1.1 संख्या पद्धति Notes

1.1 संख्या पद्धति

विषय: रेलवे NTPC – गणित (संख्या पद्धति) अध्याय: 1.1 संख्या पद्धति विषय-वस्तु: संख्या प्रणाली, परिमेय-अपरिमेय संख्याएँ

1. परिचय

संख्या पद्धति गणित की वह नींव है जिस पर पूरे गणित का भवन खड़ा होता है। रेलवे एनटीपीसी परीक्षा में प्रत्येक वर्ष संख्या पद्धति से कम से कम 4 से 6 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। यदि अभ्यर्थी इस अध्याय की मूल अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझ लेता है, तो उसके लिए बाकी के सभी अध्याय जैसे भिन्न, दशमलव, LCM और HCF अत्यंत सरल हो जाते हैं। इसीलिए इस अध्याय को गणित की "रीढ़ की हड्डी" भी कहा जाता है।

संख्या पद्धति के अंतर्गत हम संख्याओं के प्रकार, उनके बीच के संबंध, परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं की पहचान और उनकी गुणधर्मों का अध्ययन करते हैं। एक प्राकृतिक संख्या से लेकर जटिल संख्याओं तक संपूर्ण श्रृंखला इसी अध्याय में समझाई जाती है। एनटीपीसी परीक्षा में सबसे अधिक प्रश्न परिमेय-अपरिमेय संख्या की पहचान, दशमलव प्रसार के आधार पर संख्या का प्रकार ज्ञात करने और विभिन्न प्रकार की संख्याओं के गुणधर्मों से पूछे जाते हैं।

इस अध्याय के अध्ययन से अभ्यर्थी न केवल प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न हल कर पाते हैं, बल्कि उनकी तार्किक क्षमता भी विकसित होती है। संख्याओं के प्रकारों का क्रमबद्ध ज्ञान, उनके बीच के अंतर और संक्रियाओं के नियम परीक्षा में समय की बचत करते हैं। आइए, हम विस्तार से समझते हैं कि संख्या पद्धति की संपूर्ण संरचना क्या है और परिमेय तथा अपरिमेय संख्याएँ किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न हैं।

2. संख्या प्रणाली और संख्याओं के प्रकार

संख्या प्रणाली को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि हमारी गिनती की आधारभूत इकाई क्या है। अंक (Digit) एक ऐसा प्रतीक है जो किसी मान को दर्शाता है, जैसे 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9। कई अंकों के समूह को संख्या (Number) कहते हैं, जैसे 25, 148, 3097 आदि। संख्या पद्धति में संख्याओं को उनके गुणों के आधार पर निम्न प्रकारों में विभाजित किया गया है:

परीक्षा के दृष्टिकोण से संख्याओं के प्रकारों का यह वर्गीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रायः प्रश्नों में संख्याओं का एक समूह देकर पूछा जाता है कि कौन सी संख्या परिमेय नहीं है या कौन सी संख्या अपरिमेय है। साथ ही, एक संख्या एक साथ कई समुच्चयों का सदस्य भी हो सकती है। उदाहरण के लिए 6 एक प्राकृतिक, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय तथा वास्तविक संख्या है, परंतु अपरिमेय संख्या नहीं है।

संख्याओं के कुछ महत्वपूर्ण गुणधर्म

हल किया गया उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण 1: कौन-सी संख्या परिमेय नहीं है? (क) 3/7 (ख) 0.5 (ग) √3 (घ) -8

हल: विकल्प (क) 3/7 भिन्न के रूप में है, अतः परिमेय है। विकल्प (ख) 0.5 = 5/10 है, अतः परिमेय है। विकल्प (घ) -8 = -8/1 है, अतः परिमेय है। विकल्प (ग) √3 का मान 1.7320508... है जो न तो सांत है और न ही आवर्ती, अतः √3 को p/q के रूप में लिखा नहीं जा सकता। उत्तर: √3 अपरिमेय संख्या है।

उदाहरण 2: 5/6 और 7/6 के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।

हल: दो परिमेय संख्याओं के बीच की संख्या ज्ञात करने का सरल सूत्र है: (a + b)/2। यहाँ a = 5/6 और b = 7/6। औसत = (5/6 + 7/6)/2 = (12/6)/2 = 2/2 = 1। अतः 5/6 और 7/6 के बीच एक परिमेय संख्या 1 है। वैसे इसके बीच अनंत परिमेय संख्याएँ भी हैं, जैसे 11/12 आदि। उत्तर: 1

3. परिमेय संख्याएँ और उनके दशमलव प्रसार

परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q ≠ 0 हो। जब हम किसी परिमेय संख्या p/q का दशमलव प्रसार निकालते हैं तो केवल दो ही परिणाम संभव हैं:

प्रथम: सांत (Terminating) दशमलव — जब हर (q) के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और 5 हों, तो दशमलव प्रसार सांत होता है। उदाहरण: 1/2 = 0.5, 3/4 = 0.75, 7/8 = 0.875। यहाँ हर 2, 4 = 2², 8 = 2³ हैं जो केवल 2 और 5 के गुणनखंड हैं।

द्वितीय: आवर्ती (Recurring) दशमलव — जब हर (q) के अभाज्य गुणनखंड में 2 या 5 के अतिरिक्त कोई अन्य अभाज्य संख्या भी हो, तो दशमलव प्रसार आवर्ती होता है। उदाहरण: 1/3 = 0.333..., 1/7 = 0.142857142857...। आवर्ती दशमलव में अंकों का एक समूह बार-बार दोहराया जाता है जिसे आवर्ती अंक (Bar) कहते हैं, जैसे 1/3 = 0.\bar{3}।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कोई भी संख्या जिसका दशमलव प्रसार या तो सांत है या आवर्ती है, वह परिमेय संख्या है। इसके विपरीत, जिस संख्या का दशमलव प्रसार अनवसानी (कभी समाप्त न होने वाला) और अनावर्ती (दोहराव रहित) है, वह अपरिमेय संख्या होती है। उदाहरण के लिए 0.101001000100001... में अंकों में कोई नियमित दोहराव नहीं है, इसलिए यह अपरिमेय संख्या है।

परिमेय संख्याओं के क्रमबद्ध गुण

हल किया गया उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण 3: सिद्ध कीजिए कि 0.35 एक परिमेय संख्या है।

हल: 0.35 = 35/100। अब 35/100 को सरल करने पर = 7/20। यहाँ 7 और 20 पूर्णांक हैं तथा 20 ≠ 0 है। अतः 0.35 को p/q के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p = 7 और q = 20। साथ ही हर 20 = 2² × 5 है, जिसमें केवल 2 और 5 हैं, अतः दशमलव सांत है। उत्तर: 0.35 एक परिमेय संख्या है।

उदाहरण 4: 2/3 और 3/4 के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।

हल: सर्वप्रथम दोनों भिन्नों का हर समान करते हैं। LCM(3,4) = 12। 2/3 = 8/12 और 3/4 = 9/12। अब इनके बीच की संख्या ज्ञात करने हेतु औसत लेते हैं: (8/12 + 9/12)/2 = (17/12)/2 = 17/24। अतः 17/24, 2/3 और 3/4 के बीच स्थित है। जाँच: 2/3 = 0.666, 17/24 = 0.708, 3/4 = 0.75। अतः 0.666 < 0.708 < 0.75 सत्य है। उत्तर: 17/24

4. अपरिमेय संख्याएँ और वास्तविक संख्या रेखा

अपरिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q ≠ 0 हो। अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार हमेशा अनवसानी (Non-terminating) और अनावर्ती (Non-recurring) होता है। √2, √3, √5, √7, π, e, 0.1010010001... आदि इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

एक महत्वपूर्ण नियम: यदि n एक धनात्मक पूर्णांक है और √n एक पूर्णांक नहीं है, तो √n एक अपरिमेय संख्या होगी। उदाहरण के लिए √4 = 2 एक पूर्णांक है, अतः √4 परिमेय है, जबकि √5 एक पूर्णांक नहीं है, अतः √5 अपरिमेय है।

अपरिमेय संख्याओं पर संक्रियाएँ:

वास्तविक संख्या रेखा: परिमेय और अपरिमेय दोनों प्रकार की संख्याओं के संग्रह को मिलाकर वास्तविक संख्याएँ (R) बनती हैं। वास्तविक संख्या रेखा पर प्रत्येक बिंदु एक वास्तविक संख्या को दर्शाता है और प्रत्येक वास्तविक संख्या रेखा पर एक अद्वितीय बिंदु के रूप में निरूपित होती है। पूर्ण संख्याओं के विपरीत, दो वास्तविक संख्याओं के बीच अनगिनत वास्तविक संख्याएँ होती हैं। इसलिए वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को "असंख्य" कहा जाता है।

हल किया गया उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण 5: √2 और √3 के बीच एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।

हल: √2 = 1.4142... और √3 = 1.7320...। इनके बीच परिमेय संख्या 1.5 = 3/2 है, क्योंकि 1.414 < 1.5 < 1.732। इनके बीच अपरिमेय संख्या √2.5 है, क्योंकि √2.5 ≈ 1.581 जो इन दोनों के बीच स्थित है। उत्तर: परिमेय संख्या = 3/2, अपरिमेय संख्या = √2.5

उदाहरण 6: क्या 2 + √3 एक अपरिमेय संख्या है? जाँच कीजिए।

हल: √3 एक अपरिमेय संख्या है (लगभग 1.7320508... अनवसानी अनावर्ती)। इसमें परिमेय संख्या 2 जोड़ने पर परिणाम 3.7320508... प्राप्त होता है, जो अभी भी अनवसानी और अनावर्ती है। यह p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता। नियम के अनुसार परिमेय + अपरिमेय = अपरिमेय। उत्तर: हाँ, 2 + √3 एक अपरिमेय संख्या है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: संख्याओं के प्रकार

संख्या प्रकार प्रतीक शामिल संख्याएँ उदाहरण
प्राकृतिक संख्या N 1, 2, 3, 4, ... 7, 25, 108
पूर्ण संख्या W 0, 1, 2, 3, ... 0, 5, 42
पूर्णांक Z ..., -2, -1, 0, 1, 2, ... -8, 0, 15
परिमेय संख्या Q p/q, जहाँ q ≠ 0 3/4, -2/5, 9
अपरिमेय संख्या Q' p/q में नहीं लिखी जा सकतीं √2, π, √7
वास्तविक संख्या R परिमेय + अपरिमेय 3.14, -6, √5

तालिका 2: परिमेय बनाम अपरिमेय

गुण परिमेय संख्या अपरिमेय संख्या
रूप p/q, q ≠ 0 p/q में नहीं लिखी जा सकती
दशमलव प्रसार सांत या आवर्ती अनवसानी अनावर्ती
उदाहरण 0.5, 2/3, -7 √2, √3, π
पूर्णांक सम्मिलित हाँ नहीं
संख्या रेखा पर बिंदु परिमित स्थान दो संख्याओं के बीच अनंत

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[संख्या पद्धति] --> B[प्राकृतिक संख्याएँ]
    A --> C[पूर्ण संख्याएँ]
    A --> D[पूर्णांक संख्याएँ]
    A --> E[परिमेय संख्याएँ]
    A --> F[अपरिमेय संख्याएँ]
    B --> B1[1 से आरंभ]
    C --> C1[0 जोड़ने पर]
    D --> D1[ऋणात्मक धनात्मक और शून्य]
    E --> E1[सांत दशमलव]
    E --> E2[आवर्ती दशमलव]
    F --> F1[अनवसानी अनावर्ती]
    E --> G[परिमेय और अपरिमेय मिलकर]
    F --> G
    G --> H[वास्तविक संख्याएँ]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

संख्याओं के प्रकारों का वर्गीकरण वास्तविक संख्याएँ परिमेय अपरिमेय पूर्णांक पूर्ण संख्या प्राकृतिक √2, √3, π p/q रूप स्वर्ण नियम: प्रत्येक पूर्णांक परिमेय है, परंतु प्रत्येक परिमेय पूर्णांक नहीं है।

वास्तविक संख्या रेखा -2 -1 0 1 2 3 4 √2 ≈ 1.414 1 (परिमेय) प्रत्येक बिंदु एक वास्तविक संख्या और प्रत्येक वास्तविक संख्या एक बिंदु है परिमेय और अपरिमेय दोनों रेखा पर सम्मिलित हैं स्वर्ण नियम: दो वास्तविक संख्याओं के बीच अनंत वास्तविक संख्याएँ स्थित होती हैं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. शून्य को प्राकृतिक संख्या मान लेना: बहुत से अभ्यर्थी 0 को प्राकृतिक संख्या समझ लेते हैं, जबकि 0 प्राकृतिक संख्या नहीं बल्कि पूर्ण संख्या है।
  2. सभी दशमलव को परिमेय समझना: सांत और आवर्ती दशमलव परिमेय होते हैं, परंतु अनवसानी अनावर्ती दशमलव जैसे 1.4142... अपरिमेय होते हैं।
  3. π को 22/7 के बराबर मानना: 22/7 केवल π का अनुमानित मान है, π वास्तव में एक अपरिमेय संख्या है।
  4. √16 जैसी पूर्ण वर्ग संख्या को अपरिमेय बताना: √16 = 4 पूर्णांक है, अतः परिमेय है। केवल वही वर्गमूल अपरिमेय होता है जो पूर्णांक न हो।
  5. परिमेय + अपरिमेय को परिमेय मानना: परिमेय और अपरिमेय संख्या का योग सदैव अपरिमेय होता है, जब तक परिमेय संख्या शून्य न हो।
  6. शून्य से भाग को मान्य समझना: किसी संख्या को 0 से भाग देना अपरिभाषित है, 0 को किसी संख्या से भाग देना 0 होता है, दोनों में भ्रम न करें।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. दशमलव प्रसार पर ध्यान दें: परीक्षा में अपरिमेय संख्या की पहचान के लिए दशमलव प्रसार का निरीक्षण करें; यदि प्रसार सांत या आवर्ती है तो वह परिमेय है।
  2. हर के गुणनखंड जाँचें: दशमलव सांत होगा या आवर्ती यह तय करने के लिए हर (q) के अभाज्य गुणनखंड देखें, केवल 2 और 5 हों तो सांत।
  3. संख्याओं का समुच्चय क्रम याद रखें: N ⊂ W ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R का क्रम याद रखें, इससे समुच्चय के प्रश्न तुरंत हल हो जाते हैं।
  4. औसत सूत्र का प्रयोग: दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्या ज्ञात करने के लिए (a+b)/2 सूत्र सबसे तेज़ तरीका है।
  5. वर्गमूल जाँच: यदि √n पूर्णांक नहीं है, तो वह अपरिमेय है; यह नियम समय बचाता है।
  6. विकल्प निरीक्षण: प्रत्येक विकल्प को परिमेय/अपरिमेय में वर्गीकृत करके उत्तर चुनें, अंदाजा लगाने की गलती न करें।

10. निष्कर्ष

संख्या पद्धति गणित के प्रत्येक विषय की आधारशिला है और एनटीपीसी परीक्षा में इसके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। इस अध्याय में हमने संख्याओं के सभी प्रकारों, उनके समुच्चयों, परिमेय-अपरिमेय संख्याओं की पहचान के नियम तथा वास्तविक संख्या रेखा की अवधारणा को विस्तार से समझा। अभ्यर्थी को चाहिए कि वह इन मूलभूत अवधारणाओं को रटने के बजाय तर्क के आधार पर समझे और रोज कम से कम बीस अभ्यास प्रश्न हल करे, जिससे परीक्षा में त्वरित और सटीक उत्तर देने की क्षमता विकसित होगी।