विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (आधुनिक भारतीय इतिहास)
अध्याय: 13.10 महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानी
विषय-वस्तु: भगत सिंह, सुभाष, तिलक
1. परिचय
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अनेक महान सेनानियों ने अपने जीवन और बलिदान से देश को स्वतंत्र कराने में योगदान दिया। कुछ ने अहिंसक संघर्ष का मार्ग अपनाया, तो कुछ क्रांतिकारी तरीकों से अंग्रेजी शासन को चुनौती दी। इस अध्याय में हम तीन महान स्वतंत्रता सेनानियों – लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस – के व्यक्तित्व, कार्य और योगदान का अध्ययन करेंगे। ये तीनों अपने-अपने ढंग से भारतीय राष्ट्रवाद के प्रतीक बने।
तिलक ने 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा देकर जनता में राजनीतिक चेतना जगाई। भगत सिंह ने अपनी वीरता और बलिदान से युवाओं को प्रेरित किया। सुभाष चंद्र बोस ने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा' का नारा देकर आजाद हिंद फौज का गठन किया और विदेशी धरती से स्वतंत्रता संग्राम चलाया।
रेलवे NTPC परीक्षा में इस अध्याय से स्वतंत्रता सेनानियों के नारे, संगठन, संघर्ष, उपनाम और बलिदान से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इसलिए इन तीनों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण सेनानियों (गोखले, लाला लाजपत राय, चंद्रशेखर आज़ाद, मदन मोहन मालवीय आदि) की जानकारी भी आवश्यक है।
2. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक (1856-1920)
बाल गंगाधर तिलक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली गाँव में जन्मे थे। वे एक महान क्रांतिकारी, समाज सुधारक और 'गरम दल' के प्रमुख नेता थे। उन्हें 'लोकमान्य' (जनमान्य) की उपाधि से विभूषित किया गया, जिसका अर्थ है जनता द्वारा स्वीकृत नेता।
नारा: 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' – यह उनका सबसे प्रसिद्ध नारा है।
पत्रकारिता: उन्होंने 'केसरी' (मराठी) और 'मराठा' (अंग्रेजी) समाचार पत्रों का संपादन किया। इनके माध्यम से उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनमत बनाया।
सामाजिक कार्य: उन्होंने गणेश चतुर्थी उत्सव (1893) और शिवाजी उत्सव (1895) का शुभारंभ करके जन समुदायों को जोड़ा। इन त्योहारों से राष्ट्रीय चेतना का प्रसार हुआ।
'गीता रहस्य': उन्होंने 'गीता रहस्य' नामक ग्रंथ लिखा, जो कर्मयोग का संदेश देता है।
होम रूल लीग: 1916 में उन्होंने (एनी बेसेंट के साथ अलग-अलग) होम रूल लीग की स्थापना की। तिलक ने पुणे (बेलगाँव/पूना) में होम रूल लीग बनाई, जबकि एनी बेसेंट ने अडयार (मद्रास) में।
कारावास: 1908 में उन्हें राजद्रोह के आरोप में छह वर्ष की सजा मिली और उन्हें मांडले (बर्मा) निर्वासित किया गया। 1916 में वे रिहा हुए।
कांग्रेस में योगदान: 1907 के सूरत विभाजन के समय वे गरम दल के प्रमुख नेता थे। 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस फिर एक हुई।
तिलक को 'भारतीय अशांति के जनक' की उपाधि अंग्रेज अधिकारियों ने दी थी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा का प्रचार किया।
गांधीजी ने तिलक को 'आधुनिक भारत के निर्माता' कहा। 1920 में उनका निधन हुआ।
तिलक के प्रमुख योगदान (संक्षेप में):
1. गरम दल का नेतृत्व
2. होम रूल आंदोलन
3. केसरी-मराठा पत्रकारिता
4. गणेश एवं शिवाजी उत्सव
5. स्वराज्य का नारा
3. भगत सिंह (1907-1931) और क्रांतिकारी आंदोलन
भगत सिंह पंजाब के लायलपुर जिले (अब पाकिस्तान) के बंगा गाँव में जन्मे थे। वे भारत के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक थे। उनके दादा अर्जुन सिंह और पिता किशन सिंह भी स्वतंत्रता सेनानी थे।
जलियांवाला बाग की घटना (1919) और लाला लाजपत राय की मृत्यु (1928) ने भगत सिंह के क्रांतिकारी मार्ग को प्रभावित किया।
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के सदस्य रहे, जो बाद में राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) बना।
काकोरी कांड (9 अगस्त, 1925): राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह ने काकोरी (लखनऊ) में रेलगाड़ी को रोककर सरकारी खजाना लूटा। इस कांड के लिए राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को फाँसी हुई।
सॉन्डर्स की हत्या (17 दिसंबर, 1928): लाहौर में लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने असिस्टेंट पुलिस सुपरिंटेंडेंट जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या की।
सेंट्रल एसेम्बली बम कांड (8 अप्रैल, 1929): भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंके और 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाया। दोनों ने आत्मसमर्पण किया।
लाहौर षड्यंत्र केस: सॉन्डर्स की हत्या के मामले में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को लाहौर षड्यंत्र केस में फाँसी की सजा सुनाई गई।
बलिदान: 23 मार्च, 1931 को लाहौर में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी गई। उनके बलिदान दिवस को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
भगत सिंह ने जेल में आमरण अनशन किया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक बंदियों के अधिकारों की माँग की। 'काकोरी केस' के नेताओं के साथ वे 'फाँसी की सजा' के प्रतीक बने।
उनके नारे – 'इंकलाब जिंदाबाद', 'मेरा जीवन मेरा संदेश', 'वे मुझे मार सकते हैं पर मेरे विचार नहीं'।
अन्य प्रमुख क्रांतिकारी:
1. चंद्रशेखर आज़ाद – HSRA के नेता, 'आज़ाद' नाम से विख्यात; 1931 में अल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद) में शहीद।
2. राम प्रसाद बिस्मिल – काकोरी कांड के नेता, 'सरफरोशी की तमन्ना' के कवि।
3. खुदीराम बोस – 1908 में मुजफ्फरपुर में बम कांड के लिए फाँसी पाने वाले सबसे युवा क्रांतिकारी (18 वर्ष)।
4. बटुकेश्वर दत्त – भगत सिंह के सहयोगी।
5. उधम सिंह – 1940 में लंदन में डायर की हत्या।
6. मदन लाल ढींगरा – 1909 में लंदन में कर्जन वाइली की हत्या।
7. अशफाक उल्ला खान – काकोरी कांड के शहीद।
4. नेताजी सुभाष चंद्र बोस (1897-1945) और आजाद हिंद फौज
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को कटक (उड़ीसा) में हुआ। उन्हें 'नेताजी' कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे (1938 हरिपुरा, 1939 त्रिपुरी) और स्वतंत्रता संग्राम में सशस्त्र संघर्ष के पक्षधर थे।
1938 हरिपुरा अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष बने; 1939 त्रिपुरी अधिवेशन में गांधीजी के समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर दूसरी बार अध्यक्ष चुने गए।
1939 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे भारत से निकलकर जर्मनी, फिर जापान पहुँचे। 1943 में सिंगापुर में उन्होंने आजाद हिंद फौज (भारतीय राष्ट्रीय सेना, INA) का नेतृत्व संभाला।
आजाद हिंद सरकार का गठन किया और भारत की 'अनंतिम सरकार' घोषित की।
'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा' का प्रसिद्ध नारा उन्होंने सिंगापुर में दिया।
महिला रेजिमेंट: उन्होंने INA में महिलाओं की रानी झांसी रेजिमेंट बनाई, जिसकी कमांडर कैप्टन लक्ष्मी सहगल थीं।
INA ने इम्फाल और कोहिमा (बर्मा सीमा) तक आक्रमण किया, पर युद्ध की परिस्थितियों के कारण सफल नहीं हो सके।
18 अगस्त, 1945 को ताइवान में एक हवाई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, हालाँकि उनकी मृत्यु को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है।
रेड फोर्ट मुकदमा: युद्ध के बाद INA के अधिकारियों (शाह नवाज खान, प्रेम सहगल, गुरुबख्श सिंह धिल्लन) पर रेड फोर्ट में मुकदमा चला, जिसके विरोध में पूरे देश में आंदोलन हुआ। इसने ब्रिटिश शासन के अंत की दिशा को तेज किया।
23 जनवरी को उनका जन्मदिन 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण सेनानी:
1. गोपाल कृष्ण गोखले (1866-1915): नरम दल के नेता, गांधीजी के राजनीतिक गुरु, सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी (1905) के संस्थापक।
2. लाला लाजपत राय (1865-1928): 'पंजाब केसरी', आर्य समाज से जुड़े, 1928 में लाठीचार्ज से शहीद।
3. बिपिन चंद्र पाल (1858-1932): 'बंगाल के वज्र', स्वदेशी आंदोलन के नेता।
4. मदन मोहन मालवीय (1861-1946): 'महामना', बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (1916) के संस्थापक।
5. दादाभाई नौरोजी (1825-1917): 'भारत के बुजुर्ग', पहले भारतीय (ब्रिटिश) संसद सदस्य (1892)।
6. सुरेंद्रनाथ बनर्जी (1848-1925): 'राष्ट्रवादी बनर्जी', भारतीय राष्ट्रीय संघ के संस्थापक।
7. चित्तरंजन दास (1870-1925): 'देशबंधु', स्वराज्य पार्टी के सह-संस्थापक।
8. अरविंद घोष (1872-1950): क्रांतिकारी से योगी; 'कर्मयोगिनी' पत्र।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: तीन प्रमुख सेनानी – तुलना
विशेषता
तिलक
भगत सिंह
सुभाष चंद्र बोस
उपनाम
लोकमान्य
शहीद-ए-आज़म
नेताजी
संगठन
होम रूल लीग (1916)
HSRA
फॉरवर्ड ब्लॉक, आईएनए
प्रमुख नारा
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार
इंकलाब जिंदाबाद
तुम मुझे खून दो
बलिदान/मृत्यु
1920 निधन
23 मार्च 1931 फाँसी
18 अगस्त 1945
तालिका 2: प्रमुख घटनाएँ एवं तिथियाँ
घटना
वर्ष
विवरण
होम रूल लीग
1916
तिलक (पूना) और बेसेंट (अडयार)
काकोरी कांड
1925
राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान
सॉन्डर्स हत्या
1928
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव
सेंट्रल एसेम्बली बम
1929
भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त
त्रिपुरी अधिवेशन
1939
सुभाष दूसरी बार अध्यक्ष
आजाद हिंद फौज नेतृत्व
1943
सिंगापुर
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानी] --> B[तिलक]
A --> C[भगत सिंह]
A --> D[सुभाष चंद्र बोस]
B --> B1[लोकमान्य उपाधि]
B --> B2[केसरी मराठा]
B --> B3[होम रूल लीग 1916]
B --> B4[स्वराज्य नारा]
C --> C1[HSRA सदस्य]
C --> C2[काकोरी कांड 1925]
C --> C3[सॉन्डर्स हत्या 1928]
C --> C4[23 मार्च 1931 फाँसी]
D --> D1[कांग्रेस अध्यक्ष 1938-39]
D --> D2[फॉरवर्ड ब्लॉक 1939]
D --> D3[आजाद हिंद फौज 1943]
D --> D4[रानी झांसी रेजिमेंट]
A --> E[अन्य सेनानी]
E --> E1[गोखले मालवीय लाला]
E --> E2[चंद्रशेखर आज़ाद]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
तिलक का मूल नाम: बाल गंगाधर तिलक को 'तिलक' उपनाम मानने की गलती होती है; वास्तव में उनका नाम बाल गंगाधर तिलक था और 'लोकमान्य' उनकी उपाधि थी।
होम रूल लीग: होम रूल लीग 1916 में बनी थी, तिलक और एनी बेसेंट ने अलग-अलग लीगें बनाई थीं। इसे 1916 से पहले का संगठन नहीं मानें।
काकोरी बनाम सॉन्डर्स: काकोरी कांड 1925 (बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान), सॉन्डर्स हत्या 1928 (भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव)। दोनों घटनाओं के नायक परस्पर नहीं बदलें।
फाँसी की तिथि: भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को 23 मार्च 1931 को फाँसी दी गई। 1931 नहीं, 1930 की गलती से बचें।
सुभाष की मृत्यु: नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुई थी, हालाँकि यह विवादास्पद रही। उन्हें 1943 में INA का नेतृत्व मिला था, 1942 में नहीं।
रानी झांसी रेजिमेंट: इस महिला रेजिमेंट की कमांडर कैप्टन लक्ष्मी सहगल थीं, रानी लक्ष्मीबाई नहीं। 1857 की रानी लक्ष्मीबाई से इसे भ्रमित न करें।
9. परीक्षा युक्तियाँ
सेनानियों के नारे, उपनाम और संगठन की एक साथ तालिका बनाएं – यह सबसे अधिक पूछे जाने वाला भाग है।
तिथियों पर ध्यान दें – काकोरी (1925), सॉन्डर्स (1928), सेंट्रल एसेम्बली बम (1929), फाँसी (1931)।
'प्रथम' वाले तथ्य याद रखें – पहले भारतीय सांसद (दादाभाई नौरोजी, 1892), BHU (1916, मालवीय), सर्वेंट्स ऑफ इंडिया (1905, गोखले)।
आईएनए/आजाद हिंद फौज से जुड़े रेड फोर्ट मुकदमे (1945-46) और उसके नायक (शाह नवाज खान, प्रेम सहगल, गुरुबख्श सिंह) जानें।
गरम-नरम दल के नेताओं का वर्गीकरण करें – गरम (तिलक, लाला, पाल, अरविंद), नरम (गोखले, नौरोजी, मेहता, बनर्जी)।
कांग्रेस से जुड़े सुभाष के अधिवेशन (1938 हरिपुरा, 1939 त्रिपुरी) और फॉरवर्ड ब्लॉक (1939) का सटीक वर्ष याद रखें।
10. निष्कर्ष
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम विभिन्न विचारधाराओं और मार्गों से जुड़े सेनानियों की सामूहिक तपस्या का परिणाम था। लोकमान्य तिलक ने 'स्वराज्य' की माँग को जन-जन तक पहुँचाया, भगत सिंह ने अपनी वीरता और बलिदान से युवाओं में जोश भरा, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने विदेशी धरती पर आजाद हिंद फौज खड़ी करके ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। इन तीनों के अतिरिक्त गोखले, लाला लाजपत राय, चंद्रशेखर आज़ाद, मदन मोहन मालवीय जैसे अनेक सेनानियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में राष्ट्र की सेवा की। इनकी जीवनियाँ, नारे, संगठन और बलिदान परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्नों का आधार हैं, इसलिए इन्हें सटीक रूप से याद रखना आवश्यक है।