विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (मध्यकालीन भारतीय इतिहास)
अध्याय: 12.1 दिल्ली सल्तनत
विषय-वस्तु: गुलाम, खिलजी, तुगलक, लोदी वंश
1. परिचय
दिल्ली सल्तनत भारतीय इतिहास के मध्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है, जो सन् 1206 से 1526 तक लगभग 320 वर्षों तक विद्यमान रही। इस काल में तुर्क-अफगान शासकों ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाकर उत्तर भारत के विशाल भू-भाग पर शासन किया। मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद उसके सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में दिल्ली में अपनी सत्ता स्थापित की और इस प्रकार दिल्ली सल्तनत की नींव पड़ी। इस सल्तनत का उदय ईरान, मध्य एशिया और अफगानिस्तान से आए तुर्की शासकों के प्रभाव से हुआ था, जिन्होंने यहाँ अपनी सैन्य शक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की।
दिल्ली सल्तनत के शासनकाल को मुख्यतः पाँच वंशों में विभाजित किया जाता है: गुलाम वंश (1206–1290), खिलजी वंश (1290–1320), तुगलक वंश (1320–1414), सैय्यद वंश (1414–1451) और लोदी वंश (1451–1526)। इन पाँचों वंशों ने मिलकर दिल्ली को एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र बनाया और उत्तर भारत में एक केंद्रीकृत शासन व्यवस्था की नींव रखी। तैमूर लंग के आक्रमण (1398) के बाद सल्तनत की शक्ति कमजोर हुई, जिसका लाभ उठाकर लोदी वंश ने सत्ता संभाली, परंतु अंततः 1526 में बाबर ने पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी को पराजित कर मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
रेलवे NTPC की सामान्य जागरूकता परीक्षा में इस अध्याय से शासकों के शासनकाल, उनकी उपलब्धियों, स्मारकों, युद्धों और प्रशासनिक सुधारों पर आधारित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। गुलाम वंश के इल्तुतमिश और बलबन, खिलजी वंश के अलाउद्दीन खिलजी, तुगलक वंश के मुहम्मद बिन तुगलक और लोदी वंश के सिकंदर लोदी से संबंधित तथ्य परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन शासकों की तिथियों, नीतियों और निर्माण कार्यों को क्रमबद्ध रूप से याद रखना ही इस अध्याय में अच्छे अंक प्राप्त करने की कुंजी है।
2. गुलाम वंश (1206–1290)
गुलाम वंश की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में रखी। ऐबक मुहम्मद गोरी का प्रिय गुलाम सेनापति था और अपनी उदारता के कारण उसे "लाख बख्श" की उपाधि से सम्मानित किया गया। उसने कुतुबमीनार का निर्माण प्रारंभ किया, जिसे बाद में इल्तुतमिश ने पूरा कराया। ऐबक की मृत्यु 1210 में चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण हुई। उसके बाद अराम शाह ने अल्पकाल के लिए शासन किया।
इल्तुतमिश (1211–1236): इसे वास्तविक रूप से दिल्ली सल्तनत का सुदृढ़ संस्थापक माना जाता है। उसने 1229 में बगदाद के खलीफा से सल्तनत की मान्यता प्राप्त की। उसने "तुर्कान-ए-चिहलगानी" या चालीसा नामक चालीस तुर्की सरदारों का दल बनाया। उसने सोने का सिक्का टंका और तांबे का सिक्का जीतल चलाया।
रजिया सुल्तान (1236–1240): इल्तुतमिश की पुत्री भारतीय इतिहास की पहली तथा एकमात्र मुस्लिम महिला शासिका थी। उसने पुरुषों की पोशाक पहनकर दरबार में न्याय किया, परंतु याकूत नामक हब्शी के साथ संबंध की अफवाह के कारण उसके विरुद्ध विद्रोह हुआ और अंततः कैथल में उसकी हत्या कर दी गई।
बहराम शाह (1240–1242), अलाउद्दीन मसूद (1242–1246) और नासिरुद्दीन महमूद (1246–1266) के शासन में वास्तविक शक्ति बलबन के हाथों में रही।
गियासुद्दीन बलबन (1266–1287): वह कठोर शासक था और उसने "रक्त और लौह" की नीति अपनाई। उसने दिल्ली में चोरी-डकैती रोकने के लिए कठोर दंड की व्यवस्था की तथा मंगोलों के आक्रमणों से राज्य की रक्षा की। उसके पुत्र मुहम्मद की मंगोलों के विरुद्ध मृत्यु हो गई थी।
गुलाम वंश का अंतिम शासक कैकुबाद (1287–1290) था, जिसके बाद जलालुद्दीन खिलजी ने सत्ता संभाली।
त्वरित तथ्य: कुतुबमीनार की ऊँचाई लगभग 72.5 मीटर है। इल्तुतमिश को "शम्सी वंश" का संस्थापक भी कहा जाता है। गुलाम वंश को "तुर्की वंश" या "दास वंश" भी कहा जाता है।
3. खिलजी वंश (1290–1320)
खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290–1296) था, जो वृद्ध और उदार स्वभाव का शासक था। उसकी हत्या उसके भतीजे अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 में कर दी। इस प्रकार अलाउद्दीन खिलजी सत्ता पर आसीन हुआ और खिलजी वंश का सबसे महान शासक बना।
अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316): उसने अपने शासनकाल में लगभग छह बार मंगोल आक्रमणों का सामना किया और उन्हें सफलतापूर्वक विफल किया। उसने दक्कन विजय के लिए मलिक काफूर को दक्षिण भारत भेजा, जिसने देवगिरि (1307), वारंगल (1309), द्वारसमुद्र और मदुरा तक विजय प्राप्त की।
उसकी सबसे प्रसिद्ध नीति बाजार नियंत्रण थी, जिसके अंतर्गत उसने अन्न, कपड़े आदि वस्तुओं की कीमतें निर्धारित कीं। इस नीति को लागू करने के लिए उसने दीवान-ए-रियासत नामक विभाग तथा शहना-ए-मंडी नामक अधिकारी नियुक्त किया।
उसने भू-राजस्व सुधार भी किए और किसानों से नकद में कर वसूल करने की व्यवस्था की। उसने राजस्व विभाग के लिए दीवान-ए-मुस्तखराज की स्थापना की।
अलाउद्दीन खिलजी ने स्थायी सेना का संगठन किया तथा सैनिकों को नकद वेतन दिया। उसने हिंदुओं पर चौथाई कर तथा अन्य करों की व्यवस्था की।
स्मारक: उसने अलाई दरवाजा और हौज़-ए-खास जलाशय का निर्माण कराया। उसके दरबारी कवि अमीर खुसरो थे, जिन्हें भारतीय संगीत में सितार के आविष्कारक के रूप में माना जाता है।
अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद मालिक काफूर ने शिहाबुद्दीन उमर को गद्दी पर बिठाया, परंतु शीघ्र ही मुबारक खिलजी सत्ता में आया। वंश का अंतिम शासक खुसरो खान (1320) था।
त्वरित तथ्य: अलाउद्दीन खिलजी को "पहला सुल्तान" भी कहा जाता है जिसने दक्षिण भारत की विजय पूर्ण की। उसकी बाजार नीति का मुख्य उद्देश्य सेना को सस्ते दामों पर अन्न उपलब्ध कराना था।
4. तुगलक वंश और लोदी वंश (1320–1526)
तुगलक वंश की स्थापना गियासुद्दीन तुगलक (1320–1325) ने की। उसने तुगलकाबाद नगर की स्थापना की तथा कठोर न्याय प्रदान किया। एक मंडप ढह जाने से उसकी मृत्यु हुई। उसका पुत्र मुहम्मद बिन तुगलक सत्ता में आया।
मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351): उसकी योजनाएँ तो उदार थीं, परंतु क्रियान्वयन में असफल रहीं। उसने 1327 में राजधानी दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) स्थानांतरित की और 1337 में पुनः दिल्ली लौटा। उसने 1329 में तांबे की टोकन मुद्रा चलाई, जो नकली सिक्कों की भरमार के कारण असफल रही। उसने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि की, जिससे किसानों का विद्रोह हुआ। उसने कृषि विभाग दीवान-ए-कोही की स्थापना की तथा खुरासान अभियान की व्यर्थ योजना बनाई। प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता उसके दरबार में आया था। सिंध के थट्टा में उसकी मृत्यु हुई।
फिरोज शाह तुगलक (1351–1388): उसने कृषि के विकास पर विशेष ध्यान दिया। उसने नहरों का निर्माण कराया, जिनमें यमुना नदी से हिसार तक की नहर प्रमुख है। उसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया। वह दासों को विशेष प्रोत्साहन देता था और उसके पास लगभग 1.8 लाख दास थे। उसने फिरोजाबाद तथा हिसार-ए-फिरोजा नगरों की स्थापना की।
तुगलक वंश के बाद 1398 में तैमूर लंग ने दिल्ली पर आक्रमण किया और व्यापक विनाश किया। इसके बाद सैय्यद वंश (1414–1451) की स्थापना खिज्र खान ने की।
लोदी वंश (1451–1526): संस्थापक बहलोल लोदी ने अफगान सरदारों को नियंत्रण में लिया तथा जौनपुर के शर्की राज्य पर विजय प्राप्त की। उसके पुत्र सिकंदर लोदी (1489–1517) ने आगरा नगर की स्थापना की तथा "गज-ए-सिकंदरी" नामक माप प्रणाली चलाई। उसका असली नाम निज़ाम खान था। वंश का अंतिम शासक इब्राहिम लोदी (1517–1526) सरदारों में अलोकप्रिय था, जिसके कारण दौलत खान लोदी ने बाबर को भारत आमंत्रित किया।
पानीपत की पहली लड़ाई (1526): बाबर ने इब्राहिम लोदी को पराजित कर मुगल साम्राज्य की स्थापना की और दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ।
त्वरित तथ्य: मुहम्मद बिन तुगलक के अधीन इब्न बतूता ने "रिहला" नामक यात्रा वृत्तांत लिखा। फिरोज शाह तुगलक ने संगीत को हतोत्साहित किया तथा "फतुहात-ए-फिरोजशाही" की रचना करवाई।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: वंश, संस्थापक और शासनकाल
वंश
संस्थापक
शासनकाल
प्रमुख शासक
गुलाम वंश
कुतुबुद्दीन ऐबक
1206–1290
इल्तुतमिश, रजिया, बलबन
खिलजी वंश
जलालुद्दीन खिलजी
1290–1320
अलाउद्दीन खिलजी
तुगलक वंश
गियासुद्दीन तुगलक
1320–1414
मुहम्मद बिन तुगलक, फिरोज शाह
सैय्यद वंश
खिज्र खान
1414–1451
मुबारक शाह
लोदी वंश
बहलोल लोदी
1451–1526
सिकंदर लोदी, इब्राहिम लोदी
तालिका 2: शासक और प्रमुख उपलब्धि
शासक
शासनकाल
प्रमुख उपलब्धि
कुतुबुद्दीन ऐबक
1206–1210
कुतुबमीनार प्रारंभ, लाख बख्श उपाधि
इल्तुतमिश
1211–1236
चालीसा गठन, टंका सिक्का, खलीफा मान्यता
रजिया सुल्तान
1236–1240
पहली महिला शासिका
बलबन
1266–1287
रक्त और लौह की नीति
अलाउद्दीन खिलजी
1296–1316
बाजार नियंत्रण, दक्कन विजय
मुहम्मद बिन तुगलक
1325–1351
टोकन मुद्रा, राजधानी परिवर्तन
फिरोज शाह तुगलक
1351–1388
नहरों का निर्माण
सिकंदर लोदी
1489–1517
आगरा की स्थापना
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[दिल्ली सल्तनत 1206-1526] --> B[गुलाम वंश 1206-1290]
A --> C[खिलजी वंश 1290-1320]
A --> D[तुगलक वंश 1320-1414]
A --> E[सैय्यद वंश 1414-1451]
A --> F[लोदी वंश 1451-1526]
B --> B1[कुतुबुद्दीन ऐबक]
B --> B2[इल्तुतमिश]
B --> B3[रजिया सुल्तान]
B --> B4[बलबन]
C --> C1[जलालुद्दीन खिलजी]
C --> C2[अलाउद्दीन खिलजी]
C --> C3[बाजार नियंत्रण]
D --> D1[गियासुद्दीन तुगलक]
D --> D2[मुहम्मद बिन तुगलक]
D --> D3[फिरोज शाह तुगलक]
F --> F1[बहलोल लोदी]
F --> F2[सिकंदर लोदी]
F --> F3[इब्राहिम लोदी]
F3 --> G[पानीपत 1526 बाबर विजय]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: गुलाम वंश का कालक्रम
आरेख 2: दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश
8. सामान्य गलतियाँ
गलत धारणा: कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुतुबमीनार पूर्ण किया। वास्तव में ऐबक ने केवल आधार/प्रथम मंजिल बनाई, पूर्ण इल्तुतमिश ने कराया।
गलत धारणा: दिल्ली सल्तनत की स्थापना मुहम्मद गोरी ने की। सही है कि इसकी स्थापना 1206 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की।
गलत धारणा: रजिया सुल्तान बलबन की पुत्री थी। सही है कि रजिया इल्तुतमिश की पुत्री थी।
गलत धारणा: मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से आगरा स्थानांतरित की। सही स्थान देवगिरि (दौलताबाद) था।
गलत धारणा: तैमूर का आक्रमण 1399 में हुआ था। सही वर्ष 1398 है।
गलत धारणा: बलबन ने बाजार नियंत्रण की नीति लागू की। सही शासक अलाउद्दीन खिलजी था।
गलत धारणा: टोकन मुद्रा फिरोज शाह ने चलाई। सही उत्तर मुहम्मद बिन तुगलक (1329) है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
पाँच वंशों के शासनकाल (1206–1290, 1290–1320, 1320–1414, 1414–1451, 1451–1526) क्रम से याद रखें।
हर प्रमुख शासक के साथ कम से कम एक उपलब्धि और एक स्मारक अवश्य जोड़ें।
"लाख बख्श" (ऐबक), "टंका/जीतल" (इल्तुतमिश), "बाजार नियंत्रण" (अलाउद्दीन), "टोकन मुद्रा" (मुहम्मद बिन तुगलक) जैसे जोड़े बना लें।
युद्धों की तिथियाँ (पानीपत 1526) और आक्रमणकारियों के वर्ष (तैमूर 1398) अलग से सूची बनाएँ।
दीवान-ए-रियासत, दीवान-ए-कोही, दीवान-ए-मुस्तखराज जैसे विभागों को संबंधित शासक से मिलान करके अभ्यास करें।
मकबरों, किलों और द्वारों (अलाई दरवाजा, तुगलकाबाद) को शासकों से मिलाने का अभ्यास करें।
10. निष्कर्ष
दिल्ली सल्तनत भारतीय मध्यकालीन इतिहास की रीढ़ है, जिसके गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी वंशों ने मिलकर दिल्ली को उत्तर भारत का राजनीतिक केंद्र बनाया। इक्ता प्रणाली, बाजार नियंत्रण, टोकन मुद्रा और राजस्व सुधार जैसे प्रशासनिक प्रयोगों ने आगे के मुगल प्रशासन की नींव रखी। रेलवे NTPC परीक्षा के लिए शासक, शासनकाल, उपलब्धि और स्मारक के चार-चार सूत्रों को जोड़कर याद रखना इस अध्याय को पूर्णतः सुरक्षित बनाता है।