विषय: रेलवे NTPC – गणित (अंकगणित) अध्याय: 2.8 पाइप और टंकी विषय-वस्तु: भरने-खाली करने वाले पाइप
पाइप और टंकी अध्याय वास्तव में समय और कार्य का ही एक विस्तार है, जिसमें कार्य करने वाले व्यक्तियों के स्थान पर पाइप होते हैं तथा कार्य की मात्रा के स्थान पर टंकी (जलाशय) की क्षमता होती है। रेलवे NTPC की परीक्षा में इस अध्याय से प्रायः दो से तीन प्रश्न आते हैं। जो विद्यार्थी समय और कार्य अध्याय को अच्छी तरह समझ लेते हैं, वे इस अध्याय को अत्यंत सरलता से हल कर सकते हैं, क्योंकि दोनों का गणितीय ढांचा एक जैसा ही है।
इस अध्याय में हम टंकी को भरने वाले पाइपों को इनलेट (भरने वाला पाइप) कहते हैं, जो कार्य करने वाले व्यक्तियों की तरह टंकी में जल भरते हैं। इसके विपरीत टंकी को खाली करने वाले पाइप को आउटलेट (निकासी पाइप) कहा जाता है, जो टंकी के जल को बाहर निकालकर कार्य को विपरीत दिशा में प्रभावित करता है। भरने वाले पाइप का कार्य धनात्मक माना जाता है, जबकि खाली करने वाले पाइप का कार्य ऋणात्मक माना जाता है।
इस अध्याय को सुलझाने की सबसे प्रभावी विधि है एक घंटे में किए गए कार्य (भाग) की गणना। यदि कोई पाइप टंकी को x घंटे में भरता है, तो वह 1 घंटे में टंकी का 1/x भाग भरता है। इसी प्रकार यदि कोई पाइप टंकी को y घंटे में खाली करता है, तो वह 1 घंटे में टंकी का 1/y भाग खाली करता है। दोनों पाइप एक साथ खुले होने पर प्रति घंटे शुद्ध भराव = 1/x − 1/y होता है। इसी सरल विधि से भरने-खाली करने के सभी प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।
मूल सूत्र: यदि कोई पाइप टंकी को m घंटे में भरता है, तो वह 1 घंटे में टंकी का 1/m भाग भरता है। दो पाइप जो टंकी को क्रमशः m और n घंटे में भरते हैं, दोनों मिलकर टंकी को mn/(m + n) घंटे में भरेंगे। यह सूत्र समय और कार्य के xy/(x + y) सूत्र के समान है।
टंकी की क्षमता की विधि: बड़ी संख्याओं वाले प्रश्नों में टंकी की कुल क्षमता को दिए गए समयों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) मान लेने से गणना अत्यंत सरल हो जाती है। उदाहरण के लिए यदि पाइप क्रमशः 12, 15 और 20 घंटे में भरते हैं, तो टंकी की क्षमता 60 इकाई मान लेने पर पाइपों की प्रति घंटे दरें क्रमशः 5, 4 और 3 इकाई हो जाती हैं। इस विधि से भिन्नों की झंझट पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
तीन भरने वाले पाइप: तीनों पाइपों के एक साथ कार्य करने पर प्रति घंटे भरा भाग = 1/a + 1/b + 1/c। समय = 1 ÷ (1/a + 1/b + 1/c)। LCM विधि में टंकी क्षमता = a, b, c का LCM लेकर सभी दरों को जोड़कर क्षमता को कुल दर से भाग दिया जाता है।
अंशतः भरी टंकी: यदि टंकी का कोई भाग पहले से भरा है, तो शेष भाग को भरने में लगा समय = शेष भाग ÷ प्रति घंटे भरा जाने वाला भाग। उदाहरण के लिए यदि आधी टंकी भरी है और प्रति घंटे 1/8 भाग भरता है, तो शेष आधी टंकी भरने में 4 घंटे लगेंगे।
भरने वाले और खाली करने वाले पाइप एक साथ: यदि भरने वाला पाइप टंकी को x घंटे में भरता है और खाली करने वाला पाइप उसे y घंटे में खाली करता है (जहाँ y > x), तो दोनों एक साथ खुले होने पर प्रति घंटे शुद्ध भराव = 1/x − 1/y = (y − x)/xy। अतः टंकी भरने में लगा समय = xy/(y − x) घंटे। यह सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है और परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
यदि निकासी पाइप अधिक तेज हो: यदि खाली करने वाले पाइप की दर भरने वाले पाइप की दर से अधिक हो, तो टंकी कभी नहीं भरेगी और प्रति घंटे टंकी का (1/y − 1/x) भाग खाली होता जाएगा। ऐसे प्रश्नों में पूछा जाता है कि पूरी भरी टंकी कितने समय में खाली हो जाएगी, जिसका उत्तर = 1 ÷ (1/y − 1/x) होगा।
तीन पाइपों का संयोजन: दो भरने वाले और एक खाली करने वाले पाइप की स्थिति में शुद्ध दर = 1/x + 1/y − 1/z। इसी प्रकार एक भरने वाला और दो खाली करने वाले पाइप में शुद्ध दर = 1/x − 1/y − 1/z। ध्यान रखें कि उत्तर ऋणात्मक आए तो उसका अर्थ है कि टंकी खाली होती जा रही है।
खोलने-बंद करने की स्थिति: कई प्रश्नों में पाइपों को बारी-बारी खोला जाता है। ऐसे में प्रत्येक घंटे का शुद्ध प्रभाव निकालकर चक्र (समयावधि) में किए गए कार्य की गणना करनी चाहिए, फिर शेष भाग से अंतिम समय ज्ञात करना चाहिए। इस विधि में अंतिम आंशिक घंटे की गणना पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
आंशिक समय के लिए खुला पाइप: यदि भरने वाला पाइप कुछ समय बाद बंद कर दिया जाता है, तो पहले पाइप द्वारा उस समय में किए गए भराव को कुल कार्य (1) से घटाकर शेष भाग तथा शेष समय से दूसरे पाइप की दर या आवश्यक समय ज्ञात किया जाता है। यह विधि समय और कार्य के मिश्रित प्रश्नों के समान है।
एक साथ टंकी का रिसाव: कभी-कभी टंकी में कोई छिद्र होता है जो टंकी को कुछ समय में खाली कर देता है। छिद्र की दर को भी खाली करने वाले पाइप की तरह मानकर शुद्ध दर निकाली जाती है। यदि टंकी सामान्यतः x घंटे में भरती है परंतु रिसाव के कारण x + y घंटे लगते हैं, तो रिसाव की दर = 1/x − 1/(x + y) होती है, जिससे रिसाव द्वारा टंकी खाली करने का समय ज्ञात किया जाता है।
आधी भरी टंकी और विपरीत क्रियाएँ: जब टंकी आधी या कुछ भाग भरी हो और भरने-खाली करने वाले पाइप एक साथ खुले हों, तो पहले टंकी की वर्तमान स्थिति (भरा हुआ भाग) को जानकर पूर्ण भराव के लिए शेष भाग की गणना करें और फिर शुद्ध दर से भाग दें। यदि टंकी खाली करने की स्थिति हो, तो भरे हुए भाग को शुद्ध निकासी दर से भाग दिया जाता है।
पाइपों का क्रमिक खोलना: तीन या अधिक पाइपों को एकांतर घंटों में खोलने पर पहले पूरा चक्र निकालें, फिर शेष कार्य को उस पाइप की दर से विभाजित करें जो अगले घंटे में खुला रहेगा। इस विधि में क्रम में खुलने वाले पाइप का निर्धारण पूर्ण चक्र के बाद किया जाता है। ध्यान दें कि अंतिम समय भिन्नात्मक (आंशिक घंटे) में भी आ सकता है।
| स्थिति | सूत्र |
|---|---|
| भरने वाला पाइप, x घंटे | 1 घंटे में 1/x भाग भरता है |
| खाली करने वाला पाइप, y घंटे | 1 घंटे में 1/y भाग खाली करता है |
| दो भरने वाले पाइप | समय = xy/(x + y) |
| भरने वाला x, खाली करने वाला y | समय = xy/(y − x) |
| शुद्ध दर | भराव दरों का जोड़ − निकासी दरों का जोड़ |
| पाइप (घंटे) | LCM क्षमता | प्रति घंटे दर |
|---|---|---|
| A = 12, B = 18 | 36 इकाई | A = 3, B = 2 |
| भरने वाले साथ में | 36/(3+2) = 7.2 घंटे | कुल दर = 5 |
| C = 9 (खाली करे) | शुद्ध = 3+2−4 = 1 | समय = 36 घंटे |
| रिसाव की दर | 1/x − 1/(x + y) | रिसाव समय ज्ञात करें |
flowchart TD
A[2.8 पाइप और टंकी] --> B[भरने वाला पाइप]
A --> C[खाली करने वाला पाइप]
A --> D[शुद्ध दर]
A --> E[LCM क्षमता विधि]
A --> F[रिसाव]
A --> G[क्रमिक खोलना]
B --> H[1 घंटे में 1/समय भाग]
C --> I[1 घंटे में 1/समय भाग निकासी]
D --> J[भराव - निकासी]
E --> K[सरल पूर्णांक गणना]
F --> L[1/x - 1/भराव समय]
G --> M[चक्र निकालें फिर शेष भाग]
J --> N[समय = 1/शुद्ध दर]
पाइप और टंकी का अध्याय समय और कार्य के ज्ञान को विस्तार देता है और परीक्षा में पूछे जाने वाले सरलतम उच्च-अंक वाले प्रश्नों में से एक है। भरने वाले पाइप को धनात्मक और खाली करने वाले पाइप को ऋणात्मक मानकर शुद्ध दर निकालने की विधि, LCM क्षमता तकनीक तथा रिसाव की गणना, इन तीनों के अभ्यास से विद्यार्थी इस अध्याय के सभी प्रश्न न्यूनतम समय में हल कर सकता है। नियमित अभ्यास और गलतियों से सीखकर यह अध्याय निश्चित रूप से अच्छे अंक दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।