12.5 मराठा साम्राज्य Notes

12.5 मराठा साम्राज्य

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (मध्यकालीन भारतीय इतिहास) अध्याय: 12.5 मराठा साम्राज्य विषय-वस्तु: शिवाजी, पेशवा, अष्टप्रधान

1. परिचय

मराठा साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य था, जिसकी स्थापना छत्रपति शिवाजी महाराज ने 17वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्र में की। यह साम्राज्य सन् 1674 से 1818 तक विद्यमान रहा, जब अंग्रेजों ने बाजीराव द्वितीय को पराजित कर मराठा शक्ति का अंत कर दिया। मराठों ने मुगल साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित किया और पूना (पुणे) को अपनी राजधानी बनाया। शिवाजी ने 'हिन्दवी स्वराज्य' का नारा देकर मुगल आधिपत्य से स्वतंत्र हिंदू राज्य की स्थापना का सपना दिखाया।

शिवाजी के शासन में एक सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसमें अष्टप्रधान नामक आठ सदस्यीय मंत्रिपरिषद, गुरिल्ला युद्ध नीति, किलों का विकास और नौसेना का संगठन शामिल था। चौथ और सरदेशमुखी नामक कर व्यवस्था ने मराठा राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया। शिवाजी की मृत्यु के बाद पेशवा काल में मराठा शक्ति अपने चरम पर पहुँची, जब बालाजी विश्वनाथ, बाजीराव प्रथम और बालाजी बाजीराव ने साम्राज्य का भारी विस्तार किया।

रेलवे NTPC परीक्षा में मराठा अध्याय से शिवाजी की उपलब्धियाँ, अष्टप्रधान के पद, पेशवाओं के नाम, कर व्यवस्था (चौथ, सरदेशमुखी) और महत्वपूर्ण युद्धों की तिथियाँ पूछी जाती हैं। 1674 का राज्याभिषेक, पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) और 1818 का आंग्ल-मराठा युद्ध विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। पेशवाओं का क्रम और मराठा संघ के प्रमुख घरानों की जानकारी इस अध्याय में पूर्ण अंक दिला सकती है।

2. छत्रपति शिवाजी का उदय और राज्याभिषेक

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 1630 में शिवनेरी के किले में हुआ। उनके पिता शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थीं। उनके शिक्षक और मार्गदर्शक दादाजी कोंडदेव थे। शिवाजी ने कम उम्र में ही किलों पर अधिकार करना प्रारंभ किया। 1646 में उन्होंने तोरण का किला जीता, जो उनकी पहली विजय थी। धीरे-धीरे उन्होंने रायगढ़, प्रतापगढ़, सिंहगढ़ (कोंडाणा) जैसे किलों पर अधिकार किया।

त्वरित तथ्य: शिवाजी ने पुरंदर संधि के बाद आगरा से भागकर अद्भुत साहस दिखाया। शिवाजी के किले रायगढ़ उनकी राजधानी थे। मराठों की युद्ध नीति 'गनीमी कावा' (गुरिल्ला युद्ध) कहलाती थी।

3. मराठा प्रशासन: अष्टप्रधान और राजस्व

शिवाजी ने केंद्रीय प्रशासन को सुदृढ़ बनाने के लिए अष्टप्रधान नामक मंत्रिपरिषद की स्थापना की। इसमें आठ मंत्री होते थे, जिनमें से प्रत्येक का अपना निश्चित कार्य था। ये सभी मंत्री सीधे छत्रपति के अधीन कार्य करते थे। अष्टप्रधान के आठ पद निम्न थे:

शिवाजी की राजस्व व्यवस्था भी उल्लेखनीय थी। भूमि की माप और उपज के आधार पर कर निर्धारित किया जाता था। मराठों द्वारा लिया जाने वाला मुख्य कर चौथ था, जो कुल राजस्व का चौथाई (25 प्रतिशत) होता था। इसके अतिरिक्त सरदेशमुखी कर लिया जाता था, जो राजस्व का दसवाँ भाग (10 प्रतिशत) था। इन करों को मराठों ने अपनी रक्षा के लिए विदेशी क्षेत्रों से वसूला।

त्वरित तथ्य: अष्टप्रधान में पेशवा पद सर्वोच्च था। शिवाजी ने मराठी भाषा के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया। किसानों से राजस्व सीधे नहीं लिया जाता था, बल्कि मुकादम और देशपांडे के माध्यम से वसूली होती थी।

4. पेशवा काल और मराठा शक्ति

शिवाजी की मृत्यु के बाद मराठा राज्य में पेशवा पद की शक्ति बढ़ती गई और अंततः पेशवा ही वास्तविक शासक बन गए। सन् 1713 में बालाजी विश्वनाथ पहले पेशवा बने। उनके पुत्र बाजीराव प्रथम (1720–1740) ने मालवा, गुजरात और बुंदेलखंड तक मराठा शक्ति का विस्तार किया। उसने 1737 में दिल्ली पर अभियान भी चलाया और मुगल राजधानी के पास भोपाल में निजाम को पराजित किया। बाजीराव प्रथम को मराठा शक्ति का सबसे महान सेनापति माना जाता है।

त्वरित तथ्य: 1803 में द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध में अंग्रेजों ने सिंधिया को पराजित किया। पेशवा शब्द का अर्थ प्रधान मंत्री है। मराठा साम्राज्य की राजधानी पुणे (पूना) थी।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: अष्टप्रधान के आठ पद

पद कार्य
पेशवा मुख्यमंत्री
अमात्य वित्त एवं राजस्व
सचिव शाही पत्र
मंत्री इतिहास लेखन
सुमंत विदेश और गुप्तचर
सर-ए-नौबत सेनापति
पंडित राव धार्मिक मामले
न्यायाधीश न्याय विभाग

तालिका 2: पेशवा और प्रमुख घटनाएँ

पेशवा काल प्रमुख घटना
बालाजी विश्वनाथ 1713–1720 प्रथम पेशवा
बाजीराव प्रथम 1720–1740 मालवा, गुजरात विजय
बालाजी बाजीराव 1740–1761 पानीपत तृतीय (1761)
माधवराव प्रथम 1761–1772 शक्ति पुनर्स्थापना
बाजीराव द्वितीय 1796–1818 अंतिम पेशवा, अंग्रेज़ विजय

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[मराठा साम्राज्य 1674-1818] --> B[छत्रपति शिवाजी 1630-1680]
    A --> C[पेशवा काल 1713-1818]
    B --> B1[राज्याभिषेक 1674 रायगढ़]
    B --> B2[अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद]
    B --> B3[हिन्दवी स्वराज्य]
    B --> B4[चौथ और सरदेशमुखी]
    C --> C1[बालाजी विश्वनाथ 1713]
    C --> C2[बाजीराव प्रथम 1720-1740]
    C --> C3[बालाजी बाजीराव 1740-1761]
    C3 --> D[पानीपत तृतीय 1761 पराजय]
    A --> E[मराठा संघ]
    E --> E1[सिंधिया-ग्वालियर]
    E --> E2[होल्कर-इंदौर]
    E --> E3[भोंसले-नागपुर]
    E --> E4[गायकवाड़-बड़ौदा]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: शिवाजी के जीवन की प्रमुख घटनाएँ

छत्रपति शिवाजी के जीवन की प्रमुख घटनाएँ जन्म 1630शिवनेरी तोरण विजय 1646पहला किला अफ़ज़ल खान 1659प्रतापगढ़ राज्याभिषेक 1674रायगढ़ मृत्यु 1680रायगढ़ शिवाजी ने 'छत्रपति' उपाधि 1674 में रायगढ़ में धारण की। अफ़ज़ल खान की हत्या 1659 में प्रतापगढ़ के निकट हुई। स्वर्ण नियम: 1630, 1659, 1674 और 1680 की तिथियाँ सबसे महत्वपूर्ण हैं। राज्याभिषेक का स्थान रायगढ़ है।

आरेख 2: अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद

अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद छत्रपति शिवाजीअष्टप्रधान परिषद पेशवा अमात्य सचिव मंत्री सुमंत सर-ए-नौबत पंडित राव न्यायाधीश पेशवा मुख्यमंत्री था जो बाद में वास्तविक शासक बना। स्वर्ण नियम: पेशवा-मुख्यमंत्री, सुमंत-विदेश, सर-ए-नौबत-सेना का मिलान याद रखें। यह मिलान NTPC में सीधा प्रश्न बनता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलत धारणा: शिवाजी का जन्म रायगढ़ में हुआ। सही है कि उनका जन्म शिवनेरी के किले में 1630 में हुआ।
  2. गलत धारणा: शिवाजी का राज्याभिषेक 1674 में पुणे में हुआ। सही स्थान रायगढ़ है।
  3. गलत धारणा: अष्टप्रधान में नौ मंत्री थे। सही संख्या आठ है।
  4. गलत धारणा: चौथ राजस्व का दसवाँ भाग है। सही है कि चौथ चौथाई (25 प्रतिशत) और सरदेशमुखी दसवाँ भाग है।
  5. गलत धारणा: पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठे विजयी रहे। सही है कि अहमद शाह अब्दाली से मराठे पराजित हुए।
  6. गलत धारणा: बालाजी विश्वनाथ ने दिल्ली पर आक्रमण किया। सही है कि बाजीराव प्रथम ने मालवा और गुजरात पर विजय प्राप्त की।
  7. गलत धारणा: मराठा साम्राज्य का अंत 1761 में हुआ। सही है कि अंत 1818 में बाजीराव द्वितीय की पराजय से हुआ।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. शिवाजी की चार तिथियाँ (1630 जन्म, 1659 अफ़ज़ल, 1674 राज्याभिषेक, 1680 मृत्यु) रट लें।
  2. अष्टप्रधान के आठ पदों के कार्य का मिलान अभ्यास करें।
  3. चौथ (1/4) और सरदेशमुखी (1/10) के अनुपात अलग-अलग याद रखें।
  4. पेशवाओं का क्रम (बालाजी विश्वनाथ से बाजीराव द्वितीय) क्रमबद्ध रखें।
  5. मराठा संघ के घरानों को उनके केंद्रों (सिंधिया-ग्वालियर, होल्कर-इंदौर) से मिलाएँ।
  6. आंग्ल-मराठा युद्धों की तिथियाँ (1803, 1818) अलग से सूची बनाएँ।

10. निष्कर्ष

मराठा साम्राज्य ने शिवाजी के नेतृत्व में हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना की और पेशवाओं के काल में उत्तर भारत तक अपनी शक्ति का विस्तार किया। अष्टप्रधान व्यवस्था, गुरिल्ला युद्ध नीति और कर प्रणाली ने इसे एक सुदृढ़ राज्य बनाया। पानीपत तृतीय की पराजय और बाद के आंग्ल-मराठा युद्धों ने इसकी शक्ति को समाप्त किया। रेलवे NTPC के लिए शिवाजी की उपलब्धियाँ, पेशवाओं का क्रम और अष्टप्रधान का मिलान इस अध्याय में उच्च अंक दिला सकता है।