विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय भूगोल)
अध्याय: 14.6 मिट्टी और कृषि
विषय-वस्तु: मिट्टी के प्रकार, कृषि
1. परिचय
मिट्टी पृथ्वी की ऊपरी सतह का वह उपजाऊ स्तर है जो कृषि का आधार है। भारत में मिट्टी का वर्गीकरण मुख्यतः उसकी उत्पत्ति, रंग और संरचना के आधार पर किया जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार भारत की मिट्टियों को मुख्य रूप से 8 प्रकारों में बाँटा गया है। इनमें से जलोढ़ मिट्टी सबसे अधिक विस्तृत है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र घेरती है तथा उत्तरी मैदानों में पाई जाती है। मिट्टी की प्रकृति ही यह निर्धारित करती है कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उगाई जा सकती है, इसलिए मिट्टी और कृषि का अध्ययन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। देश की लगभग 58 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है तथा कृषि राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है। भारत की कृषि को तीन फसल ऋतुओं में विभाजित किया गया है—खरीफ (जून-अक्तूबर), रबी (अक्तूबर-मार्च) और जायद (अप्रैल-जून)। खरीफ की मुख्य फसलें चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास हैं; रबी की मुख्य फसलें गेहूँ, जौ, चना, सरसों हैं; तथा जायद की फसलें तरबूज, खीरा, ग्रीष्मकालीन सब्जियाँ हैं। गेहूँ उत्तर भारत में शीत ऋतु में तथा चावल पूर्वी एवं दक्षिणी भारत में वर्षा ऋतु में उगाई जाती है।
भारत में हरित क्रांति (1960 के दशक) के बाद से उच्च उपज देने वाली प्रजातियों (HYV), उर्वरकों और सिंचाई के उपयोग से अनाज उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। भारत विश्व में चावल, गेहूँ, गन्ना, कपास, चाय, दूध आदि का प्रमुख उत्पादक है। कृषि से संबंधित फसलें, उनकी जलवायु आवश्यकताएँ, प्रमुख उत्पादक राज्य तथा मिट्टी के प्रकार रेलवे NTPC में अत्यंत लोकप्रिय प्रश्न हैं।
2. मिट्टी के प्रकार
भारत की प्रमुख मिट्टियों का विवरण निम्नलिखित है:
जलोढ़ मिट्टी (Alluvial): उत्तरी मैदानों तथा नदी घाटियों में पाई जाती है; सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान में सर्वाधिक विस्तृत। इसमें पोटाश तथा चूना प्रचुर होता है, परंतु नाइट्रोजन की कमी होती है। खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए उपयुक्त; गेहूँ, चावल, गन्ना यहाँ अच्छी उगती हैं।
काली मिट्टी (रगड़/रेगुर): दक्कन के पठार (महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक) में बेसाल्ट लावा से बनी; इसमें चूना, लोहा, मैग्नीशियम प्रचुर और जल-धारण क्षमता अधिक होती है। कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त, इसलिए इसे 'काली कपास मिट्टी' कहते हैं।
लाल और पीली मिट्टी: प्रायद्वीपीय क्षेत्र (तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़, दक्षिणी पठार) में; लोहे के आक्साइड के कारण लाल रंग; उपजाऊपन मध्यम, चावल, मक्का, दालें, आलू के लिए उपयुक्त।
लैटेराइट मिट्टी: पश्चिमी घाट, केरल, महाराष्ट्र के पहाड़ी क्षेत्रों में; अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में निक्षालन (लीचिंग) के कारण बनी; लोहे-एल्युमिनियम की मात्रा अधिक; कम उपजाऊ, परंतु काजू, चाय, नारियल के लिए उपयुक्त।
मरुस्थलीय/रेतीली मिट्टी: थार मरुस्थल (राजस्थान) में; बालू की अधिकता, नमी की कमी; जौ, मोटा अनाज, बाजरा उगाया जाता है।
क्षारीय/लवणीय मिट्टी: सूखे एवं नीचे क्षेत्रों (राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश) में; सोडियम एवं लवण की अधिकता; बंजर भूमि।
पीटी/दलदली मिट्टी: अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (केरल के तट, अल्मोड़ा) में; कार्बनिक पदार्थ अधिक, उपजाऊ।
वन/पर्वतीय मिट्टी: हिमालय की ढलानों तथा वन क्षेत्रों में; धरण (ह्यूमस) की अधिकता; चाय, कॉफी, मसालों के लिए उपयुक्त।
मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए मिट्टी संरक्षण के उपाय आवश्यक हैं। मिट्टी का कटाव (अपरदन) मुख्यतः पानी और हवा द्वारा होता है। शीट अपरदन, रिल अपरदन, गली अपरदन (गलियों का बनना) तथा भू-स्खलन मिट्टी के कटाव के प्रकार हैं। मिट्टी संरक्षण के लिए समोच्च बंधन (कंटूर बंडिंग), पट्टीदार खेती (स्ट्रिप क्रॉपिंग), पवनरोधक वृक्ष-पंक्तियाँ, वनरोपण तथा न्यूनतम जुताई जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
3. फसलें और उनकी आवश्यकताएँ
भारत की प्रमुख फसलें उनकी जलवायु आवश्यकताओं एवं उत्पादक राज्यों के साथ निम्नलिखित हैं:
चावल: गर्म एवं आर्द्र जलवायु, 100 सेमी से अधिक वर्षा; प्रमुख उत्पादक—पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश; भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक है।
गेहूँ: ठंडी एवं शुष्क जलवायु, 50-75 सेमी वर्षा; रबी की मुख्य फसल; प्रमुख उत्पादक—उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा।
गन्ना: गर्म एवं आर्द्र जलवायु; प्रमुख उत्पादक—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक; भारत विश्व का प्रमुख गन्ना उत्पादक।
कपास: काली मिट्टी, गर्म जलवायु; प्रमुख उत्पादक—गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश।
जूट: गर्म-आर्द्र जलवायु, जलोढ़ मिट्टी; प्रमुख उत्पादक—पश्चिम बंगाल (देश का सर्वाधिक उत्पादन), बिहार, असम।
चाय: पहाड़ी ढलान, अधिक वर्षा, अम्लीय मिट्टी; प्रमुख उत्पादक—असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), तमिलनाडु (नीलगिरि)।
कॉफी: अरेबिका और रोबस्टा; प्रमुख उत्पादक—कर्नाटक (देश का सर्वाधिक उत्पादन), केरल, तमिलनाडु।
कृषि के प्रकारों में निर्वाह कृषि, वाणिज्यिक कृषि, मिश्रित कृषि, गहन कृषि, स्थानांतरित कृषि (झूम), रोपण कृषि शामिल हैं। स्थानांतरित कृषि को पूर्वोत्तर में 'झूम', मध्य भारत में 'बेवर', दक्षिण में 'पोडु' कहा जाता है। कृषि का विकास सिंचाई पर निर्भर है—भारत में सिंचाई का प्रमुख साधन नलकूप/कुआँ (भूमिगत जल) है, इसके बाद नहरें तथा तालाब आते हैं। भारत में वर्षा आधारित क्षेत्रों में धान, मक्का, दालें उगाई जाती हैं, जबकि सिंचित क्षेत्रों में गेहूँ, गन्ना, चावल की अधिक उपज होती है।
4. कृषि क्रांतियाँ और सरकारी योजनाएँ
भारत में हुई प्रमुख कृषि क्रांतियाँ और उनसे संबंधित फसलें निम्न हैं:
श्वेत क्रांति: दूध उत्पादन—वर्गीज कुरियन; 'ऑपरेशन फ्लड' इसी से जुड़ा।
पीली क्रांति: तिलहन।
नीली क्रांति: मछली उत्पादन।
गुलाबी क्रांति: झींगा (श्रिंप) उत्पादन।
स्वर्ण क्रांति: फल, शहद, बागवानी।
भूरी क्रांति: उर्वरक उत्पादन।
रजत क्रांति: अंडा उत्पादन।
सरकारी योजनाओं में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, पीएम किसान मान-धन योजना प्रमुख हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, फसलों का बीमा करना तथा मिट्टी की उर्वरता की जाँच करना है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना मिट्टी में पोषक तत्वों की जानकारी देकर उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देती है।
भारत में कृषि से संबंधित कुछ विशेष तथ्य:
भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है।
भारत दालों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है।
भारत में सर्वाधिक क्षेत्रफल चावल के अंतर्गत है।
गन्ना, कपास, चाय, जूट—इन फसलों के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
मिट्टी का प्रकार
पाई जाने वाली जगह
प्रमुख फसलें
जलोढ़ मिट्टी
उत्तरी मैदान
गेहूँ, चावल, गन्ना
काली मिट्टी
दक्कन का पठार
कपास, गन्ना
लाल/पीली मिट्टी
दक्षिणी पठार
चावल, मक्का, दालें
लैटेराइट मिट्टी
पश्चिमी घाट
चाय, काजू, नारियल
रेतीली मिट्टी
थार मरुस्थल
बाजरा, जौ
तालिका 2
फसल
फसल ऋतु
प्रमुख उत्पादक राज्य
चावल
खरीफ
प. बंगाल, उ. प्रदेश, पंजाब
गेहूँ
रबी
उ. प्रदेश, पंजाब, म. प्रदेश
कपास
खरीफ
गुजरात, महाराष्ट्र
जूट
खरीफ
प. बंगाल
चाय
सदाबहार
असम, प. बंगाल
कॉफी
—
कर्नाटक
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[मिट्टी और कृषि] --> B[मिट्टी के प्रकार]
B --> B1[जलोढ़ मिट्टी]
B --> B2[काली मिट्टी]
B --> B3[लाल मिट्टी]
B --> B4[लैटेराइट मिट्टी]
B --> B5[रेतीली मिट्टी]
A --> C[फसल ऋतुएँ]
C --> C1[खरीफ जून-अक्तूबर]
C --> C2[रबी अक्तूबर-मार्च]
C --> C3[जायद अप्रैल-जून]
A --> D[प्रमुख फसलें]
D --> D1[चावल]
D --> D2[गेहूँ]
D --> D3[गन्ना]
D --> D4[कपास]
D --> D5[जूट]
D --> D6[चाय]
A --> E[क्रांतियाँ]
E --> E1[हरित क्रांति अनाज]
E --> E2[श्वेत क्रांति दूध]
E --> E3[नीली क्रांति मछली]
E --> E4[पीली क्रांति तिलहन]
A --> F[सिंचाई]
F --> F1[नलकूप]
F --> F2[नहरें]
F --> F3[तालाब]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: काली मिट्टी को जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र से जोड़ना। काली मिट्टी दक्कन के बेसाल्ट क्षेत्र में है; जलोढ़ मिट्टी उत्तरी मैदान में।
गलती: चावल को रबी फसल बताना। चावल खरीफ की फसल है; रबी की मुख्य फसल गेहूँ है।
गलती: चाय को मैदानी क्षेत्र की फसल बताना। चाय पहाड़ी ढलानों पर अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उगती है।
गलती: जूट के सबसे बड़े उत्पादक राज्य को बिहार बताना। जूट का सर्वाधिक उत्पादन पश्चिम बंगाल में होता है।
गलती: श्वेत क्रांति को अनाज से जोड़ना। श्वेत क्रांति दूध उत्पादन से संबंधित है; अनाज हरित क्रांति से।
गलती: नींबू के रूप में लैटेराइट मिट्टी को अत्यधिक उपजाऊ बताना। लैटेराइट मिट्टी कम उपजाऊ होती है।
गलती: हरित क्रांति के जनक को नॉर्मन बोरलॉग बताना। वैश्विक स्तर पर बोरलॉग जनक हैं, परंतु भारत में हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन हैं।
9. परीक्षा युक्तियाँ
मिट्टी को 'क्षेत्र + प्रमुख फसल' के जोड़े में याद रखें, जैसे काली-दक्कन-कपास, जलोढ़-उत्तरी मैदान-गेहूँ।
खरीफ (चावल, कपास, जूट) और रबी (गेहूँ, चना, सरसों) की सूचियाँ अलग-अलग स्मरण करें।
क्रांतियों और उनके विषय (रंग-उत्पाद) के मिलान का अभ्यास करें; यह लोकप्रिय प्रश्न है।
सिंचाई का सबसे बड़ा साधन (नलकूप) तथा उसके बाद नहरों का क्रम याद रखें।
प्रमुख फसलों के उत्पादक राज्य (चावल-प. बंगाल, गेहूँ-उ. प्रदेश, जूट-प. बंगाल, कॉफी-कर्नाटक) दोहराएँ।
मिट्टी के कटाव के प्रकार तथा संरक्षण के उपायों की सूची संक्षेप में याद रखें।
10. निष्कर्ष
मिट्टी और कृषि भारत की अर्थव्यवस्था तथा परीक्षाओं दोनों की दृष्टि से केंद्रीय विषय हैं। मिट्टी के प्रकार, उनके विस्तार और उपयुक्त फसलों का ज्ञान कृषि संबंधी सभी प्रश्नों को हल करने में सहायक है। फसल ऋतुएँ, प्रमुख फसलों के उत्पादक राज्य, कृषि क्रांतियाँ तथा सिंचाई साधन इस अध्याय के मुख्य प्रश्न-स्रोत हैं। इन्हें तालिकाओं और स्मरण सूत्रों के साथ पढ़ने से स्थायी स्मृति बनती है। नियमित अभ्यास से रेलवे NTPC में सामान्य जागरूकता के इस महत्वपूर्ण अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।