विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.8 सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय विषय-वस्तु: अनुच्छेद 124-147, 214
भारत का सर्वोच्च न्यायालय न्यायपालिका का सर्वोच्च निकाय है, जो अनुच्छेद 124 से 147 तक वर्णित है। इसे 'अंतिम अपील की अदालत', 'रिकॉर्ड का न्यायालय' तथा 'संविधान का संरक्षक' कहा जाता है। सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 1950 में हुई तथा इसका विधिवत उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ। भारत का पहला मुख्य न्यायाधीश हीरालाल जे. कानिया थे।
उच्च न्यायालय राज्य स्तर का सर्वोच्च न्यायालय है, जिसका प्रावधान अनुच्छेद 214 में है। प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होता है, परंतु कुछ उच्च न्यायालय एक से अधिक राज्यों के लिए कार्य करते हैं। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है। उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, जो सर्वोच्च न्यायालय की अनुच्छेद 32 की शक्ति से अधिक विस्तृत है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। न्यायाधीशों का वेतन संचित निधि से भुगतान होता है तथा न्यायाधीशों के आचरण पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती। रेलवे NTPC परीक्षा में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की संरचना, न्यायाधीशों की योग्यता, निष्कासन प्रक्रिया, अधिकार क्षेत्र तथा रिटों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। अनुच्छेदों की संख्या और विषय का सटीक ज्ञान इस अध्याय में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संरचना (अनुच्छेद 124): - सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश होते हैं। - संसद कानून द्वारा न्यायाधीशों की संख्या बढ़ा सकती है। - वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृत शक्ति 34 न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) है। - न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है (अनुच्छेद 124(2))। - नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों के परामर्श की प्रथा (कोलीजियम) अपनाई जाती है।
योग्यताएँ (अनुच्छेद 124(3)): 1. भारत का नागरिक होना चाहिए। 2. उच्च न्यायालय का न्यायाधीश पाँच वर्ष तक रह चुका हो, या 3. उच्च न्यायालय का अधिवक्ता दस वर्ष रह चुका हो, या 4. प्रतिष्ठित न्यायविद् (विशिष्ट विद्वान) हो। 5. न्यायाधीश की आयु 65 वर्ष तक पद पर रह सकता है।
न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया: - मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है। - 1993 के द्वितीय न्यायाधीश वाद में कोलीजियम प्रणाली की स्थापना हुई। - 99वें संशोधन (2014) द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बनाया गया, जिसे 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर दिया। - सरकारिया आयोग ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार देने की सिफारिश की थी।
त्वरित तथ्य: 1. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 1950 में हुई; पहला उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को। 2. पहले मुख्य न्यायाधीश हीरालाल जे. कानिया थे। 3. न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है। 4. वर्तमान स्वीकृत शक्ति 34 न्यायाधीश है। 5. सर्वोच्च न्यायालय संसद द्वारा निर्धारित न्यायाधीशों की संख्या के अनुसार कार्य करता है।
सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) निम्नलिखित हैं:
त्वरित तथ्य: 1. अनुच्छेद 32 को 'मौलिक अधिकारों का संरक्षक' कहा जाता है। 2. SLP का प्रावधान अनुच्छेद 136 में है। 3. परामर्शदात्री अधिकार क्षेत्र अनुच्छेद 143 में है। 4. न्यायिक पुनरीक्षण की अवधारणा अमेरिका से ली गई है। 5. सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है।
संरचना (अनुच्छेद 214): - प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा। - उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति नियुक्त करता है। - न्यायाधीशों की संख्या संसद द्वारा निर्धारित की जाती है। - उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। - एक उच्च न्यायालय एक से अधिक राज्यों के लिए कार्य कर सकता है।
योग्यताएँ (अनुच्छेद 217): 1. भारत का नागरिक होना चाहिए। 2. दस वर्ष तक न्यायिक पद धारण किया हो, या 3. उच्च न्यायालय में दस वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो। 4. न्यायाधीशों का स्थानांतरण राष्ट्रपति करता है (अनुच्छेद 222)।
उच्च न्यायालय की शक्तियाँ: - रिट अधिकार क्षेत्र (अनुच्छेद 226): उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों तथा अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु रिट जारी कर सकता है। यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय की अनुच्छेद 32 की शक्ति से व्यापक है। - अधीक्षण (अनुच्छेद 227): अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण रखता है। - पर्यवेक्षण अधिकार: अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों की देखरेख करता है। - परामर्शदात्री अधिकार: कुछ मामलों में राष्ट्रपति उच्च न्यायालय से भी परामर्श ले सकता है।
न्यायाधीशों की निष्कासन प्रक्रिया (अनुच्छेद 124(4)): - न्यायाधीशों को 'सिद्ध कदाचार' या 'अक्षमता' के आधार पर हटाया जा सकता है। - प्रत्येक सदन में कुल सदस्यों की संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित होना चाहिए। - प्रस्ताव राष्ट्रपति को सौंपा जाता है, जो उसे हटाने का आदेश देता है। - न्यायाधीशों की जाँच प्रक्रिया न्यायिक जाँच अधिनियम (1968) के तहत होती है। - अब तक किसी भी न्यायाधीश को इस प्रक्रिया से नहीं हटाया गया है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता के उपाय: 1. न्यायाधीशों का वेतन संचित निधि से देय होता है। 2. कार्यकाल में वेतन में कमी नहीं की जा सकती (वित्तीय आपातकाल को छोड़कर)। 3. न्यायाधीशों के आचरण पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती (महाभियोग को छोड़कर)। 4. सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीश सरकार के अधीन कोई लाभ का पद नहीं धारण कर सकते। 5. न्यायालय की अवमानना पर दंड देने का अधिकार होता है।
उदाहरण: 1. केशवानंद भारती वाद (1973) में मूल ढाँचा सिद्धांत प्रतिपादित हुआ। 2. मनका गांधी वाद (1978) में अनुच्छेद 21 की व्याख्या हुई। 3. के.एस. पुट्टास्वामी वाद (2017) में निजता का अधिकार घोषित हुआ। 4. अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय किसी भी कानूनी अधिकार की रक्षा हेतु रिट जारी कर सकता है। 5. सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को सलाह देता है।
| विवरण | सर्वोच्च न्यायालय | उच्च न्यायालय |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 124-147 | 214 |
| सेवानिवृत्ति आयु | 65 वर्ष | 62 वर्ष |
| रिट क्षेत्र | अनुच्छेद 32 | अनुच्छेद 226 |
| अधीक्षण | नहीं | अनुच्छेद 227 |
| योग्यता (अधिवक्ता) | 10 वर्ष | 10 वर्ष |
| अधिकार क्षेत्र | अनुच्छेद |
|---|---|
| मूल | 131 |
| अपीलीय | 132-136 |
| परामर्शदात्री | 143 |
| पुनरीक्षण | 137 |
| रिट | 32 |
| रिकॉर्ड का न्यायालय | 129 |
flowchart TD
A[सर्वोच्च न्यायालय 124-147] --> B[संरचना]
A --> C[अधिकार क्षेत्र]
A --> D[न्यायाधीश]
B --> B1[मुख्य न्यायाधीश]
B --> B2[34 न्यायाधीश]
C --> C1[मूल 131]
C --> C2[अपीलीय 132-136]
C --> C3[परामर्शदात्री 143]
D --> D1[योग्यता 124(3)]
D --> D2[निष्कासन 124(4)]
A --> E[उच्च न्यायालय 214]
E --> E1[रिट 226]
E --> E2[अधीक्षण 227]
सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 124-147) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 214) भारतीय न्यायपालिका के स्तंभ हैं, जो संविधान की सर्वोच्चता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति, योग्यता, अधिकार क्षेत्र और निष्कासन प्रक्रिया की सटीक समझ रेलवे NTPC परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का आधार है, इसलिए इस अध्याय का गहन अध्ययन आवश्यक है।