2.1 अनुपात और समानुपात Notes

2.1 अनुपात और समानुपात

विषय: रेलवे NTPC – गणित (अंकगणित) अध्याय: 2.1 अनुपात और समानुपात विषय-वस्तु: अनुपात, समानुपात, भागीदारी

1. परिचय

अनुपात और समानुपात रेलवे NTPC परीक्षा के अंकगणित खंड का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस अध्याय से प्रत्येक परीक्षा में न्यूनतम 2 से 3 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। यह विषय न केवल स्वयं के प्रश्नों के रूप में आता है, बल्कि प्रतिशत, औसत, लाभ-हानि, साझेदारी और मिश्रण जैसे अन्य अध्यायों को हल करने की आधारशिला भी है। जो उम्मीदवार अनुपात-समानुपात की अवधारणा को गहराई से समझ लेता है, उसके लिए कई अन्य अध्याय भी सरल हो जाते हैं।

इस अध्याय में हम अनुपात की परिभाषा, समानुपात के नियम, मध्यानुपाती, तृतीयानुपाती, चतुर्थानुपाती, क्रमागत अनुपात और व्यावहारिक जीवन में अनुपात के उपयोग का अध्ययन करेंगे। साथ ही भागीदारी (साझेदारी) जो अनुपात का ही विस्तार है, का गहन विश्लेषण करेंगे। भागीदारी में विभिन्न समयावधि के लिए पूँजी लगाने पर लाभ का वितरण कैसे होता है, यह समझना अत्यंत आवश्यक है।

NTPC परीक्षा में ये प्रश्न प्रायः संक्षिप्त और सीधे होते हैं, किंतु ध्यान भटकाने वाले विकल्प रखे जाते हैं। अतः मूल अवधारणाओं का स्पष्ट ज्ञान और तीव्र गणना कौशल ही सफलता की कुंजी है। इस अध्याय का अध्ययन आपको परीक्षा में शीघ्र और सटीक उत्तर देने में सक्षम बनाएगा। यदि आप इस विषय में निपुण हो जाते हैं, तो आपका कुल अंक काफी बढ़ सकता है।

2. अनुपात

अनुपात दो समान राशियों की तुलना है। दो राशियों a और b (जहाँ b शून्य नहीं है) के अनुपात को a:b अथवा a/b लिखा जाता है। अनुपात एक शुद्ध संख्या है, अतः इसमें कोई इकाई नहीं होती। उदाहरण के लिए, 4 किग्रा तथा 6 किग्रा का अनुपात 4:6 अर्थात 2:3 होता है। अनुपात के दोनों पदों को एक ही अशून्य संख्या से गुणा या भाग करने पर अनुपात में कोई परिवर्तन नहीं होता। प्रथम पद को पूर्वपद तथा द्वितीय पद को उत्तरपद कहा जाता है।

अनुपात के प्रमुख गुणधर्म: - अनुपात के दोनों पदों को एक ही अशून्य संख्या से गुणा या भाग करने पर अनुपात अपरिवर्तित रहता है। जैसे 2:3 = 4:6 = 6:9। - अनुपात को सदैव न्यूनतम रूप में व्यक्त करना चाहिए, अर्थात दोनों पदों को उनके महत्तम समापवर्तक (HCF) से भाग देना चाहिए। - यदि दो राशियों का अनुपात a:b है, तो राशियों को ka तथा kb के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ k एक अचर है। - किसी अनुपात में दोनों पदों का योग (a+b) तथा अंतर (a-b) ज्ञात करके भी मूल राशियाँ निकाली जा सकती हैं। - दो से अधिक राशियों का अनुपात जैसे a:b:c दिया हो तो कुल राशि को (a+b+c) से भाग देकर प्रत्येक भाग ज्ञात किया जाता है।

अनुपात से संबंधित महत्वपूर्ण सूत्र: - मध्यानुपाती: दो संख्याओं a और b का मध्यानुपाती √(ab) होता है। - तृतीयानुपाती: संख्याओं a और b का तृतीयानुपाती b²/a होता है, अर्थात a:b :: b:x में x = b²/a। - चतुर्थानुपाती: तीन संख्याओं a, b, c का चतुर्थानुपाती (b×c)/a होता है, अर्थात a:b :: c:x में x = bc/a।

क्रमागत अनुपात: a:b, b:c तथा c:d को क्रमागत अनुपात कहते हैं और इसे a:b:c:d लिखा जाता है। यदि a:b = 2:3 तथा b:c = 4:5 हो, तो a:b:c ज्ञात करने के लिए b को दोनों अनुपातों में समान करना पड़ता है। यहाँ b की दोनों भिन्नों में क्रमशः 3 और 4 है, अतः b का लघुत्तम समापवर्त्य 12 करने पर a:b = 8:12 तथा b:c = 12:15 प्राप्त होता है। अतः a:b:c = 8:12:15।

हल किए गए उदाहरण: 1. यदि x:y = 3:4 तथा y:z = 5:6 हो, तो x:z ज्ञात कीजिए। हल: x/y = 3/4 और y/z = 5/6। अतः x/z = (x/y)×(y/z) = (3/4)×(5/6) = 15/24 = 5/8। अतः x:z = 5:8।

  1. एक थैले में 5 रुपये, 2 रुपये तथा 1 रुपये के सिक्कों की संख्या का अनुपात 2:3:4 है और कुल धन 480 रुपये है। प्रत्येक प्रकार के सिक्कों की संख्या ज्ञात कीजिए। हल: माना सिक्कों की संख्या क्रमशः 2x, 3x, 4x है। कुल धन = 5×(2x) + 2×(3x) + 1×(4x) = 10x + 6x + 4x = 20x = 480, अतः x = 24। अतः 5 रुपये के सिक्के = 48, 2 रुपये के सिक्के = 72, 1 रुपये के सिक्के = 96।

  2. किसी धनराशि को 2:3:5 के अनुपात में तीन व्यक्तियों में बाँटने पर सबसे बड़े और सबसे छोटे भाग में 2400 रुपये का अंतर है। कुल धनराशि ज्ञात कीजिए। हल: भाग क्रमशः 2x, 3x, 5x हैं। अंतर = 5x - 2x = 3x = 2400, अतः x = 800। कुल धनराशि = (2+3+5)x = 10×800 = 8000 रुपये।

3. समानुपात

समानुपात दो अनुपातों की समानता है। यदि a:b = c:d हो, तो चार राशियाँ a, b, c, d समानुपात में कही जाती हैं और इसे a:b :: c:d लिखा जाता है। इसमें a तथा d को अंतिम पद और b तथा c को मध्य पद कहते हैं। समानुपात का मूल नियम यह है कि अंतिम पदों का गुणनफल मध्य पदों के गुणनफल के बराबर होता है, अर्थात a×d = b×c। इस नियम से अज्ञात पद का मान शीघ्रता से ज्ञात किया जा सकता है।

समानुपात के प्रकार: - निरंतर समानुपात: जब a:b :: b:c हो, तो b को a और c का मध्यानुपाती कहा जाता है और b² = ac होता है। - प्रत्यक्ष समानुपात: जब एक राशि बढ़ने पर दूसरी भी उसी अनुपात में बढ़े। उदाहरण के लिए, कार्य और कामगारों की संख्या प्रत्यक्ष समानुपात में होती है। इसमें x1/y1 = x2/y2 होता है। - व्युत्क्रम समानुपात: जब एक राशि बढ़ने पर दूसरी उसी अनुपात में घटे। उदाहरण के लिए, समय और गति व्युत्क्रम समानुपात में होती हैं। इसमें x1×y1 = x2×y2 होता है।

समानुपात के महत्वपूर्ण नियम: - a:b :: c:d होने पर (a+b)/b = (c+d)/d होता है। इसे कॉम्पोनेंडो नियम कहते हैं। - a:b :: c:d होने पर (a-b)/b = (c-d)/d होता है। इसे डिविडेंडो नियम कहते हैं। - a:b :: c:d होने पर (a+b)/(a-b) = (c+d)/(c-d) होता है। इसे कॉम्पोनेंडो-डिविडेंडो नियम कहते हैं। - a:b :: c:d होने पर a/c = b/d तथा b/a = d/c भी लिखा जा सकता है। - यदि a/b = c/d = e/f हो, तो ये सभी अनुपात (a+c+e)/(b+d+f) के बराबर होते हैं।

हल किए गए उदाहरण: 1. यदि 4, x, 12, 21 समानुपात में हों, तो x का मान ज्ञात कीजिए। हल: समानुपात के नियमानुसार 4×21 = x×12, अर्थात 84 = 12x, अतः x = 7।

  1. 36 और 81 का मध्यानुपाती ज्ञात कीजिए। हल: मध्यानुपाती = √(36×81) = √(6²×9²) = 6×9 = 54।

  2. एक वस्तु की कीमत 400 रुपये से घटाकर 360 रुपये कर दी गई। कीमत में कितने प्रतिशत की कमी हुई? हल: कमी = 400 - 360 = 40 रुपये। कमी का अनुपात = 40/400 = 1/10 = 10 प्रतिशत। अतः कीमत में 10 प्रतिशत की कमी हुई।

4. भागीदारी (साझेदारी)

भागीदारी वह स्थिति है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर व्यवसाय में पूँजी लगाते हैं और लाभ को आपस में बाँटते हैं। जब साझेदार अपनी पूँजी समान समय के लिए लगाते हैं, तो लाभ सीधे उनकी पूँजी के अनुपात में बँटता है। जब साझेदार अलग-अलग समयावधि के लिए पूँजी लगाते हैं, तो लाभ का वितरण पूँजी और समय के गुणनफल के अनुपात में होता है।

साझेदारी के प्रकार: - साधारण साझेदारी: सभी साझेदार अपनी पूँजी समान समयावधि के लिए लगाते हैं। इसमें लाभ का अनुपात पूँजी के अनुपात के बराबर होता है। - मिश्रित साझेदारी: साझेदारों द्वारा लगाई गई पूँजी या समयावधि अलग-अलग होती है। इसमें लाभ का अनुपात (पूँजी1 × समय1) : (पूँजी2 × समय2) होता है।

महत्वपूर्ण बिंदु: - एक साझेदारी में एक व्यक्ति कार्य के लिए और दूसरा केवल पूँजी के लिए हो सकता है। कार्य करने वाले को अतिरिक्त वेतन मिलता है। - यदि कोई साझेदार बीच में पूँजी बढ़ाता या घटाता है, तो उसकी पूँजी को अलग-अलग समय खंडों में विभाजित कर गणना की जाती है। - कुल लाभ में किसी साझेदार का अंश ज्ञात करने के लिए उसके भार (पूँजी×समय) को कुल भार से भाग देते हैं। - लाभ के अनुपात और समय दिए होने पर पूँजी का अनुपात ज्ञात किया जा सकता है, क्योंकि पूँजी का अनुपात लाभ और समय के अनुपात के भागफल के बराबर होता है।

हल किए गए उदाहरण: 1. A और B ने क्रमशः 50000 रुपये और 75000 रुपये की पूँजी लगाकर व्यवसाय आरंभ किया। वर्ष के अंत में कुल लाभ 40000 रुपये हुआ। A का लाभांश ज्ञात कीजिए। हल: पूँजी का अनुपात = 50000:75000 = 2:3। कुल भाग = 5। A का लाभांश = (2/5)×40000 = 16000 रुपये।

  1. A ने 8000 रुपये 8 महीने के लिए और B ने 12000 रुपये 6 महीने के लिए व्यवसाय में लगाए। यदि कुल लाभ 17000 रुपये हो, तो B का भाग ज्ञात कीजिए। हल: A का भार = 8000×8 = 64000, B का भार = 12000×6 = 72000। भार का अनुपात = 64000:72000 = 8:9। कुल भाग = 17। B का भाग = (9/17)×17000 = 9000 रुपये।

  2. A, B और C ने एक व्यवसाय में क्रमशः 10000, 15000 और 25000 रुपये लगाए। A बीच में 6 महीने बाद 5000 रुपये और लगाता है। वर्ष के अंत में लाभ 52000 रुपये हो तो C का भाग ज्ञात कीजिए। हल: A का भार = 10000×6 + 15000×6 = 60000 + 90000 = 150000। B का भार = 15000×12 = 180000। C का भार = 25000×12 = 300000। भार का अनुपात = 150000:180000:300000 = 15:18:30 = 5:6:10। कुल भाग = 21। C का भाग = (10/21)×52000 = 24761.90 रुपये।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

अवधारणा परिभाषा सूत्र
अनुपात दो राशियों की तुलना a:b = a/b
मध्यानुपाती दो संख्याओं के बीच का पद √(ab)
तृतीयानुपाती a:b :: b:x में x b²/a
चतुर्थानुपाती a:b :: c:x में x bc/a
समानुपात दो अनुपातों की समानता a×d = b×c
निरंतर समानुपात a:b :: b:c b² = ac

तालिका 2

स्थिति लाभ वितरण का नियम
समान समय, अलग पूँजी लाभ का अनुपात = पूँजी का अनुपात
अलग समय, अलग पूँजी लाभ का अनुपात = पूँजी × समय
लाभ और समय दिया हो पूँजी का अनुपात = लाभ ÷ समय
लाभ और पूँजी दिया हो समय का अनुपात = लाभ ÷ पूँजी
मिश्रित साझेदारी भार = पूँजी × समय

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[अनुपात और समानुपात] --> B[अनुपात]
    A --> C[समानुपात]
    A --> D[भागीदारी]
    B --> B1[मध्यानुपाती]
    B --> B2[तृतीयानुपाती]
    B --> B3[क्रमागत अनुपात]
    C --> C1[प्रत्यक्ष समानुपात]
    C --> C2[व्युत्क्रम समानुपात]
    C --> C3[अंतिम पद गुणनफल = मध्य पद गुणनफल]
    D --> D1[साधारण साझेदारी]
    D --> D2[मिश्रित साझेदारी]
    D2 --> E[लाभ अनुपात = पूँजी × समय]
    E --> F[लाभ विभाजन]
    F --> G[प्रतिशत और औसत में उपयोग]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

अनुपात और समानुपात की मूल अवधारणा अनुपात a:b मध्यानुपाती √(a × b) समानुपात a:b :: c:d a × d = b × c तृतीयानुपाती b² / a चतुर्थानुपाती b × c / a भागीदारी लाभ ∝ पूँजी × समय स्वर्ण नियम: समानुपात में अंतिम पदों का गुणनफल मध्य पदों के गुणनफल के बराबर होता है।

भागीदारी में लाभ का वितरण व्यवसाय में पूँजी समान समय लाभ ∝ पूँजी अलग-अलग समय लाभ ∝ पूँजी × समय A का भार पूँजीA × समयA B का भार पूँजीB × समयB लाभ का अनुपात कुल लाभ का वितरण स्वर्ण नियम: मिश्रित साझेदारी में लाभ पूँजी और समय के गुणनफल के अनुपात में बँटता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. अनुपात में इकाई जोड़ने की भूल: अनुपात हमेशा एक शुद्ध संख्या होता है। यदि प्रश्न में राशियाँ भिन्न इकाइयों में हों, तो उन्हें पहले समान इकाई में बदलना आवश्यक है, अन्यथा उत्तर गलत आता है।
  2. समानुपात में मध्य पदों का गुणनफल गलत लेना: कई छात्र a:b :: c:d में a×b = c×d लिख देते हैं, जबकि सही नियम a×d = b×c है। अंतिम पद तथा मध्य पद की पहचान सदैव ध्यान से करें।
  3. तृतीयानुपाती और चतुर्थानुपाती में भ्रम: तृतीयानुपाती में सूत्र b²/a और चतुर्थानुपाती में bc/a प्रयुक्त होता है। दोनों को आपस में बदलकर प्रयोग करना सामान्य भूल है।
  4. साझेदारी में समय को अनदेखा करना: जब पूँजी अलग-अलग समय के लिए लगाई जाती है, तो केवल पूँजी के अनुपात से लाभ नहीं बाँटना चाहिए। ऐसे प्रश्नों में पूँजी × समय का भार आवश्यक है।
  5. बीच में पूँजी बदलने की गणना में त्रुटि: यदि कोई साझेदार बीच में पूँजी बढ़ाता या घटाता है, तो उसे अलग-अलग समय खंडों में गणना करना आवश्यक है, न कि एक ही बार में कुल पूँजी लेना।
  6. क्रमागत अनुपात में मध्य पद को समान करने में त्रुटि: a:b और b:c दिए होने पर b को लघुत्तम समापवर्त्य से गुणा कर समान करना चाहिए, न कि सीधे जोड़ना या घटाना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रश्न पढ़ते ही अनुपात को न्यूनतम रूप में लिखें: जैसे ही अनुपात दिखे, उसे तुरंत सरलतम रूप में बदलें, इससे आगे की गणना आसान हो जाती है और समय की बचत होती है।
  2. भाग के प्रश्नों में कुल योग का उपयोग करें: यदि a:b:c दिया हो और एक भाग ज्ञात करना हो, तो पहले a+b+c ज्ञात करें और फिर अनुपात के घटक को कुल योग से विभाजित करके गुणा करें।
  3. अनुमान से उत्तर चुनें: परीक्षा में दिए गए विकल्पों से उत्तर की जाँच की जा सकती है। विकल्पों को पीछे से रखकर देखें कि कौन सा विकल्प समानुपात की शर्त पूरी करता है।
  4. साझेदारी में महीने को वर्ष में बदलें: यदि समय महीनों में दिया हो, तो गणना में महीनों को ही रखें, बशर्ते सभी साझेदारों का समय समान इकाई में हो। अलग-अलग इकाई होने पर पहले समान इकाई में बदलें।
  5. प्रतिशत से जुड़े अनुपात प्रश्नों पर विशेष ध्यान दें: अनुपात को प्रतिशत में और प्रतिशत को अनुपात में बदलने का अभ्यास करें, क्योंकि NTPC में ऐसे मिश्रित प्रश्न अक्सर आते हैं।
  6. मौखिक गणना का अभ्यास करें: 2:3:5 जैसे सामान्य अनुपातों की भाग गणना मौखिक रूप से करने का अभ्यास करें, ताकि परीक्षा में समय बचे और आत्मविश्वास बढ़े।

10. निष्कर्ष

अनुपात और समानुपात रेलवे NTPC के अंकगणित में न केवल स्वयं महत्वपूर्ण हैं, बल्कि कई अन्य अध्यायों को जोड़ने वाली कड़ी भी हैं। इस अध्याय के मूल सूत्र, समानुपात का मूल नियम तथा भागीदारी में पूँजी और समय का सही विश्लेषण ही परीक्षा में सफलता दिलाते हैं। दैनिक अभ्यास, विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को हल करना और गलतियों का विश्लेषण करना ही इस विषय में निपुणता प्राप्त करने का मार्ग है।