विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय भूगोल)
अध्याय: 14.2 हिमालय और उत्तरी मैदान
विषय-वस्तु: हिमालय श्रेणियाँ, मैदान
1. परिचय
हिमालय भारत के उत्तर में स्थित विश्व की सबसे ऊँची और सबसे युवा पर्वत श्रृंखला है। यह एक युवा वलित पर्वत (फोल्ड माउंटेन) है, जो टर्शियरी काल में इंडो-आस्ट्रेलियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने से बना। हिमालय की कुल लंबाई लगभग 2,400 किलोमीटर तथा चौड़ाई 240 से 320 किलोमीटर है। यह पश्चिम में सिंधु नदी के मोड़ से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ तक फैला हुआ है। हिमालय शब्द का अर्थ है 'बर्फ का घर' (हिम = बर्फ, आलय = घर)। यह पर्वतमाला भारत के लिए प्राकृतिक सीमा, मानसून का अवरोधक तथा अनेक नदियों का उद्गम स्थल है।
हिमालय को पश्चिम से पूर्व की ओर तीन समानांतर श्रेणियों में विभाजित किया गया है—हिमाद्रि (वृहत् हिमालय), हिमाचल (लघु हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय)। इनके अतिरिक्त हिमालय को क्षेत्रीय आधार पर पंजाब हिमालय, कुमाऊँ हिमालय, नेपाल हिमालय तथा असम हिमालय में भी बाँटा जाता है। इन तीन श्रेणियों के बीच की घाटियों को 'दून' कहा जाता है, जैसे देहरादून। हिमालय की चोटियों पर स्थायी हिम (ग्लेशियर) जमा रहता है, जिससे निकलने वाली नदियाँ सदैव बहने वाली (सदानीरा) होती हैं।
हिमालय के दक्षिण में स्थित उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ (अवसाद) से निर्मित अत्यंत उपजाऊ मैदान है। यह पश्चिम में सिंधु से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र तक लगभग 2,400 किलोमीटर तक विस्तृत है तथा इसकी चौड़ाई 240 से 320 किलोमीटर है। इस मैदान में भारत की लगभग आधी जनसंख्या निवास करती है, इसीलिए इसे 'भारत का अन्न भंडार' भी कहा जाता है। दोनों विषय—हिमालय और उत्तरी मैदान—NTPC परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
2. हिमालय की मुख्य श्रेणियाँ
हिमालय की तीन समानांतर श्रेणियों का विवरण इस प्रकार है:
हिमाद्रि (वृहत् हिमालय / ग्रेटर हिमालय): यह सबसे ऊँची श्रेणी है, जिसकी औसत ऊँचाई 6,000 मीटर से अधिक है। इसमें विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) स्थित है, जिसे नेपाल में 'सागरमाथा' कहा जाता है। भारत में स्थित अन्य प्रमुख चोटियाँ कंचनजंगा (8,586 मीटर), नंदा देवी (7,816 मीटर) और कामेट हैं। यहाँ स्थायी हिम रहता है और अनेक ग्लेशियर (गंगोत्री, यमुनोत्री, सियाचिन) पाए जाते हैं।
हिमाचल (लघु हिमालय / लेसर हिमालय): यह हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है, जिसकी ऊँचाई 3,700 से 4,500 मीटर के बीच है। इसमें पीर पंजाल, धौलाधार, महाभारत तथा नागा श्रेणियाँ शामिल हैं। यहाँ के प्रमुख स्थल हैं—गुलमर्ग, कश्मीर घाटी, कांगड़ा घाटी तथा कुल्लू घाटी।
शिवालिक (बाह्य हिमालय / आउटर हिमालय): यह सबसे बाहरी और सबसे निचली श्रेणी है, जिसकी ऊँचाई 900 से 1,100 मीटर के बीच है। यह दक्षिण में पंजाब से असम तक फैली है। इसके उत्तर में स्थित लंबवत घाटियों को 'दून' कहा जाता है, जैसे—देहरादून, पटली दून, कोटली दून।
ट्रांस-हिमालय: हिमाद्रि के उत्तर में स्थित क्षेत्र को ट्रांस-हिमालय कहते हैं, जिसमें काराकोरम, लद्दाख और जास्कर श्रेणियाँ शामिल हैं। काराकोरम में स्थित K2 (गॉडविन ऑस्टिन, 8,611 मीटर) विश्व का दूसरा सबसे ऊँचा शिखर है।
हिमालय के प्रमुख दर्रे (पास) परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
जोजी ला: लेह और श्रीनगर के बीच।
नाथू ला: सिक्किम और तिब्बत (चीन) के बीच।
शिपकी ला: हिमाचल प्रदेश और तिब्बत के बीच।
रोहतांग दर्रा: हिमाचल प्रदेश में मनाली-लेह मार्ग पर।
बनिहाल दर्रा: जम्मू-कश्मीर में, जवाहर सुरंग इसी से होकर गुजरती है।
बड़ा लाचा ला और जलेप ला: सिक्किम-तिब्बत मार्ग।
3. उत्तरी मैदान के भाग और विशेषताएँ
उत्तरी मैदान (इंडो-गंगा मैदान) को चार भागों में बाँटा जाता है, जो भूमि की प्रकृति और आयु पर आधारित है:
भाबर क्षेत्र: यह शिवालिक पहाड़ियों के समीप स्थित संकरा क्षेत्र है, जहाँ नदियाँ पहाड़ों से उतरकर कंकड़-पत्थर और बालू नीचे छोड़ती हैं। यह क्षेत्र छिद्रयुक्त (पोरस) होने के कारण नदियाँ यहाँ नीचे गायब हो जाती हैं।
तराई क्षेत्र: भाबर के दक्षिण में स्थित यह क्षेत्र दलदली एवं नम है, जहाँ नदियाँ पुनः सतह पर आ जाती हैं। यहाँ घना जंगल और उपजाऊ भूमि पाई जाती है। यह क्षेत्र कृषि के लिए बहुत उपयोगी है।
बांगर क्षेत्र: यह मैदान का पुराना जलोढ़ क्षेत्र है, जिसमें 'कंकड़' (चूने के जमाव) पाए जाते हैं। यह भूमि अपेक्षाकृत ऊँची और कम उपजाऊ होती है।
खादर क्षेत्र: यह मैदान का नया जलोढ़ क्षेत्र है, जो नदियों के बाढ़ के समय जमा होता है। यह भूमि बहुत उपजाऊ है और यहाँ अच्छी फसलें होती हैं।
मैदानी भागों को नदी घाटियों के आधार पर भी बाँटा जा सकता है:
पंजाब का मैदान: सिंधु और उसकी पाँच सहायक नदियों (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) द्वारा निर्मित।
गंगा का मैदान: गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी आदि द्वारा निर्मित; यह मैदान का सबसे बड़ा भाग है।
ब्रह्मपुत्र का मैदान: असम घाटी में ब्रह्मपुत्र द्वारा निर्मित; यह संकरा और नदी-विभाजित क्षेत्र है।
गंगा के मैदान में बहने वाली प्रमुख सहायक नदियों में कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि यह प्रतिवर्ष विनाशकारी बाढ़ लाती है। इसी प्रकार यमुना, घाघरा, गंडक, सोन और चंबल अन्य प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। उत्तरी मैदान में भारत की लगभग 43 प्रतिशत भूमि समाहित है और यहाँ गेहूँ, चावल, गन्ना, दालें तथा सरसों की खेती प्रमुखता से होती है।
4. हिमनद, चोटियाँ और महत्वपूर्ण तथ्य
हिमालय में स्थित प्रमुख ग्लेशियर (हिमनद) और चोटियाँ निम्नलिखित हैं:
सियाचिन ग्लेशियर: विश्व का दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर, काराकोरम श्रेणी में, जम्मू-कश्मीर में।
गंगोत्री ग्लेशियर: गंगा नदी का उद्गम स्थल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में।
यमुनोत्री ग्लेशियर: यमुना नदी का उद्गम स्थल।
के सीसी मोटे ग्लेशियर तथा पिंडारी ग्लेशियर: कुमाऊँ हिमालय में।
सतोपंथ तथा भागीरथी ग्लेशियर: गंगोत्री के पास।
प्रमुख शिखरों की ऊँचाई क्रमशः याद रखें:
माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) — विश्व की सबसे ऊँची चोटी, नेपाल।
K2 / गॉडविन ऑस्टिन (8,611 मीटर) — विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर।
कंचनजंगा (8,586 मीटर) — भारत की सबसे ऊँची चोटी, सिक्किम।
नंदा देवी (7,816 मीटर) — उत्तराखंड।
नंगा पर्वत (8,126 मीटर) — पाकिस्तान।
हिमालय का भारत के जीवन में महत्व निम्न बिंदुओं से स्पष्ट होता है:
जलवायु नियंत्रण: यह ठंडी हवाओं को रोककर भारत में मानसूनी वर्षा को नियंत्रित करता है।
नदी तंत्र: गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियाँ यहीं से उद्गम लेती हैं।
प्राकृतिक सीमा: उत्तर में भारत की प्राकृतिक सुरक्षा का कवच।
वन एवं खनिज संसाधन: वनों, घास के मैदानों, खनिजों और पर्यटन का केंद्र।
दर्रे: व्यापारिक एवं सैन्य मार्ग प्रदान करते हैं।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
श्रेणी
ऊँचाई
प्रमुख शिखर/विशेषता
हिमाद्रि (वृहत् हिमालय)
6,000 मीटर से अधिक
माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा; स्थायी हिम
हिमाचल (लघु हिमालय)
3,700–4,500 मीटर
पीर पंजाल, धौलाधार
शिवालिक (बाह्य हिमालय)
900–1,100 मीटर
दून घाटियाँ, देहरादून
ट्रांस-हिमालय
5,000–7,000 मीटर
काराकोरम, लद्दाख, K2
तालिका 2
मैदान का भाग
स्थान/प्रकृति
प्रमुख विशेषता
भाबर
शिवालिक के दक्षिण
कंकड़-पत्थर, छिद्रयुक्त, नदियाँ गायब
तराई
भाबर के दक्षिण
दलदली, नम, उपजाऊ
बांगर
पुराना जलोढ़
कंकड़ (कैल्शियम जमाव), ऊँची भूमि
खादर
नया जलोढ़
बाढ़ से बनी, सबसे उपजाऊ
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[हिमालय और उत्तरी मैदान] --> B[हिमालय की श्रेणियाँ]
B --> B1[हिमाद्रि]
B --> B2[हिमाचल]
B --> B3[शिवालिक]
B --> B4[ट्रांस-हिमालय]
A --> C[प्रमुख चोटियाँ]
C --> C1[एवरेस्ट 8848]
C --> C2[K2 8611]
C --> C3[कंचनजंगा 8586]
A --> D[दर्रे]
D --> D1[जोजी ला]
D --> D2[नाथू ला]
D --> D3[शिपकी ला]
A --> E[उत्तरी मैदान के भाग]
E --> E1[भाबर]
E --> E2[तराई]
E --> E3[बांगर]
E --> E4[खादर]
A --> F[ग्लेशियर]
F --> F1[गंगोत्री]
F --> F2[सियाचिन]
F --> F3[यमुनोत्री]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: K2 को भारत की सबसे ऊँची चोटी बताना। वास्तव में K2 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में है; भारत की सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा (सिक्किम) है।
गलती: शिवालिक को सबसे ऊँची श्रेणी मानना। शिवालिक सबसे निचली (900–1,100 मीटर) श्रेणी है, सबसे ऊँची हिमाद्रि है।
गलती: 'दून' को नदी घाटी बताना। दून शिवालिक और हिमाचल श्रेणियों के बीच की लंबवत घाटी है, जैसे देहरादून।
गलती: बांगर और खादर की प्रकृति को उलट देना। बांगर पुराना जलोढ़ (कंकड़ सहित) है, जबकि खादर नया जलोढ़ और अधिक उपजाऊ है।
गलती: गंगोत्री ग्लेशियर को यमुना का उद्गम बताना। गंगोत्री गंगा का उद्गम है; यमुना का उद्गम यमुनोत्री है।
गलती: जोजी ला दर्रे को सिक्किम-तिब्बत मार्ग बताना। जोजी ला श्रीनगर-लेह मार्ग पर है; सिक्किम-तिब्बत मार्ग नाथू ला है।
गलती: हिमालय को प्राचीन वलित पर्वत बताना। हिमालय एक युवा (टर्शियरी काल) वलित पर्वत है, जबकि अरावली प्राचीन है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
चोटियों की ऊँचाई क्रम को याद रखें—एवरेस्ट (8848), K2 (8611), कंचनजंगा (8586), नंदा देवी (7816)।
तीन श्रेणियों (हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक) की ऊँचाई सीमा को बार-बार दोहराएँ, क्योंकि ऊँचाई वाले प्रश्न बहुत पूछे जाते हैं।
दर्रों को 'राज्य + मार्ग' के साथ स्मरण रखें—जोजी ला (श्रीनगर-लेह), नाथू ला (सिक्किम-तिब्बत), शिपकी ला (हिमाचल-तिब्बत)।
भाबर-तराई-बांगर-खादर को उत्तर से दक्षिण क्रम में याद रखें तथा 'कौन-सा कहाँ गायब होता/उभरता है' का तर्क समझें।
ग्लेशियर-नदी के जोड़े (गंगोत्री-गंगा, यमुनोत्री-यमुना, सियाचिन-नुब्रा) बार-बार दोहराएँ।
कोसी को 'बिहार का शोक' और अरावली को प्राचीनतम पर्वतमाला के रूप में स्मरण रखें।
10. निष्कर्ष
हिमालय और उत्तरी मैदान भारत के भूगोल के दो आधारभूत स्तंभ हैं—एक ओर यह युवा पर्वतमाला जलवायु, नदियों और सीमाओं को निर्धारित करती है, तो दूसरी ओर जलोढ़ से निर्मित विशाल मैदान देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। श्रेणियों का क्रम, चोटियों की ऊँचाई, दर्रे और मैदान के चार क्षेत्रों की प्रकृति—ये चार विषय परीक्षा में सर्वाधिक प्रश्न उत्पन्न करते हैं। इन्हें मानचित्र और स्मरण तालिकाओं के साथ पढ़ने से स्थायी स्मृति बनती है तथा NTPC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भूगोल के अंक आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।