विषय: रेलवे NTPC – तर्कशक्ति (तार्किक और विश्लेषणात्मक तर्क) अध्याय: 10.3 कथन और निष्कर्ष विषय-वस्तु: कथनों से निष्कर्ष
कथन और निष्कर्ष तर्कशक्ति की वह श्रेणी है जिसमें एक या दो कथन (statements) दिए जाते हैं और उनके नीचे दो या चार निष्कर्ष (conclusions) प्रस्तुत किए जाते हैं। उम्मीदवार का कार्य यह तय करना होता है कि दिए गए कथनों से कौन-सा निष्कर्ष निश्चित रूप से निकलता है और कौन-सा नहीं। यह श्रेणी न्यायवाक्य से मिलती-जुलती है, किंतु इसमें कथन केवल दो कथनों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कभी-कभी एक ही कथन दिया जाता है।
इस श्रेणी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कथन को सदैव सत्य माना जाता है, चाहे वह व्यावहारिक रूप से कितना भी असंभव क्यों न लगे। उदाहरण के लिए यदि कथन है "सभी बिल्लियाँ उड़ती हैं", तो इसे सत्य मानकर ही निष्कर्ष निकालने होंगे। कई बार उम्मीदवार अपने सामान्य ज्ञान के आधार पर उत्तर देने की गलती करते हैं, जबकि परीक्षा के नियमों के अनुसार केवल दिए गए कथन ही सत्य माने जाते हैं।
इस अध्याय में हम कथन से निष्कर्ष निकालने के नियमों, कथनों में प्रयुक्त शब्दों के महत्व (सभी, कुछ, केवल, कोई नहीं, कम से कम, अधिकांश आदि) और विभिन्न प्रकार के कथन-निष्कर्ष प्रश्नों को हल करने की रणनीति को उदाहरणों सहित समझेंगे।
सभी (All): 'सभी A हैं B' का अर्थ है कि A का प्रत्येक सदस्य B है। इससे निश्चित रूप से 'कुछ A हैं B' और 'कुछ B हैं A' निकलता है। किंतु 'सभी B हैं A' निश्चित नहीं है।
कुछ (Some): 'कुछ A हैं B' का अर्थ है कि A और B के बीच कम से कम एक उभयनिष्ठ सदस्य है। इससे केवल 'कुछ B हैं A' निश्चित निकलता है। यहाँ 'कुछ' का अर्थ एक या अधिक हो सकता है, और यह संभव है कि सभी A ही B हों।
कोई नहीं (No): 'कोई A नहीं है B' से 'कोई B नहीं है A' निश्चित निकलता है। यह एक नकारात्मक कथन है, जिसके साथ गुणवाचक कथन जुड़ने पर ही नकारात्मक निष्कर्ष संभव होता है।
केवल (Only): 'केवल A ही B हैं' का अर्थ है 'सभी B हैं A'। यह शब्द दिशा बदल देता है, इसलिए इसे सावधानीपूर्वक समझना आवश्यक है। उदाहरण: 'केवल छात्र ही पुस्तकालय जाते हैं' का अर्थ है कि पुस्तकालय जाने वाले सभी छात्र हैं।
अधिकांश (Most): 'अधिकांश A हैं B' से केवल 'कुछ A हैं B' निश्चित निकलता है, क्योंकि अधिकांश शब्द कुछ का ही एक रूप है। 'सभी A हैं B' निश्चित नहीं है।
कम से कम (At least): 'कम से कम कुछ A हैं B' का अर्थ 'कुछ A हैं B' के समान ही है। यह संभावना को दर्शाता है, निश्चितता नहीं।
कथन की दिशा: कथनों को पढ़ते समय विधेय और कर्ता पर ध्यान दें। 'सभी A हैं B' और 'सभी B हैं A' दो अलग-अलग कथन हैं। दिशा बदलने पर अर्थ पूरी तरह बदल जाता है।
संयुक्त कथन: कुछ प्रश्नों में दो अलग-अलग कथन होते हैं, जिनमें उभयनिष्ठ पद होता है। उभयनिष्ठ पद दोनों कथनों को जोड़ता है, और शेष दो पदों के बीच का संबंध ही निष्कर्ष बनता है।
नियम 1 - कथन को सत्य मानें: कथन को कभी चुनौती नहीं दी जा सकता। चाहे वह कितना भी असत्य क्यों न लगे, उसे सत्य मानकर ही आगे बढ़ें। सामान्य ज्ञान का प्रयोग केवल वहीं करें जहाँ कथन अस्पष्ट हों।
नियम 2 - श्रृंखला निर्माण: यदि दो कथनों में उभयनिष्ठ पद है, तो उसे मिलाकर श्रृंखला बनाएँ। 'सभी A हैं B' और 'सभी B हैं C' से श्रृंखला बनती है: A से B से C। श्रृंखला के सिरों पर A और C होते हैं, जिनके बीच संबंध निष्कर्ष बनता है।
नियम 3 - नकारात्मक की गणना: यदि दोनों कथन सकारात्मक हैं, तो निष्कर्ष सकारात्मक होगा। यदि एक सकारात्मक और एक नकारात्मक है, तो निष्कर्ष नकारात्मक होगा। यदि दोनों नकारात्मक हैं, तो कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा।
नियम 4 - विशेष कथनों का नियम: यदि दोनों कथन विशेष (कुछ वाले) हैं, तो कोई निश्चित निष्कर्ष संभव नहीं है। यदि एक कथन विशेष है, तो निष्कर्ष विशेष होगा, सार्वभौमिक नहीं।
नियम 5 - संभावनात्मक निष्कर्ष: जब निश्चित निष्कर्ष नहीं बनता, तो प्रश्न में संभावनात्मक निष्कर्ष दिए जा सकते हैं। इनकी पहचान 'संभव', 'हो सकता है', 'कुछ नहीं हो सकते' जैसे शब्दों से होती है। ऐसे निष्कर्ष तभी सत्य होते हैं जब वे कथनों का खंडन न करें।
नियम 6 - उप-समुच्चय की जाँच: निष्कर्ष की सत्यता जाँचने के लिए कथन के अनुरूप वेन आरेख बनाएँ। यदि निष्कर्ष आरेख के साथ संगत है और अनिवार्य रूप से सत्य है, तभी उसे सही मानें।
नियम 7 - अतिरिक्त जानकारी से बचाव: निष्कर्ष में कथन के बाहर की कोई नई सूचना नहीं होनी चाहिए। यदि कोई निष्कर्ष नई धारणा पर आधारित है, तो वह असत्य है।
नियम 8 - पुनरावृत्ति: कथन का वही भाग जो दोबारा कहा जाए, वह निष्कर्ष माना जाता है। जैसे 'कुछ A हैं B' कथन से 'कुछ A हैं B' निष्कर्ष सत्य है, परंतु परीक्षा में ऐसे निष्कर्ष सामान्यतः नहीं पूछे जाते।
उदाहरण 1: कथन: सभी देश अपनी राजधानी रखते हैं। भारत एक देश है। निष्कर्ष I: भारत अपनी राजधानी रखता है। निष्कर्ष II: भारत की राजधानी नई दिल्ली है।
हल: पहले कथन के अनुसार देशों के पास राजधानी होती है और भारत एक देश है, अतः निष्कर्ष I निश्चित रूप से सत्य है। किंतु निष्कर्ष II में नई दिल्ली का उल्लेख कथनों में नहीं है, यह अतिरिक्त जानकारी है। अतः केवल I अनुसरण करता है।
उदाहरण 2: कथन: केवल मेहनती छात्र ही परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। निष्कर्ष I: परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले सभी छात्र मेहनती हैं। निष्कर्ष II: मेहनती होने वाला हर छात्र परीक्षा में उत्तीर्ण होता है।
हल: 'केवल मेहनती छात्र ही उत्तीर्ण होते हैं' का अर्थ है 'सभी उत्तीर्ण छात्र मेहनती हैं', अतः I सत्य है। किंतु II का अर्थ है कि मेहनती सभी उत्तीर्ण होते हैं, जो कथन से निश्चित नहीं है। अतः केवल I अनुसरण करता है।
उदाहरण 3: कथन: अधिकांश कर्मचारी समय पर आते हैं। निष्कर्ष I: सभी कर्मचारी समय पर आते हैं। निष्कर्ष II: कुछ कर्मचारी समय पर आते हैं।
हल: 'अधिकांश' से 'कुछ' निश्चित निकलता है, किंतु 'सभी' निश्चित नहीं निकलता। अतः केवल II अनुसरण करता है।
उदाहरण 4: कथन: सभी वैज्ञानिक बुद्धिमान हैं। कुछ वैज्ञानिक लेखक हैं। निष्कर्ष I: कुछ लेखक बुद्धिमान हैं। निष्कर्ष II: सभी लेखक बुद्धिमान हैं।
हल: कुछ वैज्ञानिक लेखक हैं और सभी वैज्ञानिक बुद्धिमान हैं, अतः कुछ लेखक बुद्धिमान हैं (I सत्य)। किंतु सभी लेखक बुद्धिमान होना निश्चित नहीं है, क्योंकि लेखकों में गैर-वैज्ञानिक भी हो सकते हैं। अतः केवल I अनुसरण करता है।
उदाहरण 5: कथन: कोई अमीर व्यक्ति कंजूस नहीं है। सभी कंजूस लोग धन जमा करते हैं। निष्कर्ष I: कोई अमीर व्यक्ति धन नहीं जमा करता। निष्कर्ष II: कुछ धन जमा करने वाले कंजूस हैं।
हल: 'कोई अमीर कंजूस नहीं' और 'सभी कंजूस धन जमा करते हैं' से 'कोई अमीर धन नहीं जमा करता' निश्चित नहीं है, क्योंकि अमीर व्यक्ति गैर-कंजूस तरीके से धन जमा कर सकता है। किंतु II 'कुछ धन जमा करने वाले कंजूस हैं' निश्चित है। अतः केवल II अनुसरण करता है।
| कथन | निश्चित निष्कर्ष | संभावित निष्कर्ष |
|---|---|---|
| सभी A हैं B | कुछ A हैं B, कुछ B हैं A | सभी B हैं A |
| कुछ A हैं B | कुछ B हैं A | सभी A हैं B |
| कोई A नहीं है B | कोई B नहीं है A | कुछ A हैं B |
| केवल A हैं B | सभी B हैं A | — |
| अधिकांश A हैं B | कुछ A हैं B | सभी A हैं B |
| स्थिति | कथनों का संयोजन | परिणाम |
|---|---|---|
| सभी A हैं B + सभी B हैं C | सकारात्मक + सकारात्मक | सभी A हैं C |
| सभी A हैं B + कोई B नहीं है C | सकारात्मक + नकारात्मक | कोई A नहीं है C |
| कोई A नहीं है B + सभी B हैं C | नकारात्मक + सकारात्मक | कोई C नहीं है A (संभव) |
| कुछ A हैं B + कुछ B हैं C | विशेष + विशेष | कोई निश्चित नहीं |
| सभी A हैं B + कुछ B हैं C | सार्वभौमिक + विशेष | कुछ A हैं C (संभव) |
flowchart TD
A[कथन और निष्कर्ष] --> B[कथन पहचानो]
A --> C[शब्दों का विश्लेषण]
A --> D[नियम लागू करो]
A --> E[निष्कर्ष जाँचो]
B --> B1[सत्य मानना]
B --> B2[उभयनिष्ठ पद खोजना]
C --> C1[सभी - सार्वभौमिक]
C --> C2[कुछ - विशेष]
C --> C3[कोई नहीं - नकारात्मक]
C --> C4[केवल - दिशा बदल]
D --> D1[श्रृंखला बनाना]
D --> D2[नकार की गिनती]
D --> D3[विशेष का नियम]
E --> E1[वेन आरेख से जाँच]
E --> E2[अतिरिक्त जानकारी से बचना]
कथन और निष्कर्ष के प्रश्न तार्किक निगमन की नींव हैं। कथन को सत्य मानना, शब्दों के सूक्ष्म अर्थ को समझना और नियमों का यथावत पालन करना ही इस विषय में सफलता की कुंजी है। नियमित अभ्यास से न केवल इस श्रेणी में, बल्कि न्यायवाक्य और वेन आरेख में भी दक्षता बढ़ती है, क्योंकि ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं।