5.2 त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ Notes

5.2 त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ

विषय: रेलवे NTPC – गणित (त्रिकोणमिति और सांख्यिकी) अध्याय: 5.2 त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ विषय-वस्तु: sin²θ+cos²θ=1 आदि

1. परिचय

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ (Trigonometric Identities) वे समीकरण हैं जो त्रिकोणमितीय अनुपातों के बीच स्थायी संबंधों को व्यक्त करती हैं और कोण θ के सभी मानों के लिए सत्य रहती हैं। ये सर्वसमिकाएँ गणितीय व्यंजकों को सरल बनाने, प्रमाण देने और समीकरणों को हल करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। रेलवे NTPC परीक्षा में त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं से सामान्यतः 1 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें अभिव्यक्तियों को सरल करना और सर्वसमिकाओं के आधार पर मान ज्ञात करना शामिल होता है।

सर्वसमिकाओं का सबसे प्रसिद्ध समूह पाइथागोरस सर्वसमिकाएँ हैं। समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय (कर्ण² = लंब² + आधार²) से ही तीन मूल सर्वसमिकाएँ व्युत्पन्न होती हैं – sin²θ + cos²θ = 1, sec²θ = 1 + tan²θ और cosec²θ = 1 + cot²θ। इन्हीं तीन सर्वसमिकाओं के उपयोग से सैकड़ों व्यंजकों को सरल किया जा सकता है, इसलिए इन्हें त्रिकोणमिति की 'रीढ़ की हड्डी' भी कहा जाता है।

इस अध्याय में हम पाइथागोरस सर्वसमिकाओं के सिद्धांत, उनके विभिन्न रूपों और व्यंजकों को सरल करने की विधियों को विस्तार से समझेंगे। हम यह भी सीखेंगे कि जटिल दिखने वाले व्यंजकों को केवल एक ही अनुपात में परिवर्तित करके किस प्रकार सरलता से हल किया जाता है। यह अध्याय पिछले अध्याय (त्रिकोणमितीय अनुपात) पर निर्भर करता है, इसलिए sin, cos, tan के मूल अर्थ और मानक कोणों के मानों की जानकारी आवश्यक है।

2. पाइथागोरस सर्वसमिकाएँ

मूल सर्वसमिकाएँ

पाइथागोरस प्रमेय से व्युत्पन्न तीन मूल सर्वसमिकाएँ इस प्रकार हैं:

  1. sin²θ + cos²θ = 1
  2. sec²θ − tan²θ = 1 अर्थात sec²θ = 1 + tan²θ
  3. cosec²θ − cot²θ = 1 अर्थात cosec²θ = 1 + cot²θ

इन तीनों सर्वसमिकाओं के भिन्न-भिन्न रूपों को ध्यान से याद रखें:

सर्वसमिका का प्रमाण

समकोण त्रिभुज में माना कर्ण = H, लंब = P और आधार = B है। पाइथागोरस प्रमेय से H² = P² + B²। अब sin θ = P/H और cos θ = B/H, अतः sin²θ + cos²θ = P²/H² + B²/H² = (P² + B²)/H² = H²/H² = 1। इस प्रकार पहली सर्वसमिका सिद्ध होती है। शेष दो सर्वसमिकाओं के लिए पहली सर्वसमिका को क्रमशः cos²θ और sin²θ से भाग दिया जाता है।

स्पष्ट करने वाला उदाहरण

उदाहरण 1: sin²θ = 9/25 हो, तो cos²θ का मान ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: sin²θ + cos²θ = 1 - चरण 2: cos²θ = 1 − sin²θ = 1 − 9/25 = 16/25 - उत्तर: 16/25

उदाहरण 2: यदि tan θ = 3/4 हो, तो sec θ का मान ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: sec²θ = 1 + tan²θ - चरण 2: sec²θ = 1 + (3/4)² = 1 + 9/16 = 25/16 - चरण 3: sec θ = √(25/16) = 5/4 - उत्तर: 5/4

3. भागफल सर्वसमिकाएँ और पारस्परिक सर्वसमिकाएँ

भागफल सर्वसमिकाएँ

पारस्परिक सर्वसमिकाएँ

इन सर्वसमिकाओं के उपयोग से किसी भी त्रिकोणमितीय व्यंजक को sin और cos के पदों में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे सरलीकरण आसान हो जाता है।

स्पष्ट करने वाला उदाहरण

उदाहरण 3: व्यंजक (1 − cos²θ) / (1 − sin²θ) को सरल कीजिए।

हल: - चरण 1: अंश में 1 − cos²θ = sin²θ और हर में 1 − sin²θ = cos²θ - चरण 2: व्यंजक = sin²θ / cos²θ = tan²θ - उत्तर: tan²θ

उदाहरण 4: व्यंजक tan θ × cos θ को सरल कीजिए।

हल: - चरण 1: tan θ = sin θ / cos θ - चरण 2: tan θ × cos θ = (sin θ / cos θ) × cos θ = sin θ - उत्तर: sin θ

4. व्यंजकों का सरलीकरण और सर्वसमिकाओं का अनुप्रयोग

व्यंजकों को सरल करने की मानक विधि यह है कि पहले सभी अनुपातों को sin θ और cos θ में बदलें, फिर उभयनिष्ठ गुणनखंडों को काटें। कुछ व्यंजकों में सर्वसमिकाओं के प्रतिस्थापन से सीधे उत्तर प्राप्त होता है।

स्पष्ट करने वाला उदाहरण

उदाहरण 5: व्यंजक (sin θ + cos θ)² − 2 sin θ cos θ का मान ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: (a+b)² = a² + b² + 2ab सूत्र से (sin θ + cos θ)² = sin²θ + cos²θ + 2 sin θ cos θ - चरण 2: sin²θ + cos²θ = 1, अतः व्यंजक = 1 + 2 sin θ cos θ − 2 sin θ cos θ - चरण 3: शेष बचता है = 1 - उत्तर: 1

उदाहरण 6: यदि sin θ + cos θ = √2 हो, तो sin θ × cos θ का मान ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: दोनों पक्षों का वर्ग करें – (sin θ + cos θ)² = 2 - चरण 2: sin²θ + cos²θ + 2 sin θ cos θ = 2 - चरण 3: 1 + 2 sin θ cos θ = 2, अतः 2 sin θ cos θ = 1 - चरण 4: sin θ cos θ = 1/2 - उत्तर: 1/2

उदाहरण 7: व्यंजक (1 + tan²θ) × cos²θ को सरल कीजिए।

हल: - चरण 1: 1 + tan²θ = sec²θ - चरण 2: व्यंजक = sec²θ × cos²θ = (1/cos²θ) × cos²θ = 1 - उत्तर: 1

उदाहरण 8: व्यंजक cosec²θ × sin²θ + sec²θ × cos²θ का मान ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: cosec²θ × sin²θ = (1/sin²θ) × sin²θ = 1 - चरण 2: sec²θ × cos²θ = (1/cos²θ) × cos²θ = 1 - चरण 3: कुल मान = 1 + 1 = 2 - उत्तर: 2

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पाइथागोरस सर्वसमिकाएँ और उनके रूप

मूल सर्वसमिका पुनर्व्यवस्थित रूप 1 पुनर्व्यवस्थित रूप 2
sin²θ + cos²θ = 1 sin²θ = 1 − cos²θ cos²θ = 1 − sin²θ
sec²θ = 1 + tan²θ tan²θ = sec²θ − 1 sec²θ − tan²θ = 1
cosec²θ = 1 + cot²θ cot²θ = cosec²θ − 1 cosec²θ − cot²θ = 1

तालिका 2: भागफल और पारस्परिक सर्वसमिकाएँ

सर्वसमिका का प्रकार सूत्र
भागफल सर्वसमिका tan θ = sin θ/cos θ
भागफल सर्वसमिका cot θ = cos θ/sin θ
पारस्परिक सर्वसमिका cosec θ = 1/sin θ
पारस्परिक सर्वसमिका sec θ = 1/cos θ
पारस्परिक सर्वसमिका cot θ = 1/tan θ
व्युत्पन्न सर्वसमिका tan θ × cot θ = 1

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[5.2 त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ] --> B[पाइथागोरस सर्वसमिकाएँ]
    B --> C[sin²θ + cos²θ = 1]
    B --> D[sec²θ = 1 + tan²θ]
    B --> E[cosec²θ = 1 + cot²θ]
    A --> F[भागफल सर्वसमिकाएँ]
    F --> G[tan θ = sinθ/cosθ]
    F --> H[cot θ = cosθ/sinθ]
    A --> I[पारस्परिक सर्वसमिकाएँ]
    I --> J[cosec = 1/sin]
    I --> K[sec = 1/cos]
    I --> L[cot = 1/tan]
    A --> M[सरलीकरण विधि]
    M --> N[सभी को sin, cos में बदलें]
    M --> O[उभयनिष्ठ गुणनखंड काटें]
    A --> P[प्रतिस्थापन]
    P --> Q[दिए गए संबंध का वर्ग करें]
    P --> R[सर्वसमिका रूप लागू करें]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

पाइथागोरस सर्वसमिकाओं का चक्र sin²θ + cos²θ = 1 sec²θ = 1 + tan²θ cosec²θ = 1 + cot²θ स्वर्ण नियम जब भी व्यंजक में sin²θ और cos²θ एक साथ हों, उनका योग 1 रखकर व्यंजक को सरल करें; sec और tan, cosec और cot सदैव एक साथ जोड़े में याद रखें।

सर्वसमिकाओं से व्यंजक सरलीकरण (1 − cos²θ) / (1 − sin²θ) = sin²θ/cos²θ = tan²θ (sin θ + cos θ)² = sin²θ + cos²θ + 2sinθcosθ = 1 + 2sinθcosθ (1 + tan²θ) × cos²θ = sec²θ × cos²θ = 1 cosec²θ × sin²θ + sec²θ × cos²θ = 1 + 1 = 2 tan θ × cos θ = (sin θ/cos θ) × cos θ = sin θ स्वर्ण नियम सभी अनुपातों को sin θ और cos θ के रूप में बदलकर सरल करें, फिर उभयनिष्ठ पदों को काट दें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. sin²θ + cos²θ = 1 के स्थान पर sin²θ + cos²θ = 0 या sin²θ − cos²θ = 1 लिखना – मूल सर्वसमिका के चिह्न को हमेशा ध्यान से याद रखें।
  2. sec²θ − tan²θ = 1 को sec²θ + tan²θ = 1 लिखना – वास्तव में sec²θ = 1 + tan²θ होता है, अतः sec²θ − tan²θ = 1।
  3. sin²θ का अर्थ (sin θ)² समझने के बजाय sin θ² मान लेना – sin²θ, sinθ का पूर्ण वर्ग है, कोण का वर्ग नहीं।
  4. tan θ × cot θ = 1 के स्थान पर 0 लिखना – ये पारस्परिक हैं अतः गुणनफल 1 होता है।
  5. (sin θ + cos θ)² को सीधे sin²θ + cos²θ लिख देना और 2 sin θ cos θ को भूल जाना।
  6. सर्वसमिका को केवल विशेष कोणों के लिए मानकर सामान्यीकरण करना – सर्वसमिकाएँ सभी कोणों के लिए सत्य हैं, परीक्षण करना उचित है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तीन पाइथागोरस सर्वसमिकाओं को एक पंक्ति में लिखकर कंठस्थ करें – इन्हीं के आधार पर 90% सर्वसमिका प्रश्न हल होते हैं।
  2. जब व्यंजक जटिल लगे, तो सभी अनुपातों को sin θ और cos θ में बदलें; यह विधि प्रत्येक प्रश्न पर कारगर होती है।
  3. यदि दो पदों के बीच का संबंध दिया हो (जैसे sin θ + cos θ = √2), तो तुरंत वर्ग करने की आदत डालें।
  4. उत्तर के विकल्पों में tan²θ, cot²θ, 1 जैसे पद देखें – सरलीकरण के बाद व्यंजक को किसी एक अनुपात के रूप में जरूर बदल सकते हैं।
  5. जिन प्रश्नों में sec θ और tan θ एक साथ हों, वहाँ sec²θ − tan²θ = 1 का उपयोग करें; cosec और cot के साथ भी यही नियम लागू करें।
  6. हर बार सरलीकरण के बाद विकल्पों से मिलान करें और दोबारा जाँच करें कि कोई पद शेष तो नहीं बचा।

10. निष्कर्ष

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ त्रिकोणमिति के सभी अध्यायों का आधार हैं और इनकी सटीक समझ से व्यंजकों का सरलीकरण सरल, तेज और शुद्ध हो जाता है। sin²θ + cos²θ = 1, sec²θ = 1 + tan²θ और cosec²θ = 1 + cot²θ को उनके सभी रूपों में कंठस्थ करना, भागफल और पारस्परिक सर्वसमिकाओं का अभ्यास करना तथा हर व्यंजक को sin θ और cos θ में परिवर्तित करने की आदत डालना इस अध्याय की सर्वोत्तम रणनीति है। दैनिक 10-15 प्रश्नों के अभ्यास से NTPC परीक्षा में इस अध्याय से आने वाले प्रश्नों में पूर्ण अंक प्राप्त करना निश्चित है।