट को पारित करने की प्रक्रिया में बजट भाषण, आम चर्चा, मंत्रालयवार माँगों पर विचार तथा विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक का पारित होना शामिल है। विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही सरकार खजाने से धन निकाल सकती है।

राजकोषीय नीति सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली वह नीति है जिसके माध्यम से सरकार करों, व्यय, ऋण और घाटे के प्रबंधन द्वारा अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। राजकोषीय नीति का संचालन वित्त मंत्रालय करता है। राजकोषीय नीति के मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास, मूल्य स्थिरता, आय का पुनर्वितरण, संसाधनों का आवंटन और सार्वजनिक कल्याण हैं। एनटीपीसी परीक्षा में बजट के प्रकार, घाटे के प्रकार और राजकोषीय नीति के साधनों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. बजट के प्रकार और प्रमुख अवधारणाएँ

बजट के प्रकार: - संतुलित बजट: जब अनुमानित आय और व्यय बराबर हों। - घाटे का बजट: जब अनुमानित व्यय आय से अधिक हो। - अधिशेष बजट: जब अनुमानित आय व्यय से अधिक हो।

घाटे के प्रकार: - राजकोषीय घाटा: कुल व्यय में से कुल आय (उधार को छोड़कर) घटाने पर प्राप्त अंतर। यह सरकार की कुल उधार आवश्यकता को दर्शाता है। - राजस्व घाटा: राजस्व व्यय में से राजस्व प्राप्तियाँ घटाने पर प्राप्त अंतर। - प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाने पर प्राप्त अंतर। - प्रभावी राजस्व घाटा: राजस्व घाटे में से ऋणों की वसूली से प्राप्त राशि घटाने पर प्राप्त अंतर।

बजट की प्रमुख शब्दावली: - राजस्व प्राप्तियाँ: वे प्राप्तियाँ जो सरकार की परिसंपत्तियों में वृद्धि नहीं करतीं, जैसे कर और गैर-कर प्राप्तियाँ। - पूँजीगत प्राप्तियाँ: वे प्राप्तियाँ जो परिसंपत्तियों में कमी या दायित्वों में वृद्धि करती हैं, जैसे ऋण। - राजस्व व्यय: वह व्यय जो नई परिसंपत्तियाँ नहीं बनाता, जैसे वेतन और ब्याज। - पूँजीगत व्यय: वह व्यय जो नई परिसंपत्तियों का निर्माण करता है, जैसे सड़क और भवन।

बजट के घटक: - आय बजट: अनुमानित आय का विवरण। - व्यय बजट: अनुमानित व्यय का विवरण। - वित्त विधेयक: कर प्रस्तावों से संबंधित विधेयक। - विनियोग विधेयक: सरकार को खजाने से धन निकालने की अनुमति देने वाला विधेयक।

महत्वपूर्ण तथ्य: - पहला केंद्रीय बजट 1860 में जेम्स विल्सन ने प्रस्तुत किया। - स्वतंत्र भारत का पहला बजट 1947 में आर. के. षण्मुखम चेट्टी ने प्रस्तुत किया। - बजट में वोट ऑन अकाउंट चुनावों के समय अंतरिम व्यय की अनुमति देता है। - बजट प्रस्तुति का आधार अनुच्छेद 112 है।

3. राजकोषीय नीति के साधन

राजकोषीय नीति के मुख्य साधन निम्नलिखित हैं:

राजकोषीय नीति के उद्देश्य: - आर्थिक विकास और स्थिरता - मूल्य स्थिरता बनाए रखना - आय और संपत्ति का समान वितरण - संसाधनों का कुशल आवंटन - क्षेत्रीय संतुलित विकास - पूर्ण रोजगार की प्राप्ति

राजकोषीय नीति के महत्वपूर्ण आयोग: - राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM), 2003: इस अधिनियम के अंतर्गत राजकोषीय घाटे और ऋण पर नियंत्रण रखा जाता है। - एन. के. सिंह समिति: वित्तीय संसाधनों के पुनर्वितरण से संबंधित। - वित्त आयोग: केंद्र और राज्यों के बीच करों का वितरण अनुच्छेद 280 के अंतर्गत।

राजकोषीय नीति बनाम मौद्रिक नीति: - राजकोषीय नीति सरकार संचालित करती है, मौद्रिक नीति आरबीआई संचालित करता है। - राजकोषीय नीति कर और व्यय से संबंधित है, मौद्रिक नीति मुद्रा आपूर्ति से। - राजकोषीय नीति वित्त मंत्रालय के अधीन है।

4. बजट प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तथ्य

भारत में बजट प्रक्रिया की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं:

आर्थिक सर्वेक्षण: यह वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा प्रस्तुत वार्षिक दस्तावेज है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण होता है। आर्थिक सर्वेक्षण आमतौर पर बजट से एक दिन पहले प्रस्तुत किया जाता है।

प्रमुख तथ्य: - बजट का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का आवंटन और घाटे का प्रबंधन है। - राजकोषीय घाटा जीडीपी के प्रतिशत के रूप में मापा जाता है। - भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। - बजट से जुड़े महत्वपूर्ण शब्दों में विनियोग, परिवर्तन, प्रत्यय विधेयक और पूरक माँगें शामिल हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: घाटे के प्रकार

घाटा सूत्र
राजस्व घाटा राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
राजकोषीय घाटा कुल व्यय - कुल आय (उधार को छोड़कर)
प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान
प्रभावी राजस्व घाटा राजस्व घाटा - ऋण वसूली

तालिका 2: बजट से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

विषय विवरण
संवैधानिक आधार अनुच्छेद 112
प्रस्तुति का दिन 1 फरवरी
वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च
पहला केंद्रीय बजट 1860, जेम्स विल्सन
स्वतंत्र भारत का पहला बजट 1947, आर. के. षण्मुखम चेट्टी
कर प्रस्ताव वित्त विधेयक

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[20.5 बजट और राजकोषीय नीति] --> B[बजट के प्रकार]
    A --> C[घाटे के प्रकार]
    A --> D[राजकोषीय नीति]
    B --> B1[संतुलित]
    B --> B2[घाटा]
    B --> B3[अधिशेष]
    C --> C1[राजस्व घाटा]
    C --> C2[राजकोषीय घाटा]
    C --> C3[प्राथमिक घाटा]
    D --> D1[सार्वजनिक व्यय]
    D --> D2[कराधान]
    D --> D3[सार्वजनिक ऋण]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

बजट के प्रकार संतुलित बजट आय = व्यय कोई घाटा नहीं घाटे का बजट व्यय > आय विकास के लिए प्रयुक्त अधिशेष बजट आय > व्यय अधिशेष राशि बचती है स्वर्ण नियम भारत सहित अधिकांश विकासशील देश घाटे का बजट प्रस्तुत करते हैं। घाटे के बजट से विकास कार्यों के लिए धन मिलता है।

राजकोषीय घाटे की संरचना कुल व्यय राजस्व व्यय पूँजीगत व्यय ब्याज भुगतान इसमें शामिल कुल प्राप्तियाँ कर प्राप्तियाँ गैर-कर प्राप्तियाँ ऋण को छोड़कर राजकोषीय घाटा कुल व्यय - कुल प्राप्तियाँ (उधार छोड़कर) स्वर्ण नियम राजकोषीय घाटा सरकार की कुल उधार आवश्यकता को दर्शाता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. राजकोषीय और राजस्व घाटे में भेद: राजस्व घाटा केवल राजस्व लेनदेन का है, जबकि राजकोषीय घाटा पूरे बजट का। दोनों को अक्सर एक ही समझा जाता है।
  2. प्राथमिक घाटे का सूत्र: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान। कई विद्यार्थी ब्याज जोड़ देते हैं।
  3. बजट प्रस्तुति की तिथि: पहले बजट फरवरी के अंतिम दिन प्रस्तुत होता था, परंतु वर्तमान में 1 फरवरी को प्रस्तुत किया जाता है।
  4. पहला केंद्रीय बजट: कई विद्यार्थी पहला केंद्रीय बजट 1947 का बताते हैं, जबकि 1860 में जेम्स विल्सन ने प्रस्तुत किया था।
  5. बजट का अनुच्छेद: बजट अनुच्छेद 112 से जुड़ा है, कुछ लोग 112 के स्थान पर 280 (वित्त आयोग) या अन्य लिख देते हैं।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. चारों घाटों के सूत्रों को एक पंक्ति में लिखकर रटें और प्रत्येक का उदाहरण समझें।
  2. बजट प्रक्रिया के चरणों को क्रमबद्ध रूप से याद करें।
  3. राजकोषीय नीति और मौद्रिक नीति के अंतर की तालिका बनाएँ।
  4. आर्थिक सर्वेक्षण और बजट में अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
  5. FRBM अधिनियम 2003 और वित्त आयोग की भूमिका के प्रश्नों का अभ्यास करें।

10. निष्कर्ष

बजट और राजकोषीय नीति सरकार की आर्थिक नीति के दो स्तंभ हैं। बजट के प्रकारों, घाटों के सूत्रों और राजकोषीय नीति के साधनों की समझ से विद्यार्थी एनटीपीसी परीक्षा में अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रश्नों को सटीकता से हल कर सकते हैं और आर्थिक नीति विश्लेषण में सक्षम बन सकते हैं।