विषय: रेलवे NTPC – तर्कशक्ति (तार्किक और विश्लेषणात्मक तर्क) अध्याय: 10.6 निर्णय लेना विषय-वस्तु: सर्वोत्तम निर्णय
निर्णय लेना (Decision Making) तर्कशक्ति की वह श्रेणी है जिसमें किसी समस्या या परिस्थिति का वर्णन किया जाता है और उसके समाधान के लिए दो या दो से अधिक कार्यवाहियाँ (courses of action) प्रस्तुत की जाती हैं। उम्मीदवार को यह तय करना होता है कि इनमें से कौन-सी कार्यवाही सबसे उपयुक्त, व्यावहारिक और समस्या के समाधान के लिए प्रभावी है। यह श्रेणी कथन और तर्क से मिलती-जुलती है, किंतु इसमें विश्लेषण अधिक व्यापक होता है।
इस श्रेणी के प्रश्न प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत समस्याओं पर आधारित होते हैं। जैसे - 'शहर में बढ़ते यातायात जाम की समस्या है, उचित कार्यवाही क्या होगी?', 'रेलवे में टिकट कतारें बढ़ रही हैं, क्या करना चाहिए?' आदि। उम्मीदवार को समस्या की जड़ को समझकर ऐसा निर्णय चुनना होता है जो दीर्घकालिक समाधान दे और व्यावहारिक रूप से लागू हो सके।
सर्वोत्तम निर्णय की पहचान के लिए कुछ निश्चित सिद्धांत होते हैं। एक अच्छा निर्णय समस्या की जड़ पर सीधा प्रहार करता है, न्यूनतम खर्च और अधिकतम लाभ वाला होता है, कानून और नैतिकता के अनुकूल होता है, और तत्काल तथा दीर्घकालिक दोनों पहलुओं को संतुलित करता है। इस अध्याय में हम इन्हीं सिद्धांतों को उदाहरणों सहित विस्तार से समझेंगे।
समस्या की जड़ पर ध्यान: सबसे अच्छा निर्णय वह है जो समस्या के लक्षण की बजाय उसके मूल कारण को हल करे। यदि शिकायतें अधिक हैं, तो केवल शिकायत सुनने की बजाय सेवा में सुधार करना बेहतर निर्णय है।
व्यावहारिकता: वह निर्णय व्यावहारिक है जो उपलब्ध संसाधनों से लागू किया जा सके। असंभव, काल्पनिक या अत्यधिक महँगे उपाय सामान्यतः सही उत्तर नहीं होते। उदाहरण के लिए हर घर में सेना तैनात करना अव्यावहारिक है।
समयबद्धता: निर्णय को समस्या की प्रकृति के अनुसार तत्काल या क्रमबद्ध होना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में तत्काल सहायता का निर्णय सही है, जबकि दीर्घकालिक समस्या के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता होती है।
नैतिकता और कानून: निर्णय सदैव कानून, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। गलत, भ्रष्ट या हिंसक तरीके अपनाने वाला निर्णय कभी सही नहीं हो सकता।
प्रभावशीलता: निर्णय समस्या के समाधान में वास्तव में प्रभावी होना चाहिए। केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई जो समस्या को न हल करे, वह सही निर्णय नहीं है। जैसे कचरे की समस्या पर केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं, कचरा उठाने की व्यवस्था भी चाहिए।
सभी के हित में: निर्णय को प्रभावित सभी पक्षों के हित का ध्यान रखना चाहिए। किसी एक वर्ग का पक्ष लेने वाला निर्णय सामान्यतः सर्वोत्तम नहीं होता।
संबंधितता: पहली जाँच यह है कि क्या कार्यवाही समस्या से संबंधित है। असंबंधित कार्यवाही, चाहे वह कितनी भी अच्छी क्यों न लगे, सही उत्तर नहीं हो सकती।
विस्तार और सीमा: कार्यवाही की सीमा समस्या के दायरे के अनुरूप होनी चाहिए। बहुत छोटा उपाय बड़ी समस्या को हल नहीं करता, और बहुत बड़ा उपाय व्यावहारिक नहीं होता।
अति-आक्रामक उपाय: समस्या से बड़ी या अत्यधिक कठोर प्रतिक्रिया वाले उपाय जैसे सब कुछ बंद कर देना, सामान्यतः उपयुक्त नहीं होते। संतुलित दृष्टिकोण अधिक सही माना जाता है।
दोहरी कार्यवाही: कुछ प्रश्नों में दो कार्यवाहियाँ दी जाती हैं जिनमें से एक आवश्यक है और दूसरी अनुशंसा के रूप में। सही उत्तर में अक्सर कहा जाता है कि I और II दोनों अनुसरण करती हैं या कोई नहीं।
क्रमबद्धता: जब दो कार्यवाहियाँ क्रम में हों, जैसे पहले तत्काल राहत फिर स्थायी समाधान, तो दोनों सही मानी जाती हैं। कार्यवाही का क्रम भी महत्वपूर्ण है - पहले आवश्यक कदम, फिर सुधारात्मक।
अवास्तविक समाधान: पूर्णता की माँग करने वाले उपाय जैसे 'सभी को नौकरी दो', 'पूरी तरह बंद करो' प्रायः अव्यावहारिक होते हैं। विकल्पों में से सबसे संतुलित और संभव उपाय ही सही होता है।
गैर-समाधानात्मक कार्यवाही: जो कार्यवाही समस्या को हल करने के बजाय टालने का काम करे, जैसे समस्या पर चर्चा करना या उसे अनदेखा करना, वह सही निर्णय नहीं है।
उदाहरण 1: कथन: रेलवे स्टेशनों पर टिकट की लंबी कतारों के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही है। कार्यवाही I: टिकट खिड़कियों की संख्या बढ़ाई जाए और ऑनलाइन टिकट व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाए। कार्यवाही II: सभी टिकट खिड़कियाँ बंद कर दी जाएँ।
हल: कार्यवाही I समस्या की जड़ को हल करती है - कतारें घटेंगी। यह व्यावहारिक और प्रभावी है। कार्यवाही II अत्यधिक कठोर है और यात्रियों को और अधिक परेशान करेगी। उत्तर: केवल I अनुसरण करती है।
उदाहरण 2: कथन: एक कारखाने के आसपास वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। कार्यवाही I: कारखाने में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए जाएँ। कार्यवाही II: कारखाना तुरंत बंद कर दिया जाए।
हल: कार्यवाही I समस्या का स्थायी और संतुलित समाधान है। कार्यवाही II अत्यधिक है, जिससे रोजगार और उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा। अतः केवल I अनुसरण करती है।
उदाहरण 3: कथन: स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति घट रही है। कार्यवाही I: बच्चों के अभिभावकों से बात की जाए और उपस्थिति के कारणों का पता लगाया जाए। कार्यवाही II: बच्चों को स्कूल लाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की जाए।
हल: पहले कारण समझना और फिर समाधान करना क्रमबद्ध है। दोनों कार्यवाहियाँ उपयुक्त और संबंधित हैं। अतः I और II दोनों अनुसरण करती हैं।
उदाहरण 4: कथन: शहर में सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं। कार्यवाही I: यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाए। कार्यवाही II: सभी वाहन चालकों को बिना परीक्षा लाइसेंस दे दिया जाए।
हल: कार्यवाही I नियम-पालन के माध्यम से दुर्घटनाओं को रोकने वाली है, अतः सही है। कार्यवाही II खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना है, क्योंकि बिना परीक्षा लाइसेंस देने से दुर्घटनाएँ और बढ़ेंगी। उत्तर: केवल I अनुसरण करती है।
उदाहरण 5: कथन: गाँव में बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल नहीं है। कार्यवाही I: नजदीकी कस्बे में स्कूल भेजने की व्यवस्था की जाए। कार्यवाही II: गाँव में ही नया स्कूल खोला जाए।
हल: कार्यवाही II स्थायी और मूल समाधान है, क्योंकि इससे गाँव के सभी बच्चों को लाभ मिलेगा। कार्यवाही I अस्थायी उपाय है। यहाँ II अधिक उपयुक्त है, किंतु दोनों उचित दिशा में हैं; परीक्षा के संदर्भ में II सर्वोत्तम है।
| निर्णय का सिद्धांत | अच्छा निर्णय | खराब निर्णय |
|---|---|---|
| जड़ पर प्रहार | कारण को हल करना | लक्षण को अनदेखा करना |
| व्यावहारिकता | लागू हो सके | असंभव या महँगा |
| समयबद्धता | तत्काल + दीर्घकालिक | केवल आश्वासन |
| नैतिकता | कानून-अनुरूप | भ्रष्ट तरीका |
| प्रभावशीलता | वास्तविक समाधान | केवल चर्चा |
| स्थिति | परीक्षण | परिणाम |
|---|---|---|
| कार्यवाही समस्या से जुड़ी है | संबंधितता | जुड़ी - अनुसरण |
| उपाय व्यावहारिक है | व्यवहार्यता | है - अनुसरण |
| उपाय अत्यधिक कठोर है | अतिरेक | है - नहीं अनुसरण |
| उपाय समस्या को हल करता है | प्रभावशीलता | करता है - अनुसरण |
| उपाय केवल टालता है | समाधान | टालता है - नहीं अनुसरण |
flowchart TD
A[निर्णय लेना] --> B[समस्या पहचानो]
A --> C[कार्यवाहियों की जाँच]
A --> D[सर्वोत्तम निर्णय चुनो]
B --> B1[मूल कारण खोजो]
B --> B2[प्रभावित पक्ष देखो]
C --> C1[संबंधितता]
C --> C2[व्यावहारिकता]
C --> C3[नैतिकता]
C --> C4[प्रभावशीलता]
D --> D1[केवल I अनुसरण]
D --> D2[केवल II अनुसरण]
D --> D3[दोनों अनुसरण]
D --> D4[कोई भी नहीं]
निर्णय लेने के प्रश्न उम्मीदवार की व्यावहारिक बुद्धि और प्रशासनिक समझ की परीक्षा लेते हैं। समस्या के मूल कारण पर ध्यान देकर, व्यावहारिक और नैतिक विकल्प चुनकर सर्वोत्तम उत्तर दिया जा सकता है। नियमित अभ्यास से परीक्षार्थी कम समय में सही निर्णय पहचानने में निपुण हो जाते हैं, जो न केवल परीक्षा में बल्कि वास्तविक जीवन में भी उपयोगी है।