विषय: रेलवे NTPC – भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य ज्ञान अध्याय: 20.7 गरीबी बेरोजगारी और विकास विषय-वस्तु: गरीबी, बेरोजगारी
गरीबी और बेरोजगारी विकासशील अर्थव्यवस्था की दो सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ हैं। गरीबी वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य की पूर्ति करने में असमर्थ होता है। भारत में गरीबी का निर्धारण राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के आंकड़ों के आधार पर होता है। गरीबी रेखा उस आय स्तर को दर्शाती है जिसके नीचे रहने वाले व्यक्ति गरीब माने जाते हैं। भारत में गरीबी का मापन उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के आधार पर होता है।
बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें सक्षम और इच्छुक व्यक्ति को उचित मजदूरी पर रोजगार नहीं मिलता। भारत में बेरोजगारी की समस्या मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी बेरोजगारी और शहरी क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारी के रूप में दिखती है। बेरोजगारी की स्थिति में व्यक्ति का कौशल, शिक्षा और क्षमता उपयोग में नहीं आती, जिससे देश की उत्पादन क्षमता घटती है और गरीबी बढ़ती है। भारत में बेरोजगारी की माप राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के आधार पर की जाती है।
गरीबी, बेरोजगारी और विकास एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं। आर्थिक विकास से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और गरीबी घटती है। भारत में गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन के लिए अनेक योजनाएँ चलाई गई हैं, जिनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और दीनदयाल अंत्योदय योजना प्रमुख हैं। एनटीपीसी परीक्षा में गरीबी की अवधारणा, बेरोजगारी के प्रकार, विकास सूचकांक और गरीबी उन्मूलन योजनाओं से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
गरीबी के प्रकार: - निरपेक्ष गरीबी: जब व्यक्ति की आय किसी निर्धारित न्यूनतम स्तर से कम होती है। - सापेक्ष गरीबी: जब व्यक्ति की आय समाज के औसत स्तर से काफी कम होती है। - मानवीय गरीबी: जब व्यक्ति को मूलभूत क्षमताएँ जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य प्राप्त नहीं होतीं।
गरीबी मापन के तरीके: - सीमा निर्धारण विधि: एक निश्चित कैलोरी की दैनिक आवश्यकता के आधार पर गरीबी रेखा निर्धारित की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों के लिए 2100 कैलोरी का मानक रहा है। - टेंडुलकर समिति: सन् 2009 में इस समिति ने गरीबी मापन का सूत्र दिया। - रंगराजन समिति: सन् 2014 में इस समिति ने नया गरीबी मापन सूत्र प्रस्तुत किया।
गरीबी से जुड़े तथ्य: - गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को गरीब माना जाता है। - गरीबी उन्मूलन के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संगठन भी कार्य करते हैं। - विश्व बैंक प्रति व्यक्ति प्रति दिन 2.15 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा मानता है। - संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम मानव विकास सूचकांक प्रकाशित करता है।
गरीबी के कारण: - निम्न आर्थिक विकास और रोजगार की कमी - उच्च जनसंख्या वृद्धि - कृषि पर अधिक निर्भरता - शिक्षा और कौशल की कमी - आय की असमानता
बेरोजगारी के प्रकार: - खुली बेरोजगारी: जब व्यक्ति काम करने को तैयार हो फिर भी उसे कोई काम नहीं मिलता। - छिपी बेरोजगारी: जब आवश्यकता से अधिक लोग किसी कार्य में लगे होते हैं, जैसे कृषि में परिवार के कई सदस्य। - मौसमी बेरोजगारी: जब कृषि कार्यों की मौसमी प्रकृति के कारण वर्ष के कुछ महीनों में काम नहीं मिलता। - संरचनात्मक बेरोजगारी: जब अर्थव्यवस्था की संरचना में बदलाव से कौशल की मांग नहीं रहती। - घर्षणात्मक बेरोजगारी: जब काम बदलने के बीच की अवधि में व्यक्ति बेरोजगार हो। - शिक्षित बेरोजगारी: जब शिक्षित व्यक्तियों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी नहीं मिलती।
बेरोजगारी के मापन के सूचक: - बेरोजगारी दर: कुल श्रम बल में बेरोजगारों का अनुपात। - श्रम बल भागीदारी दर: कुल जनसंख्या में काम करने योग्य जनसंख्या का अनुपात। - रोजगार गहनता: प्रति इकाई उत्पादन में रोजगार की मात्रा।
बेरोजगारी के कारण: - तीव्र जनसंख्या वृद्धि - शिक्षा प्रणाली का रोजगारोन्मुखी न होना - औद्योगीकरण की धीमी गति - कृषि पर अधिक निर्भरता - कौशल विकास का अभाव
बेरोजगारी से जुड़े संगठन: - राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय - आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण - राष्ट्रीय कौशल विकास निगम - रोजगार संबंधी कार्यक्रम
आर्थिक विकास बनाम आर्थिक वृद्धि: - आर्थिक वृद्धि: जीडीपी या राष्ट्रीय आय में मात्रात्मक वृद्धि। - आर्थिक विकास: वृद्धि के साथ जीवन स्तर, स्वास्थ्य, शिक्षा और आय वितरण में गुणात्मक सुधार।
विकास के सूचकांक: - मानव विकास सूचकांक (HDI): संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा जारी, जिसमें जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और प्रति व्यक्ति आय शामिल है। - बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI): शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के आधार पर गरीबी मापता है। - कुलीन और गुणांक: आय असमानता का माप, जो 0 से 1 के बीच होता है। 0 पूर्ण समानता और 1 पूर्ण असमानता दर्शाता है।
गरीबी उन्मूलन के प्रमुख कार्यक्रम: - महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति वर्ष 100 दिन के रोजगार की गारंटी। - प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम: छोटे उद्योगों में रोजगार सृजन। - दीनदयाल अंत्योदय योजना: गरीब परिवारों के उत्थान हेतु। - पीएम आवास योजना: गरीबों को आवास उपलब्ध कराना। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम: सस्ते दामों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
महत्वपूर्ण तथ्य: - समावेशी विकास का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाना है। - सतत विकास का अर्थ है बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए विकास। - भारत में आर्थिक विकास के साथ गरीबी में लगातार कमी आई है। - रोजगार सृजन विकास का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
| प्रकार | परिभाषा |
|---|---|
| खुली बेरोजगारी | सक्षम व्यक्ति को काम न मिलना |
| छिपी बेरोजगारी | आवश्यकता से अधिक श्रमिक कार्य में |
| मौसमी बेरोजगारी | मौसम के कारण काम न मिलना |
| संरचनात्मक बेरोजगारी | संरचना बदलने से कौशल की कमी |
| शिक्षित बेरोजगारी | योग्यता के अनुसार नौकरी न मिलना |
| सूचकांक | प्रकाशक | मुख्य घटक |
|---|---|---|
| मानव विकास सूचकांक | UNDP | शिक्षा, स्वास्थ्य, आय |
| बहुआयामी गरीबी | UNDP | शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन स्तर |
| जिनी गुणांक | आय आंकड़े | आय असमानता |
flowchart TD
A[20.7 गरीबी बेरोजगारी और विकास] --> B[गरीबी]
A --> C[बेरोजगारी]
A --> D[आर्थिक विकास]
B --> B1[निरपेक्ष गरीबी]
B --> B2[सापेक्ष गरीबी]
B --> B3[गरीबी रेखा]
C --> C1[खुली बेरोजगारी]
C --> C2[छिपी बेरोजगारी]
C --> C3[मौसमी बेरोजगारी]
D --> D1[HDI]
D --> D2[MPI]
D --> D3[जिनी गुणांक]
गरीबी और बेरोजगारी भारत की विकास यात्रा की बड़ी चुनौतियाँ हैं। गरीबी के प्रकार, बेरोजगारी के रूप, मापन के तरीके और विकास के सूचकांकों की समझ विद्यार्थियों को एनटीपीसी परीक्षा में अर्थशास्त्र के प्रश्नों को सटीकता से हल करने में सक्षम बनाती है और समावेशी विकास की आवश्यकता को स्पष्ट करती है।