15.7 संसद और संसदीय समितियाँ Notes

15.7 संसद और संसदीय समितियाँ

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.7 संसद और संसदीय समितियाँ विषय-वस्तु: राज्यसभा, लोकसभा

1. परिचय

भारत की संसद द्विसदनीय है, जिसमें राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं। अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद में राष्ट्रपति तथा दो सदन होंगे। लोकसभा को 'निम्न सदन' या 'लोक सदन' तथा राज्यसभा को 'उच्च सदन' या 'राज्यों की परिषद' कहा जाता है। लोकसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा होता है, जबकि राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा होता है। लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष है, जबकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है।

संसद का मुख्य कार्य विधान निर्माण है, परंतु यह कार्यपालिका पर नियंत्रण, वित्तीय नियंत्रण तथा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव जैसे कार्य भी करती है। संसद के कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न संसदीय समितियाँ बनाई जाती हैं, जैसे प्राक्कलन समिति, लोक लेखा समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति। संसद में बहस, प्रश्नकाल, शून्य काल तथा धन्यवाद प्रस्ताव जैसी व्यवस्थाएँ भी होती हैं।

रेलवे NTPC परीक्षा में लोकसभा और राज्यसभा की संरचना, सदस्यों की योग्यता, अध्यक्ष/सभापति, धन विधेयक, संयुक्त बैठक, बजट तथा संसदीय समितियों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस अध्याय में अनुच्छेदों की संख्या तथा सदनों की विशेषताओं को याद रखना आवश्यक है। सदनों के बीच अंतर और संयुक्त बैठक की स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

2. लोकसभा और राज्यसभा की संरचना

लोकसभा (अनुच्छेद 81): - लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 है, जिसमें राज्यों से 530 तथा केन्द्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य निर्वाचित होते हैं। - 104वें संशोधन (2019) के बाद एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए मनोनीत सदस्यों का प्रावधान समाप्त कर दिया गया; वर्तमान में लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य हैं। - सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से होता है (अनुच्छेद 326)। - कार्यकाल 5 वर्ष का होता है; राष्ट्रपति आपातकाल के दौरान इसे एक बार बढ़ा सकता है (अधिकतम 1 वर्ष)। - लोकसभा में सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है। - सदस्यों की संख्या राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में निर्धारित होती है।

राज्यसभा (अनुच्छेद 80): - राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें 238 निर्वाचित तथा 12 मनोनीत सदस्य होते हैं। - राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान तथा समाज सेवा के क्षेत्रों से मनोनीत किए जाते हैं। - सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है। - राज्यसभा एक स्थायी सदन है तथा इसे भंग नहीं किया जा सकता। - सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है तथा प्रत्येक दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। - सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 30 वर्ष है। - उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

त्वरित तथ्य: 1. लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 और राज्यसभा की 250 है। 2. लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष, राज्यसभा स्थायी सदन है। 3. लोकसभा सदस्य हेतु न्यूनतम आयु 25 वर्ष, राज्यसभा हेतु 30 वर्ष। 4. राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष है। 5. 104वें संशोधन से एंग्लो-इंडियन आरक्षण समाप्त हुआ।

3. सदनों के अधिकारी, सत्र और विधि निर्माण

लोकसभा के अधिकारी (अनुच्छेद 93-94): - लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है। - अध्यक्ष लोकसभा की कार्यवाही संचालित करता है तथा मतदान में बराबरी होने पर निर्णायक मत (कास्टिंग वोट) देता है। - लोकसभा भंग होने के बाद भी अध्यक्ष अपने पद पर तब तक बना रहता है जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव न हो। - अध्यक्ष को हटाने के लिए सदन के सभी सदस्यों के बहुमत का प्रस्ताव आवश्यक है। - अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष कार्यभार संभालता है।

राज्यसभा के अधिकारी: - उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति है। - राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है। - सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति कार्यवाही संचालित करता है।

सत्र (अनुच्छेद 85): - संसद के दोनों सदनों की बैठकें वर्ष में कम से कम दो बार होनी चाहिए। - दो सत्रों के बीच अंतराल छह माह से अधिक नहीं हो सकता। - राष्ट्रपति संसद को बुलाता है, स्थगित करता है तथा लोकसभा को भंग करता है। - सामान्यतः तीन सत्र होते हैं: बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र।

विधि निर्माण प्रक्रिया: 1. साधारण विधेयक किसी भी सदन में पेश हो सकता है। 2. विधेयक के तीन वाचन होते हैं: प्रथम (सामान्य चर्चा), द्वितीय (खंडवार विचार), तृतीय (अंतिम पारित)। 3. एक सदन में पारित होने के बाद विधेयक दूसरे सदन में जाता है। 4. दूसरे सदन में पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति के लिए जाता है। 5. राष्ट्रपति की अनुमति मिलने पर विधेयक कानून बन जाता है। 6. धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश हो सकता है (अनुच्छेद 110-111)। 7. राज्यसभा धन विधेयक को केवल 14 दिन के भीतर सिफारिशें दे सकती है; लोकसभा उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। 8. संविधान संशोधन विधेयक प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से पारित होता है (अनुच्छेद 368)।

संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108): - साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में मतभेद होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है। - संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है। - संयुक्त बैठक में केवल साधारण विधेयक ही रखा जा सकता है; धन विधेयक तथा संविधान संशोधन विधेयक इसमें नहीं रखे जा सकते। - संयुक्त बैठक में लोकसभा के अधिक सदस्य होने के कारण प्रायः लोकसभा का पक्ष हावी रहता है। - संयुक्त बैठक बुलाने का उदाहरण दो बार दर्ज है: धन विधेयक? नहीं, यह साधारण विधेयकों पर हुआ।

4. वित्तीय प्रक्रिया और संसदीय समितियाँ

वित्तीय प्रक्रिया: - वार्षिक वित्तीय विवरण अर्थात बजट (अनुच्छेद 112) केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है। - बजट प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की अनुशंसा आवश्यक होती है। - संचित निधि (अनुच्छेद 266) में सभी प्राप्तियाँ जमा होती हैं; भारत की आकस्मिक निधि (अनुच्छेद 267) राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है। - धन विधेयक की परिभाषा अनुच्छेद 110 में है। - लोकसभा में बजट पर चर्चा होती है तथा विनियोग विधेयक से धन स्वीकृत होता है। - वित्त विधेयक में कराधान के प्रावधान होते हैं।

संसदीय समितियाँ: - लोक लेखा समिति (PAC): इसमें 22 सदस्य होते हैं (लोकसभा से 15 तथा राज्यसभा से 7)। इसका कार्य सरकार की खर्चों की जाँच करना है तथा इसकी अध्यक्षता सदैव विपक्ष का सदस्य करता है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) इसमें सहायता करता है। - प्राक्कलन समिति: इसमें केवल लोकसभा के 30 सदस्य होते हैं। यह बजट के प्राक्कलनों की जाँच करती है तथा दक्षता की सिफारिश करती है। - सार्वजनिक उपक्रम समिति: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की रिपोर्ट और वित्तीय मामलों की जाँच करती है। - अन्य समितियाँ: प्राक्कलन, लोक लेखा तथा उपक्रम समिति को 'वित्तीय त्रिमूर्ति' कहा जाता है। इसके अतिरिक्त विषय संबंधी स्थायी समितियाँ (विभागीय स्थायी समितियाँ) भी होती हैं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ: 1. प्रश्नकाल: सत्र का प्रथम घंटा, जिसमें सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं। 2. शून्य काल: प्रश्नकाल के बाद का समय, जिसमें सदस्य बिना सूचना विषय उठा सकते हैं। 3. धन्यवाद प्रस्ताव: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा। 4. स्थगन प्रस्ताव: तत्काल महत्व के विषय पर चर्चा। 5. अविश्वास प्रस्ताव: केवल लोकसभा में। 6. निंदा प्रस्ताव: मंत्रियों की नीति पर। 7. विशेषाधिकार हनन: सदस्यों के विशेषाधिकारों के उल्लंघन पर।

त्वरित तथ्य: 1. PAC में 22 सदस्य हैं और अध्यक्ष विपक्ष से होता है। 2. प्राक्कलन समिति में केवल लोकसभा के 30 सदस्य हैं। 3. बजट केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है। 4. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है। 5. धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश हो सकता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: लोकसभा और राज्यसभा की तुलना

विवरण लोकसभा राज्यसभा
अधिकतम सदस्य 550 250
निर्वाचन प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष
कार्यकाल 5 वर्ष स्थायी
न्यूनतम आयु 25 वर्ष 30 वर्ष
सदस्य अवधि 5 वर्ष 6 वर्ष
सभापति/अध्यक्ष अध्यक्ष उपराष्ट्रपति

तालिका 2: प्रमुख संसदीय समितियाँ

समिति सदस्य मुख्य कार्य
लोक लेखा समिति 22 (15+7) खर्चों की जाँच
प्राक्कलन समिति 30 (लोकसभा) बजट प्राक्कलनों की जाँच
सार्वजनिक उपक्रम समिति 22 सार्वजनिक उपक्रमों की जाँच

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[संसद] --> B[लोकसभा]
    A --> C[राज्यसभा]
    A --> D[राष्ट्रपति]
    B --> B1[अधिकतम 550]
    B --> B2[प्रत्यक्ष चुनाव]
    B --> B3[5 वर्ष कार्यकाल]
    C --> C1[अधिकतम 250]
    C --> C2[अप्रत्यक्ष चुनाव]
    C --> C3[स्थायी सदन]
    A --> E[संसदीय समितियाँ]
    E --> E1[लोक लेखा समिति]
    E --> E2[प्राक्कलन समिति]
    E --> E3[उपक्रम समिति]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

संसद की संरचना संसद लोकसभा अधिकतम 550, प्रत्यक्ष चुनाव कार्यकाल 5 वर्ष राज्यसभा अधिकतम 250, अप्रत्यक्ष चुनाव स्थायी सदन, 6 वर्ष कार्यकाल राष्ट्रपति संसद का अंग संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) में अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है स्वर्ण नियम: धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश हो सकता है।

प्रमुख संसदीय समितियाँ समितियाँ लोक लेखा समिति 22 सदस्य (15+7) अध्यक्ष विपक्ष से प्राक्कलन समिति 30 सदस्य (केवल लोकसभा) बजट की जाँच सार्वजनिक उपक्रम समिति 22 सदस्य उपक्रमों की जाँच तीनों को मिलाकर 'वित्तीय त्रिमूर्ति' कहा जाता है स्वर्ण नियम: लोक लेखा समिति की अध्यक्षता सदैव विपक्ष के सदस्य करता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. राज्यसभा के सदस्यों की न्यूनतम आयु 30 वर्ष है, लोकसभा की 25 वर्ष; इन्हें अक्सर मिला दिया जाता है।
  2. लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 है, न कि 545; 104वें संशोधन के बाद निर्वाचित सदस्य 543 हैं।
  3. राज्यसभा को भंग नहीं किया जा सकता, यह स्थायी सदन है; परंतु कई विद्यार्थी इसे 5 वर्ष का सदन मान लेते हैं।
  4. संयुक्त बैठक में धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक नहीं रखे जा सकते, केवल साधारण विधेयक।
  5. बजट केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है, राज्यसभा में नहीं।
  6. धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश हो सकता है; राज्यसभा इसे 14 दिन में सिफारिशें दे सकती है।
  7. PAC के अध्यक्ष को सदैव विपक्ष से चुना जाता है; इसे सत्ता पक्ष से न जोड़ें।
  8. प्राक्कलन समिति में केवल लोकसभा के 30 सदस्य होते हैं, इसमें राज्यसभा सदस्य नहीं होते।
  9. अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में; राज्यसभा में निंदा या अविश्वास प्रस्ताव नहीं।
  10. राज्यसभा में उपराष्ट्रपति सभापति होता है, परंतु मतदान में वह केवल बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत देता है; वह सदस्य नहीं है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. लोकसभा और राज्यसभा की तुलनात्मक तालिका (संख्या, आयु, कार्यकाल, चुनाव) रटें।
  2. धन विधेयक की विशेषताएँ और राज्यसभा की भूमिका (14 दिन) याद रखें।
  3. संयुक्त बैठक के नियम (अनुच्छेद 108) और अध्यक्षता पर ध्यान दें।
  4. तीन वित्तीय समितियों के सदस्यों की संख्या और अध्यक्षता रटें।
  5. अनुच्छेद 79-85, 93, 100, 110-112 की संख्याओं को विषय से जोड़ें।
  6. प्रश्नकाल और शून्य काल में अंतर स्पष्ट रखें।
  7. राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्यों के क्षेत्र (कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा) याद करें।
  8. लोकसभा में एंग्लो-इंडियन आरक्षण के समापन को 104वें संशोधन से जोड़ें।
  9. सदनों के सत्र (बजट, मानसून, शीतकालीन) के नाम रटें।
  10. अविश्वास और निंदा प्रस्ताव में अंतर स्पष्ट रखें।

10. निष्कर्ष

भारतीय संसद द्विसदनीय विधायिका है, जिसमें लोकसभा प्रत्यक्ष रूप से चुने गए सदस्यों का सदन है और राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाला स्थायी सदन। धन विधेयक, बजट, संयुक्त बैठक तथा संसदीय समितियों की प्रक्रिया संसदीय कार्य का आधार हैं। लोकसभा और राज्यसभा की संरचना, अधिकारियों, योग्यताओं तथा समितियों की सटीक जानकारी रेलवे NTPC परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है, अतः इस अध्याय की पुनरावृत्ति आवश्यक है।