विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (आधुनिक भारतीय इतिहास)
अध्याय: 13.1 यूरोपीय कंपनियों का आगमन
विषय-वस्तु: पुर्तगाली, डच, फ्रेंच, ब्रिटिश
1. परिचय
भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का आगमन आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इसका आरंभ सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों के आगमन से हुआ, जब समुद्री मार्ग की खोज ने यूरोप को मसालों और व्यापार के लिए सीधे भारत तक पहुँचा दिया। पुर्तगालियों के बाद डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी कंपनियों ने भारत के व्यापार में प्रवेश किया, और धीरे-धीरे यह व्यापारिक प्रतिस्पर्धा राजनीतिक शक्ति में बदल गई।
इस अध्याय में हम पुर्तगाली, डच, फ्रेंच और ब्रिटिश कंपनियों के आगमन, उनके मुख्य केंद्रों, नेताओं और एक-दूसरे से हुए संघर्षों का अध्ययन करेंगे। ये तथ्य रेलवे NTPC परीक्षा में सामान्य जागरूकता के अंतर्गत बार-बार पूछे जाते हैं, विशेषकर तिथियों, नामों और स्थानों के रूप में। इसलिए छात्रों को इन बातों का सटीक ज्ञान होना आवश्यक है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यूरोपीय कंपनियों का आगमन केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा। कमजोर मुगल शासन और आपसी कलह का लाभ उठाकर इन कंपनियों ने किले, सेनाएँ और राजनीतिक प्रभाव स्थापित किया। अंततः ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर भारत पर राजनीतिक आधिपत्य स्थापित किया, जिसकी नींव यहीं से पड़ी।
2. पुर्तगाली और डच कंपनियाँ
पुर्तगाली सबसे पहले आए: वास्को डी गामा ने 1498 में अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप होते हुए कालीकट (कोझिकोड) में पहुँचकर भारत-यूरोप के बीच समुद्री मार्ग खोला। उनका स्वागत ज़मोरिन (कालीकट का शासक) ने किया।
पुर्तगाली गवर्नर अल्फोंसो डी अल्बुकर्क (1509-1515) को पुर्तगाली भारत का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उसने 1510 में गोवा पर अधिकार किया और उसे अपनी राजधानी बनाया।
पुर्तगालियों ने दीव, दमन, बेसिन, साल्सेट, बॉम्बे (1534, बसीन की संधि) जैसे स्थानों पर कब्जा किया। उनका एकाधिकार समुद्री व्यापार और 'कार्टाज प्रणाली' (पास-पत्र) पर था।
पुर्तगाली उपनिवेश के प्रमुख गवर्नर: फ्रांसिस्को डी अल्मेडा (पहला गवर्नर, 1505) और अल्फोंसो डी अल्बुकर्क। डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' अपनाई, जबकि अल्बुकर्क ने 'भूमि पर अधिकार' की नीति।
पुर्तगालियों ने भारत में ईसाई धर्म का प्रचार भी किया। सेंट फ्रांसिस जेवियर गोवा आए। 'गोवा इनक्विजिशन' 1560 में आरंभ हुई।
डच (हॉलैंड वासी): डचों ने 1602 में यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी बनाई और भारत में सबसे पहले मसुलीपट्टम (1605) में कारखाना खोला।
डचों के मुख्य केंद्र: पुलिकट (कोरोमंडल तट), चिनसुरा (बंगाल), सूरत, भीमपुर, नागपट्टनम।
उनका मुख्य व्यापार मसाले, रेशम, सूती वस्त्र और नील था। उन्होंने दक्षिण पूर्व एशिया (इंडोनेशिया, स्पाइस द्वीप) पर ध्यान केंद्रित किया।
डचों की शक्ति का पतन 1759 में बेदारा के युद्ध (वेदारा युद्ध) में अंग्रेजों से हार के बाद हुआ। 1799 के बाद डचों का भारत से लगभग सफाया हो गया।
डच शब्दावली से संबंधित तथ्य: डच ही पहले थे जिन्होंने 'लॉज' और 'फैक्ट्री' शब्द भारत में प्रचलित किए, हालांकि कारखाना प्रणाली अंग्रेजों ने अधिक विस्तृत की।
परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण:
1. भारत आने वाला पहला यूरोपीय देश – पुर्तगाल
2. समुद्री मार्ग खोलने वाला – वास्को डी गामा (1498)
3. गोवा का अधिग्रहण – अल्फोंसो डी अल्बुकर्क (1510)
4. भारत आने वाली पहली ईस्ट इंडिया कंपनी – अंग्रेज (1600), लेकिन डचों का पहला कारखाना (मसुलीपट्टम) 1605 में
3. अंग्रेज और फ्रांसीसी कंपनियाँ
अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी: सन 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 'गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन' को 15 वर्षों के लिए भारत में व्यापार का एकाधिकार दिया। इसे 1600 ईस्ट इंडिया कंपनी कहा जाता है।
1612 में अंग्रेज कप्तान विलियम हॉकिन्स मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार में पहुँचे, पर फरमान नहीं मिला। बाद में 1612-13 में सर थॉमस रो जहाँगीर के दरबार में आए और उन्हें व्यापारिक रियायतें (फरमान) प्राप्त हुईं।
1612 में सूरत में पहला अंग्रेजी कारखाना स्थापित हुआ। इसके बाद 1632 में बंगाल (हुगली), 1639 में फ्रांसिस डे ने मद्रास (चेन्नई) बसाया और फोर्ट सेंट जॉर्ज बनाया।
1661 में पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रागांजा के विवाह में दहेज के रूप में बॉम्बे (मुंबई) अंग्रेजों को मिला। 1668 में इसे ईस्ट इंडिया कंपनी को दिया गया। 1687 में बॉम्बे भारत में कंपनी की राजधानी बना।
1690 में जॉब चार्नॉक ने सुतानुटी में कारखाना खोला, जो बाद में कलकत्ता (कोलकाता) बना। 1698 में कलकत्ता का जमींदारी अधिकार कंपनी को मिला और फोर्ट विलियम का निर्माण हुआ।
1757 में रॉबर्ट क्लाइव ने प्लासी का युद्ध जीता, और 1765 में कंपनी को बंगाल, बिहार, उड़ीसा की दीवानी मिली। इससे कंपनी राज की शुरुआत हुई।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रतीक चिन्ह: 'चतुर्दिक उज्ज्वल अस्तु' (Auspicio Regis et Senatus Angliae)।
फ्रांसीसी कंपनी: फ्रांसीसियों ने 1664 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी बनाई। कर्नल फ्रांस्वा कैरन ने 1668 में सूरत में पहला फ्रांसीसी कारखाना खोला।
1674 में फ्रांस्वा मार्टिन ने पांडिचेरी बसाया। अन्य केंद्र: चंद्रनगर (बंगाल), माहे (केरल), कराईकल, बालासोर, कासिम बाजार।
फ्रांसीसियों का सबसे महान गवर्नर जोसेफ फ्रांस्वा डुप्ले (1742-1754) था, जिसने भारतीय शासकों की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप की नीति अपनाई और कर्नाटक में अपना प्रभाव बढ़ाया।
डुप्ले की अवधि में हुए कर्नाटक युद्ध (1746-1763) ने फ्रांस और इंग्लैंड की शक्ति का निर्णय किया। वांडीवाश का युद्ध (1760) में सर आयरकूट ने फ्रांसीसी कमांडर काउंट लैली को पराजित किया। 1763 की पेरिस की संधि के बाद फ्रांसीसियों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा समाप्त हो गई।
यद्यपि फ्रांसीसी पांडिचेरी, चंद्रनगर जैसे केंद्रों पर बने रहे, पर उनका राजनीतिक प्रभाव समाप्त हो गया।
कर्नाटक युद्ध (झलक):
1. प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48) – अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच, ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध की प्रतिध्वनि। फ्रांसीसियों ने मद्रास पर कब्जा किया। एक्स-ला-चैपल की संधि।
2. द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749-54) – डुप्ले ने चंदा साहिब और मुजफ्फर जंग का समर्थन किया; क्लाइव ने आर्कोट (1751) पर कब्जा किया।
3. तृतीय कर्नाटक युद्ध (1756-63) – वांडीवाश (1760) में अंग्रेजों की विजय; पेरिस की संधि (1763)।
4. यूरोपीय प्रतिद्वंद्विता और ब्रिटिश प्रभुत्व
यूरोपीय कंपनियों के बीच प्रतिद्वंद्विता का मुख्य कारण मसाला व्यापार का एकाधिकार था। सोलहवीं सदी में पुर्तगाली, सत्रहवीं में डच, और अठारहवीं सदी में अंग्रेज-फ्रांसीसी प्रतिस्पर्धा प्रमुख रही।
पुर्तगाली पतन: पुर्तगालियों की शक्ति का ह्रास हुआ क्योंकि वे उच्च करों, धार्मिक कट्टरता और समुद्री व्यापार में अपने परिवारों के एकाधिकार के कारण लोकप्रिय नहीं रहे। 1663 में अंग्रेजों ने सूरत को आग लगा दी।
डच पतन: डचों ने अपना ध्यान इंडोनेशिया (जावा, मोलुक्का) पर केंद्रित किया, जिससे भारत में वे पीछे रह गए। बेदारा युद्ध (1759) में पराजय के बाद उनका प्रभाव घटा।
फ्रांसीसी पतन: डुप्ले के शक्तिशाली नेतृत्व के बावजूद फ्रांस के इंग्लैंड से समुद्री युद्धों में पिछड़ने और नौसैनिक समर्थन के अभाव के कारण फ्रांसीसी भारत में असफल रहे।
ब्रिटिश उन्नति के कारण: मजबूत नौसेना, बैंकिंग एवं पूँजी संगठन, संसदीय समर्थन, भारतीय शासकों से गठबंधन की कूटनीति, तथा सैन्य अनुशासन ने ब्रिटिश कंपनी को विजयी बनाया।
ब्रिटिश शक्ति के प्रमुख चरण (तिथियाँ याद रखें):
1. 1600 – ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
2. 1612 – सूरत में पहला कारखाना
3. 1668 – बॉम्बे का स्थानांतरण कंपनी को
4. 1690 – कलकत्ता (सुतानुटी) की स्थापना
5. 1757 – प्लासी का युद्ध
6. 1765 – दीवानी (बंगाल, बिहार, उड़ीसा)
गवर्नर-जनरल (संक्षेप): वारेन हेस्टिंग्स (1772-85), लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786-93, स्थायी बंदोबस्त 1793), लॉर्ड वेलेजली (1798-1805, सहायक संधि प्रणाली), लॉर्ड डलहौजी (1848-56, व्यपगत सिद्धांत)। इनका विस्तृत अध्ययन अगले अध्याय में किया जाएगा।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: यूरोपीय कंपनियों के आगमन एवं केंद्र
कंपनी
स्थापना वर्ष
प्रथम कारखाना
प्रमुख केंद्र
प्रमुख गवर्नर/व्यक्ति
पुर्तगाली
1498 (आगमन)
कालीकट
गोवा, दीव, दमन, बेसिन
अल्बुकर्क, डी अल्मेडा
डच
1602
मसुलीपट्टम (1605)
पुलिकट, चिनसुरा, नागपट्टनम
-
अंग्रेज
1600
सूरत (1612)
मद्रास, बॉम्बे, कलकत्ता
क्लाइव, हॉकिन्स, थॉमस रो
फ्रांसीसी
1664
सूरत (1668)
पांडिचेरी, चंद्रनगर, माहे
डुप्ले, फ्रांस्वा मार्टिन
तालिका 2: महत्वपूर्ण युद्ध एवं संधियाँ
युद्ध
वर्ष
परिणाम/विवरण
बेदारा का युद्ध
1759
अंग्रेजों द्वारा डचों की पराजय
वांडीवाश का युद्ध
1760
अंग्रेजों द्वारा फ्रांसीसियों की पराजय (लैली पर आयरकूट)
पेरिस की संधि
1763
भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा समाप्त
बसीन की संधि
1534
पुर्तगालियों को बॉम्बे, बेसिन का अधिकार
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[यूरोपीय कंपनियों का आगमन] --> B[पुर्तगाली]
A --> C[डच]
A --> D[अंग्रेज]
A --> E[फ्रांसीसी]
B --> B1[1498 वास्को डी गामा कालीकट]
B --> B2[1510 गोवा अल्बुकर्क]
C --> C1[1602 डच ईस्ट इंडिया कंपनी]
C --> C2[मसुलीपट्टम 1605]
D --> D1[1600 ब्रिटिश कंपनी]
D --> D2[1612 सूरत कारखाना]
D --> D3[मद्रास बॉम्बे कलकत्ता]
E --> E1[1664 फ्रेंच कंपनी]
E --> E2[1674 पांडिचेरी]
E --> E3[कर्नाटक युद्ध 1746-63]
D --> F[1765 दीवानी]
F --> G[कंपनी राज]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलत वर्ष: कई छात्र अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1602 लिख देते हैं। सही वर्ष 1600 है; 1602 डच कंपनी की स्थापना का वर्ष है।
गलत मार्ग: वास्को डी गामा के मार्ग को लेकर भ्रम रहता है। उसने अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप होकर भारत आया था, न कि भूमध्य मार्ग से।
अल्बुकर्क बनाम अल्मेडा: प्रथम गवर्नर फ्रांसिस्को डी अल्मेडा है, जबकि गोवा पर अधिकार करने वाले अल्फोंसो डी अल्बुकर्क हैं। इन्हें परस्पर नहीं बदलें।
पांडिचेरी की स्थापना: पांडिचेरी की स्थापना 1674 में फ्रांस्वा मार्टिन ने की थी, डुप्ले ने नहीं। डुप्ले उसका गवर्नर था।
बेदारा युद्ध: बेदारा युद्ध (1759) डचों और अंग्रेजों के बीच हुआ था, फ्रांसीसियों से नहीं। फ्रांसीसी अंग्रेजों से वांडीवाश (1760) में हारे थे।
9. परीक्षा युक्तियाँ
सभी कंपनियों की स्थापना के वर्ष (1600, 1602, 1664) और प्रथम कारखानों के नाम (सूरत, मसुलीपट्टम) एक टेबल में याद करें।
तीन कर्नाटक युद्धों के वर्ष और परिणाम याद रखें – विशेषकर वांडीवाश और पेरिस की संधि।
'सबसे पहले' वाले तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं: पहला यूरोपीय देश – पुर्तगाल, पहला कारखाना – सूरत (अंग्रेज), पहला समुद्री यात्री – वास्को डी गामा।
किलों के नाम याद रखें: फोर्ट सेंट जॉर्ज (मद्रास), फोर्ट विलियम (कलकत्ता), बॉम्बे कैसल।
मुगल सम्राटों से जुड़ी रियायतें याद रखें – जहाँगीर से थॉमस रो को फरमान, 1632 में शाहजहाँ से बंगाल में व्यापार की अनुमति।
भारत में प्रथम ब्रिटिश गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स (1772) थे, जबकि प्रथम गवर्नर-जनरल (1858 के बाद) कैनिंग – इस भेद को स्पष्ट रखें।
10. निष्कर्ष
यूरोपीय कंपनियों के आगमन ने भारत के भाग्य का रुख बदल दिया। पुर्तगालियों ने समुद्री मार्ग खोला, डच व्यापार में आगे बढ़े, पर अंततः मजबूत नौसेना, पूँजी और कूटनीति के बल पर अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी सभी प्रतिद्वंद्वियों पर विजयी रही। फ्रांसीसियों की पराजय ने भारत में ब्रिटिश आधिपत्य का मार्ग प्रशस्त किया, जो 1765 की दीवानी से पूर्ण राजनीतिक रूप लेने लगा। इस अध्याय के तथ्य केवल व्यापारिक इतिहास नहीं, बल्कि भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हैं, इसलिए इनकी सटीकता परीक्षा में निर्णायक सिद्ध होती है।