विषय: रेलवे NTPC – गणित (अंकगणित) अध्याय: 2.4 औसत विषय-वस्तु: औसत, भारित औसत
औसत रेलवे NTPC परीक्षा के अंकगणित खंड का एक सरल परंतु अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। प्रत्येक परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। औसत की अवधारणा आँकड़ों के सारांशीकरण पर आधारित है, जिसमें कई मानों को एक ही प्रतिनिधि मान में परिवर्तित किया जाता है। यह विषय आयु, अंक, तापमान, गति, वजन जैसे अनेक प्रकार के व्यावहारिक प्रश्नों में प्रयुक्त होता है।
इस अध्याय में हम औसत की मूल परिभाषा, मध्यमान ज्ञात करने की विधि, भारित औसत, औसत के विशेष नियम, संख्या श्रेणी से संबंधित प्रश्न, मिश्रण में औसत और आयु से संबंधित प्रश्नों का अध्ययन करेंगे। भारित औसत का विशेष महत्व है, क्योंकि जब भिन्न समूहों के औसत दिए जाएँ, तो कुल औसत सीधा औसत नहीं होता, बल्कि प्रत्येक समूह की मात्रा या भार के अनुसार औसत लिया जाता है।
NTPC परीक्षा में औसत के प्रश्न प्रायः सीधे सूत्र पर आधारित होते हैं, किंतु कुछ प्रश्नों में छिपी हुई स्थिति (जैसे किसी एक व्यक्ति का मान निकालना) होती है, जिसमें समग्र योग की गणना की आवश्यकता होती है। औसत में योग की अवधारणा (औसत × संख्या = योग) को समझना ही आधा युद्ध जीतना है। आइए, औसत की अवधारणा को विस्तार से समझें।
औसत किसी समूह के सभी मानों के योग को मानों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मान होता है। इसे अंकगणितीय माध्य भी कहा जाता है। यदि किसी समूह में n मान हैं और उनका योग S है, तो औसत = S/n होता है।
प्रमुख सूत्र: - औसत = सभी मानों का योग / मानों की संख्या - योग = औसत × मानों की संख्या - मानों की संख्या = योग / औसत - क्रमागत संख्याओं का औसत = (प्रथम संख्या + अंतिम संख्या) / 2 - क्रमागत प्राकृतिक संख्याओं का औसत = (n + 1) / 2 - पहली n प्राकृतिक संख्याओं का औसत = (n + 1) / 2 - पहली n प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का औसत = (n + 1)(2n + 1) / 6 - पहली n प्राकृतिक संख्याओं के घनों का औसत = n(n + 1)² / 4
औसत के महत्वपूर्ण नियम: - यदि प्रत्येक मान में x जोड़ा जाए, तो औसत में भी x जुड़ जाता है। - यदि प्रत्येक मान में से x घटाया जाए, तो औसत में से भी x घट जाता है। - यदि प्रत्येक मान को x से गुणा किया जाए, तो औसत भी x गुना हो जाता है। - यदि प्रत्येक मान को x से भाग दिया जाए, तो औसत भी x से भाग हो जाता है। - किसी व्यक्ति का मान ज्ञात करने के लिए समग्र योगों के अंतर का उपयोग होता है। - यदि किसी एक संख्या के स्थान पर दूसरी गलत संख्या रखी गई हो, तो त्रुटि = (सही मान - गलत मान) / संख्या।
हल किए गए उदाहरण: 1. 5 संख्याओं 10, 20, 30, 40, 50 का औसत ज्ञात कीजिए। हल: औसत = (10 + 20 + 30 + 40 + 50) / 5 = 150/5 = 30।
6 संख्याओं का औसत 12 है। यदि एक संख्या 8 और बढ़ा दी जाए, तो नया औसत क्या होगा? हल: यदि किसी एक संख्या में 8 की वृद्धि हो, तो योग में 8 जुड़ता है और नया औसत = 12 + 8/6 = 12 + 1.33 = 13.33।
पहले 20 प्राकृतिक संख्याओं का औसत ज्ञात कीजिए। हल: औसत = (20 + 1)/2 = 10.5।
5 संख्याओं का औसत 20 है। इसमें एक नई संख्या 30 जोड़ी जाती है। नया औसत क्या होगा? हल: पुराना योग = 5 × 20 = 100। नया योग = 100 + 30 = 130। नया औसत = 130/6 = 21.67।
जब किसी समूह के विभिन्न उपसमूहों का औसत दिया गया हो और उनकी मात्राएँ (भार) भिन्न हों, तो कुल औसत को केवल औसतों का औसत लेकर नहीं ज्ञात किया जा सकता। ऐसे में प्रत्येक उपसमूह के औसत को उसकी मात्रा से गुणा करके योग ज्ञात किया जाता है, जिसे भारित औसत कहते हैं।
प्रमुख सूत्र: - भारित औसत = (भार1 × मान1 + भार2 × मान2 + ...) / (भार1 + भार2 + ...) - यदि a मात्रा का औसत x है और b मात्रा का औसत y है, तो संयुक्त औसत = (ax + by) / (a + b) - मिश्रण में दो द्रव्यों की मात्राएँ a और b तथा मूल्य x और y हों, तो मिश्रण का मूल्य = (ax + by) / (a + b)
महत्वपूर्ण तथ्य: - भारित औसत हमेशा औसतों की सीमा के बीच होता है, अर्थात सबसे छोटे औसत से बड़ा और सबसे बड़े औसत से छोटा। - जब भार समान हों, तो भारित औसत साधारण औसत के बराबर होता है। - मिश्रण प्रश्नों में भारित औसत की अवधारणा का प्रयोग होता है। - यदि किसी समूह में कुछ मान औसत से अधिक हों, तो उनकी अधिकता का कुल योग, औसत से कम मानों की कमी के योग के बराबर होता है। इस नियम से गणना तीव्र होती है। - परीक्षा में अंकों का भारित औसत निकालते समय विषयों के क्रेडिट या घंटों को भार माना जाता है।
हल किए गए उदाहरण: 1. एक कक्षा में 20 लड़कों का औसत भार 50 किग्रा और 10 लड़कियों का औसत भार 40 किग्रा है। कक्षा का औसत भार ज्ञात कीजिए। हल: कुल भार = 20 × 50 + 10 × 40 = 1000 + 400 = 1400 किग्रा। कुल छात्र = 30। औसत = 1400/30 = 46.67 किग्रा।
दो प्रकार की चाय का मूल्य क्रमशः 120 रुपये प्रति किग्रा और 180 रुपये प्रति किग्रा है। इन्हें 2:3 के अनुपात में मिलाया जाता है। मिश्रण का मूल्य प्रति किग्रा ज्ञात कीजिए। हल: मिश्रण का मूल्य = (2 × 120 + 3 × 180) / (2 + 3) = (240 + 540) / 5 = 780/5 = 156 रुपये प्रति किग्रा।
एक क्रिकेट खिलाड़ी की 10 पारियों का औसत 30 रन है। यदि 11वीं पारी में उसने 40 रन बनाए, तो नया औसत क्या है? हल: कुल रन = 10 × 30 + 40 = 340। नया औसत = 340/11 = 30.91 रन।
एक कक्षा में 30 छात्रों का औसत अंक 40 है। यदि शिक्षक एक छात्र के 90 अंक को गलती से 60 लिख दें, तो सही औसत क्या होगा? हल: त्रुटि = 90 - 60 = 30 अंक। योग में 30 और जोड़ना होगा। सही औसत = 40 + 30/30 = 41।
औसत से संबंधित कई प्रश्नों में कुछ विशेष स्थितियाँ होती हैं, जैसे आयु में परिवर्तन, किसी व्यक्ति के स्थान पर नए व्यक्ति का आना, मानों का प्रतिस्थापन और गलत लेखन। इन प्रश्नों को हल करने के लिए समग्र योग की तकनीक सबसे उपयोगी है।
प्रमुख तकनीक: - यदि किसी समूह में x व्यक्ति बाहर निकलते हैं और y नए व्यक्ति आते हैं, तो नए और पुराने औसत की तुलना से आने-जाने वाले व्यक्तियों के योग में अंतर ज्ञात होता है। - यदि एक व्यक्ति का मान उसके स्थान पर आने वाले नए व्यक्ति के मान से अधिक हो, तो औसत में वृद्धि होती है। वृद्धि × संख्या = मानों का अंतर। - क्रमागत संख्याओं का औसत ज्ञात करते समय पहली और अंतिम संख्या का औसत लिया जाता है। - सम विषम संख्याओं के औसत में भी प्रथम और अंतिम संख्या का नियम लागू होता है। - किसी व्यक्ति की वर्तमान आयु ज्ञात करने के लिए समूह के कुल आयु में परिवर्तन का उपयोग होता है।
हल किए गए उदाहरण: 1. 5 संख्याओं का औसत 15 है। यदि एक संख्या 20 को 32 से बदल दिया जाए, तो नया औसत क्या होगा? हल: अंतर = 32 - 20 = 12। योग में 12 की वृद्धि, नया औसत = 15 + 12/5 = 17.4।
9 व्यक्तियों का औसत भार 60 किग्रा है। एक नए व्यक्ति के आने से औसत 62 किग्रा हो जाता है। नए व्यक्ति का भार ज्ञात कीजिए। हल: पुराना योग = 9 × 60 = 540। नया योग = 10 × 62 = 620। नए व्यक्ति का भार = 620 - 540 = 80 किग्रा।
एक कक्षा के 40 छात्रों का औसत 35 वर्ष है। यदि शिक्षक को शामिल किया जाए, तो औसत 36 वर्ष हो जाता है। शिक्षक की आयु क्या है? हल: पुराना योग = 40 × 35 = 1400। नया योग = 41 × 36 = 1476। शिक्षक की आयु = 1476 - 1400 = 76 वर्ष।
10 संख्याओं का औसत 42 है। यदि प्रत्येक संख्या में 5 जोड़ा जाए, तो नया औसत क्या होगा? हल: सभी में 5 जोड़ने पर औसत भी 5 बढ़ता है। नया औसत = 42 + 5 = 47।
| क्रमागत श्रेणी | औसत सूत्र |
|---|---|
| पहली n प्राकृतिक संख्याएँ | (n + 1) ÷ 2 |
| पहली n सम प्राकृतिक संख्याएँ | (n + 1) |
| पहली n विषम प्राकृतिक संख्याएँ | n |
| प्रथम एवं अंतिम संख्या का औसत | (प्रथम + अंतिम) ÷ 2 |
| n संख्याओं के वर्गों का औसत | (n + 1)(2n + 1) ÷ 6 |
| n संख्याओं के घनों का औसत | n(n + 1)² ÷ 4 |
| स्थिति | गणना विधि |
|---|---|
| औसत दिया हो तो योग | योग = औसत × संख्या |
| संख्या का मान ज्ञात करना | नया योग - पुराना योग |
| मान बदलने पर नया औसत | पुराना औसत + (अंतर ÷ संख्या) |
| भारित औसत | Σ(भार × मान) ÷ Σभार |
| गलत मान सुधारना | सही योग ÷ संख्या |
| आने वाले व्यक्ति का मान | नया योग - पुराना योग |
flowchart TD
A[औसत] --> B[मूल सूत्र]
A --> C[भारित औसत]
A --> D[विशेष प्रश्न]
B --> B1[औसत = योग ÷ संख्या]
B --> B2[योग = औसत × संख्या]
C --> C1[मिश्रण प्रश्न]
C --> C2[कक्षा के समूह प्रश्न]
D --> D1[मान बदलने पर औसत]
D --> D2[नए व्यक्ति का मान]
D --> D3[गलत मान सुधार]
B1 --> E[क्रमागत श्रेणी सूत्र]
D2 --> F[योग अंतर विधि]
C1 --> G[दो द्रव्यों का मिश्रण]
G --> H[भारित माध्य सूत्र]
F --> I[आयु प्रश्न]
औसत रेलवे NTPC के अंकगणित का एक सरल किंतु स्कोरिंग अध्याय है, जिसमें योग, संख्या और औसत के संबंध की स्पष्ट समझ ही मूल है। भारित औसत की अवधारणा, मान प्रतिस्थापन के नियम और क्रमागत श्रेणी के सूत्र इस अध्याय के प्रमुख स्तंभ हैं। नियमित अभ्यास तथा सूत्रों का स्मरण करके उम्मीदवार औसत से संबंधित सभी प्रश्नों को सहजता से हल कर सकते हैं।