विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.5 राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति विषय-वस्तु: अनुच्छेद 52-71
भारत का राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका का प्रमुख है (अनुच्छेद 52) तथा राज्य का औपचारिक (संवैधानिक) प्रमुख। वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं। राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) शामिल होता है। राष्ट्रपति की शक्तियाँ विशाल हैं, परंतु उनका प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह से होता है। राष्ट्रपति पर महाभियोग (अनुच्छेद 61) की प्रक्रिया संविधान के उल्लंघन पर चल सकती है।
उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63) राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। जब राष्ट्रपति की मृत्यु, त्यागपत्र या अन्य कारणों से पद रिक्त होता है, तब उपराष्ट्रपति उनके कार्यों का निर्वहन करता है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा होता है। रेलवे NTPC परीक्षा में राष्ट्रपति के चुनाव, योग्यताएँ, महाभियोग, क्षमादान शक्ति, वीटो शक्ति तथा उपराष्ट्रपति के कार्यों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
राष्ट्रपति पद की स्थापना संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 52 से 62 तक की गई है, जबकि उपराष्ट्रपति का प्रावधान अनुच्छेद 63 से 71 में है। चुनाव संबंधी विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करता है। राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है तथा वह पुनः निर्वाचन के लिए पात्र है। इस अध्याय की गहन समझ से परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
चुनाव प्रक्रिया (अनुच्छेद 54-55): - राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, जो निर्वाचक मंडल द्वारा होता है। - निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य तथा दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। - निर्वाचक मंडल में मनोनीत सदस्य, विधान परिषदों के सदस्य तथा राज्यपाल शामिल नहीं होते। - चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा गुप्त मतदान से होता है। - मतों का मूल्य अनुपात आधार पर निर्धारित होता है; सांसदों तथा विधायकों के मतों के मूल्य में समता का प्रयास किया जाता है।
योग्यताएँ (अनुच्छेद 58): 1. भारत का नागरिक होना चाहिए। 2. आयु 35 वर्ष पूर्ण कर ली हो। 3. लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो। 4. वह भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण न करता हो।
कार्यकाल और पद की शर्तें (अनुच्छेद 56, 59): - कार्यकाल 5 वर्ष का होता है तथा वह पुनः निर्वाचित हो सकता है (अनुच्छेद 57)। - कार्यकाल समाप्त होने से पहले राष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित त्यागपत्र दे सकता है। - पद रिक्त होने पर नए राष्ट्रपति का चुनाव पाँच वर्ष के भीतर कराया जाता है (अनुच्छेद 62)। - राष्ट्रपति संसद का सदस्य नहीं होता तथा कार्यकाल के दौरान कोई लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।
चुनाव विवाद (अनुच्छेद 71): - राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करता है। - सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम तथा बाध्यकारी होता है।
त्वरित तथ्य: 1. 70वाँ संशोधन (1992) द्वारा दिल्ली और पुडुचेरी को निर्वाचक मंडल में शामिल किया गया। 2. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने हेतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष है। 3. राष्ट्रपति पर महाभियोग केवल 'संविधान के उल्लंघन' के आधार पर चल सकता है।
राष्ट्रपति की शक्तियों को निम्न श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
वीटो शक्ति: राष्ट्रपति के पास तीन प्रकार की वीटो शक्तियाँ हैं: पूर्ण वीटो (विधेयक को अनुमति न देना), निलंबित वीटो (विधेयक को पुनर्विचार हेतु लौटाना) तथा पॉकेट वीटो (विधेयक को अनिश्चित काल तक रोक कर रखना)। धन विधेयक पर राष्ट्रपति के पास निलंबित वीटो नहीं होता। सामान्य विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा लौटाए जाने पर संसद उसे पुनः पारित कर सकती है, फिर अनुमति देना अनिवार्य हो जाता है। राष्ट्रपति के पास 'योग्यता वीटो' (क्वालिफाइड वीटो) नहीं होती।
क्षमादान शक्तियाँ (अनुच्छेद 72): राष्ट्रपति क्षमा (पार्डन), दण्डादेश स्थगन (रिस्पाइट), दण्डादेश में छूट (रिमिशन), दण्डादेश का निलंबन (सस्पेंशन) तथा दण्ड के स्थान पर कम दण्ड (कम्यूटेशन) कर सकता है। यह शक्ति न्यायिक शक्ति से भिन्न है तथा यह मंत्रिपरिषद की सलाह से प्रयोग होती है।
महाभियोग प्रक्रिया (अनुच्छेद 61): - राष्ट्रपति पर 'संविधान के उल्लंघन' के आधार पर महाभियोग चलाया जा सकता है। - महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में रखा जा सकता है, जिसके लिए 14 दिन पूर्व नोटिस आवश्यक है। - प्रस्ताव को उस सदन की कुल सदस्य संख्या के 2/3 बहुमत से पारित होना चाहिए। - तत्पश्चात दूसरा सदन जाँच करता है और 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित करता है। - उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के महाभियोग की कार्यवाही में भाग नहीं लेता। - अब तक किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चला है।
उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63-71): - उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है (अनुच्छेद 66)। - वह राज्यसभा का पदेन सभापति होता है (अनुच्छेद 64)। - वह संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं होता। - उसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है (अनुच्छेद 67)। - राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, मृत्यु, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने पर वह राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करता है (अनुच्छेद 65)। - उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया में राज्यसभा में प्रस्ताव, जो सदन के सभी सदस्यों के बहुमत से पारित हो तथा लोकसभा द्वारा साधारण बहुमत से स्वीकृत हो, शामिल है। इसे महाभियोग नहीं कहा जाता। - उपराष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष है। - उपराष्ट्रपति पद हेतु योग्यताएँ राज्यसभा के सदस्य बनने की हैं।
प्रमुख अंतर: 1. राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जबकि उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा। 2. राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा हटाया जाता है, जबकि उपराष्ट्रपति को महाभियोग नहीं बल्कि सदन की कार्यवाही से हटाया जाता है। 3. राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख है, जबकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति। 4. उपराष्ट्रपति का चुनाव मनोनीत सदस्यों की भागीदारी से होता है, जबकि राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में मनोनीत सदस्य नहीं होते।
त्वरित तथ्य: 1. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के पदों की न्यूनतम आयु 35 वर्ष है। 2. उपराष्ट्रपति पद का चुनाव मनोनीत सदस्यों सहित दोनों सदनों के सदस्य करते हैं। 3. राष्ट्रपति के चुनाव में राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित सदस्य तथा विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। 4. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव विवाद सर्वोच्च न्यायालय में जाते हैं। 5. राष्ट्रपति के पास क्वालिफाइड (योग्यता) वीटो नहीं होती।
| विवरण | राष्ट्रपति | उपराष्ट्रपति |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 52-62 | 63-71 |
| चुनाव | निर्वाचक मंडल | संसद के दोनों सदन |
| कार्यकाल | 5 वर्ष | 5 वर्ष |
| न्यूनतम आयु | 35 वर्ष | 35 वर्ष |
| निष्कासन | महाभियोग | सदन की कार्यवाही |
| मुख्य कार्य | कार्यपालिका प्रमुख | राज्यसभा सभापति |
| शक्ति | अनुच्छेद / विवरण |
|---|---|
| क्षमादान | अनुच्छेद 72 |
| अध्यादेश | अनुच्छेद 123 |
| राष्ट्रीय आपातकाल | अनुच्छेद 352 |
| राष्ट्रपति शासन | अनुच्छेद 356 |
| वित्तीय आपातकाल | अनुच्छेद 360 |
| न्यायालय से परामर्श | अनुच्छेद 143 |
flowchart TD
A[राष्ट्रपति 52-62] --> B[चुनाव निर्वाचक मंडल]
A --> C[शक्तियाँ]
A --> D[महाभियोग 61]
A --> E[उपराष्ट्रपति 63-71]
C --> C1[कार्यपालिका]
C --> C2[विधायी]
C --> C3[न्यायिक 72]
C --> C4[आपातकालीन]
B --> B1[निर्वाचित सांसद]
B --> B2[निर्वाचित विधायक]
E --> E1[राज्यसभा सभापति]
E --> E2[राष्ट्रपति के कार्य]
राष्ट्रपति भारतीय गणराज्य का संवैधानिक प्रमुख है, जिसका चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा होता है तथा जिसकी शक्तियाँ कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका, आपातकाल और क्षमादान तक विस्तृत हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उसके कार्यों का निर्वहन करता है। दोनों पदों की अनुच्छेद संख्या, चुनाव विधि, कार्यकाल और निष्कासन प्रक्रिया की सटीक जानकारी रेलवे NTPC परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है।